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Saturday, July 13, 2019

तम्बाकू खाने के नुकसान,Side Effects of Tobacco in Hindi,Quit Smoking,


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शायद आप यह पढकरअपने परिवार और बच्चों की खातिर खाना छोड़ देंगे 
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देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले 18 से 35 वर्ष के युवा इन पार्टियों को स्टेटस सिंबल नहीं मानते , कारन चिलम तम्बाकू सिगार के नलिकाओं से गुजरता नशा अब नशों तक जा चूका है रेव पार्टियों में एल एस डी ड्रग्स हशीन कोकीन से भी बढकर नशा कोबरा डंक तक गहरा चूका है ! आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता | दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है

कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं | अकेले भारत में 15 करोड़ से अधिक व्यक्ति धूम्रपान करते हैं। 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग के 30 प्रतिशत लोग तम्बाकु का सेवन करते हैं। 13 से 15 वर्ष की कच्ची उम्र के प्रत्येक 100 में 4 बच्चे धूम्रपान की गिरफ्त में है। तम्बाकू के प्रयोग में 48 प्रतिशत हिस्सा बीड़ी का है। गुटखे का हिस्सा 38 प्रतिशत तथा सिगरेट का हिस्सा 14 प्रतिशत है।

अकेले तम्बाकू से पूरे विश्व में 50 से 60 लाख तथा भारत में 10 से 12 लाख व्यक्ति प्रतिवर्ष अपने प्राण गंवाते हैं। धूम्रपान करने वालों की आयु 10-12 वर्ष औसतन कम हो जाती है। देश में अगर हम एक वर्ष का आंकड़ा उठाये तो वर्ष 2004 में 7700 करोड़ रुपये तम्बाकू उत्पादों पर खर्च किये गये तथा इसी वर्ष 5400 करोड़ रुपये तम्बाकू से जुड़ी बीमारियों पर खर्च किये गये जो कि सरकार को तम्बाकू से होने वाली करों की आय से कहीं अधिक है। सिगरेट के धुऐं में 4000 से अधिक जहरीले पदार्थ पाये जाते हैं जिनमें से 60 से अधिक पदार्थ कैंसरकारक है। 4 से 5 सिगरेटों में इतना निकोटिन होता है जिसको अगर किसी वयस्क व्यक्ति के शरीर में इंजेक्ट कर दिया जाये तो उसकी मृत्यु हो सकती है।

तम्बाकू के प्रकार-ध्रूमपान वाला तम्बाकू

  • बीड़ी
  • सिगरेट
  • सिगार
  • चैरट (एक प्रकार का सिगार)
  • चुट्टा
  • चुट्टे को उल्टा पीना
  • धुमटी
  • धुमटी को उल्टा पीना
  • पाइप
  • हुकली
  • चिलम
  • हुक़्क़ा

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तम्बाकू के प्रकार-धुंआरहित तम्बाकू

  • तम्बाकू वाला पान
  • पान मसाला
  • तम्बाकू, सुपारी और बुझे हुए चूने का मिश्रण
  • मैनपुरी तम्बाकू
  • मावा
  • तम्बाकू और बुझा हुआ चूना (खैनी)
  • चबाने योग्य तम्बाकू
  • सनस
  • मिश्री
  • गुल
  • बज्जर
  • गुढ़ाकू
  • क्रीमदार तम्बाकू पाउडर
  • तम्बाकू युक्त पानी

तम्बाकू का शरीर पर दुष्प्रभाव,Side effects of tobacco on the body

  • कैंसर सभी प्रकार का तम्बाकू कैंसर पैदा करता है जैसे फैफड़ों, मुंह, गले, गर्दन, पेट, गुर्दो, मुत्राशय, अग्न्याशय, यकृत इत्यादि।
  • हार्ट डिजीज- हार्ट अटैक, कारोनरी हृदय रोग, छाती में जकड़न, दर्द, स्ट्रोक, एन्जाईना या हार्ट अटैक।
  • अन्य रोग – पैरों में गैगरीन, ब्रेन अटैक, क्रोनिक ब्रोकाईटिल, निमोनिया, मसूड़ों-दांतों की बीमारी, उच्च रक्त चाप, अवसाद, नपुंसकता, मुंह से दुर्गन्ध्, लकवा, जबड़ों में जकड़न, ऊर्जा में कमी इत्यादि रोग तम्बाकु का सेवन करने वालों में सामन्यतः पाये जाते हैं।
  • तम्बाकू सेवन से होने वाले प्रमुख रोगों में मुख व शरीर के अन्य भागों का कैंसर, हृदय रोग, अल्सर और दमा आदि रोग शामिल हैं। महिलाओं में तम्बाकू का सेवन गर्भपात और असामान्य बच्चों के जन्म का कारण बन सकता है।
  • कैंसर के कारणों मे तबाकू को 'ए' श्रेणी का दर्जा प्राप्त है।
  • धूम्रपान करने वाला व्यक्ति अपने वातावरण में जो धुआ छोड़ता है, उसमें 4000 रसायन मौजूद होते है।
  • सरकार को पान मसाला व सिगरेट आदि की बिक्री से जो राजस्व प्राप्त होता है, उससे कहीं अधिक राशि उसे तम्बाकू जनित रोगों से निपटने में खर्च करनी पड़ती है। धूम्रपान के कारण कार्यकुशल व्यक्तियों की कार्यकुशलता में कमी सरकार को परोक्ष रूप से हानि पहुचाती है।
  • तम्बाकू में निकोटिन, नाइट्रोसामाइन्स, बेन्जोपाइरीन्स, आर्सेनिक और क्रोमियम आदि कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख तत्व पाये जाते हैं।
  • इसमें मौजूद निकोटिन, कैडमियम और कार्बन मोनेाआक्साइड तत्व सेहत के लिए अत्यत हानिप्रद है।
  • धूम्रपान न करने वाले लोग भी जब इन वस्तुओं के लती व्यक्तियों के धुएं के सपर्क में आते हैं, तो यह स्थिति उनकी सेहत के लिए भी अत्यत नुकसानदेह होती है।
  • 15 से 20 वर्षो तक तबाकू का सेवन करने से कैंसर पनपने की सभावनाएं बढ़ जाती है।
  • स्कूलों के पाठ्यक्रमों में 'कैंसर शिक्षा' को शामिल कर तम्बाकू से होने वाले नुकसान का प्रचार किया जा सकता है।
  • कैंसर रोगियों को अपने आहार में आवश्यक सुधार करना चाहिए। उन्हें भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त फलों व सब्जियों को वरीयता देनी चाहिए
  • फाइबर युक्त यानी रेशेदार आहार का भी पर्याप्त मात्रा में सेवन करना लाभप्रद है ताकि आतों की क्रिया का सचालन बेहतर ढंग से हो सके। आतों के सुचारु सचालन के कारण ही शरीर से नुकसानदेह पदार्थ मल के जरिए बाहर निकलते हैं।
  • तम्बाकू छोड़ने के लिये-पूरी दूनियां में तम्बाकू छोड़ने की कोई जादुई या चमत्कारिक दवाई नहीं है तम्बाकू छोड़ने के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति का होना आवश्यक है। धूम्रपान/तम्बाकु छोड़ने से होने वाले लाभों के बारे में विचार कर स्वयं को शक्ति देवें। तम्बाकु छोड़ने के लिये निकोटीन की तलब को पूरी करने के लिये निकोटिन की च्यूगंगम या निकोटिन टेबलेट आती है इनका प्रयोग भी डाॅक्टर की सलाह से किया जा सकता है।
  • धूम्रपान करने वाली अपनी मित्र-मण्डली को छोड़ देवें ।
  • जब भी तलब लगें अपना ध्यान किसी और वस्तु पर लगाये कभी भी खाली न रहे।
  • अप्रतिदिन योग-प्राणायाम करें, जिससे इच्छाशक्ति मजबूत हो व तम्बाकु से पहले हो चुकी हानि की क्षतिपूर्ति हो।

तम्बाकू छोड़ने के लिए

  • दृढ़ सकल्प: 'मैं कल से सिगरेट छोड़ दूंगा।' का कल कभी नहीं आता। यह सकल्प आपको आज और अभी करना होगा। यदि तम्बाकू से होने वाले खतरों के बारे में आप सोचें तो यह प्रक्रिया दृढ़ सकल्प लेने में आपकी मदद कर सकती है।
  • पेय पदार्थो का अधिक सेवन करें। शराब, कॉफी, मीठी चीजों व अधिक कैलोरी वाली चीजों का सेवन कम करें।
  • कम कैलोरी वाली चीजों का सेवन अधिक करें।
  • चबाने वाली कुछ अन्य चीजों से तम्बाकू की लत को छोड़ा जा सकता है। इस बारे में आप नाक, कान, गला विशेषज्ञ से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
  • व्यायाम व प्राणायाम करें।
  • परिजनों व मित्रों का सहयोग भी इस लत को छोड़ने में बहुत जरूरी है।
  • घर में सिगरेट अथवा गुटखा का एक भी पैकेट न रखें।
  • एक कापी में प्रतिदिन 8 से 10 बार लिखें कि मैं तम्बाकू, गुटखे या सिगरेट का सेवन नहीं करूंगा।
  • सिर्फ एक सिगरेट आज पी लेता हूं, इसके बाद फिर कभी नहीं पियूंगा'- यह सोच आपकी दुश्मन है। यह सोच आपको कभी भी सिगरेट नहीं छोड़ने देगी। इसलिए दोबारा एक भी सिगरेट न पिएं

धूम्रपान एवं तम्बाकू छोड़ने के लिए आयुर्वेदिक उपचार-substance abuse treatment,

    • बराबर मात्रा में 100 ग्राम सौंफ, 100 ग्राम अजवायन तथा 75 ग्राम काला नमक तथा दो नींबू का रस लेकर सबसे पहले काला नमक पीसकर उसमें नींबू मिला लेवें, आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी भी मिला सकते हैं।
    • तदोपरान्त सौंफ व अजवायन को एक बर्तन में डालकर काला नमक मिला नींबू रस मिलाकर भून लेवें।यह औषधि बनाकर रख लेवें तथा जब भी तम्बाकू की तलब लगे थोड़ी सी मात्रा लेकर मुंह में रखकर चूसे इससे बीड़ी, सिगरेट की तलब धीरे-धीरे कम हो जायेगी तथा तम्बाकू की आदत को छोड़ा जा सकता है

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