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Sunday, December 10, 2017

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

मेथी के पत्तों से सब्जी बनायी जाती है। इसके बीजों का उपयोग आहार के लिए विभिन्न व्यंजनों में तथा औषधि के रूप में बहुत अधिक किया जाता है। मेथी के फूल एवं फल जनवरी से मार्च के महीनों में लगते हैं। मेथी के पौधे एक फुट ऊंचे होते हैं। इसके पत्ते छोटे और गोल-गोल होते हैं। मेथी के दाने को मेथी दाना कहते हैं। यह जगंलों में भी पाई जाती है। जंगलों में पायी जाने वाली मेथी कम गुण वाली होती है। 
मेथी दाने का जड़ी बूटी, मसाले के रुप में भारतीय रसोई में खासा इस्तेमाल होता है। हालांकि इसका स्वाद कड़वा स्वाद होता है लेकिन ये काफी स्वास्थ्य लाभ देता है, क्योंकि ये कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस आदि विभिन्न पोषक तत्वों से रिच है।

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

  • हृदय रोग रोकने में कारगर-मेथी दाने में गेलोक्टोमेनन है जो आपके दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है और यह हृदय रोग विकसित होने के खतरे को भी रोकता है। इसमें पोटेशियम होता है जोकि हृदय गति और रक्तचाप नियंत्रित करने में मदद करता है। 
  • एक नवीन शोध में डाबिटीज एवं हृदय रोग में मैथी दाना बहुत ही कारगर साबित हुआ है। इसके नियमित सेवन से रक्त में कॉलेस्ट्राल की मात्रा नियमित करने में सहायता मिलती है। तथा रक्त में सुगर की मात्रा उत्तरोतर कम होती जाती है। 
  • उक्त विचार राष्ट्रीय शाकाहार शोध संस्थान नई दिल्ली के शाकाहार विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार जैन ने व्यक्त करते हुए कहा है मैथी दाना के नियमित सेवन से मूत्र के साथ निकलने वाली सुगर की मात्रा 65 प्रतिशत तक कम हो जाती है। जिसका दस दिन में ही असर दिखाई देने लगता है। उन्होने कहा है शोध के अनुसार मैथी दाना पाउडर को कांच के गिलास में शुद्ध जल को भरकर भिगो दे तथा प्रात: मंजन करने के बाद खाली पेट उस जल को पी लें। उन्होने मैथी के गुणों की उपयोगिता का बखान करते हुए कहा शाकाहार चिकित्सा में सफेद बालों की समस्या में आधा कप मैथी दाना को रात्रि में भिगोकर प्रात: उसका पेस्ट बनाकर बालो में लगायें। तथा आधा घंटा के पश्चात नीम के पानी से बालो को धो दें। एक माह तक ऐसा करने से बाल काले होने शुरू हो जाते हैं ।
  • पाचन में मदद करता है-फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से रिच होने के नाते, मेथी दाना शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। मेथी चाय अपच और पेट दर्द को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है।
  • वजन कम करने में मदद करता है-वजन कम करने के रूप में मेथी दाने का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक घुलनशील फाइबर होती है जोकि आपकी भूख को दबाने में में मदद करती है।
  • ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है-मधुमेह पीड़ित लोगों को अपने दैनिक आहार में मेथी दाने को शामिल करना चाहिए, चूंकि इसमें गेलोक्टोमेनन जोकि एक प्राकृतिक घुलनशील फाइबर है जोकि उनके रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में कारगर होता है।
  •  मेथी की सब्जी को खाने से खून में शुद्धता आती है| वात रोग में मेथी का आटा छाछ में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है| इसके सेवन से वायु (गैस), कफ (बलगम) और ज्वर (बुखार) दूर होता है। यह पेट के कीड़े, दर्द, जोड़ों के दर्द (सन्धिवात), पेट में वायु की गांठ, कमर का दर्द और शारीरिक पीड़ा को दूर करती है। दिल के लिए यह काफी लाभदायक होती है।
  • मेथी में पाचनशक्ति और कामवासना बढ़ाने की शक्ति होती है। इससे स्त्रियों की कमजोरी दूर होती है, शक्ति आती है और भूख बढ़ती है। बच्चे के जन्म (प्रसूति) होने के बाद गर्भाशय में कोई कमी रह गई हो, गर्भाशय ठीक से संकुचित न हुआ हो तो मेथी को पकाकर खाने से लाभ होता है। दस्त, बदहजमी (भोजन का न पचना), अरुचि (भोजन का मन न करना) और सन्धिवात (जोड़ों का दर्द) में मेथी के लड्डूओं को सेवन किया जाता है।
  • घरेलू औषधि के रूप में मेथी बहुत उपयोगी है। मेथी वात (गैस), कफ (बलगम) और ज्वर (बुखार) का नाश करती है| रक्तपित्त और अरुचि को मिटाती है, भूख को बढ़ाती है तथा मल को रोकती है। मेथी हृदय के लिए लाभकारी तथा बलवर्द्धक है। 
  • यह खांसी, सूजन, बादी बवासीर, कृमि (कीड़े) और वीर्य का नाश करती है, पेशाब लाती है| बंद हुए मासिक-धर्म को फिर से जारी करती है, स्वभाव को कोमल करती है, सर्दी से होने वाली बीमारी, मिर्गी, लकवा और फालिज इत्यादि में हितकर है। मेथी का काढ़ा कान के दर्द को मिटाता है। मेथी गर्भाशय संकोचक, स्तन एवं प्रसव पीड़ा को नष्ट करती है। 
  • मेथी भूख को बढ़ाती है तथा नपुंसकता, कमजोरी, गठिया(जोड़ों का दर्द), मधुमेह, बाल रोग, कब्ज, अनिद्रा (नींद का कम आना), मोटापा, रक्तातिसार तथा जलन आदि रोगों के लिए यह काफी हितकारी होती है। 

Thursday, November 09, 2017

बेल फल के फायदे-Health Benefits of Bell Fruit Hindi,

Health Benefits of Bell Fruit Hindi

बेल फल के फायदे-Health Benefits of Bell Fruit Hindi

आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद फल माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ बेल मधुर, रुचिकर, पाचक तथा शीतल फल है। बेलफल बेहद पौष्टिक और कई बीमारियों की अचूक औषधि है। इसका गूदा खुशबूदार और पौष्टिक होता है।
  • आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद फल माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ बेल मधुर, रुचिकर, पाचक तथा शीतल फल है। कच्चा बेलफल रुखा, पाचक, गर्म, वात-कफ, शूलनाशक व आंतों के रोगों में उपयोगी होता है। बेल का फल ऊपर से बेहद कठोर होता है।
  • इसे नारियल की तरह फोड़ना पड़ता है। अंदर पीले रंग का गूदा होता है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में बीज होते हैं। गूदा लसादार तथा चिकना होता है, लेकिन खाने में हल्की मिठास लिए होता है। ताजे फल का सेवन किया जा सकता है और इसके गूदे को बीज हटाकर, सुखाकर, उसका चूर्ण बनाकर भी सेवन किया जा सकता है। 
  •  दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक-बेल का रस तैयार कर लीजिए और उसमें कुछ कुछ बूंदें घी की मिला दीजिए. इस पेय को हर रोज एक निश्चित मात्रा में लें. इसके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है. ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है.
  • गैस, कब्ज की समस्या में राहत -नियमित रूप से बेल का रस पीने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
  • कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार -बेल का रस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.
  • दस्त और डायरिया की समस्या में भी फायदेमंद -आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
  • ठंडक देने का काम करता है-बेल के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है. अगर आपको मुंह के छाले हो गए हैं तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा. गर्मी के लिहाज से ये एक बेहतरीन पेय है. एक ओर जहां ये लू से सुरक्षित रखने में मददगार होता है वहीं शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करता है
  • उदर विकारों में बेल का फल रामबाण दवा है। वैसे भी अधिकांश रोगों की जड़ उदर विकार ही है। बेल के फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाती है।
  • कब्ज के रोगियों को इसके शर्बत का नियमित सेवन करना चाहिए। बेल का पका हुआ फल उदर की स्वच्छता के अलावा आँतों को साफ कर उन्हें ताकत देता है।
  • मधुमेह रोगियों के लिए बेलफल बहुत लाभदायक है। बेल की पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से डायबिटीज की बीमारी में काफी राहत मिलती है।
  • रक्त अल्पता में पके हुए सूखे बेल की गिरी का चूर्ण बनाकर गर्म दूध में मिश्री के साथ एक चम्मच पावडर प्रतिदिन देने से शरीर में नए रक्त का निर्माण होकर स्वास्थ्य लाभ होता है।
  • गर्मियों में प्रायः अतिसार की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है।
  • गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में भली प्रकार मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करें। मिश्री डालकर बेल का शर्बत भी पिलाएं तुरंत राहत मिलती है।

Friday, July 28, 2017

क्या आप जानते हैं,सेंधा नमक के लाभ,Health Benefits of Rock Salt in Hindi,

Health Benefits of Rock Salt in Hindi,

सेंधा नमक के लाभ,Health Benefits of Rock Salt in Hindi

भारत मे अधिकांश लोग समुद्र से बना नमक खाते है । श्रेष्ठ प्रकार का नमक सेंधा नमक है, जो पहाडी नमक है इस नमक से हम सब परिचित है । व्रत के समय इसी नमक का उपयोग होता है । आयुर्वेद की बहुतसी दवाईयों मे सेंधा नमक का उपयोग होता है। आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप का भय रहता है । इसके विपरीत सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप पर नियन्त्रण रहता है । इसकी शुध्धता के कारण ही इसका उपयोग व्रत के भोजन मे होता है । सेंधा नमक की सबसे बडी समस्या है कि भारत मे यह काफ़ी कम मात्रा मे होता है ,

 सेंधा नमक के लाभ,Health Benefits of Rock Salt in Hindi,

  •  मांसपेशियों की ऐंठन से छुटकारा-सेंधा नमक वर्कआउट के बाद मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द के इलाज के लिए बहुत मददगार होती है। मैग्नीशियम प्रभावी ढंग से दर्द आसान बनाता है और सूजन को कम करता है। साथ ही मांसपेशियों को तनावमुक्‍त करने में भी मदद करता है। इसके लिए आप सेंधा नमक में थोड़ा सा गर्म पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। सुखदायक आराम पाने के लिए इस पेस्‍ट को प्रभावित क्षेत्र में लगाकर 15 से 20 मिनट के लिए लगाये। अन्‍य विकल्‍प के रूप में नमक मिले गुनगुने पानी से कम से कम 20 मिनट के लिए स्‍नान करें। इसके लिए एक गुनगुने पानी के टब में एक कप सेंधा नमक मिलाये।
  • दर्द दूर करें-सेंधा नमक दर्द और सूजन को दूर करने में भी आपकी मदद कर सकता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम शरीर में पीएच स्तर को विनियमित करने में मदद करता है। यह गठिया के किसी भी रूप से जुड़े जकड़न, सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह अस्थि मिनरल के रूप में भी मदद करता है। इसके अलावा, सेंधा नमक तंत्रिका की कार्यक्षमता को बढ़ावा देने और तंत्रिका के दर्द को आराम करने में भी मदद करता है। इसके लिए आप गुनगुने पानी में 2 चम्‍मच सेंधा नमक मिला लें। फिर शरीर के दर्द वाले अंग को इस पानी में 20 से 30 मिनट तक दर्द भिगोये। प्रत्‍येक सप्‍ताह इस उपाय को तीन बार करने से लाभ मिलता है। 
  • सेंधा नमक हड्डियों को मजबूत रखत है।मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या सेंधा नमक के सेवन से ही ठीक हो सकती है। नियमित सेंधा नमक का सेवन करने से प्राकृतिक नींद आती है। यह अनिंद्रा की तकलीफ को दूर करता है।
  • यह साइनस के दर्द को कम करता है।
  • शरीर में शर्करा को शरीर के अनुसार ही संतुलित रखता है। 
  • पाचन तंत्र को ठीक रखता है।
  • यह शरीर में जल के स्तर की जांच करता है जिसकी वजह से शरीर की क्रियाओं को मदद मिलती है।
  • पित्त की पत्थरी व मूत्रपिंड को रोकने में सेंधा नमक और दूसरे नमकों से बेहद उपयोगी है।
  • पानी के साथ सेंधा नमक लेने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
  • आयोडीन की कमी को दूर करके थाइरोइड की बीमारी को दूर करने में मदद करता है।
  • .ब्रेन हेमरेज और गठिया जैसी भयावह बीमारी से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।
  •  ऐतिहासिक रूप से पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’ कहा जाता है जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। अक्सर यह नमक इसी खान से आया करता था। 
  • सेंधे नमक को ‘लाहौरी नमक’ भी कहा जाता है क्योंकि यह व्यापारिक रूप से अक्सर लाहौर से होता हुआ पूरे उत्तर भारत में बेचा जाता था।  यह सफ़ेद और लाल रंग मे पाया जाता है । सफ़ेद रंग वाला नमक उत्तम होता है। 
  • यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। 
  • रक्त विकार आदि के रोग जिसमे नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
    सिर्फ आयोडीन के चक्कर में ज्यादा नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है। 
  • यह सफ़ेद और लाल रंग मे पाया जाता है । सफ़ेद रंग वाला नमक उत्तम होता है। यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। 
  • रक्त विकार आदि के रोग जिसमे नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
    यह पित्त नाशक और आंखों के लिये हितकारी है । दस्त, कृमिजन्य रोगो और रह्युमेटिज्म मे काफ़ी उपयोगी होता है ।

Friday, May 05, 2017

तुलसी के फायदे, Tulsi Ke Fayde, Health Benefits Of Tulsi Leafs in Hindi,

तुलसी ऐसा पौधा है जो अमूमन हर घर में पाया जाता है। तुलसी को बेसिल लीव्स के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि तुलसी के पौधे में कई दिव्य गुण हैं। तुलसी से कई गंभीर समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। भारत के हर हिस्से में तुलसी के पौधे को प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। तुलसी को हिन्दु संस्कृति में अतिपूजनीय पौधा माना गया है। 

माता तुल्य तुलसी को आंगन में लगा देने मात्र से अनेक रोग घर में प्रवेश नहीं करते हैं और यह हवा को भी शुद्ध बनाने का काम करती है। तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैन्कटम है। आदिवासी भी तुलसी को अनेक हर्बल नुस्खों में अपनाते हैं, चलिए आज जिक्र करेंगे तुलसी से जुडे आदिवासियों के ऐसे

औषधीय गुण.Health Benefits of tulsi in hindi,

    • किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।
    • खांसी के लिए तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल पत्तियों को अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है। तुलसी को चाय की पत्तियों के साथ उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है।
    • आदिवासी अंचलों मे पानी की शुध्दता के लिए तुलसी के पत्ते जल पात्र में डाल दिए जाते है। इन्हें कम से कम एक सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा जाता है। फिर कपड़े से पानी को छान लिया जाता है और यह पीने योग्य माना जाता है।
    • रोजाना तुलसी के पांच पत्ते खाने से मौसमी बुखार व जुकाम जैसी समस्याएं दूर रहती है। तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है। मुंह के छाले दूर होते हैं व दांत भी स्वस्थ रहते हैं।
    • सुबह पानी के साथ तुलसी की पत्तियां निगलने से कई प्रकार की बीमारियां व संक्रामक रोग नहीं होते हैं।
      दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में रोजाना तुलसी खाने व तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है।
    • तुलसी की जड़ का काढ़ा ज्वर (बुखार) नाशक होता है। तुलसी, अदरक और मुलैठी को घोटकर शहद के साथ लेने से सर्दी के बुखार में आराम होता है।
    • औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है।
    • दिल की बीमारी में यह वरदान साबित होती है, क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्राॅल को नियंत्रित करती है। जिन्हें दिल की बीमारी हुई हो, उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई भी स्वस्थ व्यक्ति सेवन कर सकता है।
    • तुलसी की पत्तियों का रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाएं। इसे रात को चेहरे पर लगाने से फोड़े- फुंसियां ठीक हो जाती हैं और चेहरे की रंगत में निखार आता है।
    • तुलसी को थकान मिटाने वाली एक औषधि भी माना जाता है, ज्यादा थकान या तनाव होने पर तुलसी के पत्तियों और मंजरी का सेवन करें थकान दूर हो जाएगी।
    • फ्लू रोग तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता है। डाँग- गुजरात में आदिवासी हर्बल जानकार फ्लु के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने की सलाह देते हैं।
    • इसके नियमित सेवन से "क्रोनिक-माइग्रेन" के निवारण में मदद मिलती है। रोजाना दिन में 4- 5 बार तुलसी से 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माईग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।
    • शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाए तो उसे जल्द ही संतान सुख मिलता है।
    • घमाैरियों के इलाज के लिए डांग- गुजरात के आदिवासी संतरे के छिलकों को छांव में सुखाकर पाउडर बना लेते हैं। इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर शरीर पर लगाते हैं, ऐसा करने से तुरंत आराम मिलता है।
    • जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए वरना तुलसी के झाड में चीटियाँ और कीड़ें लग जाते है और उसे समाप्त कर देते है . इन पकी हुई मंजिरियों को रख ले . इनमे से काले काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर ले . यही सब्जा है . अगर आपके घर में नही है तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकान पर मिल जाएंगे
    • शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी:: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है
    • नपुंसकता:: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढोतरि होती है।
    • यौन दुर्बलता : 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें। और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
    • मासिक धर्म में अनियमियता:: जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है
    • गर्भधारण में समस्या:: जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो मासिक आने पर ५-५ ग्राम तुलसी बीज सुबह शाम पानी के साथ ले जब तक मासिक रहे ,
    • मासिक ख़त्म होने के बाद माजूफल का चूर्ण १० ग्राम सुबह शाम पानी के साथ ले ३ दिन तक तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां दाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है यह पित्त घटाता है ये त्रीदोषनाशक , क्षुधावर्धक है .
    • तुलसी के बीज,सफेद मुसली और माजूफल का चूर्ण आपको पंसारी की दूकान या आयुर्वैदिक दवाओ कि दूकान से मिल जायेंगे

      Wednesday, April 05, 2017

      शहद के औषधीय गुण-Health Benefits of Honey in Hindi,शहद खाने के फायदे,

      शहद के औषधीय गुण-Health Benefits of Honey in Hindi,शहद खाने के फायदे,
      शहद का प्रयोग पुराने समय से चलता आ रहा है। हर घर में शहद होता है लेकिन शहद के कई गुणों के बारे में अभी तक आपको पता न हो। प्राचीन समय से मधु यानि कि शहद का इस्तेमाल तीस फीसदी से अधिक चिकित्सा में यानि कि बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है। शहद में एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं यह आपको कई बीमारीयों से बचाते है

      शहद खाने के फायदे,

        • शहद अन्य उत्पादों के मुकाबले वजन को कम करके में ज्यादा जल्दी असर करता है। इसके साथ ही
        • डायटिंग करते वक्त यह शरीर को भरपूर पोषण भी देता है। 
        • शहद का प्रयोग पानी के साथ करना ज्यादा हितकर होता है। अगर पानी गरम हो तो और भी जल्दी शरीर से वजन कम होता है। शहद खाने के फायदे,
        • दूध में डालकर हल्के गर्म दूध में शहद की कुछ बूंदें डालकर पीने से बढ़ी हुई चर्बी बहुत जल्दी कम होने लगती है. उबले हुए दूध में कम कैलरी होती है जिसकी वजह से इससे वजन नहीं बढ़ता है और इसमें कुछ बूंदें शहद की डाल देने से यह और फायदेमंद हो जाता है. 
        • गर्म पानी में शहद डालकर हल्के गर्म पानी में शहद की कुछ बूंदें डालकर अच्छी तरह मिला लें. अगर आप इसमें कुछ बूंदें नींबू के रस की डाल देते हैं तो ये और बेहतर तरीके से असर करेगा. सुबह खाली पेट इसका सेवन करना सबसे अधिक फायदेमंद रहेगा. 
        • ओट्स के साथ शहद का सेवन सुबह के ब्रेकफास्ट में आप जो भी कुछ अब तक खाते आए हैं उसे छोड़कर ओट्स और शहद अपनाइए. ओेट्स और शहद के सेवन आपकी सुबह को हेल्दी शुरुआत देगा. साथ ही पेट कम करने में यह दोहरे रूप से फायदा पहुंचाएगा.
        • नींबू और शहद एक साथ लेने से वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। अगर आप रोज़ सुबह
        • नींबू, शहद और गरम पानी मिला कर पिएगें तो आपका वजन तेज़ी से घटेगा।
        • क्या आपको पता है कि शहद से गुस्सा कंट्रोल होता है। जी हां, शहद को दूध में मिला कर पीने से
        • गुस्सा तो कम होता ही है साथ में खूब सारा पोषण भी मिलता है।
        • अगर आप अपने भोजन में भी शहद को प्रयोग करना चाहते हैं तो उसको कम वसा वाले दही में मिला
        • कर खाएं। अगर आप इसे रोज़ सुबह नाश्ते के वक्त खाएगें तो लाभ होगा।
        • कई डायटिंग करने वाले लोग इसको फ्रूट सलाद में भी मिला कर प्रयोग करते हैं। बस करना केवल यह है कि शहद की कुछ बूदें अपने सलाद में डालें और मिला कर खा जाएं। यह काफी हेल्दी स्नैक्स हो सकता है
        • शहद को ओटमील में मिला कर नाश्ते में खाने से वजन कम होता है। इससे स्वास्थ्य तो अच्छा होता ही है साथ में वजन भी कम होता है। 
        • अगर आपको वजन कम करना है तो हर भोजन के बाद नींबू, शहद और गरम पानी मिला कर पिने से लाभ होता है और एक्स्ट्रा कैलोरी भी बर्न होती है। यह जिम के बाद लौट कर भी पिया जा सकता है क्योंकि इससे तुरंत शक्ति मिलती है। 
        • एक चुटकी छोटी हरड़ का पावडर और एक चम्मच शहद मिलाकर खाने से अम्ल पित्त शांत हो जाता है
        • आधा नींबू का रस एक चम्मच शहद मिलाकर चाट लें अम्ल पित्त मे आराम हो जाएगा ।
        • नींबू के पत्तों का रस और शहद समान मात्रा मे लेकर खिलाने से पेट के कीड़े मर जाते है ।
        • त्रिफला एक छोटी चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर रात्री के समय खाने के बाद चाट लिया करें और ऊपर से दूध पी लें , पेट के सभी रोगों से छुटकारा मिल जाएगा 
        • बीस ग्राम शहद दस ग्राम गाय का मक्खन मिलाकर दिन मे दो बार खाने से टी बी रोग ठीक हो जाता है ।
        • अकरकरा का चूर्ण एक ग्राम दस ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकी दूर हो जाती है ।
        • शहद और दो बूंद नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की कांति लौट आती है।
        • एक चम्मच प्याज का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर बालों पर लगाने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं
        • एक छोटा चम्मच शहद मे एक बादाम घिस कर मिला लें और रोज छोटे बच्चों को चटा देने से वे मजबूत कांतिवान मोटे हो जाते है 
        • बच्चों को खांसी होने पर एक चम्मच शहद मे एक चुटकी हल्दी मिलाकर सोते समय व सुबह खाली पेट चटा दे दो तीन दिनों मे खांसी गायब हो जाएगी । इस नुस्खे को बडे भी आजमा सकते हैं।
        • शहद मे अदरक का रस और एक चुटकी दालचीनी पावडर मिलाकर चाटने से जोड़ों मे आराम मिलता है । खांसी होने पर भी इस प्रयोग को आजमाए सौ प्रतिशत आराम मिल जाएगा ।
        • शरीर पर पड़े खरोंचों को जल्दी ठीक करने के लिए शहद मलना चाहिए। यह खरोचों के निशान भी हल्के कर देता है। 
        • शहद सेवन श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या को कम होने से रोकाता है। प्रतिदिन दो चम्मच शहद पीने से यह कीमोथैरेपी में असरदायक होता है। 
        • भोजन से अरुचि होने पर एक चम्मच खट्टे अनार का रस और एक बड़ा चम्मच शहद और सेंधा नमक मिलाकर खिलाने से भोजन मे रुचि पैदा हो जाती है । जो लोग योग का अभ्यास करते हैं उनके लिए शहद बेहद फायदेमंद होता है। शहद के सेवन से शरीर के रसायन यानि कैमिकल संतुलित रहता है। सुबह के समय में योग शुरू करने से पहले गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से शरीर के सारे अंग सक्रिय हो जाते हैं। शहद खाने के फायदे,

          Monday, April 03, 2017

          गोमुत्र के लाभ,Health Benefits Of Gomutra Cow Urine in Hindi,

          गोमुत्र के लाभ,Cow Urine Benefits,Health Benefits Of Gomutra Cow Urine in Hindi to Cure

          हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार गाय के गोबर में लक्ष्मी और मूत्र में गंगा का वास होता है, जबकि आयुर्वेद में गौमूत्र के ढेरों प्रयोग कहे गए हैं। गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से थोड़े से गौमूत्र का भी सेवन करते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है       गोमुत्र पतंजलि
          • कैंसर की चिकित्सा में रेडियो एक्टिव एलिमेन्ट प्रयोग में लाए जाते है गौमूत्र में विद्यमान सोडियम,पोटेशियम,मैग्नेशियम,फास्फोरस,सल्फर आदि में से कुछ लवण विघटित होकर रेडियो एलिमेन्ट की तरह कार्य करने लगते है और कैंसर की अनियन्त्रित वृद्धि पर तुरन्त नियंत्रण करते है | कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते है | अर्क आँपरेशन के बाद बची कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट करता है | यानी गौमूत्र में कैसर बीमारी को दूर करने की शक्ति समाहित है |
          • दूध देने वाली गाय के मूत्र में “लेक्टोज” की मात्रा आधिक पाई जाती है, जो हृदय और मस्तिष्क के विकारों के लिए उपयोगी होता है।
          • गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है! इसके अन्दर ‘कार्बोलिक एसिड‘ होता है जो कीटाणु नासक है, यह किटाणु जनित रोगों का भी नाश करता है। गौमूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे, ख़राब नहीं होता है।
          • जोड़ों के दर्द में दर्द वाले स्थान पर गौमूत्र से सेकाई करने से आराम मिलता है। सर्दियों के मौषम में इस परेशानी में सोंठ के साथ गौ मूत्र पीना फायदेमंद बताया गया है।
          • गैस की शिकायत में प्रातःकाल आधे कप पानी में गौ मूत्र के साथ नमक और नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए। 
          • चर्म रोग में गौ मूत्र और पीसे हुए जीरे के लेप से लाभ मिलता है। खाज, खुजली में गौ मूत्र उपयोगी है।
          • गौमूत्र मोटापा कम करने में भी सहायक है। एक ग्लास ताजे पानी में चार बूंद गौ मूत्र के साथ दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित पीने से लाभ मिलता है।
          • गौमूत्र का सेवन छानकर किया जाना चाहिए। यह वैसा रसायन है, जो वृद्धावस्था को रोकता है और शरीर को स्वस्थ्यकर बनाए रखता है।
          • गौमूत्र किसी भी प्रकृतिक औषधी के साथ मिलकर उसके गुण-धर्म को बीस गुणा बढ़ा देता है| गौमूत्र का कई खाद्य पदार्थों के साथ अच्छा संबंध है जैसे गौमूत्र के साथ गुड़, गौमूत्र शहद के साथ आदि|
          • अमेरिका में हुए एक अनुसंधान से सिध्द हो गया है कि गौ के पेट में "विटामिन बी" सदा ही रहता है। यह सतोगुणी रस है व विचारों में सात्विकता लाता है। 
          • गौमूत्र लेने का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल का होता है और इसे पेट साफ करने के बाद खाली पेट लेना चाहिए| गौमूत्र सेवन के 1 घंटे पश्चात ही भोजन करना चाहिए 
          • गौमूत्र देशी गाय का ही सेवन करना सही रहता है। गाय का गर्भवती या रोग ग्रस्त नहीं होना चाहिए। एक वर्ष से बड़ी बछिया का गौ मूत्र बहुत लाभकारी होता है।
          • मांसाहारी व्यक्ति को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए गौमूत्र लेने के 15 दिन पहले मांसाहार का त्याग कर देना चाहिए| पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति को सीधे गौमूत्र नहीं लेना चाहिए, गौमूत्र को पानी में मिलाकर लेना चाहिए| पीलिया के रोगी को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| देर रात्रि में गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| ग्रीष्म ऋतु में गौमूत्र कम मात्र में लेना चाहिए Benefits,Health Benefits Of Gomutra
          • घर में गौमूत्र छिड़कने से लक्ष्मी कृपा मिलती है, जिस घर में प्रतिदिन गौमूत्र का छिड़काव किया जाता है, वहां देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।
          • गौमूत्र में गंगा मईया वास करती हैं। गंगा को सभी पापों का हरण करने वाली माना गया है, अत: गौमूत्र पीने से पापों का नाश होता है। 

          • जिस घर में नियमित रूप से गौमूत्र का छिड़काव होता है, वहां बहुत सारे वास्तु दोषों का समाधान एक साथ हो जाता हैं। 
          • देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ,प्रोपिलीन ऑक्साइड” उत्पन्न होती है, जो बारिस लाने में सहायक होती है| इसी के मिश्रण से ‘इथिलीन ऑक्साइड‘ गैस निकलती है जो ऑपरेशन थियटर में काम आता है
          • गोमुत्र कीटनाशक के रूप में भी उपयोगी है। देसी गाय के एक लीटर गोमुत्र को आठ लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग किया जाता है । गोमुत्र के माध्यम से फसल को नैसर्गिक युरिया मिलता है। इस कारण खाद के रूप में भी यह छिड़काव उपयोगी होता है ।गौमूत्र से औषधियाँ एपं कीट नियंत्रक बनाया जा सकता है। Benefits,Health Benefits Of Gomutra

          by राजीव दिक्षित JI

          Wednesday, March 08, 2017

          अमरूद की पत्तियों के औषधीय गुण,Health Benefits of Guava Leavesin Hindi,

          अमरूद का फल ही नहीं पत्तियां भी बेहद लाभदायक मानी गई है। पत्तियों के सेवन से ही कई बीमारियों को मात दी जा सकती है। अगर आप एलर्जी, गठियां दर्द, मुंह के छाले, अपच की समस्या, दांत दर्द, मुहांसों की समस्या, डायरिया या डेंगू आदि रोगों से परेशान है तो इन सबका एक मात्र उपाय अमरूद की पत्तियों में छुपा है। जिसके सेवन से आप इन सब बीमारियों से राहत पा सकते हैं। तो आइए जानते है कि किस तरह अमरूद के पत्तों से आपको कई रोगों में लाभ मिल सकता है

          एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह विटामिन-सी, फाइबर और अन्य कई जरूरी मिनरल्स से भरपूर होता है। हालांकि, कम लोग ही जानते होंगे कि अमरूद के पत्ते भी बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद के पत्तों में मौजूद ऐंटी-ऑक्सीडेंट, ऐंटी-बैक्टीरियल और ऐंटी-इंफ्लेमेट्री गुण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। त्वचा, बाल और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अमरूद की ताजी पत्तियों का रस या फिर इसकी बनी हुई चाय बहुत ही फायदेमंद होती है। आइए जानते हैं यह किस तरह से फायदेमंद होती है :

          अमरूद की पत्तियों के औषधीय गुण,Health Benefits of Guava Leavesin Hindi,

          • अमरूद के पत्तों का मस्तिष्क विकार, वृक्क  प्रवाह और शारीरिक एवं मानसिक विकारों में प्रयोग किया जाता है। इसका तुरंत लाभ मिलता है।
          • अमरूद के पत्तों के 10 ग्राम काढ़े को पिलाने से वमन या उल्टी बंद हो जाती है और जी भी सही रहता है।
            अमरूद के कोमल पत्तों को पीसकर गठिया के वेदना युक्त स्थानों पर लेप करने से लाभ होता है।
          • अमरूद के पत्तों के स्वरस को भरपेट पिलाने से या अमरूद खाने से भांग, धतूरा और कई अन्य प्रकार के नशे जल्दी उतर जाते हैं। 
          • अमरूद की थोड़ी सी पत्तियों को लेकर पानी में उबालकर पीस लें। इस लेप को फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।
          • गठिया -अमरूद के पत्तियों को गर्म करके गठिया के दर्द व सूजन में लगाने से गठिया की सूजन व दर्द दूर हो जाती है। इससे गठिया के दर्द में बेहद आराम मिलता है।
          • कोलेस्‍ट्रॉल-अमरूद की कोमल पत्ते पीसकर प्रतिदिन पिएं, क्योंकि यह लीवर से गंदगी निकालता है और ख़राब कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है।
          • डायरिया रोग-अमरूद और अमरूद की पत्तियां पेट की किसी भी समस्या के लिए असरकारक औषधि है। अतः एक गिलास पानी में अमरूद की पत्‍तियों को डाल कर उबालें और फिर उसका पानी छान कर पीने से यह डायरिया रोग को दूर भगाता है।
          • अपच-अमरूद की पत्ते या फिर उससे तैयार जूस का सेवन अपच की समस्या में राहत प्रदान करता हैं और पाचन तंत्र को भी ठीक रखता है।
          • दांतों की समस्‍या-अगर अमरुद की पत्तियों को पीस कर इसका पेस्‍ट बना कर उसे मसूड़ों या दांत पर रखें तो इससे आपको दांत दर्द या मसूड़ों की समस्या में राहत प्राप्त होगी।
          • डेंगू बुखार-डेंगू बुखार होने पर यदि अमरूद की पत्‍तियों का रस रोगी को पिला दें तो इसके सेवन से बुखार के संक्रमण दूर हो जाते है।
          • एलर्जी-अमरूद की पत्तियों में एंटीसेप्टिक गुण होता है। जो किसी भी बैक्टीरियां को मारने की अचूक शक्ति रखती हैं। इसका रस किसी भी प्रकार की एलर्जी को दूर कर उस वायरस को ख़तम कर देता है जिससे एलर्जी उत्पन्न होती है।
          • आधे सिर का दर्द-आधे सिर में दर्द होने पर कच्चे हरे ताज़े अमरूद को सूर्य के उदय होने से पहले पत्थर पर घिसकर लेप तैयार कर लें और इस लेप को माथे पर लगाएं। ऐसा कुछ दिनों तक नित्य प्रयोग करने से आपको शीघ्र ही लाभ प्राप्त होगा।
          • मुंह के छाले-अपच की समस्या या अन्य कारणों से मुंह के छालें निकल आने पर आप अक्सर परेशान हो जाते हैं। तो मुंह के छालों से छुटकारा पाने के लिए आप अमरूद के पत्तों पर कत्था लगाकर इन्हें धीरे धीरे चबाएं। मुंह के छालों में राहत मिलती है।
          • मुंहासे-एंटीसेप्‍टिक गुण के कारण अमरूद के पत्ते बैक्‍टीरिया को मारने की अचूक शक्ति रखते हैं। ताज़ी पत्तियों को पीस कर मुंहासों पर लगाएं, तो कुछ ही दिनों में मुहांसे दूर भाग जायें।

          Wednesday, March 01, 2017

          जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,

          जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,
          जैतून का तेल ( Olive Oil) एक बेहद लाभकारी तेल है | इसे जैतून के फल से निकाला जाता है | इसके अनगिनत लाभ हैं | यह स्वास्थ्यवर्धक है, जैतून का तेल जिसे हम ऑलिव ऑयल भी कहते है। यह तेल हमारे शरीर को कई रोगों से राहत दिलवाता है। जैतून का तेल हमारी सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ हमें ओर भी कई समस्याओं जैसे बालों और त्वचा सम्बन्धी समस्याओं से राहत दिलवाता है। जैतून के तेल का प्रयोग खाना पकाने में, सौंदर्य सामग्री और दवाओं में तेल के रूप में प्रयोग किया जाता है।

          जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,

          • जैतून ऑस्टेरोपिरोसिस में भी लाभकारी है। यह बोन मिनरल्स को इम्प्रूव करके उनमे कैल्शियम को स्टोर करता है।
          • डिप्रेशन के शिकार लोगों को भी ऑलिव का इस्तेमाल करना चाहिए। खाना बनाने में इसके तेल का इस्तेमाल करें। 
          • जैतून के तेल से चेहरे पर मसाज करने से चेहरे में चमक और झुर्रियों से भी राहत मिलती है।
          • जैतून के तेल का प्रयोग हम शरीर पर मालिश करने के लिए भी करते है ,यें त्वचा को कोमल बनाएं रखने में मदद करता है।
          • जैतून के तेल का प्रयोग पैरों के लिए भी लाभकारी होता है,पैरों को कोमल बनाएं रखने में मदद करता है।
          • जैतून के तेल से आंखों के आसपास मसाज करने से आंखों के काले घेरों से छुटकारा मिलता है।
          • जैतून के तेल का प्रयोग भोजन में करने से हड्डियां मजबूत बनती है।
          • जैतून के तेल का सेवन करने से हृदय संबधी रोगों से निजात मिलती है।
          • ऑलिव त्वचा के कैंसर से भी बचाता है। हेल्दी नेल्स- नेल्स को ऑलिव ऑयल में आधे घण्टे तक डुबोकर रखे। इससे नेल्स सॉफ्ट और चमकदार बनेगे।
          • हेल्दी लिप्स- फ़टे और रूखे लिप्स पर ऑलिव ऑयल से 5 मिंनट तक मसाज करे। इससे लिप्स सॉफ्ट और हेल्दी बनेगी।
          • ब्लैक हेड्स- नहाने के बाद एक चम्मच ऑलिव ऑयल को चेहरे पर लगाएं। ब्लैक हेड्स की प्रॉब्लम दूर होगी।
          • कैंसर- जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार जैतून का तेल आंत में होने वाले कैंसर से बचाव करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। 
          • ऑस्टियोपोरोसिस- जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। 
          • मोटापा- लंबे समय तक जैतून के तेल को आहार में शामिल करने पर यह शरीर में मौजूद वसा को खुद ब खुद कम करने लगता है। इससे आपका मोटापा कम होता है, वह भी हेल्दी तरीके से।
          • मेकअप रिमूवर- जैतून के तेल को मेकअप रिमूवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा रूखी भी नहीं होती और त्वचा का रंग गोरा होता है। यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
          • धूप से झुलसी त्वचा को ठीक करने के लिए जैतून का तेल बहुत प्रभावी है।
          • नहाने के बाद ऑलिव ऑयल लगाने से शरीर पर मौजूद काले धब्बे दूर हो जाते हैं और पूरे दिन आपके शरीर पर नमी बनी रहती है। Benefits of Olive Oil
          • जैतून का तेल चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इससे चेहरे पर रौनक आ जाएगी और गर्दन का कालापन दूर हो जाएगा।
          • ऑलिव ऑयल में चीनी मिलाकर रोज स्क्रब करने से काली त्वचा की समस्या से काफी हद तक निजात मिलती है।
          • जैतून के तेल से सिर पर मालिश करने से बाल मुलायम हो जाते है। बालों की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।जैतून के तेल का सेवन करने से कब्ज से राहत मिलती है।
          • जैतून के तेल और चीनी का प्रयोग करके हम चेहरे पर स्क्रब भी कर सकते है।
          • जैतून के तेल का प्रयोग हम फेसपैक में भी कर सकते है।
          • जैतून का तेल त्वचा के अंदर गहराई से जा कर त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
          • जैतून के तेल का प्रयोग खाना पकाने में,सौंदर्य सामग्री और दवाओं में तेल के रूप में किया जाता है।
          • सलाद को और भी पौष्टिक बनाने के लिए उसके ऊपर ऑलिव ऑयल डालकर खाना चाहिए।
          • कई तरह के कैंसर से बचाने में भी जैतून सहायक है।*. आँखों को स्वस्थ रखने में ऑलिव बेहद लाभकारी है।
          • ऑलिव के सेवन से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती है।ऑलिव ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है।
          • ऑलिव अल्जाइमर जैसी बीमारी के प्रभाव को कम करता है। Benefits of Olive Oil

          Thursday, February 23, 2017

          अजवायन के लाभ,Health Benefit of Carom Seeds in Hindi,

          अजवायन एक रसोई घर का बे मिसाल मसाला और एक असरकारक ओषधि है। यह पकवान का स्वाद बढ़ने के साथ साथ पेट सम्बंधी अनेक रोगों जैसे वायु विकार, कृमि, अपच, कब्ज आदि को ठीक करने में मदद करता है अजवायन स्वास्थ्य और सौंदर्य, के लिए बहूत ही उपयोगी है
          अजवाइन का इस्तेमाल मसाले के रूप में हर रसोई में किया जाता है । दादी - नानी के नुस्ख़े में पेट दर्द होने पर अजवाइन की फक्की मार लेने की सलाह दी जाती है । यह खाने का स्वाद तो बढ़ाती ही है , साथ ही सेहत से जुड़ी कई परेशानियों को दूर करती है । इसका चुर्ण बनाकर खाने से पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है । आइए जाने इसके लाजवाब फायदों के बारे में

          अजवायन के लाभ,Health Benefit of Carom Seeds in Hindi,

          • अपच खाना खाने के बाद भारीपन होने पर 1 चम्मच अजवाइन को चुटकी भर अदरक पाउडर के साथ खाने से फ़ायदा मिलता है ।
          • कब्ज़ कई लोगों को पेट संबधी समस्याएँ रहती है जैसे कि कब्ज़ । इसके लिए रोज़ाना खाना खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच अजवाइन का सेवन करें । इससे कब्ज़ की परेशानी दूर होगी ।
          • गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए अजवाइन बहुत लाभकारी है । अजवाइन , शहद और सिरका का लगातार 15 दीनो तक सेवन करने से फ़ायदा मिलता है ।
          • अस्थमा के इलाज के लिए भी अजवाइन बहुत फायदेमंद मानी जाती है । रोज़ाना दिन में 2 बार अजवाइन के साथ गुड़ का सेवन करने से लाभ मिलता है ।
          • पेट दर्द से परेशान है तो अजवाइन और नमक का सेवन गुनगुने पानी के साथ करें ।
          • पीरियड्स में होने वाली दर्द से छुटकारा पाने के लिए अजवाइन का पानी बहुत लाभदायक है । रात को 1 गिलास पानी में 1 चम्मच अजवाइन भिगो कर रख दें । सुबह पानी को पी लें ।
          • गठिया यानी जोड़ो का दर्द । गठिए के रोगी को रोज़ाना अजवाइन के तेल के साथ जोड़ो की मालिश करनी चाहिए । इससे आराम मिलेगा ।
          • दस्त में अजवाइन सबसे बढ़िया घरेलू उपाय है । 1 गिलास पानी में 1 चम्मच अजवाइन डाल कर उबाल लें और इसे छान कर ठंडा कर लें । इस पानी को दिन में 2 - 3 बार पीने से दस्त ठीक हो जाते है ।
          • मुंहासे के निशान-एक छोटा चम्मच अजवाइन का पाउडर और एक बड़ा चम्मच दही को अच्छे से मिक्स करके पेस्ट बना लें । इसे रात को सोने से पहले चेहरे पर आधे घंटे के लिए लगाएं । इसके बाद इसे गुगगुने पानी से धो लें । इसके इस्तेमाल से चेहरे पर मुहासो के निशान हल्के हो जाएगें ।
          • सर्दी और जुकाम-मौसम में बदलाव के कारण सर्दी और जुकाम हो जाता है । ऐसे में पिसी हुई अजवाइन को सुंघने से राहत मिलती है । 
          • यह माइग्रेन नें भी फायदेमंद है ।घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि चर्मरोग भी नष्ट होते हैं। पाचन दरुस्त करता है, पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी फायदेमंद है । 
          • इसका  मसाले  बीज, फूल, पत्ते, तेल और अर्क के रूप में प्रयोग  किया जाता है। इसको चूर्ण, काढ़ा, क्वाथ और अर्क के रूप में भी काम में लाया जाता है। 
          • अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है । इसी कारण इसका ( पत्ती) इतालवी व्यंजनों में,जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन है. विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं। 
          • यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। 
          • जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है,श्वसन किर्या को दरुस्त करता है जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है ।

          Friday, January 06, 2017

          गोखरू के गुण,Gokhru-Health-Benefits,

          किड्नी के लिए राम बाण  औषधि है गोखरू | बंद किड्नी को चालू करता है| किड्नी मे स्टोन को टुकड़े टुकड़े करके पेशाब के रास्ते बाहर निकल देता है| क्रिएटिन ,यूरिया को तेजी  से  नीचे लाता है ,पेशाब मे जलन हो पेशाब ना होती है ,इसके लिए भी यह काम करता है इसके बारे मे आयुर्वेद के जनक आचार्य श्रुशूत ने भी लिखा इसके अलावा कई विद्वानो ने इसके बारे मे लिखा है इसका प्रयोग हर्बल दवाओं मे भी होता है आयुर्वेद की दवाओं मे भी होता है यह स्त्रियो के बंध्यत्व  मे तथा पुरुषों के नपुंसकता मे भी बहुत उपयोगी होता है इस दवा का सेवन कई लोगो ने किया है जिनका क्रिएटिन 10 पाईंट से भी अधिक था उन्हे भी 15 दिनो मे  संतोषप्रद  लाभ हुआ |आत: जिन लोगो को किडनी की प्राब्लम है वो इसका सेवन करे तो लाभ होना निश्चित है
          गोखरू की दो जातियां होती हैं बड़ा गोखरू और छोटा गोखरू। औषधि के रूप में छोटा गोखरू प्रयोग होता है। औषधि के रूप में पौधे की जड़ और फल का प्रयोग होता है।

          गोखरू के आयुर्वेदिक गुण 

          • आचार्य चरक ने गोक्षुर को मूत्र विरेचन द्रव्यों में प्रधान मानते हुए लिखा है-गोक्षुर को मूत्रकृच्छानिलहराणाम् अर्थात् यह मूत्र कृच्छ (डिसयूरिया) विसर्जन के समय होने वाले कष्ट में उपयोगी एक महत्त्वपूर्ण औषधि है । आचार्य सुश्रुत ने लघुपंचकमूल, कण्टक पंचमूल गणों में गोखरू का उल्लेख किया है । अश्मरी भेदन (पथरी को तोड़ना, मूत्र मार्ग से ही बाहर निकाल देना) हेतु भी इसे उपयोगी माना है ।
          • श्री भाव मिश्र गोक्षुर को मूत्राशय का शोधन करने वाला, अश्मरी भेदक बताते हैं व लिखते हैं कि पेट के समस्त रोगों की गोखरू सर्वश्रेष्ठ दवा है । वनौषधि चन्द्रोदय के विद्वान् लेखक के अनुसार गोक्षरू मूत्र पिण्ड को उत्तेजना देता है, वेदना नाशक और बलदायक है ।
          • पथरी रोग :- पथरी रोग में गोक्षुर के फलों का चूर्ण शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम दिया जाता है । महर्षि सुश्रुत के अनुसार सात दिन तक गौदुग्ध के साथ गोक्षुर पंचांग का सेवन कराने में पथरी टूट-टूट कर शरीर से बाहर चली जाती है । मूत्र के साथ यदि रक्त स्राव भी हो तो गोक्षुर चूर्ण को दूध में उबाल कर मिश्री के साथ पिलाते हैं ।पथरी की चिकित्सा में सबसे महत्वपूर्ण औषधी है 
          • गोखरू :- पथरी के रोगी को इसके बीजो का चूर्ण दिया जाता है तथा पत्तों का पानी बना के पिलाया जाता है | इसके पत्तों को पानी में कुछ देर के लिए भिगो देते है | उसके बाद पतो को १५ बीस बार उसी पानी में डुबोते है और निकालते है इस प्रक्रिया में पानी चिकना गाढा लार युक्त हो जाता है | यह पानी रोगी को पिलाया जाता है स्वाद हेतु इसमे चीनी या नमक थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है | 
          • यह पानी स्त्रीयों में श्वेत प्रदर ,रक्त प्रदर पेशाब में जलन आदि रोगों की राम बाण औषधी है | यह मूत्राशय में पडी हुयी पथरी को टुकड़ों में बाट कर पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देता है |
          • सुजाक रोग :- सुजाक रोग (गनोरिया) में गोक्षुर को घंटे पानी में भिगोकर और उसे अच्छी तरह छानकर दिन में चार बार 5-5 ग्राम की मात्रा में देते हैं । किसी भी कारण से यदि पेशाब की जलन हो तो गोखरु के फल और पत्तों का रस 20 से 50 मिलीलीटर दिन में दो-तीन बार पिलाने से वह तुरंत मिटती है । प्रमेह शुक्रमेह में गोखरू चूर्ण को 5 से 6 ग्राम मिश्री के साथ दो बार देते हैं । तुरंत लाभ मिलता है ।
          • प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने में :- मूत्र रोग संबंधी सभी शिकायतों यथा प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब का रुक-रुक कर आना, पेशाब का अपने आप निकलना (युरीनरी इनकाण्टीनेन्स), नपुंसकता, मूत्राशय की पुरानी सूजन आदि में गोखरू 10 ग्राम, जल 150 ग्राम, दूध 250 ग्राम को पकाकर आधा रह जाने पर छानकर नित्य पिलाने से मूत्र मार्ग की सारी विकृतियाँ दूर होती हैं ।
          • प्रदर में, अतिरिक्त स्राव में, स्री जनन अंगों के सामान्य संक्रमणों में गोखरू एक प्रति संक्रामक का काम करता है । स्री रोगों के लिए 15 ग्राम चूर्ण नित्य घी व मिश्री के साथ देते हैं ।
          • गोक्षुर चूर्ण प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र मार्ग में आए अवरोध को मिटाता है, उस स्थान विशेष में रक्त संचय को रोकती तथा यूरेथ्रा के द्वारों को उत्तेजित कर मूत्र को निकाल बाहर करता है । बहुसंख्य व्यक्तियों में गोक्षुर के प्रयोग के बाद ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं रह जाती । इसे योग के रूप न देकर अकेले अनुपान भेद के माध्यम से ही दिया जाए, यही उचित है, ऐसा वैज्ञानिकों का व सारे अध्ययनों का अभिमत है ।
          • नपुंसकता impotence arising from bad practice में, बराबर मात्रा में गोखरू के बीज का चूर्ण और तिल के बीज sesame seeds powder के चूर्ण, को बकरी के दूध और शहद के साथ दिया जाता है।
          • धातु की कमजोरी में इसके ताजे फल का रस 7-14 मिलीलीटर या 14-28 मिलीलीटर सूखे फल के काढ़े, को दिन में दो बार दूध के साथ लें।
          • मूत्रकृच्छ painful urination में 5g गोखरू चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से आराम मिलता है। यह मूत्र की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है और सूजन कम करता है।
          • मूत्रघात urinary retention में 3-6 ग्राम फल का पाउडर, पानी के साथ दिन में दो बार लें।
          • रक्तपित्त में गोखरू के फल को 100-200 मिलीलीटर दूध में उबाल कर दिन में दो बार लें।
          • धातुस्राव, स्वप्नदोष nocturnal fall, प्रमेह, कमजोरी weakness, और यौन विकारों sexual disorders में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण को बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
          • यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए, गोखरू, शतावर, नागबला, खिरैटी, असगंध, को बराबर मात्रा में कूट कर, कपड़चन कर लें और रोज़ १ छोटा चम्मच दूध के साथ ले। इसको ४० दिन तक लगातार लें।
          • अश्मरी urinary stones में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण (फल का पाउडर) शहद के साथ दिन में दो बार, पीछे से गाय का दूध लें।

          Saturday, December 17, 2016

          ईसबगोल के फायदे,Health Benefits of Plantago Ovata in Hindi,

          ईसबगोल प्रायः उष्ण कटिबन्धीय स्थानो में पाया जाता है । यह भारत में पंजाब , मैसूर , बंगाल एवं भारत के उत्तर - पश्चिम क्षेत्र में बहुतायत मात्र में पाया जाता है । इसे संस्कृत में अश्वकर्णबीज , वश्वगल ।बंगाली में इसबगुल , गुजराती में - ऊधमी जीरु । हिंदी में - ईसबगोल एवं लैटिन में प्लैन्टेगो ओवेटा कहते है 

          इसका पौधा डंठल रहित , छोटा रोमयुक्त तथा 2 से 3 फुट लम्बा होता है ।इसकी पत्तियां लगभग आधा इंच चौड़ा एवं 4 से 6 इंच तक लम्बा होता है । इसकी टहनियों से गेहूं के बाल की बाली जैसी फूलो की लम्बी फर निकलते है ।इसके फलो की मंजरियाँ गुच्छेदार होती है और इसमें झिल्लियुक्त , चिकने , पिलाभ भूरे बिज होते है । इन बीजो को कूटकर इसके ऊपर के झिल्ली से अलग कर ईसबगोल की भूसी तैयार की जाती है

          ईसबगोल की भूसी के अनेको फायदे है ।यह ग्राही , मूत्रल , शीतलता , वायु - कारक , कब्ज नाशक , मधुर एवं पौष्टिक होता है ।यह दाह , कब्ज , आंत रोगों तथा घाव आदि रोगों का नाशक होता है ।आमाशय और आंतो को बल देता है । शरीर में शीतलता प्रदान करता है । पर इसका ज्यादा दिनों तक सेवन से शरीर में दर्द मासपेशियों में दुर्बलता आदि विकार पैदा होती है । इसलिये इसका ज्यादा दिनों तक सेवन नही करनी चाहिए ।

          इसबगोल अनेका अनेक बीमारियो की एक औषिधि यह कब्ज, दस्त, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, बवासीर, गाल ब्लैडर की पत्थरी, अल्सर, एल. डी. एल. कोलेस्ट्रोल, वजन नियंत्रण में, डाईवेर्टिकुलर डिसीज़ के लिए रामबाण औषिधि हैं

          ईसबगोल के फायदे,Health Benefits of Plantago Ovata in Hindi,

          • इसबगोल एक स्वादिष्ट एवं महक रहित आयुर्वेदीय औषिधि हैं। प्लेनटेगो आवेटा तथा प्लेंटेगो सिलियम नामक पौधे के लाल भूरे एवं काले बीजो से इसबगोल प्राप्त होता हैं। इसबगोल का बीज तथा बीज का छिलका (भूसी या हस्क) औषिधीय कार्यो में बेहद उपयोगी हैं
          • इसबगोल पाचन संस्थानों के विकारो के लिए महान औषिधि हैं। यह बवासीर में होने वाले दर्द को कम करती हैं। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण यह शरीर में होने वाली जलन को भी शांत कर देती हैं। यह कब्ज को दूर करती हैं, 
          • गाल ब्लैडर की पत्थरी बनने से रोकती हैं। इसबगोल में जो चिकनाई पायी जाती हैं, उसके कारण ये अन्न नलिका की रुक्षता दूर करती हैं। 
          • इसमें पाये जाने वाले लुआब के कारण यह आंतो की गति को बढाकर, मल को बाहर निकालने में सहायक होती हैं। इसके अलावा यह जीवाणुओ की वृद्धि को रोकती हैं, जीवाणुओ से पैदा हुए विषो का अवशोषण करती हैं
          • अल्सर में लाभदायक आंतो में जब अल्सर पैदा हो जाते हैं तो उस अवस्था में जब इसका सेवन किया जाता हैं तो यह अल्सर के ऊपर एक आवरण बना देती हैं, जिसके कारण अल्सर पर सेवन किये गए मिर्च मसालों का बुरा असर नहीं पड़ पाता। इसबगोल का भुना बीज दस्तो को रोकता हैं।
          • इसबगोल फाइबर का सस्ता स्त्रोत हैं। इसके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रोल कम हो जाता हैं। इसबगोल पाचन संस्थान में कोलेस्ट्रोल बहुल बाइल अर्थात पित्त को काफी हद तक सोखने की क्षमता रखता हैं। अर्थात एल डी एल कोलेस्ट्रोल को भी कंट्रोल करता हैं।
          • वजन नियंत्रण में  यह वजन नियंत्रण करने का भी कार्य करता हैं। जब यह पेट में पहुँचता हैं तो जल का अवशोषण करते हुए पेट को भर देती हैं, 
          • जिससे व्यक्ति को भूख ना लगने का सुखद अहसास होता हैं। एक ब्रिटिश अनुसंधान के अनुसार भोजन के तीन घंटो पूर्व जिन महिलाओ ने इसबगोल का सेवन किया उनके शरीर ने आहार से वसा का कम अवशोषण किया।
          • डाईवेर्टिकुलर डिसीज़, कब्ज, दस्त, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, पाइल्स। डाईवेर्टिकुलर डिसीज़, जिसमे आंतो में बनी हुयी छोटी छोटी पॉकेट्स में मल इकट्ठा होता रहता हैं, फल स्वरुप संक्रमण होने की आशंकाए पैदा हो जाती हैं, ऐसी विकट परिस्थिति में इसबगोल आंतो से मल को बाहर कर देता हैं। विविध मल त्याग सम्बन्धी विकार जैसे कब्ज, दस्त, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, पाइल्स के लिए तो यह रामबाण औषिधि हैं। 
          • इन परिस्थितियों में तो सबसे पहले यह जल का अवशोषण करती हैं। मल को बांधती हैं तथा सुगमता पूर्वक मल त्याग कराती हैं। ढीले मल से जलीयांश को अवशोषित करने की विशिष्ट क्षमता के कारण ही ये दस्तो के उपचार में प्रभावी हैं।
          • ईसबगोल के इस्तेमाल का तरीका - ईसबगोल की भूसी का असर होने में 10-12 घंटे लग जाते हैं, इसलिए शाम को छह बजे के करीब लेंगे तो सुबह समय से मोशन हो सकेगा। जब कब्ज ठीक हो जाए, तो यह प्रयोग बंद कर दें। 
          • आधे ग्लास पानी में एक चम्मच 5 मिनट तक भिगो कर पी लें और इस के बाद एक ग्लास पानी और पी लें। इसे खाने के 1 घंटे बाद लेना बेहतर है। वजन घटाने के लिए दिन में 3 बार खाने से आधा घंटा पहले लेना उचित है। दमा की शिकायत में सुबह-शाम दो-दो चम्मच ईसबगोल की भूसी गर्म पानी के साथ लेने से यह शिकायत दूर हो जाती है। 
          • ईसबगोल के बीजों को लेना हो तो इन्हें पीसना नहीं चाहिए। ईसबगोल के बीज शांतिदायक और शीतल होते हैं। इनसे पेट की अनावश्यक गर्मी दूर होती है।
          • अनैच्छिक वीर्यपात :- दिन में दो बार दो चम्मच ईसबगोल की भूसी शिंदे पानी से ले इसे अनैच्छिक वीर्यपतन की शिकायत दूर हो जाती है । 
          • स्त्रियों में रक्तस्राव :- मट्ठे के या ठंडा पानी के साथ दो चम्मच ईसबगोल की भूसी से स्त्रियों में रक्त प्रदर मूत्राशय से खून आना धीरे धीरे समाप्त हो जाता है । इसे प्रतिदिन सुबह शाम ले 

          Monday, November 21, 2016

          बड़ी या काली इलायची, Health Benefits of Black Cardamom In Hindi,

          बड़ी या काली इलायची खाने के बड़े ही फायदे हैं। भारत में हज़ारो सालो से इलायची का उपयोग मसालो के रूप में किया जा रहा हैं. इलायची 2 तरह की होती हैं बड़ी और छोटी. छोटी इलायची मीठे पकवानो का स्वाद बढ़ाने का काम करती हैं. वही बड़ी इलायची नमकीन पकवानो के स्वाद को दुगुना करती हैं। बड़ी इलायची को काली इलायची, भूरी इलायची, लाल इलायची , Black Cardamom, लाल इलायची, नेपाली इलायची या बंगाली इलायची भी कहते हैं, इस के बहुत ही ज़्यादा फायदे हैं. इसके बीजो से कपूर जैसी सुगंध आती हैं।

          बड़ी इलायची का वनस्पतिक नाम "Amomum subulatum” और “Amomum costatum” हैं. आयुर्वेद और यूनानी उपचार में इसके बीजो के लगभग वे ही गुण बताए गये हैं, जो छोटी इलायची में होते हैं। बड़ी इलायची छोटी इलायची से थोड़ी कम स्वादिष्ट होती हैं। यह आमतौर पर नमकीनी पकवानो में उपयोग की जाती हैं। भारत में यह सबसे ज़्यादा पैदा होती हैं। बड़ी इलायची खास करके के साउथ इंडिया में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में ज़्यादा उगाई जाती हैं। भारत में पैदा की जाने वाली यह बड़ी इलायची सिर्फ़ एक मसाला भर नही हैं, बल्कि यह एक बढ़िया औषधि भी हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसे मसालो की रानी भी कहा जाता हैं।

          बड़ी इलायची के फायदे  Amazing Benefits of Black Cardamom

          • बड़ी इलायची खाने से आपको कभी सांस की बीमारी नहीं होगी। अगर आपको अस्थमा, लंग में कोई भी इंफेक्शन है तो बड़ी इलायची का सेवन करने से ठीक हो सकती है। सर्दी खासी में भी इसको खाने से आप फिट हमेशा रहेंगे।
          •  बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर छालों पर लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं।
          • यदि दांत में दर्द हो रहा हो तो बड़ी इलायची और लौंग के तेल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर पीड़ायुक्त दांत पर लगाएं ,दर्द में शांति मिलेगी।
          • यदि अधिक थूक या लार आती हो तो बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर-बराबर पीसकर, 1-2 ग्राम की मात्रा में लेकर चूसते रहने से यह कष्ट दूर हो जाता है।
          • पांच से दस बूँद बड़ी इलायची तेल में मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से दमा में लाभ होता है।
          • दो ग्राम सौंफ के साथ बड़ी इलायची के 8-10 बीजों का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
          • एक ग्राम बड़ी इलायची बीज चूर्ण को दस ग्राम बेलगिरी के साथ मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है।
          • पिसी हुई राई के साथ बड़ी इलायची चूर्ण मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करने से लीवर सम्बंधित रोगों में लाभ होता है।
          • एक से दो बड़ी इलायची के चूर्ण को दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से शरीर का दर्द ठीक होता है।
          • आपके बॉडी से खराब और जहरीली चीजों को निकाल बाहर करने में मदद करता है यह बड़ी इलायची। बॉडी में यूं तो कई बार कुछ पदार्थ जमा हो जाते हैं जिससे निकाल बाहर करना बहुत जरूरी हो जाता है। ऐसे में बड़ी इलायची बहुत उपयोगी होता है।
          • अक्सर कुछ लोगों के मुंह से बदबू आने की शिकायत रहती है। उन्हें इस समस्या में बड़ी इलायची को चबाना चहिए। यह ना सिर्फ मुंह के बदबू या यूं कहें गंदी स्मेल को दूर करने का काम करती है बल्कि मुंह के अंदर होने वाली कोई भी इनफेक्शन या घावो को ठीक भी करने का काम करती है।
          • क्या आपको हमेशा सिर में दर्द होने की शिकायत रहती है. तो ऐसे में आप बड़ी इलायची के ऑइल से अपने सिर का मसाज करिए और असर दिखेगा। आपके सिर का दर्द जल्दी ही ठीक हो जाएगा।
          • बड़ी इलायची से केंसर जैसी बड़ी बीमारियां भी दूर रहती है। बड़ी इलायची सिर्फ नाम में ही बड़ी नहीं बल्कि इसके गुण भी बड़े-बड़े हैं। बड़ी इलायची को खाना शुरू कर दें ताकि आप खमेशा हेल्दी और खुश रहें।
          • पाचन दुरुस्त करती हैं : बड़ी इलायची का सेवन Gastrointestinal system के लिए खास करके फायदेमंद होता हैं. इसका शरीर के हाज़मे पर बहुत ही अच्छा असर होता हैं. इसके सेवन से एसिडिटी की समस्या से छुटकारा मिलता हैं. इसके नियमित सेवन से गैस्ट्रिक अल्सर और दूसरी पाचन संबंधी बीमारियो का ख़तरा काफ़ी कम हो जाता हैं।
          • फेफड़े से रिलेटेड बीमारियो में लाभदायक : बड़ी इलायची दमा के रोगियो और साँस संबंधित बीमारियो से जूझ रहे लोगो के लिए खास करके के फायदेमंद हैं. इसके नियमित सेवन से अस्थमा, कुकुर खाँसी, फेफड़े का सिकूड़ना, फेफड़े की सूजन और तपेदिक (टीबी) आदि रोगो से छुटकारा पाया जा सकता हैं।
          • गुर्दे की बीमारी दूर करता हैं : बड़ी इलायची को यूरिनरी हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता हैं. यह एक बेहतरीन डाइयुरेटिक भी हैं. इसके सेवन से ना सिर्फ़ यूरिनेशन सही रहता हैं, बल्कि किडनी से रिलेटेड बीमारिया भी दूर रहती हैं।
          • एंटी-ऑक्सिडेंट्स से भरपूर : बड़ी एलाईच एंटी-ऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता हैं. इसमे दो तरह के एंटी-ऑक्सिडेंट्स होते हैं, लेकिन खास तौर पर एंटी-कैंसर एंटी-ऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं. यह ब्रेस्ट, कोलन और ओवेरियन कैंसर को रोकता हैं. इससे कैंसर सेल का निर्माण और विकास रुक जाता हैं।
          • बालों को मजबूत बनाता हैं : बड़ी इलायची के सेवन से बाल काले, घने और मजबूत बन जाते हैं. इसमे मौज़ूद तत्वो के कारण बालो को पोषण मिलता हैं. बड़ी इलायची बालो को मजबूत बनाती हैं।
          • ज़हरीले तत्वो को बाहर निकालता हैं : बड़ी इलायची एक बेहतरीन डेटोक्स का भी काम करती हैं. यह शरीर से विषैले (ज़हरीले) तत्वो को बाहर निकाल कर शरीर को सेहतमंद बनाती हैं।
          • स्किन को ग्लोयिंग बनाता हैं : बड़ी इलायची के नियमित सेवन से स्किन चमकने लगती हैं. स्किन एलर्जी की समस्या में बड़ी इलायची अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण नेचुरल रेमेडी की तरह काम करती हैं।
          • दर्द में रामबाण : बड़ी इलायची में दर्द को दूर करने की अनोखी क्षमता पाई जाती हैं. विशेषकर, सिरदर्द में तो यह रामबाण की तरह काम करती हैं. इससे तैयार किए जाने वाले खुसबूदार तेल का इस्तेमाल करने से सिरदर्द, टेंशन और थकान जैसी समस्याएँ दूर हो जाती हैं।
          • रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं : बड़ी इलायची में एंटी-सेपटिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. इसमे 14 तरह के बैक्टीरिया को ख़त्म करने की शक्ति होती हैं. इसे खाने से बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन से बचाव होता हैं।
          • ब्लड प्रेशर के रोगियो के लिए फायदेमंद : बड़ी इलायची दिल के मरीज़ो के लिए काफ़ी फायदेमंद हैं. इससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता हैं. अगर आप नियमित रूप से बड़ी इलायची का सेवन करेंगे तो आपका दिल हेल्दी रहेगा. यह खून के जमने की संभावना को भी काफ़ी हद तक कम कर देता हैं।
          • खून के प्रवाह को बेहतर बनाता हैं : बड़ी इलायची में विटामिन सी और ज़रूरी खनीज़ भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके नियमित सेवन से रक्त का प्रवाह बेहतर होता हैं और शरीर सेहतमंद बना रहता हैं।
          • दांतो की समस्या में रामबाण : बड़ी इलायची के सेवन से दांतो और मसूड़ो के इन्फेक्शन से छुटकारा पाया जा सकता हैं. साथ ही सांसो की बदबू भी दूर होती हैं।
          • बड़ी इलायची को पीसकर मस्तिष्क पर लेप करने से एवं बीजों को पीसकर सूंघने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

          Friday, November 11, 2016

          बरगद के औषधीय गुण,बरगद के फायदे,Health Benefits of Banyan Tree Fruit in Hindi,


          प्रकृति का एक वरदान है 'बरगद' ये कभी नष्ट नहीं होता है बरगद का वृक्ष घना एवं फैला हुआ होता है इसकी शाखाओं से जड़ें निकलकर हवा में लटकती हैं तथा बढ़ते हुए जमीन के अंदर घुस जाती हैं एवं स्तंभ बन जाती हैंबरगद को अक्षय वट भी कहा जाता है-बरगद(Banyan) के वृक्ष की शाखाएं और जड़ें एक बड़े हिस्से में एक नए पेड़ के समान लगने लगती हैं
          • यदि आप नियमित सूर्योदय से पहले बरगद़ के पत्ते तोड़कर टपकने वाले दूध को एक बताशे में 3-4 बूंद टपकाकर खा लें-एक बार में ऐसा प्रयोग 2-3 बताशे खाकर पूरा करें- हर हफ्ते 2-2 बूंद की मात्रा बढ़ाते हुए 5-6 हफ्ते तक यह प्रयोग जारी रखें- इसके नियमित सेवन से शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, प्रमेह, खूनी बवासीर, रक्त प्रदर आदि रोग ठीक हो जाते हैं और यह प्रयोग बलवीर्य वृद्धि के लिए भी बहुत लाभकारी है
          • बताशे में बरगद के दूध की 5-10 बूंदे डालकर रोजाना सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है- बरगद के पके फल को छाया में सुखाकर पीसकर चूर्ण बना लें- इस चूर्ण को बराबर मात्रा की मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें- इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट और सोने से पहले एक कप दूध से नियमित रूप से सेवन करते रहने से कुछ हफ्तों में यौन शक्ति में बहुत लाभ मिलता है
          • 3-3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोंपले (मुलायम पत्तियां) और गूलर के पेड़ की छाल और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर लुगदी सी बना लें फिर इसे तीन बार मुंह में रखकर चबा लें और ऊपर से 250 ग्राम दूध पी लें- 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से खत्म हुई शक्ति लौट आती है
          • बरगद के दूध की पहले दिन 1 बूंद 1 बतासे डालकर खायें, दूसरे दिन 2 बतासों पर 2 बूंदे, तीसरे दिन 3 बतासों पर 3 बूंद ऐसे 21 दिनों तक बढ़ाते हुए इसी तरह घटाना शुरू करें- इससे प्रमेह और स्वप्न दोष दूर होकर वीर्य बढ़ने लगता है
          • बरगद के फल छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें- गाय के दूध के साथ यह 1 चम्मच चूर्ण खाने से वीर्य गाढ़ा व बलवान बनता है
          • 25 ग्राम बरगद की कोपलें (मुलायम पत्तियां) लेकर 250 मिलीलीटर पानी में पकायें- जब एक चौथाई पानी बचे तो इसे छानकर आधा किलो दूध में डालकर पकायें- इसमें 6 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 6 ग्राम चीनी मिलाकर सिर्फ 7 दिन तक पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है
          • बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से वीर्य के शुक्राणु बढ़ते है
          • बरगद की जटा के साथ अर्जुन की छाल, हरड़, लोध्र व हल्दी को समान मात्रा में लेकर पानी में पीसकर लेप लगाने से उपदंश के घाव भर जाते हैं
          • बरगद का दूध उपदंश के फोड़े पर लगा देने से वह बैठ जाती है- बड़ के पत्तों की भस्म (राख) को पान में डालकर खाने से उपदंश रोग में लाभ होता है
          • बरगद के पत्तों से बना काढ़ा 50 मिलीलीटर की मात्रा में 2-3 बार सेवन करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है- यह काढ़ा सिर के भारीपन, नजला, जुकाम आदि में भी फायदा करता है
          • बरगद की जटाओं के बारीक रेशों को पीसकर बने लेप को रोजाना सोते समय स्तनों पर मालिश करके लगाते रहने से कुछ हफ्तों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है
          • बरगद की जटा के बारीक अग्रभाग के पीले व लाल तन्तुओं को पीसकर लेप करने से स्तनों के ढीलेपन में फायदा होता है
          • 4 ग्राम बरगद की छाया में सुखाई हुई छाल के चूर्ण को दूध की लस्सी के साथ खाने से गर्भपात नहीं होता है
          • बरगद की छाल के काढ़े में 3 से 5 ग्राम लोध्र की लुगदी और थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से गर्भपात में जल्द ही लाभ होता है
          • योनि से रक्त का स्राव यदि अधिक हो तो बरगद की छाल के काढ़ा में छोटे कपड़े को भिगोकर योनि में रखें- इन दोनों प्रयोग से श्वेत प्रदर में भी फायदा होता है
          • बरगद की कोपलों के रस में फोया भिगोकर योनि में रोज 1 से 15 दिन तक रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर योनि टाईट हो जाती है
          •  पुष्य नक्षत्र और शुक्ल पक्ष में लाये हुए बरगद की कोपलों का चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में मासिक-स्राव काल में प्रात: पानी के साथ 4-6 दिन खाने से स्त्री अवश्य गर्भधारण करती है या बरगद की कोंपलों को पीसकर बेर के जितनी 21 गोलियां बनाकर 3 गोली रोज घी के साथ खाने से भी गर्भधारण करने में आसानी होती है

          Monday, June 06, 2016

          जानिये अलसी के आश्चर्यजनक फायदे,Flaxseed Benefits in Hindi,अलसी खाने के फायदे

          अगर आप स्वयं को निरोग और चुस्तदुरुस्त रखना चाहते हैं, तो रोज कम से कम एक दो चम्मच अलसी को अपने आहार में शामिल करिए। डायबिटीज के नियंत्रण हेतु आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक व दैविक भोजन अलसी को “अमृत“ तुल्य माना गया है।
            • हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये
            • डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें। कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं।
            • दूसरा एक तरीका है कि आप अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये. भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है .लेकिन आप इसे जादा मात्रा में बना के न रक्खे क्युकि ये खराब हो जाती है .
            • एक हफ्ते के लिए बनाना ही चाहिए .अलसी आपको अनाज बेचने वाले तथा पंसारी या आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वालो के यहाँ से मिल जायेगी . अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है। यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।
            • इसकी बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है।
            • यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है।
            • अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है।
            • अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।
            • अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।
            • पथरी, सुजाक एवं पेशाब की जलन में अलसी का फांट पीने से रोग में लाभ मिलता है। अलसी के कोल्हू से दबाकर निकाले गए (कोल्ड प्रोसेस्ड) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें। स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा।
            • इसी कार्य के लिए इसके बीजों का ताजा चूर्ण भी दस-दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रयोग में लिया जा सकता है। यह नाश्ते के साथ लें।
            • बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।
            • अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। तीन घंटे बाद छानकर पीएं। इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा। मूत्र भी खुलकर आने लगेगा।
            • इसकी पुल्टिस हल्की गर्म कर फोड़ा, गांठ, गठिया, संधिवात, सूजन आदि में लाभ मिलता है।
            • डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में (जहां अलसी और गैहूं बराबर मात्रा में हो)
            • अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है।
            • कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी। कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी। जोड़ की हर तकलीफ का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया उपचार है अलसी। ­­ आर्थ्राइटिस, शियेटिका, ल्युपस, गाउट, ओस्टियोआर्थ्राइटिस आदि का उपचार है अलसी।
            • लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत अलसी ही है जो जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी, फफूंदरोधी और कैंसररोधी है। अलसी शरीर की रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ कर शरीर को बाहरी संक्रमण या आघात से लड़ने में मदद करती हैं और शक्तिशाली एंटी-आक्सीडेंट है।
            • लिगनेन वनस्पति जगत में पाये जाने वाला एक उभरता हुआ सात सितारा पोषक तत्व है जो स्त्री हार्मोन ईस्ट्रोजन का वानस्पतिक प्रतिरूप है और नारी जीवन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे रजस्वला, गर्भावस्था, प्रसव, मातृत्व और रजोनिवृत्ति में विभिन्न हार्मोन्स् का समुचित संतुलन रखता है। लिगनेन मासिकधर्म को नियमित और संतुलित रखता है। लिगनेन रजोनिवृत्ति जनित-कष्ट और अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार है। लिगनेन दुग्धवर्धक है। लिगनेन स्तन, बच्चेदानी, आंत, प्रोस्टेट, त्वचा व अन्य सभी कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू तथा एंलार्ज प्रोस्टेट आदि बीमारियों से बचाव व उपचार करता है।
            • त्वचा, केश और नाखुनों का नवीनीकरण या जीर्णोद्धार करती है अलसी। अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है। त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी। चिर यौवन का स्रोता है अलसी। बालों का काला हो जाना या नये बाल आ जाना जैसे चमत्कार भी कर देती है अलसी। किशोरावस्था में अलसी के सेवन करने से कद बढ़ता है।
            • अलसी एक फीलगुड फूड है, क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है यह आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है। अलसी के सेवन से मनुष्य लालच, ईर्ष्या, द्वेश और अहंकार छोड़ देता है। इच्छाशक्ति, धैर्य, विवेकशीलता बढ़ने लगती है, पूर्वाभास जैसी शक्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इसीलिए अलसी देवताओं का प्रिय भोजन थी। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित भोजन है।
            • अलसी कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और हृदयगति को सही रखती है। रक्त को पतला बनाये रखती है अलसी। रक्तवाहिकाओं को साफ करती रहती है अलसी।
            • अलसी शर्करा ही नियंत्रित नहीं रखती, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करती है। अलसी में रेशे भरपूर 27% पर शर्करा 1.8% यानी नगण्य होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है। अलसी बी.एम.आर. बढ़ाती है, खाने की ललक कम करती है, चर्बी कम करती है, शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है, आलस्य दूर करती है और वजन कम करने में सहायता करती है। चूँकि ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी।
            • आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है और पेट साफ रखने में यह इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी।

              Friday, March 11, 2016

              जायफल के लाभ Health Benefits of Nutmeg in Hindi,

              जायफल गुणकारी औषधि भी है.आयुर्वेद में जायफल को वात एवं कफ नाशक बताया गया है। आमाशय के लिए उत्तेजक होने से आमाशय में पाचक रस बढ़ता है, जिससे भूख लगती है। आंतों में पहुंचकर वहां से गैस हटाता है। ज्यादा मात्रा में यह मादक प्रभाव करता है। इसका प्रभाव मस्तिष्क पर कपूर के समान होता है, जिससे चक्कर आना, प्रलाप आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इससे कई बीमारियों में लाभ मिलता है तथा सौन्दर्य सम्बन्धी कई समस्याओं से भी निजात मिलती है।

              आइये जानते है जायफल गुण-Health Benefits of Nutmeg

                • सुबह-सुबह खाली पेट आधा चम्मच जायफल चाटने से गैस्ट्रिक, सर्दी-खांसी की समस्या नहीं सताती है। पेट में दर्द होने पर चार से पांच बूंद जायफल का तेल चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।
                • सर में बहुत तेज दर्द हो रहा हो तो बस जायफल को पानी में घिस कर लगाएं।
                • सर्दी के मौसम के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जायफल को थोड़ा सा खुरचिये, चुटकी भर कतरन को मुंह में रखकर चूसते रहिये। यह काम आप पूरे जाड़े भर एक या दो दिन के अंतराल पर करते रहिये। यह शरीर की स्वाभाविक गरमी की रक्षा करता है, इसलिए ठंड के मौसम में इसे जरूर प्रयोग करना चाहिए।
                • आपको किन्हीं कारणों से भूख न लग रही हो तो चुटकी भर जायफल की कतरन चूसिये इससे पाचक रसों की वृद्धि होगी और भूख बढ़ेगी, भोजन भी अच्छे तरीके से पचेगा।
                • दस्त आ रहे हों या पेट दर्द कर रहा हो तो जायफल को भून लीजिये और उसके चार हिस्से कर लीजिये एक हिस्सा मरीज को चूस कर खाने को कह दीजिये। सुबह शाम एक-एक हिस्सा खिलाएं।
                • फालिज का प्रकोप जिन अंगों पर हो उन अंगों पर जायफल को पानी में घिसकर रोज लेप करना चाहिए, दो माह तक ऐसा करने से अंगों में जान आ जाने की संभावना देखी गयी है।
                • प्रसव के बाद अगर कमर दर्द नहीं ख़त्म हो रहा है तो जायफल पानी में घिसकर कमर पे सुबह शाम लगाएं, एक सप्ताह में ही दर्द गायब हो जाएगा।
                • फटी एडियों के लिए इसे महीन पीसकर बीवाइयों में भर दीजिये। 12-15 दिन में ही पैर भर जायेंगे।
                • जायफल के चूर्ण को शहद के साथ खाने से ह्रदय मज़बूत होता है। पेट भी ठीक रहता है।
                • अगर कान के पीछे कुछ ऎसी गांठ बन गयी हो जो छूने पर दर्द करती हो तो जायफल को पीस कर वहां लेप कीजिए जब तक गाठ ख़त्म न हो जाए, करते रहिये।
                • अगर हैजे के रोगी को बार-बार प्यास लग रही है, तो जायफल को पानी में घिसकर उसे पिला दीजिये।
                • जी मिचलाने की बीमारी भी जायफल को थोड़ा सा घिस कर पानी में मिला कर पीने से नष्ट हो जाती है।
                • इसे थोडा सा घिसकर काजल की तरह आँख में लगाने से आँखों की ज्योति बढ़ जाती है और आँख की खुजली और धुंधलापन ख़त्म हो जाता है।
                • जायफल आवाज में सम्मोहन भी पैदा करता है।
                • जायफल और काली मिर्च और लाल चन्दन को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है, मुहांसे ख़त्म होते हैं।
                • किसी को अगर बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो उसे जायफल और सफ़ेद मूसली 2-2 ग्राम की मात्र में मिलाकर पानी से निगलवा दीजिये, दिन में एक बार, खाली पेट, 10 दिन लगातार।
                • बच्चों को सर्दी-जुकाम हो जाए तो जायफल का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लीजिये फिर 3 चुटकी इस मिश्रण को गाय के घी में मिलाकर बच्चे को सुबह शाम चटायें।
                • चेहरे पर या फिर त्वचा पर पड़ी झाईयों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप का झाईयों की जगह पर इस्तेमाल करें, इससे आपकी त्वचा में निखार भी आएगा और झाईयों से भी निजात मिलेगी।
                • चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए आप जायफल को पीस कर उसका लेप बनाकर झुर्रियों पर एक महीने तक लगाएंगे तो आपको जल्द ही झुर्रियों से निजात मिलेगी।
                • आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए रात को सोते समय रोजाना जायफल का लेप लगाएं और सूखने पर इसे धो लें। कुछ समय बाद काले घेरे हट जाएंगे।
                • अनिंद्रा का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और इसका त्वचा पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। त्वचा को तरोताजा रखने के लिए भी जायफल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको रोजाना जायफल का लेप अपनी त्वचा पर लगाना होगा। इससे अनिंद्रा की शिकायत भी दूर होगी और त्वचा भी तरोजाता रहेगी।
                • कई बार त्वचा पर कुछ चोट के निशान रह जाते हैं तो कई बार त्वचा पर नील और इसी तरह के घाव पड़ जाते हैं। जायफल में सरसों का तेल मिलाकर मालिश करें। जहां भी आपकी त्वचा पर पुराने निशान हैं रोजाना मालिश से कुछ ही समय में वे हल्के होने लगेंगे। जायफल से मालिश से रक्त का संचार भी होगा और शरीर में चुस्ती-फुर्ती भी बनी रहेगी।
                • जायफल के लेप के बजाय जायफल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
                • दांत में दर्द होने पर जायफल का तेल रुई पर लगाकर दर्द वाले दांत या दाढ़ पर रखें, दर्द तुरंत ठीक हो जाएगा। अगर दांत में कीड़े लगे हैं तो वे भी मर जाएंगे।

                  Sunday, March 06, 2016

                  गुलाब फूल के गुण -Health Benefits of Rose Flower in Hindi,गुलाब के फूल के लाभ,

                  गुलाब के फूल के औषधिय गुण-Health Benefits of Rose Flower,

                  गुलाब एक बहुवर्षीय, झाड़ीदार, कंटीला, पुष्पीय पौधा है जिसमें बहुत सुंदर सुगंधित फूल लगते हैं। इसकी 100 से अधिक जातियां हैं जिनमें से अधिकांश एशियाई मूल की हैं।गुलाब के फूल को कोमलता और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यह सिर्फ खूबसूरत फूल ही नहीं है, बल्कि कई तरह के औषधिय गुणों से भी भरपूर है।इसके फूल में कई रोगों के उपचार की क्षमता है। कुछ ऐसे ही उपयोग हैं गुलाब के फूलों का रस रक्तशोधक होता है। गुलाब में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। अत: विटामिन सी की कमी का पूरा करने के लिये इसका उपयोग किया जाता है।
                  • नींद न आती हो या तनाव रहता हो तो सिर के पास गुलाब रखकर सोएं, अनिद्रा की समस्या दूर हो जाएगी। 
                  • गुलाब के फूल की पंखुड़ियां खाने से मसूढ़े और दांत मजबूत होते हैं। मुंह की बदबू दूर होती है और पायरिया रोग से भी निजात मिल जाती है। 
                  • गुलाब में विटामिन सी बहुत मात्रा में पाया जाता है। गुलकंद रोज खाने से हड्डियां मजबूत हो जाती है। रोजाना एक गुलाब खाने से टी.बी के रोगी को बहुत जल्दी आराम मिलता है। 
                  • गुलाब की पत्तियों को ग्लिसरीन डालकर पीस लें। इस मिश्रण को होंठों पर लगाएं। इससे होंठ गुलाबी और चिकने हो जाते हैं। 
                  •  गुलाब का तेल बुखार को आने से भी रोकता हैं। गुलाब में मौजूद एंटी इंफ्मेंटेरी तत्‍व सूक्ष्म जीवाणु संक्रमण के कारण सूजन, रसायन, अपच और निर्जलीकरण को कम करने में मदद करता हैं।
                  • गुलाब जल का प्रयोग एक हर्बल चाय के रूप में भी किया जा सकता हैं। 
                  • यह पेट के रोगों और मूत्राशय में होने वाले संक्रमण को दूर करने के काम आती हैं । और साथ ही गर्मी के दिनों में गुलाब को पीस कर उसका लेप बना कर माथे पर लगाने से सिर दर्द भी ठीक हो जाता हैं ।
                  • गुलाब के तेल में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घावों को जल्दी भरने में मदद करते हैं । घाव पर गुलाब का तेल लगाने से संक्रमण भी नहीं फैलता हैं ।
                  • गुलाब के फूल में विटामिन ए, बी 3, सी, डी और ई से भरपूर होता हैं । इसमें उच्‍च मात्रा में  विटामिन सी होने के कारण डायरिया के इलाज के लिए इसका प्रयोग किया जाता हैं। गुलाब के फल में फ्लवोनोइड्स, बायोफ्लवोनोइड्स, सिट्रिक एसिड, फ्रुक्टोज, मैलिक एसिड, टैनिन और जिंक भी होता हैं।
                  • गुलाब जल में बालों की देखभाल के प्रभावी गुण होते हैं। इसे बालों में लगाने से बालों की जड़ों में ब्लड के सर्कुलेशन में सुधार होता हैं। जिससे बालों के विकास में मदद मिलती हैं। इसके अलावा यह बालों को मजबूत और लचीला बनाने के लिए एक कंडीशनर का भी काम करता हैं ।
                  • त्वचा के लिए गुलाब जल बहुत लाभदायक होता हैं । गुलाब जल के प्रयोग का सबसे बड़ा फायदा यह हैं कि गुलाब जल एक  प्राकृतिक एस्ट्रिंजेंट होने से यह एक सर्वश्रेष्‍ठ टोनर भी हैं । 
                  • रोज रात को सोने से पहले इसे लगाने से त्वचा टाइट होती हैं, यह त्वचा के पीएच संतुलन को बनाएं रखता हैं और मुंहासों को दूर करने में भी मदद करता हैं ।
                  • गुलाब से बने गुलकंद में गुलाब का अर्क होता है। जो शरीर को ठंडक पहुंचाता है। यह शरीर को डीहाइड्रेशन से बचाता है और तरोताजा रखता है। पेट को भी ठंडक पहुंचाता है। गुलकंद स्फूर्ति देने वाला एक शीतल टॉनिक है, जो थकान, आलस्य, मांसपेशियों के दर्द और जलन आदि समस्याओं को दूर करता है। 
                  • अर्जुन की छाल और देसी गुलाब मिलाकर पानी में उबाल लें। यह काढ़ा पीने से दिल से जुड़ी बीमारियां खत्म होती हैं। दिल की धड़कन बढ़ रही हो तो सूखी पंखुड़ियां उबालकर पिएं। 
                  • आंतों में घाव हों तो 100 ग्राम मुलेटी ,50 ग्राम सौंफ ,50 ग्राम गुलाब की सूखी हुई पंखुड़ियां तीनों को मिलाकर पीस लें। रोजाना इस चूर्ण को दस ग्राम की मात्रा में लें। 
                  • गुलकंद में विटामिन सी, ई और बी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। भोजन के बाद गुलकंद खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं। 
                  • गुलकंद में अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। त्वचा के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण हैं, जो त्वचा की समस्याएं मिटाते हैं।
                  • छोटी-छोटी फुंसियां हो रही हों तो गुलकंद का सेवन करें, फुंसियां खत्म हो जाएंगी। बच्चों के पेट में कीड़े होने पर बाइविडिंग का चूर्ण गुलकंद में मिलाकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम 15 दिनों तक लें। पेट के कीड़े खत्म हो जाएंगे। 
                  • आंखों में गर्मी के कारण जलन हो या धूल मिट्टी से आंखों में तकलीफ हो तो गुलाबजल से आंखें धोने पर आराम मिलता है। रतौंधी नामक आंखों के रोग के लिए गुलाब जल अचूक दवा का काम करता है। 
                  • गुलाब की पंखुडियां को सूखाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को चेचक के रोगी के बिस्तर पर डालने से उसे ठंडक और आराम मिलता है। 
                  • गुलाब को पीस कर लेप बनाकर सिर पर लगाने से सिर दर्द थोड़ी देर में गायब हो जाता है। 
                  • भोजन के बाद पान में गुलकंद डलवाकर खाना चाहिए। इससे सांस की दुर्गंध दूर हो जाती है और खाना भी हजम हो जाता है।
                  •  गुलाब की पत्तियों के रस की कुछ बूंदें कान में डालने से कर्णशूल में राहत मिलती है।
                  • गुलाब के अर्क में चंदन का तेल मिलाकर मालिश करने से शीत पित्त में लाभ होता है।
                  • गुलाब के फूल, लौंग, अकरकरा और शीतल चीनी को पीसकर गुलाब जल के साथ गोलियां बनाकर चूसने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है।
                  • प्रात:काल गुलकंद खाने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।
                  • टीबी से आई शारीरिक कमजोरी में गुलकंद का सेवन करने से लाभ होता है।
                  • हाथ-पैर या पूरे शरीर में जलन होने पर चंदन में गुलाबजल मिलाकर लेप करें।
                  • गुलकंद को सनाय की पत्ती के साथ सेवन करने से कब्ज दूर होता है।
                  • एक कप गुलाब जल, चौथाई कप चूने का पानी, चौथाई कप संतरे का रस मिलाकर दिन में दो बार पीने से सीने में जलन, गले में जलन, जी मिचलाना आदि रोग नष्ट होते हैं।
                  • जलन या बहुत ज्यादा गर्मी हो तो गुलाब की पंखुड़ी 10 ग्राम, इलायची 5, काली मिर्च 5 तथा मिश्री 10 ग्राम पीसकर हर चार घंटे पर पिलाएं।
                  • दाद पर गुलाब के अर्क में नींबू का रस मिलाकर लेप करें।
                  • लू लगने पर गुलाबजल, पानी में मिलाकर माथे पर पट्टी रखें।
                  • भोजन के बाद गुलकंद खाने से हाजमा ठीक होता है।
                  • आधा सीसी के दर्द में एक ग्राम असली नौसादर को 12 ग्राम गुलाबजल में मिलाकर हिला लें। नाक में चार-पांच बूंद दवा की टपकाकर नाक के अंदर खींच लें। कुछ ही देर में सिरदर्द में आराम होगा

                  Saturday, February 20, 2016

                  केसर के गुण -Health Benefits Of Saffron (Kesar) in Hindi

                  केसर एक सुगंध देने वाला पौधा। पतली बाली सरीखा केसर 15-25 सेंटीमीटर ऊंचा होता है। इसके पुष्प को हिन्दी में केसर, उर्दू में जाफरान और अंग्रेजी में सैफरॉन कहते हैं। चिकित्सा में यह उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ नाशक मानी गयी है। केसर को ना जाने कितने ही रोगों की मुक्ति के लिए एक औषधि के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिससे ये मनुष्य जीवन में एक विशेष स्थान रखता है. केसर से मनुष्य अपनी छोटी से लेकर बड़ी, मानसिक से लेकर शारीरिक हर तरह की बिमारी से निजात पा सकता है. इसीलिए इसे आयुर्वेद की सबसे अहम बूटी भी माना जाता है.

                  Health Benefits Of Saffron,

                  • उत्तेजक, वाजीकारक-यह उत्तेजक, वाजीकारक, यौनशक्ति वर्धक, त्रिदोष नाशक, वातशूल शमन करने वाली है। इतना ही नहीं, यह मासिक धर्म ठीक करने वाली, त्वचा को निखारने वाली, रक्तशोधक, प्रदर और निम्न रक्तचाप को ठीक करने वाली भी है। कफ का नाश करने, मन को प्रसन्न रखने, मस्तिष्क को बल देने वाली, हृदय और रक्त के लिए हितकारी भी है।
                  • मासिक धर्म-महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के लिए 2-2 रत्ती केसर दूध में घोलकर दिन में तीन बार देना फायदेमंद होता है। बच्चों को सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर केसर की एक पंखु़डी पानी में घोंटकर इसका लेप छाती, पीठ और गले पर लगाने से आराम होता है। चंदन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, आंख और मस्तिष्क को शीतलता, शांति और ऊर्जा मिलती है।
                  • नाक से रक्त का गिरना-इससे नाक से रक्त का गिरना बंद हो जाता है और सिर दर्द जल्द दूर होता है। बच्चे को सर्दी हो तो केसर की 1-2 पंखु़डी 2-4 बूंद दूध के साथ अच्छी तरह घोंटें ताकि केसर दूध में घुल जाए। इसे एक चम्मच दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह-शाम पिलाएं। इससे उसे काफी लाभ होगा। माथे, नाक, छाती व पीठ पर लगाने के लिए केसर, जायफल व लौंग का लेप पानी में बनाएं और रात को सोते समय इसका लेप करें।
                  • पौरूष वर्धक के लिये-केसर दूध पौरूष व कांतिवर्धक होता है। ज़ाडे में गर्म व गर्मी में ठंडे दूध के साथ केसर का उपयोग स्वास्थ्यवर्धक होता है।गर्भावस्था के दौरान केसर का सेवन करने से होने वाला बच्चा तंदुरूस्त होता है और कई तरह की बीमारियों से बचा रहता है।आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार नियमित रूप से, अल्प मात्रा में ग्रहण करने पर यह त्रि-दोषों (वात, पित्त व कफ) से निजात दिलाता है।इसका स्वभाव गर्म होता है। अत: औषधि के रूप में 250 मिलिग्राम व खाद्य के रूप में 100 मिलिग्राम से अधिक मात्रा में इसके सेवन की सलाह नहीं दी जाती।
                  • कामशक्ति बढ़ाने के लिये-यह एक कामशक्ति बढ़ाने वाला रसायन है। अत: इसका उपयोग बाजीकरण के लिए भी किया जाता है।
                  • हिस्टीरिया रोग -केसर, वच और पीपलामूल 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लेने से हिस्टीरिया रोग ठीक होता है।
                  • महिलाओं की कुछ बीमारियों-महिलाओं की कुछ बीमारियों में यह रामबाण साबित होता है। बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय की सफाई के लिए कुछ दिनों तक इसका नियमित सेवन करना बहुत अच्छा रहता है। माहवारी के दौरान दर्द, अनियमितता व गड़बड़ी से निजात के लिए यह एक अच्छी औषधि है। 
                  • त्रिदोष नाशक, रुचिकर, मासिक धर्म साफ लाने वाली, गर्भाशय व योनि संकोचन जैसे रोगों को भी दूर करती है। केसर और नागकेसर 4-4 ग्राम की मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और मासिकधर्म शुरू होने के तुरंत बाद खाएं। इससे गर्भधारण होता है।
                  • गजकेसर की जड़, पीपल की दाढ़ी और शिवलिंगी के बीज 6-6 ग्राम की मात्रा में कूट-छान लें और इसमें 18 ग्राम की मात्रा में चीनी मिला लें। यह 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय बछडे़ वाली गाय के 250 मिलीलीटर कच्चे दूध में मिलाकर मासिकधर्म खत्म होने के बाद लगभग एक सप्ताह तक खाएं। इसके सेवन से स्त्रियां गर्भधारण के योग्य बन जाती है।
                  • त्वचा के लिये-त्वचा का रंग उज्ज्वल करने वाली, रक्तशोधक, धातु पौष्टिक, प्रदर और निम्न रक्तचाप को ठीक करने वाली, कफ नाशक, मन को प्रसन्न करने वाली रंगीन और सुगन्धित करने वाली होती है।अगर सर्दी लग गई हो तो रात्रि में एक गिलास दूध में एक चुटकी केसर और एक चम्मच शहद डालकर यदि मरीज को पिलाया जाए तो उसे अच्छी नींद आती है।
                  • शिशुओं के लिये-शिशुओं को अगर सर्दी जकड़ ले और नाक बंद हो जाये तो मां के दूध में केसर मिलाकर उसके माथे और नाक पर मला जाये तो सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है।आधा ग्राम केसर को घी में पीसकर खाने से 1 साल पुरानी कब्ज़ दूर होती है।120 मिलीग्राम केसर को 50 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रात को भिगो दें। सुबह 20-25 किशमिश खाकर इस पानी को पीएं। इसका सेवन 15 दिनों तक करने से हृदय की कमजोरी दूर होती है।
                  • गंजे लोगों के लिये-गंजे लोगों के लिये तो यह संजीवनी बूटी की तरह कारगर है। जिनके बाल बीच से उड़ जाते हैं, उन्हें थोड़ी सी मुलहठी को दूध में पीस लेना चाहिए। तत्पश्चात् उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है। रूसी की समस्या हो या फिर बाल झड़ रहे हो तो भी ये उपाय बेहद कारगर है।

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