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Sunday, January 22, 2023

अर्जुन की छाल के फायदे

अर्जुन की छाल के फायदे

अर्जुन की छाल के फायदे  

हृदय की सभी समस्याओ के लिए एक वरदान।हृदय रोगियों के लिए वरदान। 
अर्जुन वृक्ष भारत में होने वाला एक औषधीय वृक्ष है। इसे घवल, ककुभ तथा नदीसर्ज (नदी नालों के किनारे होने के कारण) भी कहते हैं। कहुआ तथा(सादड़ी नाम से बोलचाल की 

भाषा में प्रख्यात यह वृक्ष एक बड़ा सदाहरित पेड़ है। लगभग 60 से 80 फीट ऊँचा होता है तथा हिमालय की तराई, शुष्क पहाड़ी क्षेत्रों में नालों के किनारे तथा बिहार,मध्य प्रदेश में काफी पाया जाता है। इसकी छाल पेड़ से उतार लेने पर फिर उग आती है। छाल का ही प्रयोग होता हैआयुर्वेद :आयुर्वेद ने तो सदियों 

पहले इसे हृदय रोग की महान औषधि घोषित कर दिया था। आयुर्वेद के प्राचीन विद्वानों में वाग्भट, चक्रदत्त और भावमिश्र ने इसे हृदय रोग की महौषधि स्वीकार किया है। 

अर्जुन की छाल के गुण

  • यह शीतल, हृदय को हितकारी, कसैला और क्षत, क्षय, विष, रुधिर विकार, मेद, प्रमेह, व्रण, कफ तथा पित्त को नष्ट करता है।अभी तक अर्जुन से प्राप्त विभिन्न घटकों के प्रायोगिक जीवों पर जो प्रभाव देखे गए हैं, उससे इसके वर्णित गुणों की पुष्टि ही होती है। विभिन्न प्रयोगों द्वारा पाया गया हे कि अर्जुन से हृदय की पेशियों को बल मिलता है, 
  • स्पन्दन ठीक व सबल होता है तथा उसकी प्रतिमिनट गति भी कम हो जाती है। स्ट्रोक वाल्यूम तथा कार्डियक आउटपुट बढ़तती है। हृदय सशक्त व उत्तजित होता है। इनमें रक्त स्तंभक व प्रतिरक्त स्तंभक दोनों ही गुण हैं। 
  • अधिक रक्तस्राव होने की स्थिति से या कोशिकाओं की रुक्षता के कारण टूटने का खतरा होने परयह  स्तंभक की भूमिका निभाता है, लेकिन हृदय की रक्तवाही नलिकाओं (कोरोनरी धमनियों) में थक्का  नहीं बनने देता तथा बड़ी धमनी से प्रति मिनट भेजे जाने वाले रक्त के आयतन  में वृद्धि करता है। 
  • इस प्रभाव के कारण यह शरीर व्यापी तथा वायु कोषों में जमे पानी को मूत्र मार्ग से बाहर निकाल................... जिस किसी भी ईन्सान की धमनियों में खून के धक्के जमे हुए है..? या इनमे प्लाक जमा हुआ हैं।या किन्ही कारणवश डॉक्टर ने आपको ANGIOPLASTY के लिए कह दिया हैं।
  • या कैसी भी  गंभीर समस्या हैं।तो एक बार ये ज़रूर आज़माये।अर्जुन के पैड की छाल का काढा ”हृदय रोग का इलाज सिर्फ 10या 15 रुपैये में।
  • अर्जुन छाल।हृदय की सभी समस्याओ के लिए एक वरदान।हृदय रोगियों के लिए वरदान।अर्जुन की छाल को 400 ग्राम ले कर 500 मिली पानी में पकाये 200 मिली रहने  पर उतार ले और हर रोज़ सुबह शाम 10-10 मिली ले।इस से खून में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल कम हो जायेगा, खून के धक्के साफ़ हो जायेंगे,और ANGIOPLASTY की नौबत नहीं आएगी। अर्जुन के सेवन से अलसर में भी आशातीत लाभ होता हैं। अर्जुन की चाय भी बना कर पी जा सकती हैं। 
  • साधारण चाय की जगह अर्जुन की कुटी हुई छाल डालिये। और चाय की तरह बना कर पीजिये। अगर आपको अर्जुन के पेड़ न मिले तो अर्जुन छाल आपको रामदेव आयुर्वेद कीदुकानो से मिल जाएगी ये 100 ग्राम 15 रुपैये की आएगी। 
  • अनेको हृदय रोगियों को इस से राहत मिली हैं। अर्जुन की छाल बाजार मे पंसारी की दुकान पर भी मिलती हैैं। अर्जुनकी छाल की काढा को पक्षा घात ( PARALYSIS ) के मरीजों को भी देते हैं जिस से उनको बहुत लाभ होता हैं। varicose veins में भी ये बहुत उपयोगी हैं, अलसर के रोगियों के लिए भी ये बहुत लाभदायक हैं। अर्जुन की छाल और जंगली प्याज के कंदों का चूर्ण समान मात्रा में तैयार कर प्रतिदिन आधा चम्मच दूध के साथ लेने से हृदय रोगों में लाभ मिलता है।
  • यह धारियों युक्त फलों की वजह से आसानी से पहचाना जा सकता है। इसके फल कच्चेपन में हरे और पकने पर भूरे-लाल रंग के होते हैं। हृदय रोगियों के लिए पुनर्नवा का पांचांग (समस्त पौधा) का रस और अर्जुन छाल की समान मात्रा बहुत फायदेमंद होती है। अर्जुन की छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम गुड़, शहद या दूध के साथ दिन में 2 या 3 बार लेने से दिल के मरीजों को काफी फायदा होता है। 
  • अर्जुन की छाल के चूर्ण को चाय के साथ उबालकर पीने से हृदय और उच्च रक्तचाप की समस्याओं में तेजी से आराम मिलता है। चाय बनाते समय एक चम्मच इस चूर्ण को डाल दें तो इससे उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाता है। 
  • अर्जुन की चाय हॄदय विकारों से ग्रस्त रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होती है। अर्जुन की छाल का चूर्ण (1 ग्राम) एक कप पानी में खौलाकर उसमें दूध व चीनी आवश्यकतानुसार मिलाकर पिएं तो फायदा  होताहै। हृदय की सामान्य धड़कन जब 72 से बढ़कर 150 से ऊपर रहने लगे तो एक गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन करने से शीघ्र ही धड़कन सामान्य हो जाती है। 
  • यदि हृदयघात जैसा महसूस हो तो अर्जुन का चूर्ण जुबान पर रख लेने से तेजी से फ़ायदा होता है। इससे हृदयाघात के बुरे असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 
  • अर्जुन छाल का चूर्ण और देसी जामुन के बीजों के चूर्ण की समान मात्रा लेकर मिला लिया जाए और प्रतिदिन रोज रात सोने से पहले आधा चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी में मिलाकर लें। यह नुस्खा डायबिटीज़ के रोगियो के लिए फायदेमंद होता है। अर्जुन के कच्चे ताजे हरे फलों को चबाया जाए तो यह मुख दुर्गन्धनाशक होता है। 
  • दिन में कम से कम 2 बार किया जाना चाहिए। अर्जुन छाल पीसकर शहद के साथ मिलाकर लगाने से झाइयां दूर होती है | हृदय रोगियों के लिए वरदान है अर्जुन की छाल 
  • हृदय रोग, रक्त विकार, कास, पयूमेह, प्रदर, जीर्णज्वर, सामान्य दौर्बल्य। मात्रा ५ से १० ग्राम छाल चूर्ण अर्जुन में चूने के अंश होने से रक्त स्तम्भक है। कैल्शियम तथा कषायीन होने से यह रक्त संग्राहक है। आँतों में यह प्रोटीन के साथ मिलकर एक घन आवरण बनाता है व विषों के प्रभाव से रक्षा करता है। 
  • अर्जुन में हृदय शैथिल्य और उत्तेजक दोनों गुण होने से हृदय रोगों की यह सर्वश्रेष्ठ औषधि है। 
  • वातज हृदय रोग में बलामूल चूर्ण एवं अर्जुन चूर्ण को पिप्पली एवं हरीति की क्वाथ से या मधु के साथ सेवन करने से लाभ होता है।पित्तज हृदय रोग में अर्जुन चूर्ण ३ ग्राम, शतावरी चूर्ण १ ग्राम, मक्खन मिश्री से सेवन करें।कपफज हृदय रोग में इसका चूर्ण पोहकर मूलचूर्ण के साथ सेवन करने से लाभ होता है।त्रिदोषज 
  • हृदय रोग में अर्जुन, मुलहठी, पुष्कर मूल, बलामूल चूर्ण को मधु के साथ सेवन करने से लाभ होता है।दूध के साथ इसकी जड का चूर्ण सेवन करने से टूटी हड्डी जल्दी जुडती है व चोट के कारण निशान, नीले पडे हो तो वह भी जल्दी ठीक होते है।इसकी छाल को दूध में पकाकर सेवन करने से हृदय रोग (समस्त) दूर होते हैं व खून की चर्बी कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है। 
  • इसकी छाल का क्वाथ पीने से मूत्रा को रोकने के कारण हुई उदावर्त्त (गैस का उपर की ओर चढना) मिटती है व मूत्राघात हो तो वह भी दूर होती है।विषैले कीटों के दंश पर इसकी छाल का लेप करने से जलन मिटती है।तिल के तेल में इसका चूर्ण मिलाकर कुल्ले करने से मुखपाक हटता है।इसके पत्तों का रस कान में डालने से कर्णशूल मिटता है।इसका क्वाथ पीने से ज्वर छूटता है।
  • इसके चूर्ण को मधु में मिलाकर लेप करने से मुख की झाइयाँ मिटती है।जल से इसका चूर्ण लेने से पित्त विकार मिटते है।दूध से इसका चूर्ण लेने से रक्त पित्त मिटता है व हृदय को मजबूती मिलती है।उच्च रक्त दाब में इसका चूर्ण दूध से सेवन अत्यधिक लाभप्रद है।इसके एवं मुलहठी चूर्ण को दूध, जल के साथ सेवन करने से हृदय रोग मिटते है। 
  • इसके लिए यह उत्तम रसायन है।गेहूँ एवं अर्जुन चूर्ण को बकरी के दूध एवं गाय के घृत में पकाकर उसमें शहद मिश्री मिलाकर चाटने से अति उग्र हृदय रोग मिटता है।
  • इसके एवं गंगेरण जड की छाल के चूर्ण को दूध से सेवन करने से वायु नाश होती है।अर्जुन चूर्ण एवं श्वेत चंदन चूर्ण का क्वाथ लेने से सभी प्रकार की प्रमेह दूर होती है।
  • अर्जुन चूर्ण एवं श्वेत चंदन क्वाथ सभी प्रकार के प्रदर श्वेत या रक्त दूर होते है।अर्जुन छाल को दूध में पीसकर मधु मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार मिटता है। 
  • अर्जुन छाल एवं गंगेरण समभाग लेकर व आधा भाग एरण्ड बीज चूर्ण प्रतिदिन प्रातः सांयकाल बकरी के दूध में डालकर लगभग ५ ग्राम चूर्ण पकायें। ठण्डा होने पर विषम मात्रा १-३ या ३-१ में घृत मधु मिलाकर पिलाने से क्षय रोग मिटता है।त्वक चूर्ण, अर्जुनत्वक चूर्ण एवं चावलों का चूर्ण सेवन करने से कुष्ठ में लाभ होता है व समस्त प्रकार के त्वचागत रोग मिटते है।
  • भृंगराज एवं अर्जुनक्षार दही के पानी के साथ सेवन करने से संग्रहणी में लाभ होता है।उडद के आटे में अर्जुन छाल चूर्ण मिलाकर घृत में सेंक कर भैंस के दूध् में पकाकर सेवन करने से भस्मक तीक्ष्णाग्नि मिटती है। 
  • २ ग्राम अर्जुन त्वक चूर्ण, २ ग्राम कडुवा इन्द्र जौ चूर्ण मिलाकर शीतल जल से सेवन करने से तीव्र अतिसार मिटता है। 
  • पाण्डु रोग में इसके चूर्ण के साथ स्वर्ण माक्षिक भस्म मिलाकर गोमूत्रा यकपफजन्य मेंद्ध या मिश्रीयुक्त दुग्ध् पित्तजन्य मेंद्ध से किंवा निम्बपत्रा स्वरस आमलकी स्वरस से सेवन अत्यध्कि हितकारी है। 
  • अर्जुन छाल ३ ग्राम, गुलाब जल १५ मिली, द्राक्षरिष्ट या मृ(कासव १५ मिली की मात्रा से प्रतिदिन भोजन के पश्चात यदि गर्भवती स्त्री सेवन करें तो उसे बहुत सुंदर सन्तान की प्राप्ति होती है ।धडकन बढने में 
  • अर्जुनत्वक, सफेद खैरेटी बला मूल, गोखरू, जटामासी एवं अश्वगन्ध समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम २ बार २-२ ग्राम, दूध से सेवन करने पर उत्तम लाभ होता है।टमाटर का रस २५० ग्राम लेकर ३ ग्राम अर्जुन चूर्ण मिलाकर सेवन करने से हृदय की धडकन ठीक स्थिति में आ जाती है।

जीरा के फायदे,Jeera Khane Ke Fayde in Hindi,Health Benefits of Cumin Seeds in Hindi,

जीरा (Jeera) एक ऐसा मसाला है जिसके छौंक से दाल और सब्जियों का स्वाद बहुत बढ़ जाता है। चाट का चटपटा स्वाद भी जीरे के बिना अधूरा सा लगता है। अंग्रेजी में इसे क्यूमिन कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम क्यूमिनम सायमिनम है। यह पियेशी परिवार का एक पुष्पीय पौधा है। मुख्यत: पूर्वी भूमध्य सागर से लेकर भारत तक इसकी पैदावार अधिक होती है।दिखने में सौंफ के आकार का दिखाई देने वाला जीरा सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता यह बहुत उपयोगी भी है। यही कारण है कि कई रोगों में दवा के रूप में भी जीरे का उपयोग किया जा सकता है। जीरा के फायदे

आइए देखते हैं घरेलू नुस्खे के रूप में किन रोगों के उपचार के लिए जीरा उपयोगी है

  • भुने हुए जीरे को सूंघने से जुकाम से छीकें आना बंद हो जाता है। 
  • एक गिलास ताजी छाछ में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर भोजन के साथ लें, इससे अजीर्ण और अपच से छुटकारा मिलेगा। जीरा के फायदे
  • बच्चों को दस्त होने पर बबूल की कोमल पत्ती, अनार की कली व जीरा मिलाकर दें, लाभ होगा। 
  • आंवले को भूनकर गुठली निकालकर पीसकर धीमे भूनें। फिर उसमें स्वादानुसार जीरा, अजवाइन, सेंधा नमक और थोड़ी सी भुनी हुई हींग मिलाकर गोलियां बना लें। इन्हें खाने से भूख बढ़ती है। इतना ही नहीं, इससे डकार, चक्कर और दस्त में लाभ होता है। जीरा के फायदे
  • पानी में जीरा डालकर उबालें और छानकर ठंडा करें। इस पानी से मुंह धोने से आपका चेहरा साफ और चमकदार होता है। जीरा के फायदे
  • जीरा और सेंधा नमक महीन पीसकर मंजन करने से दांतों तथा मसूड़ों के दर्द में आराम मिलेगा और मुंह की दरुगंध नष्ट होगी। 
  • हिस्टीरिया के रोगी को गर्म पानी में भुनी हींग, जीरा, पुदीना, नींबू और नमक मिलाकर पिलाने से रोगी को तत्काल लाभ होता है। 
  • थायराइड (गले की गांठ) में एक कप पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और 
  • जीरा (Jeera) आयरन का सबसे अच्छा स्रोत है। इसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर हो जाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए जीरा अमृत का काम करता है। 
  • जीरा (Jeera) , अजवाइन, सौंठ, कालीमिर्च, और काला नमक अंदाज से लेकर इसमें घी में भूनी हींग कम मात्रा में मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है। पेट का दर्द ठीक हो जाता है। 
  • जीरा (Jeera) , अजवाइन और काला नमक का चूर्ण बनाकर रोजाना एक चम्मच खाने से तेज भूख लगती है। जीरा के फायदे
  • 3 ग्राम जीरा (Jeera) और 125 मि.ग्रा. फिटकरी पोटली में बांधकर गुलाब जल में भिगो दें। आंख में दर्द होने पर या लाल होने पर इस रस को टपकाने से आराम मिलता है। 
  • दही में भुने जीरे का चूर्ण मिलाकर खाने से डायरिया में आराम मिलता है। 
  • जीरे को नींबू के रस में भिगोकर नमक मिलाकर खाने से जी मिचलाना बंद हो जाता है। 
  • जीरा में थोड़ा-सा सिरका डालकर खाने से हिचकी बंद हो जाती है। 
  • जीरे को गुड़ में मिलाकर गोलियां बनाकर खाने से मलेरिया में लाभ होता है। 
  • एक चुटकी कच्चा जीरा खाने से एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती है। 
  • डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए एक छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ लेने से लाभ होता है। जीरा के फायदे
  • कब्जियत की समस्या हो तो जीरा, काली मिर्च, सौंठ और करी पाउडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं।राहत मिलेगी। 
  • पके हुए केले को मैश करके उसमें थोड़ा-सा जीरा मिलाकर रोजाना रात के खाने के बाद लें। अनिद्रा की समस्या दूर हो जाएगी। जीरा के फायदे
  • इसमें एंटीसेप्टिक तत्व भी पाया जाता है। सीने में जमे हुए कफ को बाहर निकलने के लिए जीरे को पीसकर फांक लें। यह सर्दी-जुकाम से भी राहत दिलाता है। 
  • हींग को उबाल लें। इस पानी में जीरा, पुदीना, नींबू और नमक मिलाकर पिलाने से हिस्टीरिया के रोगी को तत्काल लाभ होता है। जीरा के फायदे
  • थायराइड (गले की गांठ) में एक कप पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है। 
  • मेथी, अजवाइन, जीरा और सौंफ 50-50 ग्राम और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर पीस लें। एक चम्मच रोज सुबह सेवन करें। इससे शुगर, जोड़ों के दर्द और पेट के विकारों से आराम मिलेगा। 
  • प्रसूति के पश्चात जीरे के सेवन से गर्भाशय की सफाई हो जाती है। 
  • खुजली की समस्या हो तो जीरे को पानी में उबालकर स्नान करें। राहत मिलेगी। 
  • एक गिलास ताजी छाछ में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर भोजन के साथ लें। इससे अजीर्ण और अपच से छुटकारा मिलेगा। जीरा के फायदे
  • आंवले की गुठली निकालकर पीसकर भून लें। फिर उसमें स्वादानुसार जीरा, अजवाइन, सेंधा नमक और थोड़ी-सी भुनी हुई हींग मिलाकर गोलियां बना लें। इन्हें खाने से भूख बढ़ती है। इतना ही नहीं, इससे डकार, चक्कर और दस्त में लाभ होता है। 
  • जीरा उबाल लें और छानकर ठंडा करें। इस पानी से मुंह धोने से आपका चेहरा साफ और चमकदार होगा। 
  • एक चम्मच जीरा भूनकर रोजाना चबाने से याददाश्त अच्छी रहती है। 
  • जिनको अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या अन्य सांस संबंधी समस्या है, उन्हें जीरे का नियमित प्रयोग किसी भी रूप में करना चाहिए। जीरा के फायदे
  • दक्षिण भारत में लोग अक्सर जीरे का पानी पीते हैं। उनके अनुसार, इसके सेवन से मौसमी बीमारियां नहीं होतीं और पेट भी तंदुरुस्त रहता है। जीरा के फायदे
  • 50 ग्राम जीरे में 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीसकर पाउडर बना लें। इसे सुबह-शाम एक चम्मच सेवन करें। बवासीर में आराम मिलेगा।

बबूल के औषधीय गुण,Health Benefits Acacia Tree in Hindi,Arabic Gum,

इसका पेड़ बहुत ही पुराना है। इसकी छाल एवं गोंद प्रसिद्ध व्यवसायिक द्रव्य होता है। वास्तव में यह एक बबूल रेगिस्तानी प्रदेश का पेड़ है। इसकी पत्तियां बहुत छोटी होती है। इसका पेड़ कांटेदार होता है। यह पूरे भारतवर्ष में लगाए हुए तथा जंगली पाए जाते हैं। ग्रीष्म के मौसम में इस पर पीले रंग के फूल गोलाकार गुच्छों में आते हैं। सर्दियों के सीजन में फलियां लगती हैं। इसके बड़े आकार के घने होते हैं। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है। इसके पेड़ पानी के निकट तथा काली मिट्टी में ज्यादा पाये जाते हैं। इनमें सफेद कांटे पाए जाते हैं। कांटों की लम्बाई 2 सेमी से 4 सेमी तक होती है। इसके कांटे जोड़े के रूप में होते हैं।

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  • कचनार की छाल, बबूल की छाल, मौलश्री छाल, पियाबांसा की जड़ तथा झरबेरी के पंचांग का काढ़ा बनाकर इसके हल्के गर्म पानी से कुल्ला करने से लाभ मिलता है। इससे गले में छाले, मुंह का सूखापन, दांतों का हिलना, जीभ का फटना और तालु के विकार नष्ट हो जाते हैं। 
  • जामुन, बबूल और फूली हुई फिटकरी का काढ़ा बना लें। इस काढ़े से कुल्ला करने पर मुंह के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं। बबूल की छाल लें, उसको बारीक पीस लें, इसे पानी में उबालकर कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले खतम हो जाते हैं। बबूल की छाल के काढ़े से 2-3 बार कुल्ला करें। इससे लाभ मिलता है। 
  • बादाम के छिलके और बबूल की फली के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करें। इससे दांतों का दर्द दूर हो जाता है। इसकी कोमल टहनियों की दातून करें। इससे भी दांतों के कई रोग दूर होते हैं और दांत स्वस्थ और मजबूत हो जाते हैं। 
  • वीर्य की कमी -बबूल के पत्तों को चबाकर उसके ऊपर से गाय का दूध पीने से कुछ ही दिनों में वीर्य की कमी दूर होती है 
  • बबूल की छाल, मौलश्री छाल, कचनार की छाल, पियाबांसा की जड़ तथा झरबेरी के पंचांग का काढ़ा बनाकर इसके हल्के गर्म पानी से कुल्ला करें। इससे दांत का हिलना, जीभ का फटना, गले में छाले, मुंह का सूखापन और तालु के रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल, जामुन और फूली हुई फिटकरी का काढ़ा बनाकर उस काढ़े से कुल्ला करने पर मुंह के सभी रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल को बारीक पीसकर पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल के काढ़े से 2-3 बार गरारे करने से लाभ मिलता है। गोंद के टुकड़े चूसते रहने से भी मुंह के छाले दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। मुंह के छाले पर इस चूर्ण को लगाने से कुछ दिनों में ही छाले ठीक हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में 2 से 3 बार गरारे करें। इससे मुंह के छाले ठीक होते हैं। 
  • दांत का दर्द-बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत का दर्द दूर हो जाता है। 
  • बबूल की कोमल टहनियों की दातून करने से भी दांतों के रोग दूर होते हैं और दांत मजबूत हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल, पत्ते, फूल और फलियों को बराबर मात्रा में मिलाकर बनाये गये चूर्ण से मंजन करने से दांतों के रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल के काढ़े से कुल्ला करने से दांतों का सड़ना मिट जाता है। 
  • रोजाना सुबह नीम या बबूल की दातुन से मंजन करने से दांत साफ, मजबूत और मसूढे़ मजबूत हो जाते हैं। 
  • मसूढ़ों से खून आने व दांतों में कीड़े लग जाने पर बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर रोजाना 2 से 3 बार कुल्ला करें। इससे कीड़े मर जाते हैं तथा मसूढ़ों से खून का आना बंद हो जाता है। 
  • वीर्य के रोग-बबूल की कच्ची फली सुखा लें और मिश्री मिलाकर खायें इससे वीर्य रोग में लाभ होता है। 10 ग्राम बबूल की मुलायम पत्तियों को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पानी के साथ लेने से वीर्य-रोगों में लाभ होता है। अगर बबूल की हरी पत्तियां न हो तो 30 ग्राम सूखी पत्ती भी ले सकते हैं।कीकर (बबूल) की 100 ग्राम गोंद भून लें इसे पीसकर इसमें 50 ग्राम पिसी हुई असगंध मिला दें। इसे 5-5 ग्राम सुबह-शाम हल्के गर्म दूध से लेने से वीर्य के रोग में लाभ होता है। 
  • ग्राम कीकर के पत्तों को छाया में सुखाकर और पीसकर तथा छानकर इसमें 100 ग्राम चीनी मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य के रोग में लाभ मिलता है। 
  • बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से करने से वीर्य गाढ़ा होता है और सभी वीर्य के रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल के गोंद को घी में तलकर उसका पाक बनाकर खाने से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूत काल स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति भी बढ़ती है। 
  • बबूल का पंचांग लेकर पीस लें और आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से कुछ ही समय में वीर्य रोग में लाभ मिलता है। 
  • बलवीर्य की वृद्धि-बबूल के गोंद को घी में भूनकर उसका पकवान बनाकर सेवन करने से मनुष्य के सेक्स करने की ताकत बढ़ जाती है। 
  • बबूल की कच्ची फलियों का रस दूध और मिश्री में मिलाकर खाने से वीर्य की कमी दूर होती है। 
  • धातु पुष्टि के लिए-बबूल की कच्ची फलियों के रस में एक मीटर लंबे और एक मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे दुबारा भिगोकर सुखा लेते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते हैं, और रोजाना एक टुकड़े को 250 ग्राम दूध में उबालकर पीने से धातु की पुष्टि होती है। 
  • स्तन -बबूल की फलियों के चेंप (दूध) से किसी कपड़े को भिगोकर सुखा लें। इस कपड़े को स्तनों पर बांधने से ढीले स्तन कठोर हो जाते हैं। 
  • मासिक-धर्म संबन्धी विकार -4.5 ग्राम बबूल का भूना हुआ गोंद और 4.5 ग्राम गेरू को एकसाथ पीसकर रोजाना सुबह फंकी लेने से मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है। 
  • 20 ग्राम बबूल की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर बचे हुए 100 मिलीलीटर काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से भी मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है।लगभग 250 ग्राम बबूल की छाल को पीसकर 8 गुने पानी में पकाकर काढ़ा बना लेते हैं। जब यह काढ़ा आधा किलो की मात्रा में रह जाए तो इस काढ़े की योनि में पिचकारी देने से मासिक-धर्म जारी हो जाता है और उसका दर्द भी शान्त हो जाता है। 
  • 100 ग्राम बबूल का गोंद कड़ाही में भूनकर चूर्ण बनाकर रख लेते हैं। इसमें से 10 ग्राम की मात्रा में गोंद, मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म की पीड़ा (दर्द) दूर हो जाती है और मासिक धर्म नियमित रूप से समय से आने लगता है। 
  • बांझपन दूर करना -कीकर (बबूल) के पेड़ के तने में एक फोड़ा सा निकलता है। जिसे कीकर का बांदा कहा जाता है। इसे लेकर पीसकर छाया में सुखाकर चूर्ण बना लेते हैं। इस चूर्ण को तीन ग्राम की मात्रा में माहवारी के खत्म होने के अगले दिन से तीन दिनों तक सेवन करें। फिर पति के साथ संभोग करे इससे गर्भ अवश्य ही धारण होगा।

Thursday, August 30, 2018

माइग्रेन का घरेलू उपचार- Migraine treatment in Hindi,माइग्रेन का आयुर्वेदिक इलाज

माइग्रेन, आधा सीसी सिरदर्द-माइग्रेन, अधकपारी, Migraine in Hindi, Adhkapari in Hindi

क्या है माइग्रेन, आधा सीसी सिरदर्द-What is Migraine Headache,what causes headaches,Cause Headaches,

एक अध्ययन के अनुसार माइग्रेन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को तीन गुना अधिक प्रभावित करता है। अधिकांश लोगों को माइग्रेन का पता तब चलता है, जब वे कई साल तक इस तकलीफ को झेलने के बाद इसके लक्षणों से परिचित हो जाते हैं। कई बार यह दर्द सा माइग्रेन, आधा सीसी सिरदर्द माइग्रेन एक सिरदर्द का रोग है। इसमें सिर के आधे भाग में भीषण दर्द होता है। 

मान्यता अनुसार इसका कोई इलाज नहीं है, किंतु इससे असरदार तरीके से निपटा जा सकता है। इस रोग में कभी कभी सिर के एक हिस्से में बुरी तरह धुन देने वाले मुक्कों का एहसास होता है और लगता है कि सिर अभी फट जाएगा। उस समय अत्यंत साधारण काम करना भी मुश्किल हो जाता है। यह एहसास होता है कि किसी अंधेरी कोठरी में पड़े हैं। चिकित्सकीय निगरानी में रहकर और जीवन-शैली में बदलाव करके इस रोग से निपटा जा सकता है। 

इनोसाइटिस का भी हो सकता है। किसी कठोर चीज से सिर के एक हिस्से में जोर-जोर से वार करने का एहसास होता है, खून की धमनियां फूलने लगती हैं, या उनमें जलन होने लगती है। जबकि अन्य प्रकार के सिरदर्द में आमतौर पर दर्द सिकुड़ी हुई धमनियों या सिर और गर्दन की मांसपेशियों के सख्त हो जाने के कारण होता है। विख्यात न्यूरोलॉजिस्ट कहते है कि माइग्रेन का दर्द बहुत जबर्दस्त होता है। इसमें रोजमर्रा के आम काम भी नहीं कर पाते। यहां तक कि चलना फिरना भी दूभर हो जाता है और लगता है कि शरीर टूट चुका है।

माइग्रेन के लक्षण -Migraine Symptoms

माइग्रेन के साथ अक्सर जी मिचलाता है और उल्टी भी हो जाती है। माइग्रेन का अटैक होने पर मरीज को रोशनी, आवाज या किसी तरह की गंध नहीं सुहाती। माइग्रेन का हमला अचानक होता है। 

कई बार यह शुरू में हल्का होता है, लेकिन धीरे-धीरे बहुत तेज दर्द में बदल जाता है। अधिकतर यह सिरदर्द के साथ शुरू होता है और कनपटी में बहुत तीव्रता से टीस उठती है या ऐसा लगता है कि कोई कनपटी पर प्रहार कर रहा है। 
प्रायः यह दर्द आधे सिर में होता है, लेकिन एक तिहाई मामलों में दर्द सिर के दोनों ओर भी होता पाया गया है। एक तरफ होने वाला दर्द अपनी जगह बदलता है और यह ४ से ४८ घंटों तक रह सकता है।

माइग्रेन का दर्द प्रायः पर सिर के एक सिरे से, या कभी-कभी बीचों-बीच से या पीछे की तरफ से उठता है। कभी यह रह-रहकर कई हफ्तों या महीनों तक, या फिर सालों तक खास अंतराल में उठता है। कई बार एक ही समय में यह बार-बार हथौड़ों की बारिश का एहसास कराता है। 

इसकी अनुभूति कई बार वास्तविक दर्द से दस मिनट से लेकर आधे घंटे पहले ही शुरू हो जाती है। इस दौरान सिर में बिजली फट पड़ने, आंखों के आगे अंधेरा छा जाने, बदबू आने, सुन्न पड़ जाने या दिमाग में झन्नाहट का एहसास होता है। किसी-किसी मरीज को अजीब-अजीब सी छायाएं नजर आती हैं। किसी को चेहरे और हाथों में सुइयां या या पिनें चुभने का एहसास होता है।

इस समय उबकाई आना, उल्टी, फोनोफोबिया और प्रकाश से भय आदि समस्याएं भी पैदा हो सकती है। माइग्रेन का हमला किसी भी आयु में हो सकता है, माइग्रेन के ज्यादातर रोगी वे होते हैं, जिनके परिवार में ऐसा इतिहास रहा है। इसके कुल रोगियों में ७५ प्रतिशत महिलाएं होती हैं।

माइग्रेन के प्रमुख कारणों में तनाव होना, लगातार कई दिनों तक नींद पूरी न होना, हार्मोनल परिवर्तन, शारीरिक थकान, चमचमाती रोशनियां, कब्ज़, नशीली दवाओं व शराब का सेवन आते हैं। कई मामलों में ऋतु परिवर्तन, चाय / कॉफी का अत्यधिक सेवन किसी प्रकार की गंध और सिगरेट का धुआं आदि कारण भी माइग्रेन की समस्या का कारण देखे गये हैं। 

आजकल डिब्बाबंद पदार्थों और जंक फूड का काफी चलन है। इनमें मैदे का बड़ी मात्रा में प्रयोग होता है, यदि आपको माइग्रेन की शिकायत है तो आप इन पदार्थों का सेवन कतई न करें। पनीर, चाकलेट, चीज, नूडल्स, पके केले और कुछ प्रकार के नट्स में ऐसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं।

माइग्रेन का घरेलू उपचार-Migraine Home remedies in Hindi,Migraine Treatment at Home,

माइग्रेन का निवारण योगासन द्वाआ सुलभ है। इसके लिए रात्रि को बिना तकिए के शवासन में सोएं। सुबह-शाम योगाभ्यास में ब्रह्म मुद्रा, कंध संचालन, मार्जरासन, शशकासन के पश्चात प्राणायाम करें। इसमें पीठ के बल लेटकर पैर मिलाकर रखें। श्वास धीरे-धीरे अंदर भरें, तब तक दोनों हाथ बिना मोड़े सिर की तरफ जमीन पर ले जाकर रखें और श्वास बाहर निकालते वक्त धीरे-धीरे दोनों हाथ बिना कोहनियों के मोड़ें व वापस यथास्थिति में रखें। ऐसा प्रतिदिन दस बार करें। अंत में कुछ देर शवासन करके नाड़िशोधन प्राणायाम दस-दस बार एक-एक स्वर में करें।
इस दर्द में यदि सिर, गर्दन और कंधों की मालिश की जाए तो यह इस दर्द से आराम दिलाने बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है। इसके लिए हल्की खुश्बू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।पुदीना, नीलगिरी के कुछ आम इत्र माइग्रेन के केस में कारगर साबित हो सकते हैं।

रोगी साँस की गति को थोड़ा धीमा करके, लंबी साँसे लेने की कोशिश करें। यह तरीका दर्द के साथ होने वाली बेचैनी से राहत दिलाने में सहायता करेगा।

एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश करें। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए बर्फ के टुकड़ों का उपयोग भी कर सकते हैं।

अरोमा थेरेपी माइग्रेन के दर्द से काफ़ी आराम पहुंचाता है। इस तरीके में हर्बल तेलों के एक तकनीक के माध्यम से हवा में फैला दिया जाता है या फिर इसको भाप के द्वारा चेहरे पर डाला जाता है। इसके साथ हल्का संगीतक भी चलाया जाता है जो दिमाग को आराम पहुँचाता है।

माइग्रेन का सिरदर्द कम करने के लिए एक सबसे सरल उपचार है अपने सिर पर आइस पैक रखें। आइस पैक मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करता है और दर्द को कम कर देता है। प्रभावित क्षेत्र, कनपटी और गर्दन पर प्रभावी राहत के लिए आइस पैक को धीरे-धीरे रगड़ें।

मैगनीशियम ( बादाम )अक्सर माइग्रेन के मरीजों के लिए रामबाण माना जाता है। मैग्नीशियम प्रभावी ढंग से विभिन्न माइग्रेन सक्रियताओं का मुकाबला कर सकता है क्योंकि यह रक्त शर्करा और रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करता है। अपने आहार में 500 मिलीग्राम मैग्नीशियम की खुराक आपको माइग्रेन के दौरों का प्रभावी ढंग से इलाज करने में मदद कर सकती है।

माइग्रेन से आराम के लिए आप ठंडे पानी में अपने पैर रख दें और अपने सिर के पीछे गरम पानी की बोतल रख सकते हैं।

माइग्रेन होने पर आप बिस्तर पर लेटकर दर्द वाले हिस्से को बेड के नीचे लटका दीजिए। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो रहा हो उस तरफ वाले नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल दीजिए, उसके बाद जोर से सांसों को ऊपर की तरफ खींचिए इससे सिरदर्द से राहत मिलेगी।

माइग्रेन होने पर दालचीनी को पानी के साथ महीन पीसकर माथे पर पतला लेप कर लगा लीजिए। लेप सूख जाने पर उसे हटा लीजिए। 3-4 लेप लगाने पर सिरदर्द होना बंद हो जाएगा।

मुलहठी को कूट-पीसकर महीन चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण को नाक के पास ले जाकर सूंघने से सिरदर्द या माइग्रेन में राहत मिलती है।

माइग्रेन में दर्द होने पर कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश कुछ देर तक मालिश कीजिए।

बटर में मिश्री को मिलाकर चबा चबा करखाने से भी माइग्रेन में राहत मिलती है।

नींबू के छिलके को पीसकर, इसका लेप माथे पर लगाने से भी माइग्रेन ठीक होता है।

माइग्रेन में सिर दर्द होने पर धीमी आवाज में संगीत सुनना बहुत फायदेमंद होता है। दर्द से राहत पाने के‍ लिए बंद कमरे में हल्की आवाज में अपने पसंदीदा गानों को सुनिए, सिरदर्द कम होगा और रोगी को राहत भी मिलेगी।

नियम से सुबह खाली पेट महीन महीन काट कर सेब खाने से भी माइग्रेन में शीघ्र ही लाभ मिलता है ।
चौथाई चम्मच तुलसी के चूर्ण को शहद के साथ सुबह शाम चाटने से भी माइग्रेन में लाभ मिलता है ।

बीस ग्राम सौंठ के चूर्ण को 100 ग्राम गुड के साथ मिलाकर उसकी छोटी छोटी गोलियॉं बना लें । 4-5 गोलियाँ सुबह शाम चूसने से भी माइग्रेन में लाभ मिलता है ।

माइग्रेन के रोगी को अधिक प्रोटीन चिकनाई युक्त भोजन से दूर रहना चाहिए । इन्हे फल,सब्जियाँ और अकुंरित अनाज नियमित रूप से ज्यादा ज्यादा सेवन करना बहुत ही लाभकारी होता है ।

12 ग्राम गुड़ को 6 ग्राम देशी घी के साथ खाएं माइग्रेन से लाभ मिलता है ।

6-7 कालीमिर्च चबा चबा कर खाएं ऊपर से दो चम्मच देशी घी पीएं, माइग्रेन धीरे धीरे ठीक होता जाता है 

गाजर और पालक का रस दोनों करीब 300 मि.ली. मात्रा में पीएं। यह इस रोग काफी गुणकारी है।

Wednesday, January 03, 2018

गर्म पानी के फायदे,Benefits of Hot Water in Hindi

अगर आप स्किन प्रॉब्लम्स से परेशान हैं या ग्लोइंग स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स यूज करके थक चूके हैं तो रोजाना एक गिलास गर्म पानी पीना शुरू कर दें। आपकी स्किन प्रॉब्लम फ्री हो जाएगी व ग्लो करने लगेगी। पानी से प्यास मिटती है और गर्म पानी से रोग दूर होते हैं। गुनगुना पानी और सेहत का रिश्ता बेहद पुराना हैं। सेहत चाहिए तो रोज गर्म पानी पीने की आदत डालनी ही चाहिए। आइए जानते है जो लोग रोज गर्म पानी पीते हैं उन्हें क्या-क्या फायद मिलता है-
  • लड़कियों को पीरियड्स के दौरान अगर पेट दर्द हो तो ऐसे में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती है। दरअसल इस दौरान होने वाले पैन में मसल्स में जो खिंचाव होता है उसे गर्म पानी रिलैक्स कर देता है।
  • गर्म पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। सुबह खाली पेट व रात्रि को खाने के बाद पानी पीने से पाचन संबंधी दिक्कते खत्म हो जाती है व कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं।
  • भूख बढ़ाने में भी एक गिलास गर्म पानी बहुत उपयोगी है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और काली मिर्च व नमक डालकर पीएं। इससे पेट का भारीपन कुछ ही समय में दूर हो जाएगा।
  • खाली पेट गर्म पानी पीने से मूत्र से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। दिल की जलन कम हो जाती है। वात से उत्पन्न रोगों में गर्म पानी अमृत समान फायदेमंद हैं।
  • गर्म पानी के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन भी तेज होता है। दरअसल गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है। पसीने के माध्यम से शरीर की सारे जहरीले तत्व बाहर हो जाते हैं।
  • बुखार में प्यास लगने पर मरीज को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। गर्म पानी ही पीना चाहिए बुखार में गर्म पानी अधिक लाभदायक होता है।
  • यदि शरीर के किसी हिस्से में गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो एक गिलास गर्म पानी पीने से गैस बाहर हो जाती है।
  • अधिकांश पेट की बीमारियां दूषित जल से होती हैं यदि पानी को गर्म कर फिर ठंडा कर पीया जाए तो जो पेट की कई अधिकांश बीमारियां पनपने ही नहीं पाएंगी।
  • गर्म पानी पीना बहुत उपयोगी रहता है इससे शक्ति का संचार होता है। इससे कफ और सर्दी संबंधी रोग बहुत जल्दी दूर हो जाते हैं।
  • दमा ,हिचकी ,खराश आदि रोगों में और तले भुने पदार्थों के सेवन के बाद गर्म पानी पीना बहुत लाभदायक होता है।
  • सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू मिलाकर पीने से शरीर को विटामिन सी मिलता है। गर्म पानी व नींबू का कॉम्बिनेशन शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है।साथ ही पी.एच. का स्तर भी सही बना रहता है।
  • रोजाना एक गिलास गर्म पानी सिर के सेल्स के लिए एक गजब के टॉनिक का काम करता है। सिर के स्केल्प को हाइड्रेट करता है जिससे स्केल्प ड्राय होने की प्रॉब्लम खत्म हो जाती है।
  • वजन घटाने में भी गर्म पानी बहुत मददगार होता है। खाने के एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से मेटॉबालिम्म बढ़ता है। यदि गर्म पानी में थोड़ा नींबू व कुछ बूंदे शहद की मिला ली जाएं तो इससे बॉडी स्लिम हो जाती है।
  • हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए गर्म पानी एक बेहतरीन औषधि का काम करता है।

पानी पीने के नियम

  • हमें जब भी प्यास लगे, तब कम से कम एक गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए। ऐसा करने पर हमारा शरीर पानी की कमी को पूरा कर लेता है।
  • परिश्रम वाले काम करने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। मेहनत वाले काम करने के बाद कम से कम आधे घंटे बाद पानी पीना चाहिए।
  • अभी गर्मी के दिन है तो इस बात का ध्यान रखें कि धूप में घुमने के बाद घर लौटकर एकदम पानी नहीं पीना चाहिए। धूप में घुमने से शरीर एकदम गर्म रहता है और इस परिस्थिति में पानी पीने पर स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
  • लू लग जाने पर ठंडा पानी व सर्दी लग जाने पर गर्म पानी पीना चाहिए। ऐसा करने पर शरीर को राहत मिलती
  • खाना खाने से पहले पानी पीना चाहिए और यह खाना खाने से 40 मिनट पहले पीना चाहिए। 3.
  • खाने के बाद मुंह और गले को साफ़ करने के लिए 1 या 2 घूँट गर्म या गुनगुना पानी लिया जा सकता है ।

Friday, January 06, 2017

कब्ज का इलाज,Kabz Ka-Elaj-Ke Upay Constipation Tips in Hindi

कब्ज आज के समय का एक साधारण रोग है। आज बहुत से लोग कब्ज रोग से परेशान रहते हैं। कब्ज रोग व्यक्ति के स्वयं के खान-पान में असावधानी रखने का ही परिणाम है। कब्ज उत्पन्न होने का मुख्य कारण अधिक मिर्च-मसाले वाला भोजन करना, कब्ज बनाने वाले पदार्थों का सेवन करना, भोजन करने के बाद अधिक देर तक बैठना, तेल व चिकनाई वाले पदार्थों का अधिक सेवन करना आदि है

कब्ज, पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति  का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। (एक सप्ताह में 3 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है।

पेट में शुष्क मल का जमा होना ही कब्ज है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। कब्जियत का मतलब ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को तो मल त्याग के लिये जाना ही चाहिये। दो बार नहीं तो कम से कम एक बार तो जाना आवश्यक है। नित्य कम से कम सुबह मल त्याग न कर पाना अस्वस्थता की निशानी है।

क़ब्ज़ होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी की कमी होना है। पानी की कमी होने पर आँतो में मल सूखने लगता है और मल त्याग करने में काफ़ी ज़ोर लगाना पड़ता है। क़ब्ज़ के उपचार के लिए रोगी को पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए और खाना खाते समय पानी नही पीना चाहिए।

कब्ज का प्रमुख कारण

  • कम रेशायुक्त भोजन का सेवन करना ; भोजन में फायबर (Fibers) का अभाव।
  • अल्पभोजन ग्रहण करना।
  • शरीर में पानी का कम होना
  • कम चलना या काम करना ; किसी तरह की शारीरिक मेहनत न करना; आलस्य करना; शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना।
  • कुछ खास दवाओं का सेवन करना
  • बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण (यानि बड़ी आंत में कैंसर)
  • थायरॉयड हार्मोन का कम बनना
  • कैल्सियम और पोटैशियम की कम मात्रा
  • मधुमेह के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या
  • कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)
  • चाय, कॉफी बहुत ज्यादा पीना। धूम्रपान करना व शराब पीना।
  • गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना।
  • आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी।

कब्ज का लक्षण

  • रोगी को शौच साफ़ नहीं होता है, मल सूखा और कम मात्रा में निकलता है। मल कुंथन करने या घण्टों बैठे रहने पर निकलता है।
  • कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रोजाना मलत्याग नहीं होता है। कब्ज रोग से पीड़ित रोगी जब मल का त्याग करता है तो उसे बहुत अधिक परेशानी होती है। कभी-कभी मल में गांठे बनने लगती है। जब रोगी मलत्याग कर लेता है तो उसे थोड़ा हल्कापन महसूस होता है।
  • कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के पेट में गैस अधिक बनती है। पीड़ित रोगी जब गैस छोड़ता है तो उसमें बहुत तेज बदबू आती है।
  • कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद तथा मटमैली हो जाती है। जीभ मलावृत रहती है तथा मुँह का स्वाद ख़राब हो जाता है। कभी कभी मुँह से दुर्गन्ध आती है।
  • रोगी व्यक्ति के आंखों के नीचे कालापन हो जाता है तथा रोगी का जी मिचलता रहता है। रोगी की भूख मर जाती है, पेट भारी रहता है एवं मीठा मीठा दर्द बना रहता है, शरीर तथा सिर भारी रहता है।
  • लेपित जीब
  • बहती नाक
  • भूख में कमी
  • सरदर्द
  • चक्कर आना
  • जी मिचलाना
  • चहरे पर दाने
  • मुँह मे अल्सर
  • पेट में लगातार परिपूर्णता

 कब्ज का घरेलू इलाज

  • क़ब्ज़ दूर करने के लिए रोगी को फलो में पपीता और अमरूद ज़रूर खाना चाहिए।
  • पेट में जमे हुए मल को बाहर निकालने के लिए 1 कप गुनगुने पानी में 1 नींबू निचोड़ कर पिए।
  • 1 ग्लास गरम दूध रात को सोने से पहले पिए। अगर मल आँतो में चिपक रहा हो तो दूध में 1 से 2 चम्मच अरंडी का तेल मिला कर पिए।
  • इसबगोल की भूसी क़ब्ज़ के इलाज में रामबाण का काम करती है। 125 ग्राम दही मे 10 ग्राम इसबगोल की भूसी घोल कर सुबह शाम खाने से qabz में आराम मिलता है।
  • बेकिंग सोडा जिसे हम मीठा सोडा से भी जानते है क़ब्ज़ खोलने में काफ़ी फयदेमंद है। एक चौथाई कप गरम पानी में 1 चम्मच मीठा सोडा मिला कर पिए.
  • नमक – छोटी हरड और काल नमक समान मात्रा में मि‍लाकर पीस लें। नि‍त्‍य रात को इसकी दो चाय की चम्‍मच गर्म पानी से लेने से दस्‍त साफ आता हैं।
  • ईसबगोल – दो चाय चम्‍मच ईसबगोल 6 घण्‍टे पानी में भि‍गोकर इतनी ही मि‍श्री मि‍लाकर जल से लेने से दस्‍त साफ आता हैं। केवल मि‍श्री और ईसबगोल मि‍ला कर बि‍ना भि‍गोये भी ले सकते हैं।
  • चना – कब्‍ज वालों के लि‍ए चना उपकारी है। इसे भि‍गो कर खाना श्रेष्‍ठ है। यदि‍ भीगा हुआ चना न पचे तो चने उबालकर नमक अदरक मि‍लाकर खाना चाहि‍ए। चेने के आटे की रोटी खाने से कब्‍ज दूर होती है। यह पौष्‍ि‍टक भी है। केवल चने के आटे की रोटी अच्‍छी नहीं लगे तो गेहूं और चने मि‍लाकर रोटी बनाकर खाना भी लाभदायक हैं। एक या दो मुटठी चने रात को भि‍गो दें।
  • प्रात: जीरा और सौंठ पीसकर चनों पर डालकर खायें। घण्‍टे भर बाद चने भि‍गोये गये पानी को भी पी लें। इससे कब्‍ज दूर होगी।
  • पेट की बीमारियो से बचने और उनके उपचार के लिए पेट में अच्छे बॅक्टीरिया होना ज़रूरी है। दही खाने से शरीर में अच्छे बॅक्टीरिया की मात्रा बढ़ेगी। 2 से 3 कप दही का सेवन ज़रूर करे।
  • आधा ग्लास पत्ता गोभी का जूस पीने से क़ब्ज़ के रोग से निजात मिलती है। पालक का जूस भी kabz kholne में काफ़ी असरदार है।
  • 1 ग्लास गरम दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच घी मिला कर घोल ले और रात को सोने से पहले पिए।
  • एक ग्लास दूध में थोड़ी अंजीर उबाल ले और सोने से पहले पिए।
  • सुबह खाली पेट एक ग्लास गरम पानी में दो चम्मच्च शहद मिला कर पीने से क़ब्ज़ दूर होती है।
  • बेल – पका हुआ बेल का गूदा पानी में मसल कर मि‍लाकर शर्बत बनाकर पीना कब्‍ज के लि‍ए बहुत लाभदायक हैं। यह आँतों का सारा मल बाहर नि‍काल देता है।
  • नीबू – नीम्‍बू का रस गर्म पानी के साथ रात्रि‍ में लेने से दस्‍त खुलकर आता हैं। नीम्‍बू का रस और शक्‍कर प्रत्‍येक 12 ग्राम एक गि‍लास पानी में मि‍लाकर रात को पीने से कुछ ही दि‍नों में पुरानी से पुरानी कब्‍ज दूर हो जाती है।
  • नारंगी – सुबह नाश्‍ते में नारंगी का रस कई दि‍न तक पीते रहने से मल प्राकृति‍क रूप से आने लगता है। यह पाचन शक्‍ति‍ बढ़ाती हैं।
  • मेथी – के पत्‍तों की सब्‍जी खाने से कब्‍ज दूर हो जाती है।
  • गेहूँ के पौधों (गेहूँ के जवारे) का रस लेने से कब्‍ज नहीं रहती है।
  • धनिया – सोते समय आधा चम्‍मच पि‍सी हुई सौंफ की फंकी गर्म पानी से लेने से कब्‍ज दूर होती है।
  • दालचीनी – सोंठ, इलायची जरा सी मि‍ला कर खाते रहने से लाभ होता है।
  • टमाटर कब्‍जी दूर करने के लि‍ए अचूक दवा का काम करता है। अमाश्‍य आँतों में जमा मल पदार्थ नि‍कालने में और अंगों को चेतनता प्रदान करने में बडी मदद करता है। शरीर के अन्‍दरूनी अवयवों को स्‍फूर्ति‍ देता है।

Monday, April 18, 2016

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अनियमित खान-पान और लाइफस्टाइल कब्ज का प्रमुख कारण है। अनियमित दिनचर्या और खान-पान के
कारण कब्ज और पेट गैस की समस्या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्ज रोगियों में पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है मानसिक तनाव, अशांति, भय, चिंता, क्रोध के कारण पाचन अंगों के आवश्यक पाचक रसों का स्राव कम हो जाता है, जिससे अज्रीर्ण(Indigestion) की तकलीफ हो जाती है और अज्रीर्ण का विकृत रूप गैस कि बिमारी पैदा कर देता है। ।

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  • भोजन खूब चबा चबा कर आराम से करना चाहिए! बीच बीच में अधिक पानी ना पिएं!
  • नींबू आदि का सेवन अधिक करना चाहिए
  • भोजन के दो घंटे के बाद 1 से 2 गिलास पानी पिएं। दोनों समय के भोजन के बीच हल्का नाश्ता फल आदि अवश्य खाएं।
  • तेल गरिष्ठ भोजन से परहेज करें! भोजन सादा, सात्त्विक और प्राक्रतिक अवस्था में सेवन करने कि कोशिश करें।
  • दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी का सेवन अवश्य करें।
  • प्रतिदिन कोई न कोई व्यायाम करने कि आदत जरुर बनाएं! शाम को घूमने जाएं! पेट के आसन से व्यायाम का पूरा लाभ मिलता है। प्राणयाम करने से भी पेट की गैस की तकलीफ दूर हो जाती है।
  • शराब, चाय, कॉफी, तम्बाकू, गुटखा, जैसे व्यसन से बचें।
  • प्राक्रतिक वेगों को रोके रखने कि आदत को छोड़ें जैसे मूत्र या मल।
  • दिन में सोना छोड़ दें और रात को मानसिक परिश्रम से बचें|
  • एक चम्मच अजवाइन के साथ चुटकी भर काला नमक भोजन के बाद चबाकर खाने से पेट कि गैस शीर्घ ही निकल जाती है|
  • अदरक और नींबू का रस एक एक चम्मच कि मात्रा में लेकर थोड़ा सा नमक मिलकर भोजन के बाद दोनों समय सेवन करने से गैस कि सारी तकलीफें दूर हो जाती हैं , और भोजन भो हजम हो जाता है!
  • भोजन करते समय बीच बीच में लहसुन, हिंग, थोड़ी थोड़ी मात्रा में खाते रहने से गैस कि तकलीफ नहीं होती|
  • हरड, सोंठ का चूर्ण आधा आधा चम्मच कि मात्रा में लेकर उसमे थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर भोजन के बाद पानी से सेवन करने से पाचन ठीक प्रकार से होता है और गैस नहीं बनती!
  • नींबू का रस लेने से गैस कि तकलीफ नहीं होती और पाचन क्रिया सुधरती है!
  • सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा। 
  • 20 ग्राम त्रिफला रात को लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्ज की शिकायत दूर हो जाएगी।
  • कब्ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्ज दूर हो जाता है। 
  • सुबह उठने के बाद बिना कुछ खाए हुए, 4-5 दाने काजू के और 4-5 दाने मुनक्का के साथ खाइए, इससे कब्ज की शिकायत समाप्त होगी। हर रोज रात में हर्रई को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा। 
  • रात को सोते वक्त अरंडी के तेल को हल्के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा। 
  • इसाबेल की भूसी कब्ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्त इसाबेल की भूसी लेने से कब्ज समाप्त होता है। 
  • अमरूद और पपीता कब्ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।
  • पालक का रस पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्जी का प्रयोग करना चाहिए।छाछ भी गैस की समस्या से निपटने का एक तरीका हैं इसमें लैक्टिक एसिड होता हैं। दूध से ज्यादा इसमें पचाने की क्षमता ज्यादा होती हैं । छाछ को गैस की समस्या होने पर जरूर पीना चाहिए 
  • गर्म पानी और नींबू का रस मिक्स करके पीने से मतली ,उल्टी या डकार से राहत मिलती हैं । यह रक्त शोधक के रूप में काम करता हैं । सुबह उठकर ताज़ा नींबू पानी पीने से पाचन से जुडी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।
  • अदरक पेट की गैस के लिए एक कारगर उपाय हैं । अगर आपका खाना नही पच रहा हैं तो आप तो अदरक चबाएं इससे आपके खाना पचने में मदद मिलेगी, नहीं तो आप सेंधा नमक,अदरक पाउडर और चुटकी भर हींग को मिलाकर आप उसे पानी के साथ खा सकते हैं । खाने में भी आप अदरक डाल सकते हैं या अदरक की चाय भी पी सकते हैं । यह पाचन शक्ति को बढ़ाता हैं और एसिडिटी होने से रोकता हैं ।
  • पेट में गैस के लिए एक और सबसे अच्छा इलाज हैं आलू का रस, खाना खाने से पहले आप आधा कप आलू का रस पी लो । दिन में कम से कम इसे तीन बार पीयें और परिणाम देखें ।
  • लहसुन भी गैस की समस्या से बड़ी राहत प्रदान करता हैं । लहसुन की तीखी गंध और हीटिंग गुणवत्ता उचित पाचन में मदद करती है और गैस से राहत प्रदान करता है जो आमाशय में जलन भी नहीं होने देता । आप गैस से पीड़ित हैं, बेहतर परिणाम के लिए ताजा लहसुन का प्रयोग करें।लहसुन का सूप भी पी सकते हैं । 3 लहसुन, लौंग उन्हें आग पर भुन लें और यह छीलने के बाद इसे खा लें । बेहतर परिणाम के लिए रोज़ाना कम से कम दो या तीन बार इस लहसुन की विधि को अपनाएं ।

Tuesday, March 22, 2016

भिन्डी के फायदे,Health Benefits of Lady finger in Hindi

हरी सब्जियों में भिंडी का भी अहम स्थान है। यह सेहत के ल‌िए खासी फायदेमंद है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व और प्रोटीन मौजूद होते हैं। भिंडी में प्रोटीन, वसा, रेशा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह मैग्नीशियम, पोटेशियम और सोडियम मौजूद होता है।

मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी -भिंडी में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में उपयोगी साबित होता है। भिंडी खून में पहले से मौजूद शुगर के अंश को सोख लेती है और ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाने में मदद करती है। मैक्स की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. सुनिता रॉय चौधरी के मुताबिक शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने में भी भिंडी मददगार होती है। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है या फिर आप शुगर की आशंका से दूर रहते हैं।

पेट के लिए उपयोगी -भिंडी हमारी आंतों के लिए फिल्टर का काम करती है। यह पेट के पित्त, अम्ल और कोलेस्ट्रॉल को बांध देती है, जिससे आंत को नुकसान नहीं पहुंचता। भिंडी आंतों की खराश को भी दूर करती है। इसलिए पेचिश या गैस की समस्या में भी भिंडी काम आती है। भिंडी शरीर में एसिड को भी बेअसर बनाती है और पाचनतंत्र के कवच के रूप में सुरक्षा करती है। भिंडी हमारे शरीर में पाए जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया को मजबूत करती है। इसके साथ-साथ भिंडी शरीर में प्रोबायोटिक्स के विकास में भी मदद करती है, जिससे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और पाचन तंत्र बेहतर होता है।

मूत्र की जलन के लिए उपयोगी -भिंडी पेशाब की जलन को दूर करती है। इसे खाने से पेशाब खुलकर और साफ आता है। इसलिए पेशाब की जलन होने पर भिंडी का सेवन करना चाहिए।

कमजोरी या थकावट में भी कारगर -कमजोरी, थकावट महसूस करने वालों के लिए भिंडी ऊर्जावर्धक दवा की तरह काम करती है। डॉक्टरों के मुताबिक भिंडी डिप्रेशन के शिकार लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित होती है।

जोड़ों का दर्द के लिए उपयोगी -भिंडी में पाया जाने वाला लसलसा पदार्थ हमारी हड्डियों के लिए उपयोगी होता है। इसके अलावा भिंडी में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के लिए लाभकारी होता है। यह जोडमें को लचीला बनाती है।

अस्थमा के रोगियों के लिए उपयोगी -भिंडी अस्थमा के रोगियों के लिए भी काफी लाभकारी साबित होती है। भिंडी में पाया जाने वाला विटामिन सी अस्थमा के लक्षण को पनपने से रोकता है। इसके अलावा भिंडी फेफडमें में सूजन और गले में खराश को ठीक करती है।

आंखें के लिए उपयोगी -भिंडी में विटामिन ‘ए’ की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो आंखों के लिए उपयोगी होता है। जिन लोगों की आंखें कमजोर होती हैं, उन्हें भिंडी खाने की सलाह दी जाती है। खाने में यदि भिंडी शामिल कर लिया जाए तो आंखों की रोशनी तो दुरुस्त होगी ही, आंखों से संबंधित कई अन्य समस्याएं भी ठीक होती हैं। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक भिंडी मोतियाबिंद के जोखिम को भी कम करती है, हालांकि भारत में अभी इस पर शोध जारी है।  
त्वचा के लिए उपयोगी -भिंडी में विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इस लिहाज से यह हमारी त्वचा के लिए भी वरदान है। त्वचा को पिंपल फ्री बनाना हो या चेहरे को चिकना और चमकदार बनाना हो, भिंडी हमेशा असरदार साबित होती है।

बालों के लिए उपयोगी -बेजान और रूखे बालों में बाउंस लाने के लिए भी आप भिंडी का इस्तेमाल कर सकते हैं। भिंडी को तब तक उबालें, जब तक कि वह एकदम पतली न हो जाए। फिर उस पानी में नींबू निचोड़कर बालों में लगाएं। इससे बालों की अच्छी कंडीशनिंग होगी और बालों में जान लौट आएगी।
 अनीमिया से बचाये - भिंडी में मौजूद आयरन तत्‍व हमारे शरीर के लिए काफी लाभकारी होते हैं। यह रक्‍त में हीमोग्‍लोबिन का निर्माण करते हैं, जिससे आप अनीमिया से बचे रहते हैं। इसके साथ ही भिंडी में मौजूद विटामिन के रक्‍त स्राव को रोकने में मदद करता है, जिससे किसी विकट परिस्थिति में शरीर से रक्‍तस्राव बहुत कम होता है।
वजन रखे काबू - जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए भिंडी में मौजूद फाइबर से अच्‍छा और कोई उपाय नहीं है। भिंडी में कैलोरी की मात्रा बिलकुल भी नहीं होती , इसलिए यह वजन कम करने का अच्‍छा उपाय माना जाता है।
दिल के लिए लाभकारी - भिंडी में मौजूद घुलनशील फाइबर रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद करता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। भिंडी उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल को काबू करने का कारगर उपाय है। इसमें मौजूद पैक्‍टिन उच्‍च कोलेस्‍ट्रोल को काबू करने में मदद करता है।

अन्य लाभ

  • इसके सेवन से त्वचा अच्छी दिखती है. भिन्डी को उबाल कर , मसल कर इसे त्वचा पर थोड़ी देर लगा कर रखे. धोने के बाद आप पायेंगे की त्वचा बहुत मुलायम और ताजगी भरी लग रही है.
  • इसका सेवन कालोन कैंसर से बचाता है. इसका विटामिन ए म्यूकस मेम्ब्रेन बनाने में मदद करता है , जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है.
  • इसके नियमित सेवन से किडनी की सेहत में सुधार होता है.
  • मोटापे को दूर करता है. कई बार शरीर में विटामिन्स की कमी से ज़्यादा खाने का मन करता है. इसलिए भिन्डी में मौजूद विटामिन्स उसकी कमी को दूर कर अनावश्यक भूक को मिटाते है.
  • इसका विटामिन के हड्डियों को मज़बूत बनाता है. यह रक्त की कमी को भी दूर करता है.
  • कोलेस्ट्रोल को कम करती है.
  • इसके विटामिन्स आँखों , बाल और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाते है.
  • यह गर्मी से बचाती है.

Wednesday, March 16, 2016

कद बढ़ाने के उपाय,Height Increase Tips in hindi,

लम्बाई बढाने के घरेलु उपाय,स्त्री हो या पुरुष, अच्छी हाइट दोनो की सुंदरता और व्यक्तित्व में निखार लाती है। क्योंकि लम्बाई जीन्स पर निर्भर करती है, इसलिए कुछ लोग सोचते हैं कि लम्बाई बढ़ा पाना मुमकिननहीं होता। लेकिन आपको यह जानकर खुशी होगी कि कुछ ऐसे प्रकृतिक तरीके हैं जिनको अपनाकर आप अपनी लम्बाई बढ़ा सकते हैं।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी या हार्मोन की गड़बड़ी होने पर कुछ लोगों का कद बढ़ नहीं पाता है। दरअसल, हमारी लंबाई बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन यानी एचजीएच का होता है। एचजीएच पिट्युटरी ग्लैंड से निकलता है। यही कारण है कि सही प्रोटीन और न्यूट्रिशन न मिलने पर शरीर का विकास रुक जाता है।

यदि आपके साथ भी यह समस्या है तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं हाइट बढ़ाने और कर्वी फिगर पाने के कुछ खास नुस्खे

कद बढ़ाने के उपाय ,how to increase height,

1-अश्वगंधा और सूखी नागौरी दोनों को ही आयुर्वेद में शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।सामग्री – 20 ग्राम सूखी नागौरी। – 20 ग्राम अश्वगंधा। – 20 ग्राम चीनी
बनाने की विधि- सूखी नागौरी और अश्वगंधा की जड़ को बारीक पीस लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिला लें। यह मिश्रण कांच की बोतल में भर लें।

ऐसे करें सेवन- रात को सोते समय रोज दो चम्मच चूर्ण लें। फिर गाय का दूध पिएं। इससे हाइट बढ़ने के साथ ही हेल्थ भी बन जाती है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लें। सर्दियों में यह चूर्ण अधिक फायदा करता है।

2-काले तिल और अश्वगंधा का यह योग नियमित रूप से सेवन करने पर हाइट बढ़ने लगती है।

सामग्री- 1.अश्वगंधा चूर्ण। 2. काले तिल। 3. खजूर। 4. गाय का घी

बनाने की विधि- 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण और 1 से 2 ग्राम काले तिल को पीसकर चूर्ण बना लें।

ऐसे करें सेवन- इस चूर्ण को 3 से 5 खजूर में मिलाकर 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है।



3- केवल अश्वगंधा का पाउडर लेने से भी कद बढ़ने लगता है।

सामग्री- 1. अश्वगंधा की जड़ 2. चीनी 3. दूध


बनाने की विधि- थोड़ी सी मात्रा में अश्वगंधा की जड़ लेकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर रख लें।
कैसे करें सेवन How use

ऐसे करें सेवन- इस मिश्रण को 2 चम्मच मात्रा में एक गिलास दूध में डालकर पिएं। रात को सोने से पहले 45 दिनों तक इस योग का सेवन करने से शरीर सुडौल बनता है और कद बढ़ जाता है

सावधानियां,Precautions

1-फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन न करें। – खटाई न खाएं– ज्यादा मिर्च-मसाले से
परहेज करें। – इन दवाओं का सेवन गाय के दूध से करें तो बेहतर है।
मनुष्य को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है
2-पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।शरीर में लंबाई बढ़ाने का सबसे बड़ा योगदान होता है ह्यूमन ग्रोथ हॉरमोन का यानी की एचजीएच। एचजीएच पिटूइटेरी ग्लैंड से निकलता है जिससे हाइट बढ़ती है। सही प्रोटीन और न्यूटिशन न मिलने के कारण शरीर का विकास होना बंद या कम हो जाता है। और अगर आप शरीर का सही विकास करना चाहते हैं तो खान-पान का पूरा ध्यान रखना शुरु कर दें।

Saturday, March 12, 2016

गोंद के गुण, Health Benefits of Glue,Health Care,Glue,gond ke fayde,

किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पावडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है

1-नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है - पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।

2-आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है।

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3-सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।
बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है

4-हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है हींग दो किस्म की होती है 

5-एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं ।
कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है .

6-नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है 

7-पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।

8-आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है।

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9-सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है।

10-हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है । हींग दो किस्म की होती है - एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं । इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है । हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती

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11-गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है .

12-प्रपोलीश- यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने में तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।

13-ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होता है .ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम , पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है.ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है।

14-इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती
15-इसके अलावा सहजन , बेर , पीपल , अर्जुन आदि पेड़ों के गोंद में उसके औषधीय गुण मौजूद होते है

Thursday, February 25, 2016

गेंदा फूल के औषधीय गुण Health Benefits of Marigold Flowers in Hindi

Health Benefits of Marigold Flowers in Hindi
  • स्पर्मेटोमिया में है रामबाण आदिवासियों का मानना है कि जिन पुरुषों को स्पर्मेटोरिया (पेशाब और मल करते समय वीर्य जाने की शिकायत) हो उन्हे गेंदा के फूलों का रस पीना चाहिए। 
  • कान का दर्द दूर करता है गेंदा के पत्तों का रस कान में डाला जाए तो यह कान दर्द को खत्म कर देता है। आदिवासी इसकी पत्तियों को कुचलकर रस तैयार करते हैं और इस रस की 2 बूंद कान मे डालते हैं। 
  • पुरुषों को शक्ति प्रदान करता है यदि गेंदा के फूलों को सुखा लिया जाए और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन कुछ दिनों तक दिन में दो बार किया जाए तो यह पुरुषों को शक्ति प्रदान करता है। 
  • दमा और खांसी में है अचूक औषधि 
  • डांग- गुजरात के आदिवासी सूखे हुए गेंदे के फूल को मिश्री के साथ खाने की सलाह उन रोगियों को देते है जिन्हें दमा और खाँसी की शिकायत है 
  • बिवाई में राहत देता है गेंदा के पत्तों को मोम में गर्म करके ठंडा होने पर पैरों की बिवाई पर लगाने से आराम मिल जाता है। पैरो के तलवे भी चिकने हो जाते हैं 
  • बवासीर में लाभदायक है बवासीर के रोगी को यदि गेंदा की पत्तियों के रस में काली मिर्च और नमक डालकर पिलाया जाए तो आराम मिल जाता है। 
  • सूजन कम कर देता है गेंदे के फूल की पंखुडियों को एकत्र कर पीस लिया जाए और शरीर के सूजन वाले हिस्सों में लगाया जाए तो सूजन मिट जाती है 
  • घाव को जल्दी भर देता है जिन्हें सिर में फोड़े,फुन्सियां और घाव हो जाए उन्हे मैदा के साथ गेंदा की पत्तियों और फूलों के रस को मिलाकर सप्ताह में दो बार सिर पर लगाना चाहिए

Thursday, January 14, 2016

अशोक पेड़ के औषधीय गुण ,Ashoka Tree Benefits,Health Benefits of Ashoka Tree in Hindi,

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ऐसा कहा जाता है कि जिस पेड़ के नीचे बैठने से शोक नहीं होता, उसे अशोक कहते हैं, अर्थात् जो स्त्रियों के सारे शोकों को दूर करने की शक्ति रखता है, वही अशोक है। अशोक का पेड़ आम के पेड़ की तरह सदा हरा-भरा रहता है, जो 7.5 से 9 मीटर तक ऊंचा तथा अनेक शाखाओं से युक्त होता है। इसका तना सीधा आमतौर पर लालिमा लिए हुए भूरे रंग का होता है। 

यह पेड़ सारे भारत में आसानी से मिलता है। अशोक के पत्ते डंठल के दोनों ओर 5-6 के जोड़ों में 9 इंच लंबे, गोल व नोकदार होते हैं। प्रारंभ में पत्तों का रंग तांबे के रंग के समान होता है, जो बाद में लालिमा लिए हुए गहरे हरे रंग का हो जाता है। सूखने के बाद पत्तों का रंग लाल हो जाता है। पुष्प प्रारंभ में सुंदर, पीले, नारंगी रंग के होते हैं। बंसत ऋतु में लगने वाले पुष्प गुच्छाकार, सुगंधित, चमकीले, सुनहरे रंग के होते हैं, जो बाद में लाल रंग के हो जाते हैं। मई के माह में लगने वाली फलियां 4 से 10 बीज वाली होती हैं। अशोक फली गहरे जामुनी रंग की होती है। फली पहले गहरे जामुनी रंग की होती है, जो पकने पर काले रंग की हो जाती है। पेड़ की छाल मटमैले रंग की बाहर से दिखती है, लेकिन अंदर से लाल रंग की होती है।
  • गुण : आयुर्वेदिक मतानुसार अशोक का रस कड़वा, कषैला, शीत प्रकृति युक्त, चेहरे की चमक बढ़ाने वाला, प्यास, जलन, कीड़े, दर्द, जहर, खून के विकार, पेट के रोग, सूजन दूर करने वाला, गर्भाशय की शिथिलता, सभी प्रकार के प्रदर, बुखार, जोड़ों के दर्द की पीड़ा नाशक होता है।
  • होम्योपैथी मतानुसार अशोक की छाल के बने मदर टिंचर से गर्भाशय सम्बंधी रोगों में लाभ मिलता है और बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना, पेशाब कम मात्रा में होना, मासिक-धर्म के साथ पेट दर्द, अनियमित स्राव तथा रक्तप्रदर का कष्ट भी दूर होता है।
  • वैज्ञानिक मतानुसार, अशोक का मुख्य प्रभाव पेट के निचले भागों यानी योनि, गुर्दों और मूत्राशय पर होता है। गर्भाशय के अलावा ओवरी पर इसका उत्तेजक असर पड़ता है। यह महिलाओं में प्रजनन शक्ति को बढ़ाता है। इसकी रासायनिक संरचना करने पर अशोक की छाल में टैनिन 7 प्रतिशत, कैटेकॉल 3 प्रतिशत, इसेन्शियल आइल 4 प्रतिशत, कैल्शियम युक्त कार्बनिक 2 प्रतिशत, लौह खनिज 4 प्रतिशत तथा ग्लाइकोसाइड भी पाया जाता है, जिसकी क्रिया एस्ट्रोजन हार्मोन जैसी होती है। अशोक की मुख्य क्रिया स्टेरायड और कैल्शियम युक्त लवणों के यौगिक के कारण होती है।
  • मात्रा :अशोक की छाल का चूर्ण 10 से 15 ग्राम। बीज और पुष्प का चूर्ण 3 से 6 ग्राम। छाल का काढ़ा 50 मिलीलीटर।

विभिन्न रोगों में अशोक से उपचार,Ashoka Tree Benefits,Health Benefits of Ashoka Treein Hindi,

  • गर्भ स्थापना हेतु:- अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन करते रहने से स्त्री का गर्भ स्थापित होता है।
  • श्वेत प्रदर:- अशोक की छाल का चूर्ण और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर गाय के दूध के साथ 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार कुछ हफ्ते तक सेवन करते रहने से श्वेत प्रदर नष्ट हो जाता है।
  • खूनी प्रदर:- अशोक की छाल, सफेद जीरा, दालचीनी और इलायची के बीज को उबालकर काढ़ा तैयार करें और छानकर दिन में 3 बार सेवन करें।
  • योनि के ढीलेपन के लिए:- अशोक की छाल, बबूल की छाल, गूलर की छाल, माजूफल और फिटकरी समान भाग में पीसकर 50 ग्राम चूर्ण को 400 मिलीलीटर पानी में उबालें, 100 मिलीलीटर शेष बचे तो उतार लें, इसे छानकर पिचकारी के माध्यम से रोज रात को योनि में डालें, फिर 1 घंटे के पश्चात मूत्रत्याग करें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से योनि तंग (टाईट) हो जायेगी।
  • पेशाब करने में रुकावट:- अशोक के बीज पानी में पीसकर नियमित रूप से 2 चम्मच की मात्रा में पीने से मूत्र न आने की शिकायत और पथरी के कष्ट में आराम मिलता है।
  • मुंहासे, फोड़े-फुंसी:- अशोक की छाल का काढ़ा उबाल लें। गाढ़ा होने पर इसे ठंडा करके, इसमें बराबर की मात्रा में सरसों का तेल मिला लें। इसे मुंहासों, फोड़े-फुंसियों पर लगाएं। इसके नियमित प्रयोग से वे दूर हो जाएंगे।
  • मंदबुद्धि (बृद्धिहीन):- अशोक की छाल और ब्राह्मी का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच सुबह-शाम एक कप दूध के साथ नियमित रूप से कुछ माह तक सेवन करें। इससे बुद्धि का विकास होता है।
  • सांस फूलना :- पान में अशोक के बीजों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में चबाने से सांस फूलने की शिकायत में आराम मिलता है।
  • खूनी बवासीर :- *अशोक की छाल और इसके फूलों को बराबर की मात्रा में लेकर रात्रि में एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह पानी छानकर पी लें। इसी प्रकार सुबह भिगोकर रखी छाल और फूलों का पानी रात्रि में पीने से शीघ्र लाभ मिलता है।अशोक की छाल का 40-50 मिलीलीटर काढ़ा पिलाने से खूनी बवासीर में खून का बहना बंद हो जाता है।"
  • श्वास :- अशोक के बीजों के चूर्ण की मात्रा एक चावल भर, 6-7 बार पान के बीड़े में रखकर खिलाने से श्वास रोग में लाभ होता है।
  • त्वचा सौंदर्य :- अशोक की छाल के रस में सरसों को पीसकर छाया में सुखा लें, उसके बाद जब इस लेप को लगाना हो तब सरसों को इसकी छाल के रस में ही पीसकर त्वचा पर लगायें। इससे रंग निखरता है।
  • वमन (उल्टी) :- अशोक के फूलों को जल में पीसकर स्तनों पर लेप कर दूध पिलाने से स्तनों का दूध पीने के कारण होने वाली बच्चों की उल्टी रुक जाती है।
  • रक्तातिसार :- अशोक के 3-4 ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्तातिसार में लाभ होता है।
  • मासिक-धर्म में खून का अधिक बहना :- अशोक की छाल 80 ग्राम और 80 मिलीलीटर दूध को डालकर चौगुने पानी में तब तक पकायें जब तक एक चौथाई पानी शेष न रह जाए, उसके बाद छानकर स्त्री को सुबह-शाम पिलायें। इस दूध का मासिक-धर्म के चौथे दिन से तब तक सेवन करना चाहिए, जब तक खून का बहना बंद न हो जाता हो।
  • स्वप्नदोष :- स्त्रियों के स्वप्नदोष में 20 ग्राम अशोक की छाल, कूटकर 250 मिलीलीटर पानी में पकाएं, 30 ग्राम शेष रहने पर इसमें 6 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।
  • पथरी :- अशोक के 1-2 ग्राम बीज को पानी में पीसकर नियमित रूप से 2 चम्मच की मात्रा में पिलाने से मूत्र न आने की शिकायत और पथरी के कष्ट में आराम मिलता है।
  • अस्थिभंग (हड्डी का टूटना) होने पर :- अशोक की छाल का चूर्ण 6 ग्राम तक दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से तथा ऊपर से इसी का लेप करने से टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है और दर्द भी शांत हो जाता है।
  • गर्भाशय की सूजन :- *अशोक की छाल 120 ग्राम, वरजटा, काली सारिवा, लाल चंदन, दारूहल्दी, मंजीठ प्रत्येक की 100-100 ग्राम मात्रा, छोटी इलायची के दाने और चन्द्रपुटी प्रवाल भस्म 50-50 ग्राम, सहस्त्रपुटी अभ्रक भस्म 40 ग्राम, वंग भस्म और लौह भस्म 30-30 ग्राम तथा मकरध्वज गंधक जारित 10 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी औषधियों को कूटछानकर चूर्ण तैयार कर लेते हैं। फिर इसमें क्रमश: खिरेंटी, सेमल की छाल तथा गूलर की छाल के काढ़े में 3-3 दिन खरल करके 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लेते हैं। इसे एक या दो गोली की मात्रा में मिश्रीयुक्त गाय के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। इसे लगभग एक महीने तक सेवन कराने से स्त्रियों के अनेक रोगों में लाभ मिलता है। इससे गर्भाशय की सूजन, जलन, रक्तप्रदर, माहवारी के विभिन्न विकार या प्रसव के बाद होने वाली दुर्बलता नष्ट हो जाती है।
  • जरायु (गर्भाशय) के किसी भी दोष में अशोक की छाल का चूर्ण 10 से 20 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह क्षीरपाक विधि (दूध में गर्म कर) सेवन करने से अवश्य ही लाभ मिलता है। इससे गर्भाशय के साथ-साथ अंडाशय भी शुद्ध और शक्तिशाली हो जाता है। "
  • (मासिक धर्म का कष्ट से आना) :- अशोक की छाल 10 से 20 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन क्षीरपाक विधि (दूध में गर्म करके) प्रतिदिन पिलाने से कष्टरज (माहवारी का कष्ट के साथ आना), रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर आदि रोग ठीक हो जाते हैं। यह गर्भाशय और अंडाशय में उत्तेजना पैदा करती है और उन्हें पूर्ण रूप से सक्षम बनाती है।
  • खूनी अतिसार :- 100 से 200 ग्राम अशोक की छाल के चूर्ण को दूध में पकाकर प्रतिदिन सुबह सेवन करने से रक्तातिसार की बीमारी समाप्त हो जाती है।
  • मासिक-धर्म सम्बंधी परेशानियां :- अशोक की छाल 10 ग्राम को 250 मिलीलीटर दूध में पकाकर सेवन करने से माहवारी सम्बंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
  • प्रदर रोग :- *अशोक की छाल को कूट-पीसकर कपड़े से छानकर रख लें। इसे 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से सभी प्रकार के प्रदर में आराम मिलता है।
  • अशोक की छाल के काढ़े को दूध में डालकर पका लें, इसे ठंडा कर स्त्री को उसके शक्ति के अनुसार पिलाने से प्रदर में बहुत लाभ मिलता है।
  • लगभग 20-24 ग्राम अशोक की छाल लेकर इससे आठ गुने पानी के साथ पकाकर चतुर्थांश शेष काढ़ा बना लें और फिर 250 मिलीलीटर दूध के साथ उबालकर रोगी को पिलायें। इससे सभी तरह के प्रदर रोग मिट जाते हैं।
  • अशोक की छाल को चावल के धोवन के पानी के साथ पीसकर छान लें। इसमें थोड़ी मात्रा में शुद्ध रसांजन और शहद डालकर पीयें। इससे सभी तरह के प्रदर में लाभ होता है।
  • 2-ग्राम अशोक के बीज, ताजे पानी के साथ ठंडाई की तरह पीसे, उसमें सही मात्रा में मिश्री मिलाकर रोगी को पिलायें। इससे रक्तप्रदर और मूत्र आने में रुकावट, पथरी सभी में बहुत अधिक लाभ मिलता है।
  • अशोक के फूलों का रस शहद में मिलाकर पीने से प्रदर में आराम मिलता है।
  • अशोक की छाल के काढ़े में वासा पंचाग का चूर्ण 2 ग्राम शहद 2 ग्राम मिलाकर पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है। इसे दिन में 2 बार सेवन करना चाहिए।
  • अशोक की छाल के काढे़ से योनि का धोये तो इससे खून के बहाव को रोकने में सहायता मिलती है। इससे रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर तथा योनि की सड़न में भी लाभ होता है।
  • अशोक की छाल का काढ़ा, सफेद फिटकरी के चूर्ण में मिलाकर गुप्तांग (योनि) में पिचकारी देने से दोनों प्रकार के प्रदर और उनकी विभिन्न बीमारियां मिट जाती हैं।
  • अशोक और पुनर्नवा मिश्रित काढ़े से योनि का प्रक्षालन करने से योनि की सूजन में लाभ होता है और खून का बहाव भी कम हो जाता है। इससे प्रदर रोग और योनि की सूजन भी मिट जाती है।
  • 100 ग्राम अशोक की छाल और बबूल की छाल, 50-50 ग्राम लोध्र की छाल और नीम के सूखे पत्ते को जौकूट (पीस) करें और चौगुने पानी में गर्म कर लें। जब आधा पानी ही रह जाये तो इसे उतारकर छान लें। ठंडा होने पर बोतल में भरकर रख लें। इस काढे़ से योनि को धोयें। इससे प्रदर में फायदा होता है।
  • अशोक की छाल 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय चूर्ण बनाकर दूध में उबालकर सेवन करने से लाभ मिलता है। यह रक्तप्रदर, कष्टरज और श्वेतप्रदर आदि दोषों से मुक्ति दिलाकर गर्भाशय और अंडाशय को पूर्ण सक्षम और सबल बना देता है।
  • अशोक की छाल के 40-50 मिलीलीटर काढ़े को दूध में मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से श्वेत प्रदर और रक्त प्रदर में लाभ होता है।
  • अशोक की 3 ग्राम छाल को चावल के धोवन (चावल को धोने से प्राप्त पानी) में पीस लें, फिर छानकर इसमें 1 ग्राम रसौत और 1 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से सुबह-शाम सेवन करें। इससे सभी प्रकार के प्रदर में लाभ होगा। इस प्रयोग के साथ इसकी छाल के काढ़े में फिटकरी मिलाकर योनि में इसकी पिचकारी लेनी चाहिए।
  • अशोक के 2-3 ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्त प्रदर में लाभ होता है। इसकी अंतर छाल का महीन चूर्ण 10 ग्राम, साठी चावल का चूर्ण 50 ग्राम, मिश्री चूर्ण 10 ग्राम, शहद 3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से रक्तप्रदर में विशेष लाभ होता है। इसे दिन में तीन बार सेवन करें

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