Friday, October 16, 2026

मांसपेशियों में खिंचाव,Home Remedies for Pulled Muscle in Hindi,


Treatment Of Pulled Muscle‎ in Hindi,

मांसपेशियों का दर्द या ऐंठन आमतौर पर पाई जाने वाली समस्याओं में से एक है। और यह एक से अधिक मांसपेशियों में हो सकता है। मांसपेशियों के दर्द में, ऊतक के लिगामेंट, टेंडोंस, फेशिया, और मांसपेशियों के संपर्क में आनेवाले कोमल ऊतकों और हड्डियों में दर्द हो सकता है।

कभी काम करते-करते, दिनचर्या में भाग दौड़, कभी खेलते या दौड़ते में और कभी यूं ही सामान्य अवस्था में अचानक मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। इस खिंचाव को हल्के में न लें यह एक बड़ी समस्या भी बन सकती है अधिक व्यायाम करने से भी मांसपेशियों में दर्द हो जाता है। इस स्थिति में हमारे शरीर को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इस अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए मांसपेशियों में अवायुश्वसन होता है जिसके कारण लेक्टिक एसिड एकत्रित होने लगता है। इस लेक्टिक एसिड के कारण मांसपेशियों में थकान और दर्द होता है।

मांसपेशियों में खिंचाव आने के कारण 

  • अनियमित जीवन शैली और गलत खान-पान इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है. शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिलने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. अधिक वजन होने से भी कमर, घुटने में दर्द जैसी समस्या होती है. 
  • पेट बढ़ने से रीढ़ पर तनाव बढ़ता है, जिससे कमर दर्द शुरू हो जाता है. अचानक झुकने, वजन उठाने, झटका लगने, गलत तरीके से उठने-बैठने और सोने, व्यायाम न करने से भी कमर दर्द या मांसपेशियों का दर्द हो सकता है. 
  • ऊबड़-खाबड़ रास्तों में तेज ड्राइविंग से भी रीढ़ की डिस्क प्रभावित हो सकती है. कठोर श्रम या चोट हो सकता है कारण मांसपेशियों में दर्द पूरे शरीर की स्थिति का संकेत हो सकता है. 
  • शारीरिक परिश्रम या कठोर श्रम के कारण तनाव, थकान या मांसपेशियों में चोट, इन्फ्लूएंजा, लाइम डिजीज, मलेरिया, डेंगू, मांसपेशी का फोड़ा तथा संक्रमण की वजह से भी दर्द हो सकता है. इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन जैसे-पोटैशियम या कैल्शियम की मात्रा बहुत कम होना भी इसका कारण हो सकता है.

मांसपेशियों में खिंचाव आने के लक्षण:

जब मसल्स का खिचांव होता है तो तेज दर्द के साथ कुछ अन्य लक्षण भी है जोे आज हम आपको बता रहे है।
  • यदि किसी खुली चोट की वजह से मसल्स फटी या टूटी हैं तो खुला घाव नजर आना।
  • जहा दर्द हो रहा हो उस जगह पर सूजन।
  • चलने-फिरने में भी कठिनाई आना और दर्द होना।
  • बेचैन करने वाला दर्द और आराम करने पर भी दर्द का बने रहना।
  • प्रभावित स्थान पर त्वचा के रंग का बदल जाना व अकड़न महसूस होना।
  • कमजोरी महसूस होना।

मांसपेशियों में खिंचाव आने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार

  • मांसपेशियों में खिंचाव आने पर रोगी व्यक्ति को पूरी तरह से आराम करना चाहिए।
  • रोगी को अपनी मांसपेशियों पर हर 2 घण्टे के अन्तराल पर आधे घण्टे के लिए बर्फ से मालिश करनी चाहिए।
  • मांसपेशियों में खिंचाव से पीड़ित रोगी को गर्म तथा ठंडा स्नान करना चाहिए।
  • मांसपेशियों में खिंचाव से पीड़ित रोगी को विटामिन `सी´ की मात्रा वाली चीजों का भोजन में अधिक सेवन करना चाहिए।
  • जडी बूटियाँ और लेप कुछ जडी बूटियों में एंटी इम्फ्लेमेट्री (प्रदाहनाशी) और आरामदायक गुण होते हैं। जबकि हर्बल लेप (जडी बूटियों के अर्क का अर्द्ध ठोस रूप जो लोशन, जेल या बामके रूप में होता है) त्वचा तथा ऊतकों में अंदर तक प्रवेश करते हैं तथा आराम पहुंचाते हैं।
  • मांसपेशियों में खिंचाव आने पर तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप दर्द जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • प्रभावित स्थान पर बर्फ लगाने से सूजन, ब्लीडिंग और दर्द में आराम मिलता है। मांसपेशियों में खिंचाव आने के बाद जितनी जल्दी आप बर्फ लगा सकते हैं, लगा लें। आप कितनी भी बार बर्फ लगा सकते हैं। बस ये ध्यान में रखें कि जब भी बर्फ लगाएं, 15 मिनट से ज्यादा देर के लिए न लगाएं।
  • तेल से मालिश मालिश से मांसपेशियों में रक्त परिसंचरण बढ़ता है जिससे मांसपेशियों को गर्मी मिलती है तथा यह लेक्टिक एसिड को दूर करता है जबकि तेल मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है और दर्द से राहत दिलाता है। विभिन्न प्रकार के तेल जैसे पाइन, लैवेंडर, अदरक और पिपरमेंट का तेल मांस पेशियों के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं।
  • एप्सम सॉल्ट (Epsom salt) गर्म पानी की एक बाल्टी में या टब में एक कप एप्सम नमक डाल कर प्रभावित स्थान को इस पानी में तकरीबन 15 मिनट के लिए डुबा कर रखें। एक हफ्ते में इस प्रक्रिया को दो से तीन बार कर सकते हैं। लेकिन हृदय से संबंधित, शुगर या उच्च रक्तचाप (high blood pressure) की समस्या से पीड़ित व्यक्ति इस विधि को न करें।
  • गर्म और ठंडा सेक (Hot and cold fomentation) गर्म पानी से नहाने से मांसपेशियों की सिकाई होती है और उन्हें आराम भी मिलता है। इस तरह से मांसपेशियों की अकड़न भी दूर होती है। लेकिन इसके उलट यदि सूजन महसूस हो रही हो तो बर्फ के टुकड़ों को पतले कपड़े में लपेटकर उससे सिकाई करनी चाहिए।
  • मैग्नीशियम युक्त खाना (Magnesium rich food) मैग्नीशियम की कम मात्रा से भी मांसपेशियों में दर्द और खिंचाव हो सकता है। इसके लिए खाने में कद्दू के बीज (pumpkin seeds), काली बीन्स (black beans), सूरजमुखी के बीज (sunflower seeds), बादाम और काजू को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। जिससे शरीर को प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम मिल सके।
  • सेब का सिरका (Apple cider vinegar) सेब के सिरके की कुछ मात्रा एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से मसल्स के दर्द से राहत मिलती है। इसके अलावा यदि इस तरह पीना कठिन लगे तो एक गिलास पानी में दो चम्मच सिरका, एक चम्मच शहद और कुछ पत्तियां पुदीने की मिलाकर भी पी जा सकती हैं।
  • ऑयल (Oil) मसल पेन में राहत के लिए कैमोमाइल, पेपरमिंट, लेवेंडर आदि तेल में एक या दो चम्मच, नारियल या ऑलिव ऑयल मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए।
  • चेरी जूस (Cherry juice) मसल पेन से राहत के लिए चेरी जूस भी पीना चाहिए। चेरी जूस पीने से मसल्स का खिंचाव कम होता है साथ ही यह मांसपेशियों को राहत भी देता है।
  • मसाज (Massage) मसाज करने से शरीर का रक्तसंचार बेहतर होता है जो कि दर्द को तेजी से ठीक करने में मदद करता है। यदि मसाज करने के लिए अच्छे तेलों का प्रयोग किया जाए तो असर दोगुना हो जाता है।
  • मिर्च में मौजूद कैप्सेसिन (capsaicin) भी दर्द की खास दवा है। बाजार में मिर्च से तैयार कई तरह की दर्द निवारक क्रीम मिलती हैं, लेकिन इन्हें आप घर भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए नारियल या जैतून के तेल को गरम करके इसमें एक बड़ा चम्मच लाल मिर्च मिलाकर इसे ठंडा करें। इसके बाद इसमें एलोवेरा जेल मिलाएं। इस तरह से तैयार उत्पाद को यदि प्रभावित स्थान पर लगाकर हल्के हाथ से मालिश की जाए तो बेहद आराम मिलता है।
  • आराम (Rest) कई बार कुछ न करके सिर्फ आराम करना भी शरीर को बहुत लाभ दे सकता है। यदि शरीर में अकड़न महसूस हो तो कम से कम दो दिन आपको शरीर को पूरी तरह आराम देना चाहिए। इससे शरीर हल्का महसूस करता है और तनाव कम होता है जिसका सीधा असर मांसपेशियों पर भी पड़ता है।

दालचीनी के स्वास्थ्य लाभ, Health Benefits of Dalchini Cinnamon in Hindi,

दालचीनी का पौधा जितना छोटा है इसके गुण उतने ही बड़े हैं। दालचीनी की सूखी पत्तियां तथा छाल को मसालों के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसकी छाल थोड़ी मोटी, चिकनी तथा हल्के भूरे रंग की होती है। दालचीनी मोटापा कम करने के साथ-साथ कई बीमारियों को भी दूर करता है। यह रक्तशोधक भी है। शहद तथा दालचीनी को मिलाकर दिल की बीमारियों, कोलेस्ट्रॉल, त्वचा रोग, सर्दी जुकाम, पेट की बीमारियों के लिए फायदेमंद है।

Health Benefits of Dalchini

  • सर्दी जुकाम के लिए-सर्दी-जुकाम होने पर दालचीनी का प्रयोग करना चाहिए। एक चम्मच शहद में थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर सुबह-शाम लेने से खांसी-जुकाम में आराम मिलता है। हल्के गर्म पानी में एक चुटकी दालचीनी पाउडर तथा एक चुटकी पिसी काली मिर्च शहद में मिलाकर पीने से जुकाम तथा गले की खराश दूर होती है। इसके पाउडर को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाने से ठंडी हवा से होने वाले सिर दर्द में आराम मिलता है।
  • जोड़ों के दर्द के लिए-जोड़ो के दर्द को कम करने के लिए दालचीनी का प्रयोग कीजिए। हल्के गर्म पानी में दालचीनी पाउडर और थोड़े से शहद को मिलाकर शरीर में दर्द वाले अंग पर लगाकर हल्‍के हाथों से मालिश करने से फायदा होता है। एक कप हल्के गर्म पानी में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से भी जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
  • त्वचा के रोगों में फायदेमंद-त्‍वचा की समस्‍या होने पर भी दालचीनी बहुत फायदेमंद है। त्वचा में खाज और खुजली होने पर दालचीनी पाउडर तथा शहद बराबर मात्रा में लेकर पेस्‍ट बना लें। इस पेस्‍ट को लगाने से त्‍वचा की यह समस्‍या दूर होती है। दालचीनी के पाउडर में थोड़ा सा नीबूं का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से कील मुंहासे दूर होते हैं।
  • पेट की समस्‍या-अपच जैसी पेट की समस्‍या होने पर दालचीनी का प्रयोग करने से आराम मिलता है। इसके अलावा दालचीनी के प्रयोग से उलटी तथा दस्त में आराम मिलता है। एक चम्मच शहद के साथ थोड़ा सा दालचीनी पाउडर मिलाकर लेने से पेट दर्द और एसिडिटी में आराम मिलता है तथा भोजन भी आसानी से पच जाता है और पेट की समस्‍या नहीं होती।
  • मोटापे के लिए-मोटे लोगों को भी दालचीनी का प्रयोग करना चाहिए। चाय में एक चम्मच दाल चीनी पाउडर मिलाकर एक गिलास जल में उबालें, फिर इसे उतारकर इसमें दो बड़े चम्मच शहद मिलाकर सुबह नाश्ते से लगभग आधा घंटा पहले पियें। ऐसा रात को सोने के पहले करें। नियमित ऐसा करने से शरीर की अनावश्यक चर्बी समाप्त होती है और अधिक केलोरी वाला भोजन लेने पर भी शरीर में चर्बी नहीं बढ़ती और वजन कम होता है।
  • दिल के मरीजों के लिए-शहद और दालचीनी के पाउडर का पेस्ट बनाकर रोटी के साथ खाने से धमनियों में कोलेस्‍टॉल जमा नहीं होगा और दिल के दौरे की संभावना को कम किया जा सकता है। जिन लोगों को पहले भी हार्ट अटैक दौरा पड़ चुका है वे अगर इस उपचार को करेंगे तो भविष्‍य में हार्ट अटैक की संभावना को कम कर सकेंगे।
  • बढ़ा हुआ कोलेस्‍ट्रॉल-बढ़े हुए कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने के लिए दालचीनी का प्रयोग कीजिए। दालचीनी के दो बड़े चम्मच शहद और तीन चम्मच दालचीनी पावडर को हल्‍के गरम आधा लीटर पानी में मिलाकर लें। इससे सिर्फ 2 घंटे में खून का कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर 10 प्रतिशत तक नीचे आ जाता है, और दिन में इसे तीन बार लेते रहने से बढ़ा हुआ कोलेस्‍ट्रॉल कम हो जाता है।
  • कैंसर में भी फायदेमंद-कैंसर जैसे घातक रोग के लिए भी दालचीनी फायदेमंद है। जापान और आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने आमाषय और बोन कैंसर की बढ़़ी हुई स्थिति को दालचीनी और शहद का उपयोग करके इसे पूरी तरह काबू किया जा सकता है। कैंसर के रोगियों को एक बड़ा चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी के पावडर को गरम पानी के साथ एक महीने तक लेने से आराम मिलता है।
  • बहरापन दूर करें-शहद और दालचीनी पाउडर को बराबर मात्रा में मिलाकर एक-एक चम्‍मच सुबह और रात को लेने से सुनने की शक्ति बढ़ती है। कान से कम सुनाई देने की समस्‍या होने पर कान में दालचीनी के तेल की कुछ बूंदें डालने से आराम मिलता है।

Thursday, January 08, 2026

 बिना जिम जाए वजन कम करने के 5 आसान और असरदार तरीके


बिना जिम जाए वजन कम करने के 5 आसान और असरदार तरीके

प्रस्तावना (Introduction): आज के समय में बढ़ता वजन और मोटापा एक बड़ी समस्या बन चुका है। खराब जीवनशैली और डेस्क जॉब की वजह से शरीर में चर्बी जमा होने लगती है। बहुत से लोग वजन कम करने के लिए जिम जाना चाहते हैं, लेकिन समय की कमी के कारण नहीं जा पाते। अच्छी बात यह है कि आप अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करके और घरेलू नुस्खों की मदद से घर पर ही अपना वजन कम कर सकते हैं।

1. सुबह खाली पेट गुनगुना पानी और नींबू (Lemon & Honey Water) वजन घटाने का सबसे पुराना और कारगर तरीका है सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी से करना। एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) तेज होता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालने में मदद करता है और फैट बर्निंग प्रोसेस को शुरू करता है।

2. प्रोटीन युक्त नाश्ता करें (High Protein Breakfast) अपने दिन की शुरुआत ऐसे नाश्ते से करें जिसमें प्रोटीन भरपूर हो, जैसे कि अंकुरित अनाज (Sprouts), पनीर, या ओट्स। प्रोटीन खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे आप दिन भर में फालतू कैलोरी खाने से बच जाते हैं। शक्कर और मैदे से बनी चीजों को नाश्ते में बिल्कुल शामिल न करें।

3. ग्रीन टी का सेवन (Benefits of Green Tea) साधारण चाय या कॉफी की जगह दिन में दो बार बिना चीनी वाली ग्रीन टी पिएं। ग्रीन टी में 'कैटेचिन' नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघलाने में मदद करता है। इसे दोपहर के खाने के एक घंटे बाद पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है।

4. रात का खाना हल्का और जल्दी रखें (Light & Early Dinner) वजन बढ़ने का एक बड़ा कारण रात को भारी खाना और तुरंत सो जाना है। कोशिश करें कि रात का खाना सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खा लें। रात के खाने में सूप, सलाद या मूंग दाल जैसी हल्की चीजें लें। इससे पाचन तंत्र पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर सोते समय ऊर्जा का बेहतर उपयोग कर पाता है।

5. चीनी और प्रोसेस्ड फूड से दूरी (Say No to Sugar) अगर आप सच में वजन कम करना चाहते हैं, तो चीनी (Sugar) और बाहर के जंक फूड को पूरी तरह छोड़ दें। कोल्ड ड्रिंक्स, मिठाई और ज्यादा नमक वाले चिप्स शरीर में वाटर रिटेंशन और चर्बी बढ़ाते हैं। इनकी जगह ताजे फल और ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें।

स्वास्थ्य सलाह (Expert Tip): वजन घटाने के लिए '70% डाइट और 30% एक्सरसाइज' का नियम याद रखें। घर के छोटे-मोटे काम खुद करें और लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। रोज़ाना 30 मिनट की पैदल चाल भी बड़े बदलाव ला सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion): वजन कम करना कोई रातों-रात होने वाला जादू नहीं है, इसके लिए धैर्य और अनुशासन की ज़रूरत होती है। इन घरेलू उपायों को कम से कम एक महीने तक फॉलो करें, आपको अपनी बॉडी में सकारात्मक बदलाव ज़रूर दिखेगा। BPRR Home Tips के इस लेख को अपने दोस्तों के साथ साझा करना न भूलें।

पेट की गैस और बदहजमी से तुरंत छुटकारा पाने के 5 अचूक घरेलू उपाय

 पेट की गैस और बदहजमी से तुरंत छुटकारा पाने के 5 अचूक घरेलू उपाय


प्रस्तावना (Introduction): आजकल की व्यस्त जीवनशैली और असंतुलित खान-पान की वजह से पेट में गैस (Acidity), भारीपन और बदहजमी एक आम समस्या बन गई है। ज्यादा तला-भुना खाना, समय पर न खाना और शारीरिक मेहनत की कमी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। अगर आप भी अक्सर पेट की समस्याओं से परेशान रहते हैं, तो दवाओं के बजाय आप कुछ असरदार घरेलू नुस्खे अपना सकते हैं।

1. अदरक का इस्तेमाल (Ginger for Digestion) अदरक में पाचन को सुधारने वाले औषधीय गुण होते हैं। पेट की गैस को शांत करने के लिए आप अदरक के एक छोटे टुकड़े को चबा सकते हैं या अदरक वाली चाय पी सकते हैं। अदरक पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है जिससे खाना जल्दी पचता है।

2. काला नमक और अजवाइन (Ajwain & Black Salt) गैस की समस्या के लिए अजवाइन सबसे पुराना और कारगर इलाज है। एक चम्मच अजवाइन में थोड़ा सा काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट के दर्द और गैस में तुरंत आराम मिलता है। अजवाइन में मौजूद 'थायमोल' पाचन प्रक्रिया को तेज करता है।

3. जीरा पानी का सेवन (Cumin Water) जीरा केवल खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह पेट की जलन और गैस को दूर करने में भी बहुत मददगार है। एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा उबालें और उसे छानकर ठंडा होने पर पिएं। यह एसिडिटी को कम करने में सहायक होता है।

4. हींग का लेप और सेवन (Hing/Asafoetida) छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, हींग पेट की समस्याओं के लिए रामबाण इलाज है। आप एक चुटकी हींग को गर्म पानी में मिलाकर पी सकते हैं। अगर पेट ज्यादा फूला हुआ महसूस हो रहा है, तो नाभि के आसपास हींग का लेप लगाने से भी गैस से राहत मिलती है।

5. पुदीने की पत्तियां (Mint Leaves) पुदीना अपने ठंडा करने वाले गुणों के कारण पेट की मांसपेशियों को आराम देता है। बदहजमी होने पर पुदीने की कुछ पत्तियों को चबाएं या पुदीने का शरबत बनाकर पिएं। यह पाचन क्रिया को शांत और दुरुस्त करता है।

स्वास्थ्य सलाह (Expert Tip): इन घरेलू नुस्खों के साथ-साथ यह ज़रूरी है कि आप खाना हमेशा चबा-चबाकर खाएं और खाने के तुरंत बाद बहुत सारा पानी न पिएं। रोज़ाना 15-20 मिनट की सैर आपके पाचन तंत्र को हमेशा स्वस्थ रखेगी।

निष्कर्ष (Conclusion): पेट की गैस को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि इन उपायों के बाद भी समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। उम्मीद है कि BPRR Home Tips का यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।



Sunday, January 22, 2023

अर्जुन की छाल के फायदे

अर्जुन की छाल के फायदे

अर्जुन की छाल के फायदे  

हृदय की सभी समस्याओ के लिए एक वरदान।हृदय रोगियों के लिए वरदान। 
अर्जुन वृक्ष भारत में होने वाला एक औषधीय वृक्ष है। इसे घवल, ककुभ तथा नदीसर्ज (नदी नालों के किनारे होने के कारण) भी कहते हैं। कहुआ तथा(सादड़ी नाम से बोलचाल की 

भाषा में प्रख्यात यह वृक्ष एक बड़ा सदाहरित पेड़ है। लगभग 60 से 80 फीट ऊँचा होता है तथा हिमालय की तराई, शुष्क पहाड़ी क्षेत्रों में नालों के किनारे तथा बिहार,मध्य प्रदेश में काफी पाया जाता है। इसकी छाल पेड़ से उतार लेने पर फिर उग आती है। छाल का ही प्रयोग होता हैआयुर्वेद :आयुर्वेद ने तो सदियों 

पहले इसे हृदय रोग की महान औषधि घोषित कर दिया था। आयुर्वेद के प्राचीन विद्वानों में वाग्भट, चक्रदत्त और भावमिश्र ने इसे हृदय रोग की महौषधि स्वीकार किया है। 

अर्जुन की छाल के गुण

  • यह शीतल, हृदय को हितकारी, कसैला और क्षत, क्षय, विष, रुधिर विकार, मेद, प्रमेह, व्रण, कफ तथा पित्त को नष्ट करता है।अभी तक अर्जुन से प्राप्त विभिन्न घटकों के प्रायोगिक जीवों पर जो प्रभाव देखे गए हैं, उससे इसके वर्णित गुणों की पुष्टि ही होती है। विभिन्न प्रयोगों द्वारा पाया गया हे कि अर्जुन से हृदय की पेशियों को बल मिलता है, 
  • स्पन्दन ठीक व सबल होता है तथा उसकी प्रतिमिनट गति भी कम हो जाती है। स्ट्रोक वाल्यूम तथा कार्डियक आउटपुट बढ़तती है। हृदय सशक्त व उत्तजित होता है। इनमें रक्त स्तंभक व प्रतिरक्त स्तंभक दोनों ही गुण हैं। 
  • अधिक रक्तस्राव होने की स्थिति से या कोशिकाओं की रुक्षता के कारण टूटने का खतरा होने परयह  स्तंभक की भूमिका निभाता है, लेकिन हृदय की रक्तवाही नलिकाओं (कोरोनरी धमनियों) में थक्का  नहीं बनने देता तथा बड़ी धमनी से प्रति मिनट भेजे जाने वाले रक्त के आयतन  में वृद्धि करता है। 
  • इस प्रभाव के कारण यह शरीर व्यापी तथा वायु कोषों में जमे पानी को मूत्र मार्ग से बाहर निकाल................... जिस किसी भी ईन्सान की धमनियों में खून के धक्के जमे हुए है..? या इनमे प्लाक जमा हुआ हैं।या किन्ही कारणवश डॉक्टर ने आपको ANGIOPLASTY के लिए कह दिया हैं।
  • या कैसी भी  गंभीर समस्या हैं।तो एक बार ये ज़रूर आज़माये।अर्जुन के पैड की छाल का काढा ”हृदय रोग का इलाज सिर्फ 10या 15 रुपैये में।
  • अर्जुन छाल।हृदय की सभी समस्याओ के लिए एक वरदान।हृदय रोगियों के लिए वरदान।अर्जुन की छाल को 400 ग्राम ले कर 500 मिली पानी में पकाये 200 मिली रहने  पर उतार ले और हर रोज़ सुबह शाम 10-10 मिली ले।इस से खून में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल कम हो जायेगा, खून के धक्के साफ़ हो जायेंगे,और ANGIOPLASTY की नौबत नहीं आएगी। अर्जुन के सेवन से अलसर में भी आशातीत लाभ होता हैं। अर्जुन की चाय भी बना कर पी जा सकती हैं। 
  • साधारण चाय की जगह अर्जुन की कुटी हुई छाल डालिये। और चाय की तरह बना कर पीजिये। अगर आपको अर्जुन के पेड़ न मिले तो अर्जुन छाल आपको रामदेव आयुर्वेद कीदुकानो से मिल जाएगी ये 100 ग्राम 15 रुपैये की आएगी। 
  • अनेको हृदय रोगियों को इस से राहत मिली हैं। अर्जुन की छाल बाजार मे पंसारी की दुकान पर भी मिलती हैैं। अर्जुनकी छाल की काढा को पक्षा घात ( PARALYSIS ) के मरीजों को भी देते हैं जिस से उनको बहुत लाभ होता हैं। varicose veins में भी ये बहुत उपयोगी हैं, अलसर के रोगियों के लिए भी ये बहुत लाभदायक हैं। अर्जुन की छाल और जंगली प्याज के कंदों का चूर्ण समान मात्रा में तैयार कर प्रतिदिन आधा चम्मच दूध के साथ लेने से हृदय रोगों में लाभ मिलता है।
  • यह धारियों युक्त फलों की वजह से आसानी से पहचाना जा सकता है। इसके फल कच्चेपन में हरे और पकने पर भूरे-लाल रंग के होते हैं। हृदय रोगियों के लिए पुनर्नवा का पांचांग (समस्त पौधा) का रस और अर्जुन छाल की समान मात्रा बहुत फायदेमंद होती है। अर्जुन की छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम गुड़, शहद या दूध के साथ दिन में 2 या 3 बार लेने से दिल के मरीजों को काफी फायदा होता है। 
  • अर्जुन की छाल के चूर्ण को चाय के साथ उबालकर पीने से हृदय और उच्च रक्तचाप की समस्याओं में तेजी से आराम मिलता है। चाय बनाते समय एक चम्मच इस चूर्ण को डाल दें तो इससे उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाता है। 
  • अर्जुन की चाय हॄदय विकारों से ग्रस्त रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होती है। अर्जुन की छाल का चूर्ण (1 ग्राम) एक कप पानी में खौलाकर उसमें दूध व चीनी आवश्यकतानुसार मिलाकर पिएं तो फायदा  होताहै। हृदय की सामान्य धड़कन जब 72 से बढ़कर 150 से ऊपर रहने लगे तो एक गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर नियमित सेवन करने से शीघ्र ही धड़कन सामान्य हो जाती है। 
  • यदि हृदयघात जैसा महसूस हो तो अर्जुन का चूर्ण जुबान पर रख लेने से तेजी से फ़ायदा होता है। इससे हृदयाघात के बुरे असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 
  • अर्जुन छाल का चूर्ण और देसी जामुन के बीजों के चूर्ण की समान मात्रा लेकर मिला लिया जाए और प्रतिदिन रोज रात सोने से पहले आधा चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी में मिलाकर लें। यह नुस्खा डायबिटीज़ के रोगियो के लिए फायदेमंद होता है। अर्जुन के कच्चे ताजे हरे फलों को चबाया जाए तो यह मुख दुर्गन्धनाशक होता है। 
  • दिन में कम से कम 2 बार किया जाना चाहिए। अर्जुन छाल पीसकर शहद के साथ मिलाकर लगाने से झाइयां दूर होती है | हृदय रोगियों के लिए वरदान है अर्जुन की छाल 
  • हृदय रोग, रक्त विकार, कास, पयूमेह, प्रदर, जीर्णज्वर, सामान्य दौर्बल्य। मात्रा ५ से १० ग्राम छाल चूर्ण अर्जुन में चूने के अंश होने से रक्त स्तम्भक है। कैल्शियम तथा कषायीन होने से यह रक्त संग्राहक है। आँतों में यह प्रोटीन के साथ मिलकर एक घन आवरण बनाता है व विषों के प्रभाव से रक्षा करता है। 
  • अर्जुन में हृदय शैथिल्य और उत्तेजक दोनों गुण होने से हृदय रोगों की यह सर्वश्रेष्ठ औषधि है। 
  • वातज हृदय रोग में बलामूल चूर्ण एवं अर्जुन चूर्ण को पिप्पली एवं हरीति की क्वाथ से या मधु के साथ सेवन करने से लाभ होता है।पित्तज हृदय रोग में अर्जुन चूर्ण ३ ग्राम, शतावरी चूर्ण १ ग्राम, मक्खन मिश्री से सेवन करें।कपफज हृदय रोग में इसका चूर्ण पोहकर मूलचूर्ण के साथ सेवन करने से लाभ होता है।त्रिदोषज 
  • हृदय रोग में अर्जुन, मुलहठी, पुष्कर मूल, बलामूल चूर्ण को मधु के साथ सेवन करने से लाभ होता है।दूध के साथ इसकी जड का चूर्ण सेवन करने से टूटी हड्डी जल्दी जुडती है व चोट के कारण निशान, नीले पडे हो तो वह भी जल्दी ठीक होते है।इसकी छाल को दूध में पकाकर सेवन करने से हृदय रोग (समस्त) दूर होते हैं व खून की चर्बी कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है। 
  • इसकी छाल का क्वाथ पीने से मूत्रा को रोकने के कारण हुई उदावर्त्त (गैस का उपर की ओर चढना) मिटती है व मूत्राघात हो तो वह भी दूर होती है।विषैले कीटों के दंश पर इसकी छाल का लेप करने से जलन मिटती है।तिल के तेल में इसका चूर्ण मिलाकर कुल्ले करने से मुखपाक हटता है।इसके पत्तों का रस कान में डालने से कर्णशूल मिटता है।इसका क्वाथ पीने से ज्वर छूटता है।
  • इसके चूर्ण को मधु में मिलाकर लेप करने से मुख की झाइयाँ मिटती है।जल से इसका चूर्ण लेने से पित्त विकार मिटते है।दूध से इसका चूर्ण लेने से रक्त पित्त मिटता है व हृदय को मजबूती मिलती है।उच्च रक्त दाब में इसका चूर्ण दूध से सेवन अत्यधिक लाभप्रद है।इसके एवं मुलहठी चूर्ण को दूध, जल के साथ सेवन करने से हृदय रोग मिटते है। 
  • इसके लिए यह उत्तम रसायन है।गेहूँ एवं अर्जुन चूर्ण को बकरी के दूध एवं गाय के घृत में पकाकर उसमें शहद मिश्री मिलाकर चाटने से अति उग्र हृदय रोग मिटता है।
  • इसके एवं गंगेरण जड की छाल के चूर्ण को दूध से सेवन करने से वायु नाश होती है।अर्जुन चूर्ण एवं श्वेत चंदन चूर्ण का क्वाथ लेने से सभी प्रकार की प्रमेह दूर होती है।
  • अर्जुन चूर्ण एवं श्वेत चंदन क्वाथ सभी प्रकार के प्रदर श्वेत या रक्त दूर होते है।अर्जुन छाल को दूध में पीसकर मधु मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार मिटता है। 
  • अर्जुन छाल एवं गंगेरण समभाग लेकर व आधा भाग एरण्ड बीज चूर्ण प्रतिदिन प्रातः सांयकाल बकरी के दूध में डालकर लगभग ५ ग्राम चूर्ण पकायें। ठण्डा होने पर विषम मात्रा १-३ या ३-१ में घृत मधु मिलाकर पिलाने से क्षय रोग मिटता है।त्वक चूर्ण, अर्जुनत्वक चूर्ण एवं चावलों का चूर्ण सेवन करने से कुष्ठ में लाभ होता है व समस्त प्रकार के त्वचागत रोग मिटते है।
  • भृंगराज एवं अर्जुनक्षार दही के पानी के साथ सेवन करने से संग्रहणी में लाभ होता है।उडद के आटे में अर्जुन छाल चूर्ण मिलाकर घृत में सेंक कर भैंस के दूध् में पकाकर सेवन करने से भस्मक तीक्ष्णाग्नि मिटती है। 
  • २ ग्राम अर्जुन त्वक चूर्ण, २ ग्राम कडुवा इन्द्र जौ चूर्ण मिलाकर शीतल जल से सेवन करने से तीव्र अतिसार मिटता है। 
  • पाण्डु रोग में इसके चूर्ण के साथ स्वर्ण माक्षिक भस्म मिलाकर गोमूत्रा यकपफजन्य मेंद्ध या मिश्रीयुक्त दुग्ध् पित्तजन्य मेंद्ध से किंवा निम्बपत्रा स्वरस आमलकी स्वरस से सेवन अत्यध्कि हितकारी है। 
  • अर्जुन छाल ३ ग्राम, गुलाब जल १५ मिली, द्राक्षरिष्ट या मृ(कासव १५ मिली की मात्रा से प्रतिदिन भोजन के पश्चात यदि गर्भवती स्त्री सेवन करें तो उसे बहुत सुंदर सन्तान की प्राप्ति होती है ।धडकन बढने में 
  • अर्जुनत्वक, सफेद खैरेटी बला मूल, गोखरू, जटामासी एवं अश्वगन्ध समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम २ बार २-२ ग्राम, दूध से सेवन करने पर उत्तम लाभ होता है।टमाटर का रस २५० ग्राम लेकर ३ ग्राम अर्जुन चूर्ण मिलाकर सेवन करने से हृदय की धडकन ठीक स्थिति में आ जाती है।

जीरा के फायदे,Jeera Khane Ke Fayde in Hindi,Health Benefits of Cumin Seeds in Hindi,

जीरा (Jeera) एक ऐसा मसाला है जिसके छौंक से दाल और सब्जियों का स्वाद बहुत बढ़ जाता है। चाट का चटपटा स्वाद भी जीरे के बिना अधूरा सा लगता है। अंग्रेजी में इसे क्यूमिन कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम क्यूमिनम सायमिनम है। यह पियेशी परिवार का एक पुष्पीय पौधा है। मुख्यत: पूर्वी भूमध्य सागर से लेकर भारत तक इसकी पैदावार अधिक होती है।दिखने में सौंफ के आकार का दिखाई देने वाला जीरा सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता यह बहुत उपयोगी भी है। यही कारण है कि कई रोगों में दवा के रूप में भी जीरे का उपयोग किया जा सकता है। जीरा के फायदे

आइए देखते हैं घरेलू नुस्खे के रूप में किन रोगों के उपचार के लिए जीरा उपयोगी है

  • भुने हुए जीरे को सूंघने से जुकाम से छीकें आना बंद हो जाता है। 
  • एक गिलास ताजी छाछ में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर भोजन के साथ लें, इससे अजीर्ण और अपच से छुटकारा मिलेगा। जीरा के फायदे
  • बच्चों को दस्त होने पर बबूल की कोमल पत्ती, अनार की कली व जीरा मिलाकर दें, लाभ होगा। 
  • आंवले को भूनकर गुठली निकालकर पीसकर धीमे भूनें। फिर उसमें स्वादानुसार जीरा, अजवाइन, सेंधा नमक और थोड़ी सी भुनी हुई हींग मिलाकर गोलियां बना लें। इन्हें खाने से भूख बढ़ती है। इतना ही नहीं, इससे डकार, चक्कर और दस्त में लाभ होता है। जीरा के फायदे
  • पानी में जीरा डालकर उबालें और छानकर ठंडा करें। इस पानी से मुंह धोने से आपका चेहरा साफ और चमकदार होता है। जीरा के फायदे
  • जीरा और सेंधा नमक महीन पीसकर मंजन करने से दांतों तथा मसूड़ों के दर्द में आराम मिलेगा और मुंह की दरुगंध नष्ट होगी। 
  • हिस्टीरिया के रोगी को गर्म पानी में भुनी हींग, जीरा, पुदीना, नींबू और नमक मिलाकर पिलाने से रोगी को तत्काल लाभ होता है। 
  • थायराइड (गले की गांठ) में एक कप पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और 
  • जीरा (Jeera) आयरन का सबसे अच्छा स्रोत है। इसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर हो जाती है। गर्भवती महिलाओं के लिए जीरा अमृत का काम करता है। 
  • जीरा (Jeera) , अजवाइन, सौंठ, कालीमिर्च, और काला नमक अंदाज से लेकर इसमें घी में भूनी हींग कम मात्रा में मिलाकर खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है। पेट का दर्द ठीक हो जाता है। 
  • जीरा (Jeera) , अजवाइन और काला नमक का चूर्ण बनाकर रोजाना एक चम्मच खाने से तेज भूख लगती है। जीरा के फायदे
  • 3 ग्राम जीरा (Jeera) और 125 मि.ग्रा. फिटकरी पोटली में बांधकर गुलाब जल में भिगो दें। आंख में दर्द होने पर या लाल होने पर इस रस को टपकाने से आराम मिलता है। 
  • दही में भुने जीरे का चूर्ण मिलाकर खाने से डायरिया में आराम मिलता है। 
  • जीरे को नींबू के रस में भिगोकर नमक मिलाकर खाने से जी मिचलाना बंद हो जाता है। 
  • जीरा में थोड़ा-सा सिरका डालकर खाने से हिचकी बंद हो जाती है। 
  • जीरे को गुड़ में मिलाकर गोलियां बनाकर खाने से मलेरिया में लाभ होता है। 
  • एक चुटकी कच्चा जीरा खाने से एसिडिटी में तुरंत राहत मिलती है। 
  • डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए एक छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ लेने से लाभ होता है। जीरा के फायदे
  • कब्जियत की समस्या हो तो जीरा, काली मिर्च, सौंठ और करी पाउडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं।राहत मिलेगी। 
  • पके हुए केले को मैश करके उसमें थोड़ा-सा जीरा मिलाकर रोजाना रात के खाने के बाद लें। अनिद्रा की समस्या दूर हो जाएगी। जीरा के फायदे
  • इसमें एंटीसेप्टिक तत्व भी पाया जाता है। सीने में जमे हुए कफ को बाहर निकलने के लिए जीरे को पीसकर फांक लें। यह सर्दी-जुकाम से भी राहत दिलाता है। 
  • हींग को उबाल लें। इस पानी में जीरा, पुदीना, नींबू और नमक मिलाकर पिलाने से हिस्टीरिया के रोगी को तत्काल लाभ होता है। जीरा के फायदे
  • थायराइड (गले की गांठ) में एक कप पालक के रस के साथ एक चम्मच शहद और चौथाई चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है। 
  • मेथी, अजवाइन, जीरा और सौंफ 50-50 ग्राम और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर पीस लें। एक चम्मच रोज सुबह सेवन करें। इससे शुगर, जोड़ों के दर्द और पेट के विकारों से आराम मिलेगा। 
  • प्रसूति के पश्चात जीरे के सेवन से गर्भाशय की सफाई हो जाती है। 
  • खुजली की समस्या हो तो जीरे को पानी में उबालकर स्नान करें। राहत मिलेगी। 
  • एक गिलास ताजी छाछ में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर भोजन के साथ लें। इससे अजीर्ण और अपच से छुटकारा मिलेगा। जीरा के फायदे
  • आंवले की गुठली निकालकर पीसकर भून लें। फिर उसमें स्वादानुसार जीरा, अजवाइन, सेंधा नमक और थोड़ी-सी भुनी हुई हींग मिलाकर गोलियां बना लें। इन्हें खाने से भूख बढ़ती है। इतना ही नहीं, इससे डकार, चक्कर और दस्त में लाभ होता है। 
  • जीरा उबाल लें और छानकर ठंडा करें। इस पानी से मुंह धोने से आपका चेहरा साफ और चमकदार होगा। 
  • एक चम्मच जीरा भूनकर रोजाना चबाने से याददाश्त अच्छी रहती है। 
  • जिनको अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या अन्य सांस संबंधी समस्या है, उन्हें जीरे का नियमित प्रयोग किसी भी रूप में करना चाहिए। जीरा के फायदे
  • दक्षिण भारत में लोग अक्सर जीरे का पानी पीते हैं। उनके अनुसार, इसके सेवन से मौसमी बीमारियां नहीं होतीं और पेट भी तंदुरुस्त रहता है। जीरा के फायदे
  • 50 ग्राम जीरे में 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीसकर पाउडर बना लें। इसे सुबह-शाम एक चम्मच सेवन करें। बवासीर में आराम मिलेगा।

बबूल के औषधीय गुण,Health Benefits Acacia Tree in Hindi,Arabic Gum,

इसका पेड़ बहुत ही पुराना है। इसकी छाल एवं गोंद प्रसिद्ध व्यवसायिक द्रव्य होता है। वास्तव में यह एक बबूल रेगिस्तानी प्रदेश का पेड़ है। इसकी पत्तियां बहुत छोटी होती है। इसका पेड़ कांटेदार होता है। यह पूरे भारतवर्ष में लगाए हुए तथा जंगली पाए जाते हैं। ग्रीष्म के मौसम में इस पर पीले रंग के फूल गोलाकार गुच्छों में आते हैं। सर्दियों के सीजन में फलियां लगती हैं। इसके बड़े आकार के घने होते हैं। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है। इसके पेड़ पानी के निकट तथा काली मिट्टी में ज्यादा पाये जाते हैं। इनमें सफेद कांटे पाए जाते हैं। कांटों की लम्बाई 2 सेमी से 4 सेमी तक होती है। इसके कांटे जोड़े के रूप में होते हैं।

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  • कचनार की छाल, बबूल की छाल, मौलश्री छाल, पियाबांसा की जड़ तथा झरबेरी के पंचांग का काढ़ा बनाकर इसके हल्के गर्म पानी से कुल्ला करने से लाभ मिलता है। इससे गले में छाले, मुंह का सूखापन, दांतों का हिलना, जीभ का फटना और तालु के विकार नष्ट हो जाते हैं। 
  • जामुन, बबूल और फूली हुई फिटकरी का काढ़ा बना लें। इस काढ़े से कुल्ला करने पर मुंह के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं। बबूल की छाल लें, उसको बारीक पीस लें, इसे पानी में उबालकर कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले खतम हो जाते हैं। बबूल की छाल के काढ़े से 2-3 बार कुल्ला करें। इससे लाभ मिलता है। 
  • बादाम के छिलके और बबूल की फली के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करें। इससे दांतों का दर्द दूर हो जाता है। इसकी कोमल टहनियों की दातून करें। इससे भी दांतों के कई रोग दूर होते हैं और दांत स्वस्थ और मजबूत हो जाते हैं। 
  • वीर्य की कमी -बबूल के पत्तों को चबाकर उसके ऊपर से गाय का दूध पीने से कुछ ही दिनों में वीर्य की कमी दूर होती है 
  • बबूल की छाल, मौलश्री छाल, कचनार की छाल, पियाबांसा की जड़ तथा झरबेरी के पंचांग का काढ़ा बनाकर इसके हल्के गर्म पानी से कुल्ला करें। इससे दांत का हिलना, जीभ का फटना, गले में छाले, मुंह का सूखापन और तालु के रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल, जामुन और फूली हुई फिटकरी का काढ़ा बनाकर उस काढ़े से कुल्ला करने पर मुंह के सभी रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल को बारीक पीसकर पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल के काढ़े से 2-3 बार गरारे करने से लाभ मिलता है। गोंद के टुकड़े चूसते रहने से भी मुंह के छाले दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। मुंह के छाले पर इस चूर्ण को लगाने से कुछ दिनों में ही छाले ठीक हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में 2 से 3 बार गरारे करें। इससे मुंह के छाले ठीक होते हैं। 
  • दांत का दर्द-बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत का दर्द दूर हो जाता है। 
  • बबूल की कोमल टहनियों की दातून करने से भी दांतों के रोग दूर होते हैं और दांत मजबूत हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल, पत्ते, फूल और फलियों को बराबर मात्रा में मिलाकर बनाये गये चूर्ण से मंजन करने से दांतों के रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल की छाल के काढ़े से कुल्ला करने से दांतों का सड़ना मिट जाता है। 
  • रोजाना सुबह नीम या बबूल की दातुन से मंजन करने से दांत साफ, मजबूत और मसूढे़ मजबूत हो जाते हैं। 
  • मसूढ़ों से खून आने व दांतों में कीड़े लग जाने पर बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर रोजाना 2 से 3 बार कुल्ला करें। इससे कीड़े मर जाते हैं तथा मसूढ़ों से खून का आना बंद हो जाता है। 
  • वीर्य के रोग-बबूल की कच्ची फली सुखा लें और मिश्री मिलाकर खायें इससे वीर्य रोग में लाभ होता है। 10 ग्राम बबूल की मुलायम पत्तियों को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर पानी के साथ लेने से वीर्य-रोगों में लाभ होता है। अगर बबूल की हरी पत्तियां न हो तो 30 ग्राम सूखी पत्ती भी ले सकते हैं।कीकर (बबूल) की 100 ग्राम गोंद भून लें इसे पीसकर इसमें 50 ग्राम पिसी हुई असगंध मिला दें। इसे 5-5 ग्राम सुबह-शाम हल्के गर्म दूध से लेने से वीर्य के रोग में लाभ होता है। 
  • ग्राम कीकर के पत्तों को छाया में सुखाकर और पीसकर तथा छानकर इसमें 100 ग्राम चीनी मिलाकर 10-10 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य के रोग में लाभ मिलता है। 
  • बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से करने से वीर्य गाढ़ा होता है और सभी वीर्य के रोग दूर हो जाते हैं। 
  • बबूल के गोंद को घी में तलकर उसका पाक बनाकर खाने से पुरुषों का वीर्य बढ़ता है और प्रसूत काल स्त्रियों को खिलाने से उनकी शक्ति भी बढ़ती है। 
  • बबूल का पंचांग लेकर पीस लें और आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से कुछ ही समय में वीर्य रोग में लाभ मिलता है। 
  • बलवीर्य की वृद्धि-बबूल के गोंद को घी में भूनकर उसका पकवान बनाकर सेवन करने से मनुष्य के सेक्स करने की ताकत बढ़ जाती है। 
  • बबूल की कच्ची फलियों का रस दूध और मिश्री में मिलाकर खाने से वीर्य की कमी दूर होती है। 
  • धातु पुष्टि के लिए-बबूल की कच्ची फलियों के रस में एक मीटर लंबे और एक मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे दुबारा भिगोकर सुखा लेते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते हैं, और रोजाना एक टुकड़े को 250 ग्राम दूध में उबालकर पीने से धातु की पुष्टि होती है। 
  • स्तन -बबूल की फलियों के चेंप (दूध) से किसी कपड़े को भिगोकर सुखा लें। इस कपड़े को स्तनों पर बांधने से ढीले स्तन कठोर हो जाते हैं। 
  • मासिक-धर्म संबन्धी विकार -4.5 ग्राम बबूल का भूना हुआ गोंद और 4.5 ग्राम गेरू को एकसाथ पीसकर रोजाना सुबह फंकी लेने से मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है। 
  • 20 ग्राम बबूल की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर बचे हुए 100 मिलीलीटर काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से भी मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है।लगभग 250 ग्राम बबूल की छाल को पीसकर 8 गुने पानी में पकाकर काढ़ा बना लेते हैं। जब यह काढ़ा आधा किलो की मात्रा में रह जाए तो इस काढ़े की योनि में पिचकारी देने से मासिक-धर्म जारी हो जाता है और उसका दर्द भी शान्त हो जाता है। 
  • 100 ग्राम बबूल का गोंद कड़ाही में भूनकर चूर्ण बनाकर रख लेते हैं। इसमें से 10 ग्राम की मात्रा में गोंद, मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म की पीड़ा (दर्द) दूर हो जाती है और मासिक धर्म नियमित रूप से समय से आने लगता है। 
  • बांझपन दूर करना -कीकर (बबूल) के पेड़ के तने में एक फोड़ा सा निकलता है। जिसे कीकर का बांदा कहा जाता है। इसे लेकर पीसकर छाया में सुखाकर चूर्ण बना लेते हैं। इस चूर्ण को तीन ग्राम की मात्रा में माहवारी के खत्म होने के अगले दिन से तीन दिनों तक सेवन करें। फिर पति के साथ संभोग करे इससे गर्भ अवश्य ही धारण होगा।

राजमा खाने के फायदे,,Health Benefits of Red Kidney Beans in Hindi,

राजमा (Red Kidney Beans) खाने में स्वादिष्ट लगने के साथ ही यह सेहत का भी खजाना है। दिल और दिमाग की सेहत बनी रहने के अलावा राजमा (Red Kidney Beans) के सेवन से शरीर में ऊर्जा भी बनी रहती है। मस्तिष्क के लिए असरदार : राजमा खाने से दिमाग को बहुत फायदा होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन ‘के’ पाया जाता है. जोकि नर्वस सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है. साथ ही ये विटामिन ‘बी’ का भी अच्छा स्त्रोत है, जोकि मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए बहुत जरूरी है. ये दिमाग को पोषित करने का काम करता है।

Red Kidney Beans Benefits in Hindi,

    • ताकत का स्रोत : राजमा में उच्च मात्रा में आयरन मौजूद होता है, जिस वजह से ये ताकत देने का काम करता है। शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा के लिए आयरन की जरूरत होती है, जो राजमा खाने से पूरी हो जाती है. साथ ही ये शरीर में ऑक्सीजन के सर्कुलेशन को भी बढ़ाता है।
    • मधुमेह के लिए लाभप्रद : बीन्स का ‘ग्लाइसेमिक इन्डेक्स’ कम होता है इसका अभिप्राय यह है कि जिस तरह से अन्य भोज्य पदार्थों से रक्त में शक्कर का स्तर बढ़ जाता है, बीन्स खाने के बाद ऐसा नहीं होता। बीन्स में मौजूद फाइबर रक्त में शक्कर का स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं। और बीन्स की इस ख़ासियत की वजह से मधुमेह के रोगियों को बीन्स खाने की सलाह देते हैं।
    • ऐसे उदाहरण भी हैं कि बीन्स का ज़ूस शरीर में इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है। इस वजह से जिन्हें मधुमेह है या मधुमेह का खतरा है उनके लिये बीन्स खाना बहुत लाभदायक है। बीन्स का ज़ूस उत्तेजक ( स्टिम्युलेंट) होता है इसकी इसी प्रकृति के कारण यह उन लोगों को बहुत फ़ायदा करता है जो लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं या जो बीमारी पश्चात पूर्ण स्वास्थ्य लाभ चाहते हैं। बीन्स का 150 मिली ज़ूस हर रोज़ पीना आपके इस उद्देश्य को भली-भाँति पूरा कर देगा।
    • फ्रेंच बीन्स किडनी से संबंधित बीमारियों में भी काफी फ़ायदेमंद है। किडनी में पथरी की समस्या हो तब आप यह नुस्खा अपनाएँ। आप 60 ग्राम बीन्स की पौध लेकर इसे चार लीटर पानी में चार घंटे तक उबाल लें। फिर इसके पानी को कपड़े से छान लें और छने हुए पानी को करीब आठ घंटे तक ठंडा होने के लिए रख दें। अब इसे फिर से छान लें पर ध्यान रखें कि इस बार इस पानी को बिना हिलाए छानना है। इसे दिन में दो-दो घंटे से पीयें, यह नियम एक हफ्ते तक दोहराएँ। इसके परिणाम आशानुरूप मिलेंगे।
    • पाचन क्रिया में सहायक : राजमा में उच्च मात्रा में फाइबर होते हैं. जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखते हैं। साथ ही ये ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित रखने में मददगार होता है।
    • माइग्रेन की प्रॉब्लम खत्म करता है : इसमें मौजूद फोलेट की मात्रा दिमाग के काम करने की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही उसे दुरुस्त भी रखती है। मैग्नीशियम की मात्रा माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या में राहत दिलाती है। हफ्ते में एक बार इसका सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है।
    • कैंसर से बचाव : राजमा में मौजूद मैंगनीज़, एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करता है। यह फ्री रैडिकल्स को डैमेज होने से रोकता है। इसके साथ इसमें मौजूद विटामिन के की मात्रा सेल्स को बाहरी नुकसानदायक चीजों से बचाती है जो कैंसर का मुख्य कारण होते हैं।
    • कैलोरी की प्राप्ति : राजमा में जिस मात्रा में कैलोरी मौजूद होती है वो हर आयु वर्ग के लिए सही होती है। आप चाहें तो इसे करी के अलावा सलाद और सूप के रूप में भी ले सकते हैं। ऐसे लोग जो अपने वजन को नियंत्रित करना चाहते हैं उनके लिए लंच में राजमा का सलाद और सूप लेना फायदेमंद रहेगा।
    • नर्वस सिस्टम के लिए अच्छा : विटामिन के की पर्याप्त मात्रा ब्रेन के साथ ही नर्वस सिस्टम के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होती है। राजमा में मौजूद थियामिन की मात्रा दिमाग की क्षमता बढ़ाती है। इससे अल्जाइमर जैसी बीमारी दूर रहती है और याददाश्त भी बढ़ती है।
    • शरीर की सफाई : राजमा खाने से शरीर के अंदर मौजूद गंदगी बाहर निकलती है, क्योंकि इसमें मॉलिबडेनम पाया जाता है जिसका काम बॉडी को डिटॉक्सीफाई करना है। साथ ही कई प्रकार की एलर्जी को दूर करने के साथ ही सिरदर्द जैसी समस्या को भी कम करता है।
    • फाइबर की उचित मात्रा : राजमा में उच्च मात्रा में फाइबर होते हैं। जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखते हैं। साथ ही ये ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित रखने में मददगार होता है।
    • इम्यून सिस्टम मज़बूत बनाएं : राजमा में सिर्फ फाइबर और प्रोटीन ही नहीं होता बल्कि काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यून सिस्टम को बढ़ाते हैं और फ्री रेडिकल्स से इसे मुक्त रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि एंटीऑक्सीडेंट्स में एंटी-एजिंग तत्व भी पाए जाते हैं।
    • ब्लड शुगर में कण्ट्रोल : राजमा में घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम करते हैं। राजमा प्रोटीन का भी बहुत अच्छा स्रोत होता है। ये दोनों ही मिलकर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं।
    • कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण : राजमा में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है। साथ ही ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करने का काम करता है। मैग्नीशियम की मात्रा दिल से जुड़ी बीमारियों से लड़ने में भी सहायक होती है।
    • हाइपरटेंशन कम करने में सहायक : राजमा पोटाशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है। साथ ही इसमें फाइबर और प्रोटीन भी पाया जाता है। ये सभी दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व माने जाते हैं। पोटाशियम और मैग्नीशियम रक्त वाहिकाओं में घुल जाते हैं जिससे कि ब्लड फ्लो आसान हो जाता है।
    • एनर्जी : आयरन की भरपूर मात्रा लिए राजमा बॉडी को एनर्जी भी प्रदान करती है। इसके अलावा मैंगनीज़ की मौजूदगी भी मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करके एनर्जी बढ़ाने का काम करती है।
    • हड्डियों की मजबूती के लिए : कमजोर हड्डियां ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का कारण होती हैं। मजबूत हड्डियों के लिए कैल्शियम और मैंगनीज़ की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है जिसे राजमा खाकर पूरा किया जा सकता है। इसके साथ ही राजमा में फोलेट की मौजूदगी होमोसिस्टीन लेवल को कंट्रोल करती है, जो हड्डियों के टूटने की मुख्य वजह है।
    • वजन घटाने में सहायक : वजन घटाने के तमाम प्रयासों से हार मान चुके हैं, तो हरी सब्जी बीन्स का सहारा लें। बीन्स से बने उत्पादों का सेवन करके आप अपना मोटापा घटा सकते हैं। बीन्स का इस्तेमाल आप किसी भी तरह कर सकते हैं। वजन नियंत्रित करना-बीन्स में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, प्रति कप में 10 ग्राम। मोटे या आवश्यकता से अधिक वजन वाले लोग जो कम कैलोरी, उच्च प्रोटीन, उच्च फाइबर युक्त आहार लेते हैं, उनका वजन उन लोगों की तुलना में कम होता है जो नियमित तौर पर नियंत्रित मात्रा में कैलोरी, उच्च कार्बोहाइड्रेट और कम फैट वाला आहार लेते हैं।पोषक तत्त्वों से भरपूर-फल तथा सब्जियों की तरह बीन्स भी पोषक तत्त्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है इसका अर्थ यह है कि इसमें शरीर की प्रक्रिया के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्त्व उपस्थित होते हैं तथा साथ ही साथ इसमें कैलोरी भी कम होती है। साथ ही साथ कॉपर आयरन के साथ मिलकर लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। इसके अलावा कॉपर रक्तप्रवाह, प्रतिरक्षा प्रणाली, तथा हड्डियों को स्वस्थ तथा संतुलित रखता है।
    • फास्फोरस तथा मैग्नीशियम शक्तिशाली हड्डियों के लिए आवश्यक हैं तथा मैग्नीशियम के साथ पौटेशियम रक्त के दबाव के स्तर को नियंत्रित रखता है।आपके पेट को भरा रखता है-इसमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, जिसके कारण यह एक ऐसा स्नैक है जो आपके पेट को भरा रखता है जिससे आप खाने की और आकर्षित नहीं होते।

      चक्कर आने पर घरेलू उपचार,Home Remedies for Vertigo,(Chakkar Aana).



      अगर आपको कभी भी चक्कर आने लगते हैं, सिर घूमने लगता है, या किसी किसी काम में मन नहीं लगता, कमजोरी महसूस होती है और नींद भी नहीं आती तो जरा सावधान हो जाईए.चक्कर आना या सिर घूमना या आंखों के सामने गोल गोल घूमती हुई दिखाई देने वाली स्थिती को चक्कर आना या(vertigo )कहते है ।
      कुछ देर बैठे रहने के बाद जब उठते हैं तो चक्कर आने लगते हैं और आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। रोगी को लगता है कि उसके चारों तरफ़ की चीजें बडी तेजी से घूम रही हैं।चक्कर का एक कारण दिमाग में खून की पूर्ति कम हो जाना है। चक्कर आने के विस्तृत कारण हो सकते हैं 
      जैसे--कान में संक्रमण होना,कान में मैल अधिक होने से डाट लग जाना,माईग्रेन, आंखों की समस्या,सिर की ताजा चोट,हृदय के रोग,अर्बुद,रक्ताल्पता, खून में कैल्शियम का स्तर बिगड जाना आदि।

      चक्कर आना-तीन प्रकार का होता है

      • ऑब्जेक्टिव'-इसमें व्यक्ति को यह महसूस होता है कि सभी वस्तुएं घूम रही हैं।
      • सब्जेक्टिव'-इसमें व्यक्ति को यह आभास होता है कि वह स्वयं घूम रहा है।
      • स्यूडो वर्टाइगो'-इसमें व्यक्ति को सिर के अंदर घूमने का आभास होता है।

      चक्कर आने का -लक्षण 

      • चक्कर आने की परेशानी यदि वास्तविक है तो भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।
      • इसके अलावा निम्नलिखित लक्षणों में से कुछ अथवा सभी लक्षण महसूस हो सकते हैं-
      • मिचलाहट अथवा उल्टी
      • पसीना आना
      • आंखों में असामान्य गतिविधि
      • इन लक्षणों की अवधि मिनटों से घंटों तक हो सकती है। यह लक्षण स्थायी अथवा अस्थायी भी हो सकते हैं।
      • कान के अंदरूनी भाग में कोई इंफैक्शन या कान की कोई और बीमारी
      • थकावट, तनाव या बुखार के चलते भी अकसर चक्कर आ जाता है
      • ब्लड-शुगर कम होना भी चक्कर आने के कारणों में शामिल है
      • खून की कमी अथवा एनीमिया में भी चक्कर आ सकते हैं.
      • डीहाइड्रेशन--- जब कभी हमें दस्त एवं उलटियां परेशान करती हैं,तो शरीर में पानी की कमी को ही डीहाइड्रेशन कहते हैं.
      • सिर के ऊपर कोई चोट लगने से भी सिर घूमने लगता है
      • दिल की अथवा सरकुलेटरी सिस्टम की कोई बीमारी 
      • दिमाग में स्ट्रोक हो जाना

      चक्कर आने पर घरेलू उपचार

      • तुलसी के २० पत्ते पीसकर शहद मिलाकर चाटने से चक्कर आने की समस्या काफ़ी हद तक नियंत्रण में आ जाती है। 
      • १० ग्राम गेहूं,५ ग्राम पोस्तदाना,७ नग बादाम,७नग कद्दू के बीज लेकर थोडे से पानी के साथ पीसकर इनका पेस्ट बनालें। अब कढाई में थोडा सा गाय का घी गरम करें और इसमें २-३ नग लोंग पीसकर डाल दें। अब बनाया हुआ पेस्ट इसमें डालकर एक मिनट आंच दें। इस मिश्रण को एक गिलास दूध में घोलकर पियें। चक्कर आने में असरदार स्वादिष्ट नुस्खा है।
      • चाय,काफ़ी और तली गली मसालेदार चीजों से परहेज करना आवश्यक है। इनके उपयोग से चक्कर आने की तकलीफ़ में इजाफ़ा होता है।
      • कभी-कभी नमक की मात्रा शरीर में कम होने पर भी चक्कर आने लगते हैं। आलू की नमकीन चिप्स खाने से लाभ होता देखा गया है।
      • जब चक्कर आने का हमला हुआ हो , बर्फ़ के समान ठंडा पानी ३ गिलास पीने से भी तुरंत राहत मिलती है।
      • चक्कर आने की तकलीफ़ में रोगी को आहिस्ता घूमना चाहिये। तेज चलने से गिरकर चोंट लगने की संभावना रहती है।आहिस्ता चलने से वर्टिगो का प्रभाव कम हो जाता है।
      • अचानक चक्कर आने पर सबसे बढिया बात यह है कि लेट जाएं। चित्त लेटना उचित नहीं है। साइड से लेटें और सिर के नीचे तकिया अवश्य लगाएं।
      • अनुलोम विलोम प्राणायाम से चक्कर आने की व्याधि से हमेशा के लिये छुटकारा मिल जाता है।
      • खरबूजे के बीज की गिरी गाय के घी में भुन लें। इसे पीसकर रख लें। ५ ग्राम की मात्रा में सुबह शाम लेने से चक्कर आने की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।
      • १५ ग्राम मुनक्का देशी घी में भुनकर उस पर सैंधा नमक बुरककर सोते समय खाने से चक्कर आने का रोग मिट जाता है।
      • प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रोज करीब दस ग्राम की मात्रा में लेने से उच्च रक्तचाप में लाभ मिलता है.
      • तरबूज के बीज की गिरि और खसखस इन दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें. रोज सुबह-शाम एक चम्मच खाली पेट पानी के साथ सेवन करें. यह प्रयोग करीब एक महीने तक नियमित रूप से जारी रखें.
      • एक चम्मच मैथीदाना-चूर्ण रोजाना सुबह खाली पेट लेने से हाई ब्लडप्रेशर से बचा जा सकता है.
      •  खाना खाने के बाद दो कच्चे लहसुन की छिली हुई कलियां तीन-चार बीज निकले हुए मुनक्कों के साथ चबाएं, ऐसा करने से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत दूर होने के साथ पेट में रुकी हुई गैस भी पास होने लग जाती है.
      • सूखा आंवला पीस लें। दस ग्राम आंवला चूर्ण और १० ग्राम धनिया का पावडर एक गिलास पानी में डालकर रात को रख दें। सुबह अच्छी तरह मिलाकर छानकर पी जाएं। चक्कर आने में आशातीत लाभ होगा।
      • अदरक लगभग 20 ग्राम की मात्रा में बारीक काटकर पानी में उबालें आधा रह जाने पर छानकर पीयें। अदरक का रस भी इतना ही उपकारी है।सब्जी बनाने में भी अदरक का भरपूर उपयोग करें। चाय बनाने में अदरक का प्रयोग करें।अदरक किसी भी तरह खाएं चक्कर आने के रोग में आशातीत लाभकारी है।

      दाद और खुजली का घरेलु उपचार,Fungal Infection In Hindi

      Fungal Infection In Hindi,Ayurvedic Treatment for Fungal infection of skin in hindi

      अगर आपको शरीर पर लाल धब्बे दीखते हैं और खुजली होती है तो सावधान हो जाइए ये दाद है अगर ये आपके नाख़ून पर हुआ तो आपका नाख़ून जड़ से निकल सकता है बालों की जड़ो मे हुआ तो आपके बाल उस जगह से झड़ सकते हैं।
        • टमाटर खट्टा होता है। इसकी खटाई खून को साफ करती है। नींबू में इसी तरह के गुण होते हैं। रक्तशोधन (खून साफ करना) के लिए टमाटर को अकेले ही खाना चाहिए। रक्तदोष (खून की खराबी) से त्वचा पर जब लाल चकत्ते उठे हों, मुंह की हडि्डयां सूज गई हो, दांतों से खून निकल रहा हो, दाद या बेरी-बेरी रोग हो तो टमाटर का रस दिन में 3-4 बार पीने से लाभ होता है। कुछ सप्ताह तक रोजाना टमाटर का रस पीने से चर्मरोग (त्वचा के रोग) ठीक हो जाते हैं।
        • अंजीर का दूध लगाने से दाद मिट जाते हैं। पके केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर लगाने से दाद, खाज, खुजली और छाजन आदि रोगों में लाभ होता है। इन्फेक्शन हुआ हो तो ये एक बहुत बेहतरीन तरीका है। छोटे छोटे राई के दाने दाद को ठीक करने में सहायक है। राई को 30 मिनट तक पानी में भिगो कर रख दें। फिर उसका पेस्ट बनाकर दाद की जगह पर लगा लें।
        • एलो वेरा का अर्क हर तरह के फंगल इन्फेक्शन को ठीक कर देता हैं । इसे तोड़कर सीधे दाद पर लगा लीजिये ठंडक मिलेगी। हो सके तो रात भर लगा कर रखें । एलो वेरा का नियमित सेवन करने और प्रभावित स्थान पर लगाने से दाद और खुजली में बहुत आराम मिलता हैं।
            • नीम के पत्तों को पानी में उबालकर स्नान करना चाहिये। काले चनों को पानी में पीस कर दाद पर लगायें। दाद में आराम आएगा। शरीर के जिन स्थानों पर दाद हों, वहां बड़ी हरड़ को सिरके में घिसकर लगाएं। छिलकेवाली मूंग की दाल को पीसकर इसका लेप दाद पर लगाएं।
            • दाद होने पर हींग को पानी में घिस कर नियमित प्रभावित स्थान पर लगाये। इस से दाद में आशातीत आराम मिलता हैं। नौसादर को नींबू के रस में पीसकर दाद में कुछ दिनों तक लगाने से दाद दूर हो जाता है। नाइलान व सिंथेटिक वस्त्रों की जगह सूती वस्त्रों का प्रयोग करें तथा अधोवस्त्र को हमेशा साफ सुथरा रखें।
            • खुजली एक विशेष प्रकार के सूक्ष्म परजीवी के त्वचा पर चिपक कर खून चूसने से उस जगह पर छाले व फुंसियां निकल आती है। इससे अत्यधिक खुजली पैदा होती है। खुजली एक ऐसा चर्म रोग है जो आनंद देता है खुजाने में। जब तब त्वचा जलने न लगे तब तक खुजलाहट शांत नहीं होती। इस रोग में सबसे अधिक शरीर की सफाई पर ध्यान देना चाहिये। चूंकि यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक शीघ्र पहुंचाता है इसलिय संक्रमित के कपड़े अलग रखकर उनकी गरम पानी से धुलाई करनी चाहिये। इसके उपचार हैं
            • आंवले की गुठली जलाकर उसकी भस्म में नारियल का तेल मिलाकर मलहम बनायें और खुजली वाले स्थान पर लगाने से खुजली दूर होती है। नीम की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर खुजली वाले स्थान पर लगायें। काली मिर्च एवं गंधक को घी में मिलाकर शरीर पर लगाने से खुजली दूर होती है।
            • टमाटर का रस एक चम्मच, नारियल का तेल दो चम्मच मिलाकर मालिश करें और उसके आधे घंटे बाद स्नान करें। खुजली में राहत मिलेगी। स्वमूत्र चिकित्सा से भी इसका लाभप्रद इलाज होता है। छ: दिन का पुराना स्वमूत्र दाद खुजली पर लगाने से और स्वमूत्र की पट्टी रखने से चमत्कारी लाभ मिलता है।
            • उपरोक्त दाद वाले इलाज खुजली में भी उतनी ही उपयोगी हैं जितने दाद में। बच्चो को पहनाये जाने वाले डाइपर बहुत हानिकारक होते हैं, जहाँ तक हो सके उन से परहेज करे। दाद खाज-त्वचा के ऐसे रोग हैं कि लापरवाही बरतने से हमेशा के मेहमान बन जाते हैं। दाद, खाज और खुजली में मूंगफली का असली तेल लगाने से आराम आता है।
            • 1 कप गाजर का रस रोजाना पीने से त्वचा के रोग ठीक हो जाते हैं। त्वचा के किसी भी तरह के रोगों में मूली के पत्तों का रस लगाने से लाभ होता है। नीम्बू के रस में इमली के बीज पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता हैं।
            • शरीर की त्वचा पर कहीं भी चकत्ते हो तो उस पर नींबू के टुकड़े काटकर फिटकरी भरकर रगड़ने से चकत्ते हल्के पड़ जाते हैं और त्वचा निखर उठती है। लहसुन में प्राकृतिक रूप से एंटी फंगल तत्व होते हैं। जो की कई तरीके के फंगल इन्फेक्शन को ठीक करने में सहायक है। जिसमे से दाद भी एक है। लहसुन को छिल कर उसके छोटे छोटे टुकड़े कर दाद पर रख दीजिये जल्दी आराम मिलेगा। नारियल का तेल दाद को ठीक करने में बहुत उपयोगी है। ख़ास कर जब आपके सर की जड़ो में शरीर की त्वचा पर कहीं भी चकत्ते हो तो उस पर नींबू के टुकड़े काटकर फिटकरी भरकर रगड़ने से चकत्ते हल्के पड़ जाते हैं और त्वचा निखर उठती है।
                • नींबू के टुकड़े को काटकर दाद पर मलने से दाद की खुजली कम हो जाती है और थोड़े ही दिनों में दाद बिल्कुल मिट जाता है। इसको शुरूआत में दाद पर लगाने से कुछ जलन सी महसूस होती है। टमाटर खट्टा होता है। इसकी खटाई खून को साफ करती है। नींबू में इसी तरह के गुण होते हैं। रक्तशोधन (खून साफ करना) के लिए टमाटर को अकेले ही खाना चाहिए। रक्तदोष (खून की खराबी) से त्वचा पर जब
                • लाल चकत्ते उठे हों, मुंह की हडि्डयां सूज गई हो, दांतों से खून निकल रहा हो, दाद या बेरी-बेरी रोग हो तो टमाटर का रस दिन में 3-4 बार पीने से लाभ होता है। कुछ सप्ताह तक रोजाना टमाटर का रस पीने से चर्मरोग (त्वचा के रोग) ठीक हो जाते हैं।
                • अंजीर का दूध लगाने से दाद मिट जाते हैं। पके केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर लगाने से दाद, खाज, खुजली और छाजन आदि रोगों में लाभ होता है।
                • दाद, खाज और खुजली में मूंगफली का असली तेल लगाने से आराम आता है। सुपारी को पानी के साथ घिसकर लेप करने से उकवत, और चकत्ते आदि रोग दूर हो जाते हैं। त्वचा के किसी भी तरह के रोगों में मूली के पत्तों का रस लगाने से लाभ होता है।

                  Friday, June 04, 2021

                  चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,Beet juice Benefits

                  चुकंदर के औषधीय गुण-Health Benefits of Beetroot in Hindi,beetroot juice,beet juice benefits
                  गुणों से भरपूर- सोडियम पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते है इसे खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। हर्बल जानकार चुंकदर को कैंसर जैसे भयावह रोग से ग्रसित रोगी को खिलाने की सलाह देते हैं। इनका मानना है कि चुकंदर कैंसर नियंत्रण में काफी मददगार होता है, चुकंदर का सेवन अधिक उम्र वालों में भी ऊर्जा का संचार करता है। इसमें एंटीआक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो हमेशा जवान बनाएं रखते हैं। 
                  Health Benefits of Beetroot आदिवासी हर्बल जानकार चुकंदर सेवन की सलाह गर्भवती महिलाओं को देते हैं। इनके अनुसार चुकंदर का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए। यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा तैयार करने में मददगार साबित होता है। चुकंदर में भरपूर मात्रा में लौह तत्व और फ़ोलिक एसिड पाए जाते हैं जो रक्त निर्माण के लिए मददगार होते हैं।

                  चुकंदर के औषधीय गुण

                  • एनीमिया में चुकंदर का जूस मानव शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया में उपयोगी होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय और उनकी पुर्नरचना करता है। यह एनीमिया के उपचार में विशेष रूप से उपयोगी होता है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
                  • त्वचा के लिए फायदेमंद- यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का खा लीजिये। इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर की एनर्जी बढाता है।सफेद चुकंदर को पानी में उबाल कर छान लें। यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है। खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। 
                  • चुकन्दर में ’बिटिन‘ नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में कैंसर तथा ट्यूमर बनने की संभावनाओं को नष्ट कर देता है तथा यह शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है।
                  • चुकन्दर के नियमित सेवन से दूध पिलानेवाली स्त्रियों के दूध में वृद्धि होती है। चुकन्दर का
                  • नियमित सलाद खाते रहने से पेशाब की जलन में फायदा होता है। पेशाब के साथ कैल्शियम का शरीर से निकलना बन्द हो जाता है।
                  • कब्ज तथा बवासीर में चुकन्दर गुणकारी है। रोज इसके सेवन से कब्ज तथा बवासीर की तकलीफ नहीं रहती। एनीमिया (रक्ताल्पता) में एक कप चुकन्दर का रस दिन में ३ बार लें। सुबह शाम रोज १ कप चुकन्दर का रस सेवन करने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। इससे दिमाग की गर्मी तथा मानसिक कमजोरी दूर होती है।
                  • एक कप चुकन्दर के रस में एक चम्मच नीबू का रस मिलाकर पीने से पाचन क्रिया की अनियमितताएँ दूर होती हैं तथा उल्टी, दस्त, पेचिश, पीलिया में लाभ होता है। रोजाना सोने से पहले एक कप चुकन्दर का रस पीने से बवासीर में लाभ होता है। चुकन्दर के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से गेस्ट्रिक अल्सर में फायदा होता है।
                  • चुकन्दर के रस में गाजर तथा खीरे का रस मिलाकर सेवन करने से गुर्दे तथा गाल ब्लेडर की सफाई होती है। चुकन्दर का रस एक कप दिन में दो बार पीने से या १०० ग्राम चुकन्दर का नियमित सेवन करने से गुर्दे सम्बन्धी रोगों में फायदा होता है। Health Benefits of Beetroot
                  • चुकन्दर के रस में गाजर का रस तथा पपीता या संतरे का रस मिलाकर दिन में २ बार सेवन करने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। स्त्रियों के गर्भाशय सम्बन्धी रोगों में चुकन्दर विशेष लाभकारी है। बार-बार गर्भपात होता है या कम मासिक आने में बी यह लाभदायक होता है। इसके लिये एक प्याला चुकन्दर का रस सुबह खाली पेट पीना चाहिए।
                  • गर्भवती स्त्रियों को चुकन्दर, गाजर, टमाटर तथा सेव का रस मिलाकर पिलाने से उनके शरीर में विटामिन ए.सी.डी तथा लोहे की कमी नहीं हो पाती। यह रक्तशोधन करके शरीर को लाल सुर्ख बनाने में सहायता करता है।
                  • दिल की बीमारियां- चुकंदर में नाइट्रेट नामक रसायन होता है जो रक्त के दबाव को काफी कम कर देता है और दिल की बीमारी के जोखिम को भी कम करता है। चुकंदर एनीमिया के उपचार में बहुत उपयोगी माना जाता है। 
                  • यह शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया में सहायक होता है। आयरन की प्रचुरता के कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय रखने की क्षमता को बढ़ा देता है। इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और घाव भरने की क्षमता भी बढ़ जाती है।
                  • हाई ब्लड प्रेशर में- लंदन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रोज चुकंदर का जूस पीने वाले मरीजों को अध्ययन में शामिल किया। उन्होंने रोज चुकंदर का मिक्स जूस [गाजर या सेब के साथ] पीने वाले मरीजों के हाई ब्लड प्रेशर में कमी पाई। अध्ययन के मुताबिक रोजाना केवल दो कप चुकंदर का मिक्स जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। हालांकि इसका ज्यादा सेवन घातक साबित हो सकता है।
                  • कब्ज और बवासीर-चुकंदर का नियमित सेवन करेंगे, तो कब्ज की शिकायत नहीं होगी। बवासीर के रोगियों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होता है। रात में सोने से पहले एक गिलास या आधा गिलास जूस दवा का काम करता है।
                  • लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उन्हें खाने के साथ चुकंदर खाना चाहिए। इससे शरीर में एनर्जी बढती है और थकान दूर होती है। साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है Health Benefits of Beetroot
                  • आदिवासी एसिडिटी होने पर चुकंदर के जूस के सेवन की सलाह देते हैं। चुकंदर न सिर्फ किडनी की सफाई में मदद करता है बल्कि यकृत को स्वस्थ बनाने में भी मदद करता है।
                  • चुकंदर को एंटी एजिंग के लिए एक महत्वपूर्ण और कारगर फार्मुला माना गया है। यह शारीरिक कोशिकाओं को तरोताजा रखने में सहायक तो होता ही है इसके अलावा रक्त संचार को सुचार रखने में बेहतर साबित होता है।

                  कौन से रोग में कौन सा कैसा जूस पिया जाए Health Benefits of Juices in Hindi

                  जूस का सेवन सेहत के लिहाज से बहुत फायेदमंद होता है, लेकिन क्‍या आपको पता है कौन सा जूस कब पीना चाहिए, अगर नही तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा रोगो के हिसाब से जूस का सेवन कब और कैसे करना चाहिए जूस में भरपूर मात्रा में विटामिन, कैल्सियम, मिनरल और फाइबर होता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है साथ ही कई रोगों से भी बचाता है। आइये जानते है कौन  से रोग में कौन सा कैसा जूस पिया जाए जो सेहत के लिए लाभ दायक होगा

                  1-►गठियावात रोग के लिए जूस-

                  नीबू, खीरा, गाजर, पालक, चुकंदर का रस उपयोगी है

                  2-►मधुमेहरोग के लिए जूस-

                  गाजर, संतरा, पालक, मुसम्बी, अन्नानास, नीबू, का रस उपयोगी है 

                  3-►उच्च रक्तचापरोग के लिए जूस-

                  संतरा, अंगूर, गाजर चुकंदर, खीरा का रस उपयोगी है.

                  4-►सर्दी-जुकाम रोग के लिए जूस-

                  नीबू,संतरा,अनन्नास, गाजर,प्याज, पालक का रस उपयोगी है

                  4-►आँखों के लिए-

                  टमाटर, गाजर, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है 

                  5-►मोटापे के लिए-

                  नीबू, संतरा, अनन्नास, टमाटर, पपीता, चुकंदर, गाजर, पालक, पत्तागोभी का रस उपयोगी है.

                  6-►अल्सर के लिए-

                  गाजर, पत्तागोभी, अंगूर, खुबानी का रस उपयोगी है

                  7-►टांसिल के लिए-

                  नीबू, संतरा, अनन्नास, गाजर, पालक, मूली, खुबानी का रस उपयोगी है

                  8-►सिरदर्द के लिए-

                  अंगूर, नीबू, गाजर, पालक का रस उपयोगी है

                  9-►अनिद्राके लिए-

                  सेव, गाजर, अंगूर, नीबू कर रस उपयोगी है.

                  10-►रक्ताल्पता के लिए-

                  गाजर, पालक, काले अंगूर, चुकंदर, खुबानी का रस उपयोगी है.

                  11-►कब्जके लिए-

                  अंगूर, गाजर, चुकंदर, पपीता का रस उपयोगी है.

                  12-►बुखार के लिए-

                  संतरा, नीबू, मुसम्बी, गाजर, अनन्नास, प्याज, पालक, खुबानी का रस उपयोगी है

                  13-►पीलिया के लिए-

                  गन्ना, नीबू, गाजर,अंगूर,चुकंदर, खीर, मुली, पालक, नाशपाती का रस उपयोगी है 

                  हीमोग्लोबिन बढाने के घरेलु उपाय How to Increase Your Haemoglobin Level in Hindi,

                  How to Increase Blood in Body in Hindi

                    जब हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या हीमोग्लोबिन की संख्या सामान्य से कम होती है तो यह रक्त की कमी या एनीमिया कहलाता है। चूंकि यह अपने आप में कोई बीमारी तो नहीं है परंतु यह दूसरे गंभीर बीमारियों का एक लक्षण हो सकता है।

                    खून में स्थित लाल रक्त कोशिकाएँ शरीर में ऑक्सीज़न का वाहन करती है और शरीर के विभिन्न भागों तक ऑक्सीज़न पहुँचती है। यदि खून में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाय तो हमारे शरीर के विभिन्न भागों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीज़न नहीं पहुँच पाएगा और हमे थकान महसूस होने लगेगा। इस ऑक्सीज़न को पूरा करने के लिए हमे ज़ोर-ज़ोर से श्वास लेने की जरूरत महसूस होगी। इस तरह हमे श्वास लेने में तकलीफ होने लगेगी। हमे चक्कर आने लगेगा और व्याकुलता महसूस होगी।

                    शरीर में खून की कमी के लक्षण

                    • शरीर में खून की कमी हो जाने पर रोगी कमजोरी, थकावट, शक्तिहीनता और चक्कर आना 
                    • चमडी पर समय पूर्व  झुर्रियां पड जाना ,याददाश्त की कमी,  
                    • मामूली काम करने या चलने पर सांस फ़ूल जाना, 
                    • घाव हो जाने पर उसके ठीक होने या भरने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगना,सिर दर्द होना 
                    • दिल की धडकन  बढ जाना ये लक्षण भी रक्त की कमी के रोगी में अक्सर देखने को मिलते हैं। 

                    खून की कमी के कारण

                    • पोषक तत्वों की कमी
                    •  लाल रक्त कणिकाएं नष्ट होना
                    •  रक्त संबंधी आनुवांशिक बीमारियाँ
                    • आयरन और विटामिन B12 की कमी आदि

                    हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए के घरेलू उपाय

                    • एक गिलास चुकंदर (बीटरूट) के रस में शहद मिला कर अथवा आनार का रस सुबह-शाम प्रतिदिन सेवन करें। इससे हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ती है। 
                    • दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।
                    • काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं
                    • आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ,मूंग और चने को अंकुरित करकेउसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें
                    • पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसा करने से खून तेजी से बढ़ता है।
                    • शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली के दानोंको गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।
                    • सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
                    • मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।
                    • अमरूद, पपीता, चीकू, सेब और नींबू आदि फलो का अधिक से अधिक सेवन करें।
                    • आंवले का रस और जामुन का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
                    • एक गिलास टमाटर का रस रोज पीने से भी खून की कमी दूर होती है। इसलिए टमाटर का सूप भी बनाकर आप ले सकते हो।
                    • बथुआ, मटर, सरसों, पालक, हरा धनिया और पुदीना को अपने भोजन में जरूर शामिल करें।
                    • फालसे का शर्बत या फालसे का सेवन सुबह शाम करने से शरीर में खून की मात्रा जल्दी बढ़ती है।
                    • शरीर में खून को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से लहसुन और नमक की चटनी का सेवन करे। यह हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है।
                    • सेब का जूस रोज पीएं। चुकंदर के एक गिलास रस में अपने स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर इसे रोज पीएं। इस जूस में लौह तत्व ज्यादा होता है।शरीर में खून की कमी से बहुत बीमारियां लग सकती हैं।जिस वजह से इंसान कमजोर हो जाता है और उसका शरीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है। इसलिए महिलाओं और पुरूषों को शरीर में खूनकी मात्रा बढ़ाने के लिए इन आयुवेर्दिक उपायों को अपनाना चाहिए।
                    • शरीर में लोह तत्व बढाने के लिये सबसे अच्छा तरीका यह है भोजन से इसकी पूर्ति करें। चाय,काफ़ी और अम्ल विरोधि (एन्टासिड) दवाएं उपयोग में न लाएं। ये चीजें शरीर द्वारा लोह तत्व ग्रहण करने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं।
                    • लोह तत्व की वृद्धि के लिये हरे मटर,हरे चने(छोले),अंडे,मछली, कलेजी दूध का प्रचुर उपयोग करना उत्तम है। जो लोग शाकाहारी हैं वे अपने भोजन में पालक,सभी तरह की हरी सब्जियां, दालें अंजीर,अखरोट बदाम काजू, किशमिश,खजूर, आदि रक्त वर्धक पदार्थो का भरपूर उपयोग करना चाहिये।
                    • सेवफ़ल,टमाटर भोजन में शामिल करें। एक कप सेवफ़ल के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर नित्य पीने से खून की कमी दूर होती है।
                    • टमाटर और सेवफ़ल का रस प्रत्येक २०० मिलिलिटर मिश्रण करके रोज सुबह लेने से रक्ताल्पता में आशातीत लाभ होता है।
                    • ताजा सलाद खाने और शहद से शरीर में हेमोग्लोबिन बढकर एनिमिया का निवारण होता है।विटामिन बी१२, फ़ोलिक एसिड,और विटामिन सी ग्रहण करने से हेमोग्लोबिन की वृद्धि होती है
                    • दूध,मांस,गुर्दे और कलेजी में प्रचुर विटामिन बी१२ पाया जाता है।मैथी की सब्जी कच्ची खाने से लोह तत्व मिलता है।
                    • किशोरावस्था की लडकियों में होने वाली खून की कमी में मैथी की पत्तियां उबालकर उपयोग करने से बहुत फ़ायदा होता है। मैथी के बीज अंकुरित कर नियमित खाने से रक्ताल्पता का निवारण होता है।सभी पत्तेदार सब्जीयां और खासकर पालक में प्रचुर मात्रा मे लोह तत्व पाया जाता है। इनसे मिलने वाला आयरन श्रेष्ठ दर्जे का होता है। यह लोह तत्व शरीर में ग्रहण होने के बाद बडी तेजी से रक्त कण बनते हैं और रक्ताल्पता शीघ्र ही दूर हो जाती है।
                    • खून की कमी दूर करने में सोयाबीन का महत्वपूर्ण स्थान है। इसमे आयरन होता है और श्रेष्ठ दर्जे का प्रोटीन भी होता है। लेकिन एनिमिया रोगी की पाचन शक्ति कमजोर होती है इसलिये सोयाबीन का दूध बनाकर पीना उचित रहता है।
                    • 7 नग बादाम दो घन्टे पानी में गला दें। फ़िर छिलका उतारकर खरल में पेस्ट बनाकर रोज खाने से नया खून बनता है और रक्ताल्पता लाभ होता है।
                    •  मुनक्का को रात में लोहे की कड़ाही में पानी में 6 घंटे भिगोने के बाद प्रयोग करें, ऐसा करने से तेजी से खून में आयरन की मात्रा बढ़ेगी। साथ ही रोजाना 15 मिनट वरूण मुद्रा करें तो जल्द ही खून की कमी पूरी हो जाएगी।

                      Friday, August 16, 2019

                      बॉडी बनाने के घरेलू उपाय-Home Remedies for Healthy body in Hindi,


                      बॉडी बनाने के घरेलू उपाय-Home Remedies for Healthy body in Hindi,


                      पर्सनालिटी तभी आकर्षक लगती है। जब उनका शरीर गठीला और मसल्स मजबूत हो। जिन लोगों की मसल्स मजबूत होती हैं उनका शरीर अपने आप शेप में दिखाई देता है। इसके लिए सिर्फ घंटों जिम में गुजरना ही काफी नहीं है, बल्कि सही डाइट प्लान भी जरूरी होता है।

                      खानपान पर यदि पूरी तरह से ध्यान दिया जाए तो मसल्स मजबूत होती हैं और शरीर आंतरिक रूप सेताकतवर बन जाता है। आइए आज जानते हैं हम कुछ ऐसी ही  चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से मसल्स मजबूत हो जाती हैं।

                      मसल्स को मजबूत बनाने के लिए फल और सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। इनमें विटामिन, मिनरल्स और कई पोषक तत्व व प्रोटीन पाए जाते हैं, जो कि मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

                      2. लो फैट डेयरी उत्पाद

                      कम फैट वाले डेयरी उत्पादों जैसे दूध, दही, छाछ आदि में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। इसीलिए पुरुषों को इनका नियमित सेवन करना चाहिए। एक कप दूध से लगभग 8 मि.ग्रा. कार्निटिन मिलता है। दूध से बनी चीजों में कैल्शियम, विटामिन-ए जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। इसके अलावा इनमें कार्बोहाइड्रेट और विटामिन डी भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

                      3. ड्राय फ्रूट्स

                      ड्राय फ्रूट्स और नट्स दोनों में ही भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। पुरुषों को ड्रायफ्रूट्स का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। फिर चाहें तो इन्हें कच्चा खाएं या फिर भूनकर खाएं। इनमें फैट्स रेशे, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिनसे मसल्स मजबूत होती हैं।

                      4. अंकुरित अनाज

                      अंकुरित अनाज पुरुषों की सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। साथ ही, यह जिंक जैसे पोषक तत्वों का स्रोत हैं, जो पुरुषों में कमजोरी और नपुंसकता की समस्या कम करने में सहायक होते हैं व मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

                      5. मूंगफली

                      मूंगफली में जिंक के साथ ही भरपूर मात्रा में वसीय अम्ल पाए जाते हैं। ये वसीय अम्ल पुरुषों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से पुरुषों में कमजोरी की समस्या दूर हो जाती है।

                      6. लहसुन

                      लहसुन का सेवन भी पुरुषों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है। लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीवायरल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं। यह परिसंचरण तंत्र को भी स्वस्थ बनाता है।

                      7. ब्रॉकली

                      ब्रॉकली खाने के भी चमत्कारिक लाभ हैं। इसमें पाया जाने वाला आइसोथायोसाइनेट्स यकृत को उत्तेजित करता है। यह उन एन्जाइम्स के निर्माण में सहायता करता है, जो कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के प्रभाव को कम करते हैं। इसमें विटामिन-सी भी मौजूद होता है। इसीलिए इसे पुरुषों की सेहत के लिए बेहतरीन औषधि माना गया है। 

                      8. तुलसी टी

                      तुलसी टी का सेवन भी पुरुषों के लिए बहुत अच्छा होता है।तुलसी पत्ते में ओसियाम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। यह कैंसर होने से रोकता है।तुलसी टी रोजाना पीने से पेट, फेफड़ों व आंतों की बीमारियां दूर होती हैं।

                      9. आम और पपीता

                      आम और पपीता, दोनों में ही भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। आम में अमीनों अम्ल, विटामिन ए, सी और ई, नियासिन, बिटाकेरोटिन, आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम पाया जाता है। वहीं, पपीता में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी व सी के साथ ही एंटीआक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। इन दोनों फलों के छिलकों में बायोफ्लैवेनॉइड्स पाया जाता है। इसीलिए यह फल पुरुषों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

                      10. शिमला मिर्च

                      शिमला मिर्च भी पुरुषों के लिए फायदेमंद होती है। कुछ शोधों के अनुसार लाल शिमला मिर्च में संतरे के रस के मुकाबले तीन गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। वैज्ञानिकों की मानें तो फ्लैवोनॉइड्स के लिए लाल शिमला मिर्च प्रभावी विकल्प है। फ्लैवोनॉइड्स पुरुषों को सेहतमंद बनाता है।

                      11. टमाटर

                      टमाटर में लाइकोपीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। लाइकोपीन पौधों में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक रासायनिक पदार्थ है। यह रासायनिक पदार्थ अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। यह प्रॉस्ट्रेट, फेफड़े और पेट के कैंसर को खत्म करता है। साथ ही, चेहरे की लालिमा और चमक भी बढ़ाता है

                      12.अनार

                      पुरुषों को अनार का जूस अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। रोजाना एक गिलास अनार का जूस पीने से पुरुषों को प्रोस्टेट की समस्या नहीं होती है।

                      13. रागी

                      रागी कैल्शियम का सबसे बढिय़ा स्रोत है। यह पुरुषों को ऑस्टियोपोरेसिस से बचाता है। साथ ही, यह जिंक तथा रेशे का भी अच्छा स्रोत है। इसके नियमित सेवन से डिसलिपिडीमिया, डायबिटीज और मोटापे से बचा जा
                      सकता है।

                      कद्दू भी पुरुषों के लिए लाभदायक होता है। इसमें रेशे, विटामिन, खनिज और कई स्वास्थ्यवर्धक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसके नियमित सेवन से ताउम्र स्किन जवां बनी रहती है।

                      15. सोया

                      सोया में मौजूद आइसोफ्लैवोन्स प्रॉस्ट्रेट की रक्षा करते हैं। यह प्रॉस्ट्रेट कैंसर के खतरे को कम करते हैं। रोजाना 25 ग्राम सोया प्रोटीन के सेवन से कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी कम किया जा सकता है।


                      व्यायाम : आप यौगिक व्यायाम कीजिये. यौगिक व्यायाम का मतलब उस व्यायाम से है जिनमे आपकी एक से अधिक मांसपेशियाँ और एक से अधिक जोड़ उपयोग में आते हो. यौगिक व्यायाम को मांसपेशियों के लिए बहुत ही उपयुक्त माना गया है. साथ ही आपको सुबह सुबह जल्दी उठ कर खाली पेट भी व्यायाम करना चाहिए.

                      एंजाइम : ये आपके खाने को पचाने का कार्य करते है. शरीर का वजन बढ़ाने के लिए आप अधिक कैलरी लेने के लिए अच्छा आहार खाओगे और अधिक आहार लोगे ताकि आपकी मांसपेशियों में अधिक वृद्धि हो. ऐसी स्थिति में आपका पाचनतंत्र उस गति से काम नही कर पाता कि इतने सारे आहार को आप ग्रहण कर पाओ, किन्तु अगर आप एंजाइम को ले रहे हो तो ये आपके पाचनतंत्र की शक्ति को बढ़ाता है और आप जी भर कर आहार ग्रहण कर पाते हो.

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