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Sunday, December 10, 2017

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

मेथी के पत्तों से सब्जी बनायी जाती है। इसके बीजों का उपयोग आहार के लिए विभिन्न व्यंजनों में तथा औषधि के रूप में बहुत अधिक किया जाता है। मेथी के फूल एवं फल जनवरी से मार्च के महीनों में लगते हैं। मेथी के पौधे एक फुट ऊंचे होते हैं। इसके पत्ते छोटे और गोल-गोल होते हैं। मेथी के दाने को मेथी दाना कहते हैं। यह जगंलों में भी पाई जाती है। जंगलों में पायी जाने वाली मेथी कम गुण वाली होती है। 
मेथी दाने का जड़ी बूटी, मसाले के रुप में भारतीय रसोई में खासा इस्तेमाल होता है। हालांकि इसका स्वाद कड़वा स्वाद होता है लेकिन ये काफी स्वास्थ्य लाभ देता है, क्योंकि ये कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस आदि विभिन्न पोषक तत्वों से रिच है।

मेथी के औषधीय गुण,Health Benefits Of Methi Fenugreek in Hindi,

  • हृदय रोग रोकने में कारगर-मेथी दाने में गेलोक्टोमेनन है जो आपके दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है और यह हृदय रोग विकसित होने के खतरे को भी रोकता है। इसमें पोटेशियम होता है जोकि हृदय गति और रक्तचाप नियंत्रित करने में मदद करता है। 
  • एक नवीन शोध में डाबिटीज एवं हृदय रोग में मैथी दाना बहुत ही कारगर साबित हुआ है। इसके नियमित सेवन से रक्त में कॉलेस्ट्राल की मात्रा नियमित करने में सहायता मिलती है। तथा रक्त में सुगर की मात्रा उत्तरोतर कम होती जाती है। 
  • उक्त विचार राष्ट्रीय शाकाहार शोध संस्थान नई दिल्ली के शाकाहार विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार जैन ने व्यक्त करते हुए कहा है मैथी दाना के नियमित सेवन से मूत्र के साथ निकलने वाली सुगर की मात्रा 65 प्रतिशत तक कम हो जाती है। जिसका दस दिन में ही असर दिखाई देने लगता है। उन्होने कहा है शोध के अनुसार मैथी दाना पाउडर को कांच के गिलास में शुद्ध जल को भरकर भिगो दे तथा प्रात: मंजन करने के बाद खाली पेट उस जल को पी लें। उन्होने मैथी के गुणों की उपयोगिता का बखान करते हुए कहा शाकाहार चिकित्सा में सफेद बालों की समस्या में आधा कप मैथी दाना को रात्रि में भिगोकर प्रात: उसका पेस्ट बनाकर बालो में लगायें। तथा आधा घंटा के पश्चात नीम के पानी से बालो को धो दें। एक माह तक ऐसा करने से बाल काले होने शुरू हो जाते हैं ।
  • पाचन में मदद करता है-फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से रिच होने के नाते, मेथी दाना शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। मेथी चाय अपच और पेट दर्द को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है।
  • वजन कम करने में मदद करता है-वजन कम करने के रूप में मेथी दाने का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक घुलनशील फाइबर होती है जोकि आपकी भूख को दबाने में में मदद करती है।
  • ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है-मधुमेह पीड़ित लोगों को अपने दैनिक आहार में मेथी दाने को शामिल करना चाहिए, चूंकि इसमें गेलोक्टोमेनन जोकि एक प्राकृतिक घुलनशील फाइबर है जोकि उनके रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में कारगर होता है।
  •  मेथी की सब्जी को खाने से खून में शुद्धता आती है| वात रोग में मेथी का आटा छाछ में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है| इसके सेवन से वायु (गैस), कफ (बलगम) और ज्वर (बुखार) दूर होता है। यह पेट के कीड़े, दर्द, जोड़ों के दर्द (सन्धिवात), पेट में वायु की गांठ, कमर का दर्द और शारीरिक पीड़ा को दूर करती है। दिल के लिए यह काफी लाभदायक होती है।
  • मेथी में पाचनशक्ति और कामवासना बढ़ाने की शक्ति होती है। इससे स्त्रियों की कमजोरी दूर होती है, शक्ति आती है और भूख बढ़ती है। बच्चे के जन्म (प्रसूति) होने के बाद गर्भाशय में कोई कमी रह गई हो, गर्भाशय ठीक से संकुचित न हुआ हो तो मेथी को पकाकर खाने से लाभ होता है। दस्त, बदहजमी (भोजन का न पचना), अरुचि (भोजन का मन न करना) और सन्धिवात (जोड़ों का दर्द) में मेथी के लड्डूओं को सेवन किया जाता है।
  • घरेलू औषधि के रूप में मेथी बहुत उपयोगी है। मेथी वात (गैस), कफ (बलगम) और ज्वर (बुखार) का नाश करती है| रक्तपित्त और अरुचि को मिटाती है, भूख को बढ़ाती है तथा मल को रोकती है। मेथी हृदय के लिए लाभकारी तथा बलवर्द्धक है। 
  • यह खांसी, सूजन, बादी बवासीर, कृमि (कीड़े) और वीर्य का नाश करती है, पेशाब लाती है| बंद हुए मासिक-धर्म को फिर से जारी करती है, स्वभाव को कोमल करती है, सर्दी से होने वाली बीमारी, मिर्गी, लकवा और फालिज इत्यादि में हितकर है। मेथी का काढ़ा कान के दर्द को मिटाता है। मेथी गर्भाशय संकोचक, स्तन एवं प्रसव पीड़ा को नष्ट करती है। 
  • मेथी भूख को बढ़ाती है तथा नपुंसकता, कमजोरी, गठिया(जोड़ों का दर्द), मधुमेह, बाल रोग, कब्ज, अनिद्रा (नींद का कम आना), मोटापा, रक्तातिसार तथा जलन आदि रोगों के लिए यह काफी हितकारी होती है। 

Thursday, November 09, 2017

बेल फल के फायदे-Health Benefits of Bell Fruit Hindi,

Health Benefits of Bell Fruit Hindi

बेल फल के फायदे-Health Benefits of Bell Fruit Hindi

आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद फल माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ बेल मधुर, रुचिकर, पाचक तथा शीतल फल है। बेलफल बेहद पौष्टिक और कई बीमारियों की अचूक औषधि है। इसका गूदा खुशबूदार और पौष्टिक होता है।
  • आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद फल माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ बेल मधुर, रुचिकर, पाचक तथा शीतल फल है। कच्चा बेलफल रुखा, पाचक, गर्म, वात-कफ, शूलनाशक व आंतों के रोगों में उपयोगी होता है। बेल का फल ऊपर से बेहद कठोर होता है।
  • इसे नारियल की तरह फोड़ना पड़ता है। अंदर पीले रंग का गूदा होता है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में बीज होते हैं। गूदा लसादार तथा चिकना होता है, लेकिन खाने में हल्की मिठास लिए होता है। ताजे फल का सेवन किया जा सकता है और इसके गूदे को बीज हटाकर, सुखाकर, उसका चूर्ण बनाकर भी सेवन किया जा सकता है। 
  •  दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक-बेल का रस तैयार कर लीजिए और उसमें कुछ कुछ बूंदें घी की मिला दीजिए. इस पेय को हर रोज एक निश्चित मात्रा में लें. इसके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है. ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है.
  • गैस, कब्ज की समस्या में राहत -नियमित रूप से बेल का रस पीने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
  • कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार -बेल का रस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.
  • दस्त और डायरिया की समस्या में भी फायदेमंद -आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
  • ठंडक देने का काम करता है-बेल के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है. अगर आपको मुंह के छाले हो गए हैं तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा. गर्मी के लिहाज से ये एक बेहतरीन पेय है. एक ओर जहां ये लू से सुरक्षित रखने में मददगार होता है वहीं शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करता है
  • उदर विकारों में बेल का फल रामबाण दवा है। वैसे भी अधिकांश रोगों की जड़ उदर विकार ही है। बेल के फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाती है।
  • कब्ज के रोगियों को इसके शर्बत का नियमित सेवन करना चाहिए। बेल का पका हुआ फल उदर की स्वच्छता के अलावा आँतों को साफ कर उन्हें ताकत देता है।
  • मधुमेह रोगियों के लिए बेलफल बहुत लाभदायक है। बेल की पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से डायबिटीज की बीमारी में काफी राहत मिलती है।
  • रक्त अल्पता में पके हुए सूखे बेल की गिरी का चूर्ण बनाकर गर्म दूध में मिश्री के साथ एक चम्मच पावडर प्रतिदिन देने से शरीर में नए रक्त का निर्माण होकर स्वास्थ्य लाभ होता है।
  • गर्मियों में प्रायः अतिसार की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है।
  • गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में भली प्रकार मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करें। मिश्री डालकर बेल का शर्बत भी पिलाएं तुरंत राहत मिलती है।

Friday, July 28, 2017

क्या आप जानते हैं,सेंधा नमक के लाभ,Health Benefits of Rock Salt in Hindi,

Health Benefits of Rock Salt in Hindi,

सेंधा नमक के लाभ,Health Benefits of Rock Salt in Hindi

भारत मे अधिकांश लोग समुद्र से बना नमक खाते है । श्रेष्ठ प्रकार का नमक सेंधा नमक है, जो पहाडी नमक है इस नमक से हम सब परिचित है । व्रत के समय इसी नमक का उपयोग होता है । आयुर्वेद की बहुतसी दवाईयों मे सेंधा नमक का उपयोग होता है। आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप का भय रहता है । इसके विपरीत सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप पर नियन्त्रण रहता है । इसकी शुध्धता के कारण ही इसका उपयोग व्रत के भोजन मे होता है । सेंधा नमक की सबसे बडी समस्या है कि भारत मे यह काफ़ी कम मात्रा मे होता है ,

 सेंधा नमक के लाभ,Health Benefits of Rock Salt in Hindi,

  •  मांसपेशियों की ऐंठन से छुटकारा-सेंधा नमक वर्कआउट के बाद मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द के इलाज के लिए बहुत मददगार होती है। मैग्नीशियम प्रभावी ढंग से दर्द आसान बनाता है और सूजन को कम करता है। साथ ही मांसपेशियों को तनावमुक्‍त करने में भी मदद करता है। इसके लिए आप सेंधा नमक में थोड़ा सा गर्म पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। सुखदायक आराम पाने के लिए इस पेस्‍ट को प्रभावित क्षेत्र में लगाकर 15 से 20 मिनट के लिए लगाये। अन्‍य विकल्‍प के रूप में नमक मिले गुनगुने पानी से कम से कम 20 मिनट के लिए स्‍नान करें। इसके लिए एक गुनगुने पानी के टब में एक कप सेंधा नमक मिलाये।
  • दर्द दूर करें-सेंधा नमक दर्द और सूजन को दूर करने में भी आपकी मदद कर सकता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम शरीर में पीएच स्तर को विनियमित करने में मदद करता है। यह गठिया के किसी भी रूप से जुड़े जकड़न, सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह अस्थि मिनरल के रूप में भी मदद करता है। इसके अलावा, सेंधा नमक तंत्रिका की कार्यक्षमता को बढ़ावा देने और तंत्रिका के दर्द को आराम करने में भी मदद करता है। इसके लिए आप गुनगुने पानी में 2 चम्‍मच सेंधा नमक मिला लें। फिर शरीर के दर्द वाले अंग को इस पानी में 20 से 30 मिनट तक दर्द भिगोये। प्रत्‍येक सप्‍ताह इस उपाय को तीन बार करने से लाभ मिलता है। 
  • सेंधा नमक हड्डियों को मजबूत रखत है।मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या सेंधा नमक के सेवन से ही ठीक हो सकती है। नियमित सेंधा नमक का सेवन करने से प्राकृतिक नींद आती है। यह अनिंद्रा की तकलीफ को दूर करता है।
  • यह साइनस के दर्द को कम करता है।
  • शरीर में शर्करा को शरीर के अनुसार ही संतुलित रखता है। 
  • पाचन तंत्र को ठीक रखता है।
  • यह शरीर में जल के स्तर की जांच करता है जिसकी वजह से शरीर की क्रियाओं को मदद मिलती है।
  • पित्त की पत्थरी व मूत्रपिंड को रोकने में सेंधा नमक और दूसरे नमकों से बेहद उपयोगी है।
  • पानी के साथ सेंधा नमक लेने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
  • आयोडीन की कमी को दूर करके थाइरोइड की बीमारी को दूर करने में मदद करता है।
  • .ब्रेन हेमरेज और गठिया जैसी भयावह बीमारी से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।
  •  ऐतिहासिक रूप से पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’ कहा जाता है जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। अक्सर यह नमक इसी खान से आया करता था। 
  • सेंधे नमक को ‘लाहौरी नमक’ भी कहा जाता है क्योंकि यह व्यापारिक रूप से अक्सर लाहौर से होता हुआ पूरे उत्तर भारत में बेचा जाता था।  यह सफ़ेद और लाल रंग मे पाया जाता है । सफ़ेद रंग वाला नमक उत्तम होता है। 
  • यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। 
  • रक्त विकार आदि के रोग जिसमे नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
    सिर्फ आयोडीन के चक्कर में ज्यादा नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है। 
  • यह सफ़ेद और लाल रंग मे पाया जाता है । सफ़ेद रंग वाला नमक उत्तम होता है। यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। 
  • रक्त विकार आदि के रोग जिसमे नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
    यह पित्त नाशक और आंखों के लिये हितकारी है । दस्त, कृमिजन्य रोगो और रह्युमेटिज्म मे काफ़ी उपयोगी होता है ।

Friday, May 05, 2017

तुलसी के फायदे, Tulsi Ke Fayde, Health Benefits Of Tulsi Leafs in Hindi,

तुलसी ऐसा पौधा है जो अमूमन हर घर में पाया जाता है। तुलसी को बेसिल लीव्स के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि तुलसी के पौधे में कई दिव्य गुण हैं। तुलसी से कई गंभीर समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। भारत के हर हिस्से में तुलसी के पौधे को प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। तुलसी को हिन्दु संस्कृति में अतिपूजनीय पौधा माना गया है। 

माता तुल्य तुलसी को आंगन में लगा देने मात्र से अनेक रोग घर में प्रवेश नहीं करते हैं और यह हवा को भी शुद्ध बनाने का काम करती है। तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैन्कटम है। आदिवासी भी तुलसी को अनेक हर्बल नुस्खों में अपनाते हैं, चलिए आज जिक्र करेंगे तुलसी से जुडे आदिवासियों के ऐसे

औषधीय गुण.Health Benefits of tulsi in hindi,

    • किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।
    • खांसी के लिए तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल पत्तियों को अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है। तुलसी को चाय की पत्तियों के साथ उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है।
    • आदिवासी अंचलों मे पानी की शुध्दता के लिए तुलसी के पत्ते जल पात्र में डाल दिए जाते है। इन्हें कम से कम एक सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा जाता है। फिर कपड़े से पानी को छान लिया जाता है और यह पीने योग्य माना जाता है।
    • रोजाना तुलसी के पांच पत्ते खाने से मौसमी बुखार व जुकाम जैसी समस्याएं दूर रहती है। तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है। मुंह के छाले दूर होते हैं व दांत भी स्वस्थ रहते हैं।
    • सुबह पानी के साथ तुलसी की पत्तियां निगलने से कई प्रकार की बीमारियां व संक्रामक रोग नहीं होते हैं।
      दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में रोजाना तुलसी खाने व तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है।
    • तुलसी की जड़ का काढ़ा ज्वर (बुखार) नाशक होता है। तुलसी, अदरक और मुलैठी को घोटकर शहद के साथ लेने से सर्दी के बुखार में आराम होता है।
    • औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है।
    • दिल की बीमारी में यह वरदान साबित होती है, क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्राॅल को नियंत्रित करती है। जिन्हें दिल की बीमारी हुई हो, उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई भी स्वस्थ व्यक्ति सेवन कर सकता है।
    • तुलसी की पत्तियों का रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाएं। इसे रात को चेहरे पर लगाने से फोड़े- फुंसियां ठीक हो जाती हैं और चेहरे की रंगत में निखार आता है।
    • तुलसी को थकान मिटाने वाली एक औषधि भी माना जाता है, ज्यादा थकान या तनाव होने पर तुलसी के पत्तियों और मंजरी का सेवन करें थकान दूर हो जाएगी।
    • फ्लू रोग तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता है। डाँग- गुजरात में आदिवासी हर्बल जानकार फ्लु के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने की सलाह देते हैं।
    • इसके नियमित सेवन से "क्रोनिक-माइग्रेन" के निवारण में मदद मिलती है। रोजाना दिन में 4- 5 बार तुलसी से 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माईग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।
    • शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाए तो उसे जल्द ही संतान सुख मिलता है।
    • घमाैरियों के इलाज के लिए डांग- गुजरात के आदिवासी संतरे के छिलकों को छांव में सुखाकर पाउडर बना लेते हैं। इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर शरीर पर लगाते हैं, ऐसा करने से तुरंत आराम मिलता है।
    • जब भी तुलसी में खूब फुल यानी मंजिरी लग जाए तो उन्हें पकने पर तोड़ लेना चाहिए वरना तुलसी के झाड में चीटियाँ और कीड़ें लग जाते है और उसे समाप्त कर देते है . इन पकी हुई मंजिरियों को रख ले . इनमे से काले काले बीज अलग होंगे उसे एकत्र कर ले . यही सब्जा है . अगर आपके घर में नही है तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकान पर मिल जाएंगे
    • शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी:: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है
    • नपुंसकता:: तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढोतरि होती है।
    • यौन दुर्बलता : 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें। और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
    • मासिक धर्म में अनियमियता:: जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है
    • गर्भधारण में समस्या:: जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो मासिक आने पर ५-५ ग्राम तुलसी बीज सुबह शाम पानी के साथ ले जब तक मासिक रहे ,
    • मासिक ख़त्म होने के बाद माजूफल का चूर्ण १० ग्राम सुबह शाम पानी के साथ ले ३ दिन तक तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां दाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है यह पित्त घटाता है ये त्रीदोषनाशक , क्षुधावर्धक है .
    • तुलसी के बीज,सफेद मुसली और माजूफल का चूर्ण आपको पंसारी की दूकान या आयुर्वैदिक दवाओ कि दूकान से मिल जायेंगे

      Wednesday, April 05, 2017

      शहद के औषधीय गुण-Health Benefits of Honey in Hindi,शहद खाने के फायदे,

      शहद के औषधीय गुण-Health Benefits of Honey in Hindi,शहद खाने के फायदे,
      शहद का प्रयोग पुराने समय से चलता आ रहा है। हर घर में शहद होता है लेकिन शहद के कई गुणों के बारे में अभी तक आपको पता न हो। प्राचीन समय से मधु यानि कि शहद का इस्तेमाल तीस फीसदी से अधिक चिकित्सा में यानि कि बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है। शहद में एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं यह आपको कई बीमारीयों से बचाते है

      शहद खाने के फायदे,

        • शहद अन्य उत्पादों के मुकाबले वजन को कम करके में ज्यादा जल्दी असर करता है। इसके साथ ही
        • डायटिंग करते वक्त यह शरीर को भरपूर पोषण भी देता है। 
        • शहद का प्रयोग पानी के साथ करना ज्यादा हितकर होता है। अगर पानी गरम हो तो और भी जल्दी शरीर से वजन कम होता है। शहद खाने के फायदे,
        • दूध में डालकर हल्के गर्म दूध में शहद की कुछ बूंदें डालकर पीने से बढ़ी हुई चर्बी बहुत जल्दी कम होने लगती है. उबले हुए दूध में कम कैलरी होती है जिसकी वजह से इससे वजन नहीं बढ़ता है और इसमें कुछ बूंदें शहद की डाल देने से यह और फायदेमंद हो जाता है. 
        • गर्म पानी में शहद डालकर हल्के गर्म पानी में शहद की कुछ बूंदें डालकर अच्छी तरह मिला लें. अगर आप इसमें कुछ बूंदें नींबू के रस की डाल देते हैं तो ये और बेहतर तरीके से असर करेगा. सुबह खाली पेट इसका सेवन करना सबसे अधिक फायदेमंद रहेगा. 
        • ओट्स के साथ शहद का सेवन सुबह के ब्रेकफास्ट में आप जो भी कुछ अब तक खाते आए हैं उसे छोड़कर ओट्स और शहद अपनाइए. ओेट्स और शहद के सेवन आपकी सुबह को हेल्दी शुरुआत देगा. साथ ही पेट कम करने में यह दोहरे रूप से फायदा पहुंचाएगा.
        • नींबू और शहद एक साथ लेने से वजन कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। अगर आप रोज़ सुबह
        • नींबू, शहद और गरम पानी मिला कर पिएगें तो आपका वजन तेज़ी से घटेगा।
        • क्या आपको पता है कि शहद से गुस्सा कंट्रोल होता है। जी हां, शहद को दूध में मिला कर पीने से
        • गुस्सा तो कम होता ही है साथ में खूब सारा पोषण भी मिलता है।
        • अगर आप अपने भोजन में भी शहद को प्रयोग करना चाहते हैं तो उसको कम वसा वाले दही में मिला
        • कर खाएं। अगर आप इसे रोज़ सुबह नाश्ते के वक्त खाएगें तो लाभ होगा।
        • कई डायटिंग करने वाले लोग इसको फ्रूट सलाद में भी मिला कर प्रयोग करते हैं। बस करना केवल यह है कि शहद की कुछ बूदें अपने सलाद में डालें और मिला कर खा जाएं। यह काफी हेल्दी स्नैक्स हो सकता है
        • शहद को ओटमील में मिला कर नाश्ते में खाने से वजन कम होता है। इससे स्वास्थ्य तो अच्छा होता ही है साथ में वजन भी कम होता है। 
        • अगर आपको वजन कम करना है तो हर भोजन के बाद नींबू, शहद और गरम पानी मिला कर पिने से लाभ होता है और एक्स्ट्रा कैलोरी भी बर्न होती है। यह जिम के बाद लौट कर भी पिया जा सकता है क्योंकि इससे तुरंत शक्ति मिलती है। 
        • एक चुटकी छोटी हरड़ का पावडर और एक चम्मच शहद मिलाकर खाने से अम्ल पित्त शांत हो जाता है
        • आधा नींबू का रस एक चम्मच शहद मिलाकर चाट लें अम्ल पित्त मे आराम हो जाएगा ।
        • नींबू के पत्तों का रस और शहद समान मात्रा मे लेकर खिलाने से पेट के कीड़े मर जाते है ।
        • त्रिफला एक छोटी चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर रात्री के समय खाने के बाद चाट लिया करें और ऊपर से दूध पी लें , पेट के सभी रोगों से छुटकारा मिल जाएगा 
        • बीस ग्राम शहद दस ग्राम गाय का मक्खन मिलाकर दिन मे दो बार खाने से टी बी रोग ठीक हो जाता है ।
        • अकरकरा का चूर्ण एक ग्राम दस ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकी दूर हो जाती है ।
        • शहद और दो बूंद नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की कांति लौट आती है।
        • एक चम्मच प्याज का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर बालों पर लगाने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं
        • एक छोटा चम्मच शहद मे एक बादाम घिस कर मिला लें और रोज छोटे बच्चों को चटा देने से वे मजबूत कांतिवान मोटे हो जाते है 
        • बच्चों को खांसी होने पर एक चम्मच शहद मे एक चुटकी हल्दी मिलाकर सोते समय व सुबह खाली पेट चटा दे दो तीन दिनों मे खांसी गायब हो जाएगी । इस नुस्खे को बडे भी आजमा सकते हैं।
        • शहद मे अदरक का रस और एक चुटकी दालचीनी पावडर मिलाकर चाटने से जोड़ों मे आराम मिलता है । खांसी होने पर भी इस प्रयोग को आजमाए सौ प्रतिशत आराम मिल जाएगा ।
        • शरीर पर पड़े खरोंचों को जल्दी ठीक करने के लिए शहद मलना चाहिए। यह खरोचों के निशान भी हल्के कर देता है। 
        • शहद सेवन श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या को कम होने से रोकाता है। प्रतिदिन दो चम्मच शहद पीने से यह कीमोथैरेपी में असरदायक होता है। 
        • भोजन से अरुचि होने पर एक चम्मच खट्टे अनार का रस और एक बड़ा चम्मच शहद और सेंधा नमक मिलाकर खिलाने से भोजन मे रुचि पैदा हो जाती है । जो लोग योग का अभ्यास करते हैं उनके लिए शहद बेहद फायदेमंद होता है। शहद के सेवन से शरीर के रसायन यानि कैमिकल संतुलित रहता है। सुबह के समय में योग शुरू करने से पहले गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीने से शरीर के सारे अंग सक्रिय हो जाते हैं। शहद खाने के फायदे,

          Monday, April 03, 2017

          गोमुत्र के लाभ,Health Benefits Of Gomutra Cow Urine in Hindi,

          गोमुत्र के लाभ,Cow Urine Benefits,Health Benefits Of Gomutra Cow Urine in Hindi to Cure

          हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार गाय के गोबर में लक्ष्मी और मूत्र में गंगा का वास होता है, जबकि आयुर्वेद में गौमूत्र के ढेरों प्रयोग कहे गए हैं। गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से थोड़े से गौमूत्र का भी सेवन करते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है       गोमुत्र पतंजलि
          • कैंसर की चिकित्सा में रेडियो एक्टिव एलिमेन्ट प्रयोग में लाए जाते है गौमूत्र में विद्यमान सोडियम,पोटेशियम,मैग्नेशियम,फास्फोरस,सल्फर आदि में से कुछ लवण विघटित होकर रेडियो एलिमेन्ट की तरह कार्य करने लगते है और कैंसर की अनियन्त्रित वृद्धि पर तुरन्त नियंत्रण करते है | कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते है | अर्क आँपरेशन के बाद बची कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट करता है | यानी गौमूत्र में कैसर बीमारी को दूर करने की शक्ति समाहित है |
          • दूध देने वाली गाय के मूत्र में “लेक्टोज” की मात्रा आधिक पाई जाती है, जो हृदय और मस्तिष्क के विकारों के लिए उपयोगी होता है।
          • गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है! इसके अन्दर ‘कार्बोलिक एसिड‘ होता है जो कीटाणु नासक है, यह किटाणु जनित रोगों का भी नाश करता है। गौमूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे, ख़राब नहीं होता है।
          • जोड़ों के दर्द में दर्द वाले स्थान पर गौमूत्र से सेकाई करने से आराम मिलता है। सर्दियों के मौषम में इस परेशानी में सोंठ के साथ गौ मूत्र पीना फायदेमंद बताया गया है।
          • गैस की शिकायत में प्रातःकाल आधे कप पानी में गौ मूत्र के साथ नमक और नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए। 
          • चर्म रोग में गौ मूत्र और पीसे हुए जीरे के लेप से लाभ मिलता है। खाज, खुजली में गौ मूत्र उपयोगी है।
          • गौमूत्र मोटापा कम करने में भी सहायक है। एक ग्लास ताजे पानी में चार बूंद गौ मूत्र के साथ दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित पीने से लाभ मिलता है।
          • गौमूत्र का सेवन छानकर किया जाना चाहिए। यह वैसा रसायन है, जो वृद्धावस्था को रोकता है और शरीर को स्वस्थ्यकर बनाए रखता है।
          • गौमूत्र किसी भी प्रकृतिक औषधी के साथ मिलकर उसके गुण-धर्म को बीस गुणा बढ़ा देता है| गौमूत्र का कई खाद्य पदार्थों के साथ अच्छा संबंध है जैसे गौमूत्र के साथ गुड़, गौमूत्र शहद के साथ आदि|
          • अमेरिका में हुए एक अनुसंधान से सिध्द हो गया है कि गौ के पेट में "विटामिन बी" सदा ही रहता है। यह सतोगुणी रस है व विचारों में सात्विकता लाता है। 
          • गौमूत्र लेने का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल का होता है और इसे पेट साफ करने के बाद खाली पेट लेना चाहिए| गौमूत्र सेवन के 1 घंटे पश्चात ही भोजन करना चाहिए 
          • गौमूत्र देशी गाय का ही सेवन करना सही रहता है। गाय का गर्भवती या रोग ग्रस्त नहीं होना चाहिए। एक वर्ष से बड़ी बछिया का गौ मूत्र बहुत लाभकारी होता है।
          • मांसाहारी व्यक्ति को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए गौमूत्र लेने के 15 दिन पहले मांसाहार का त्याग कर देना चाहिए| पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति को सीधे गौमूत्र नहीं लेना चाहिए, गौमूत्र को पानी में मिलाकर लेना चाहिए| पीलिया के रोगी को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| देर रात्रि में गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| ग्रीष्म ऋतु में गौमूत्र कम मात्र में लेना चाहिए Benefits,Health Benefits Of Gomutra
          • घर में गौमूत्र छिड़कने से लक्ष्मी कृपा मिलती है, जिस घर में प्रतिदिन गौमूत्र का छिड़काव किया जाता है, वहां देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।
          • गौमूत्र में गंगा मईया वास करती हैं। गंगा को सभी पापों का हरण करने वाली माना गया है, अत: गौमूत्र पीने से पापों का नाश होता है। 

          • जिस घर में नियमित रूप से गौमूत्र का छिड़काव होता है, वहां बहुत सारे वास्तु दोषों का समाधान एक साथ हो जाता हैं। 
          • देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ,प्रोपिलीन ऑक्साइड” उत्पन्न होती है, जो बारिस लाने में सहायक होती है| इसी के मिश्रण से ‘इथिलीन ऑक्साइड‘ गैस निकलती है जो ऑपरेशन थियटर में काम आता है
          • गोमुत्र कीटनाशक के रूप में भी उपयोगी है। देसी गाय के एक लीटर गोमुत्र को आठ लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग किया जाता है । गोमुत्र के माध्यम से फसल को नैसर्गिक युरिया मिलता है। इस कारण खाद के रूप में भी यह छिड़काव उपयोगी होता है ।गौमूत्र से औषधियाँ एपं कीट नियंत्रक बनाया जा सकता है। Benefits,Health Benefits Of Gomutra

          by राजीव दिक्षित JI

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