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Monday, August 05, 2019

गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए,What to not eat in Pregnancy in Hindi

गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए।,WHAT TO NOT EAT IN PREGNANCY IN HINDI !

किसी महिला को मां के दर्जे तक पहुंचाने वाले नौ महीने बेशकीमती होते हैं। इन नौ महीनों में वह क्या सोचती है, क्या खाती है, क्या करती है, क्या पढ़ती है, ये तमाम चीजें मिलकर आनेवाले बच्चे की सेहत और पर्सनैलिटी तय करती हैं। इन नौ महीनों को अच्छी तरह प्लान करके कैसे मां एक सेहतमंद जिंदगी को जीवन दे सकती है

गर्भावस्‍था में क्‍या खाए जाए से जरूरी यह जानना है कि क्‍या न खाया जाए। घर-परिवार की बुजुर्ग महिलाएं अपने अनुभव के आधार पर यह राय देती रहती हैं। चलिए जानते हैं कि गर्भावस्‍था में कौन सी सब्‍जियों और फलों से परहेज करना चाहिए। आइये जानें, गर्भवस्‍था के दौरान कौन-कौन से फल और सब्जियां ना खाएं।
  • गर्भावस्था के दौरान इन चीजों के सेवन बचें :-बिना धुले हुए फल और सब्जियां ना खाये :- गर्भावस्था के दौरान पके हुए खाद्य पदार्थ खाएं। कच्चे और बिना पके खाद्य पदार्थ न खाएं। फल और सब्जियां तथा ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें खाने से पहले धोने की आवश्यकता होती है, उन्हें बिना धोएं न खाएं।
  • कॉफ़ी, चाय और शराब से दूर रहे :- प्रसव के दौरान जटिलताओं से तथा भ्रूण में जन्म दोष से बचने के लिए गर्भावस्था के दौरान चाय, कॉफ़ी और शराब के सेवन से बचें। इन तीन पेय पदार्थों के अत्याधिक सेवन से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
  • पपीता ना खाये :- कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान पपीता ना खाए। पपीता खाने से प्रसव जल्दी होने की संभावना बनती है। पपीता, विशेष रूप से अपरिपक्व और अर्द्ध परिपक्व लेटेक्स जो गर्भाशय के संकुचन को ट्रिगर करने के लिए जाना जाता है को बढ़ावा देता है। गर्भावस्था के तीसरे और अंतिम तिमाही के दौरान पका हुआ पपीता खाना अच्छा होता हैं। पके हुए पपीते में विटामिन सी और अन्य पौष्टिक तत्वों की प्रचुरता होती है, जो गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों जैसे कब्ज को रोकने में मदद करता है। शहद और दूध के साथ मिश्रित पपीता गर्भवती महिलाओं के लिए और विशेष रूप से स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए एक उत्कृष्ट टॉनिक होता है।
  • अनानास ना खाये :- गर्भावस्था के दौरान अनानस खाना गर्भवती महिला के स्‍वास्‍थ्‍ा के लिए हानिकारक हो सकता है। अनानास में प्रचुर मात्रा में ब्रोमेलिन पाया जाता है, जो गर्भाशय ग्रीवा की नरमी का कारण बन सकती हैं, जिसके कारण जल्‍दी प्रसव होने की सभांवना बढ़ जाती है। हालांकि, एक गर्भवती महिला अगर दस्त होने पर थोड़ी मात्रा में अनानास का रस पीती है तो इससे उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। वैसे पहली तिमाही के दौरान इसका सेवन ना करना ही सही रहेगा, इससे किसी भी प्रकार के गर्भाशय के अप्रत्याशित घटना से बचा जा सकता है।
  • अंगूर का सेवन ना करे :- डॉक्‍टर गर्भवती महिलाओं को उसके गर्भवस्‍था के अंतिम तिमाही में अंगूर खाने से मना करते है। क्‍योंकि इसकी तासिर गरम होती है। इसलिए बहुत ज्‍यादा अंगूर खाने से असमय प्रसव हो सकता हैं। कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान अंगूर ना खाए।
  • पारा यानी कि मरक्युरी बच्चे के मस्तिष्क के विकास में विलंब पैदा करता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पारा युक्त मछली के सेवन से बचना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान भारतीय महिलाओं को पपीता का सेवन करने से मना किया जाता है, खासकर के अगर पपीता कच्चा या अधपका हो।
  • बैंगन, मिर्ची, प्याज, लहसुन, हिंग, बाजरा, गुड़ का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए, खासकर के उनको जिनका किसी न किसी कारण से पहले गर्भपात हो चुका है।
  • पिसे हुए मसालेदार मांस का सेवन करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि उसमे हानिकारक जीवाणुओं का समावेश हो सकमीट
  • कच्‍चा या अधपका मीट खाने से गर्भावस्‍था के शुरूआती दिनों में बचना चाहिये। बेहतर होगा कि गर्भावस्‍था के दिनों में आप मीट को अच्‍छी तरह पकाकर खाएं। गर्भावस्‍था में प्रॉन मीट खाने से बचना चाहिये।
  • डिब्बा बंद भोजन और अचार के रूप में, लंबी अवधि के भंडारण के लिए करना है कि खाना नहीं खाते।डिब्बाबंद।स्टू, मछली और सब्जी के विभिन्न प्रकार इसकी संरचना में बरकरार रखता सिरका या अन्य परिरक्षकों है।भ्रूण के विकास पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है गर्भवस्था के समय हर महिला को अपने खानपान से लेकर हर छोटी सी बड़ी चीजों का बड़ा ध्यान रखना होता है इसके लिए जरूरी होता है कि क्या खाएं और क्या न खाएं इसका भी बहुत ही खास ध्यान रखना होता है।
  • जी हां एक शोध के अनुसार पता चला है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान आलू का सेवन ज्यादा करती है उनको मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है। तो ऐसे समय आप आलू की जगह और दूसरी सब्जियों का सेवन करना शुरू कर दें।

Wednesday, September 26, 2018

पीरियड के कितने दिन बाद प्रेग्नेंट होते है,? Period Ke Kitne Din Baad Pregnancy Hoti Hai in Hindi,


ओवुलेशन चक्र को समझ लेने से आपके गर्भवती होने की समभावना बढ़ जाती हैं। जितने भी लोग बच्चा पैदा करना चाहते हैं , उनमे से लगभग 85% लोग एक साल के अन्दर ऐसा करने में सफल हो जाते हैं. जिसमे से 22 % लोग तो पहले महीने के अन्दर ही सफल हो जाते हैं. यदि एक साल तक प्रयास करने पर भी बच्चा ना हो तो यह समस्य का विषय हो सकता है , और ऐसे जोड़ों को बांझ समझा जाता हैं.

बच्चा पैदा होने के लिए couples के बीच सेक्स का होना अनिवार्य है. और इसके दौरान पुरुष का penis (लिंग) इस्त्री के vagina (योनी) में जाना चाहिए और उसे इस्त्री के vagina में sperm ( शुक्राणु ) छोड़ने होंगे , जिससे sperm ,uterus(गर्भाशय) के मुख के पास इकठ्ठा हो जायेगा

इसके आलावा सम्भोग ovaluation के समय के आस-पास होना चाहिए. Ovaluation एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे महिलाओं के Ovary (अंडाशय ) से egg ( अंडे) निकलते हैं. बच्चा पैदा करने के लिए महिलाओं में सेक्स के दौरान orgasm होना अनिवार्य नहीं है. Doctors का कहना है कि दरअसल fallopian tube जो कि अंडे को ovary से uterus तक ले जाता है , sperm को अपने अन्दर खींच ले जाता है और उसे egg से मिलाने की कोशिश करता है. और इसके लिए महिलाओं में orgasm का आना जरूरी नहीं है.

पीरियड के कितने दिन बाद प्रेग्नेंट होते है,

Ovulation का समय पता करने का अर्थ है उस समय का पता करना जब ovaries से fertilization के लिए तैयार egg निकले. इसे जानने के लिए आपको अपने period-cycle (मासिक-धर्म) का अंदाजा होना चाहिए. यह 24 से 40 दिन के बीच हो सकता है. अब यदि आप को अपने next period के आने का अंदाजा है तो आप उससे 12 से 16 दिन पहले का समय पता कर लीजिये , यही आपका ovulation का समय होगा .
For Example: यदि period की शुरुआत 30 तारीख को होनी है तो 14 से 18 तारिख का समय ovulation का समय होगा.
 सही समय पर सेक्स न करना। अधिकतर जोड़े इस बात से अंजान होते हैं कि गर्भधारण में सेक्स की 'टाइमिंग' बहत मायने रखती है। समय पर सहवास-गर्भवती होने के लिए सिर्फ सहवास करना जरूरी नहीं होता बल्कि सही समय पर सहवास करना भी मायने रखता है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि पुरुष के शुक्राणु हमेशा लगभग एक जैसे ही होते हैं, जो महिला को गर्भवती कर सकते हैं। लेकिन महिला का शरीर ऐसा नहीं होता जो कभी भी गर्भवती हो सके। उसका एक निश्चित समय होता है, एक छोटी सी अवधि होती है।  
Ovulation के समय के आस-पास sex करें Gynecologists का मानना है कि बच्चा पैदा करने के लिए इस्त्री के eggs ovary से निकलने के 24 घंटे के अन्दर ही fertilize होने चाहियें. आदमी के sperms औरत के reproductive tract (प्रजनन पथ) में 48 से 72 घंटे तक ही जीवित रह सकते हैं. चूँकि बच्चा पैदा करने के लिए आवश्यक embryo (भ्रूण ) egg और sperm के मिलन से ही बनता है , इसलिए couples को ovulation के दौरान कम से कम 72 घंटे में एक बार ज़रूर sex करना चाहिए और इस दौरान पुरुष को इस्त्री के ऊपर होना चाहिए ताकि sperms के leakage की सम्भावना कम हो. साथ ही पुरुषों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो 48 घंटे में एक बार से ज्यादा ना ejaculate करें वरना उनका sperm count काफी नीचे जा सकता है , जो हो सकता है कि egg जो fertilize करने में पर्याप्त ना हो.
  • एक healthy lifestyle बनाए रखें.बच्चा पैदा करने के chances बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है कि पति-पत्नी एक स्वस्थ्य- जीवनशैली बनाये रखें. इससे होने वाली संतान भी अच्छी होगी. खाने – पीने में पर्याप्त भोजन और फल की मात्रा रखें . Vitamins कि सही मात्र से पुरुष-स्त्री दोनों की fertility rate बढती है .रोजाना व्यायाम करने से भी फायदा होता है.
  • सिगरेट पीने वाली महिलाओं में conceive करने के chances 40 % तक घट जाते हैं Stress-free (तनाव-मुक्त) रहने का प्रयास करें:इसमें कोई शक नहीं है कि अत्यधिक तनाव आपके reproductive function में बाधा डालेगा. तनाव से कामेक्षा ख़तम हो सकती है , और extreme conditions में स्त्रियों में menstruation कि प्रक्रिया को रोक सकती है. एक शांत मन आपके शरीर पर अच्छा प्रभाव डालता है और आपके pregnant होने की सम्भावना को बढ़ता है. इसके लिए आप regularly breathing- exercises और relaxation techniques का प्रयोग कर सकती हैं.
  • Testicles (अंडकोष)को ज्यादा heat से बचाएँ :यदि sperms ज्यादा तापमान में expose हो जायें तो वो मृत हो सकते हैं. इसीलिए Testicles (जहाँ sperms का निर्माण होता है) body के बहार होते हैं ताकि वो ठंढे रह सकें. गाड़ी चलते समय ऐसे beaded सीट का प्रयोग करें जिसमे से थोड़ी हवा पास हो सके. और बहुत ज्यादा गरम पानी से इस अंग को ना धोएं .
  • सेक्स के बाद थोड़ी देर आराम करें-सेक्स के बाद थोड़ी देर लेटे रहने से महिलाओं कि योनी से sperms के निकलने के chances नहीं रहते. इसलिए सेक्स के बाद 15-20 मिनट लेटे रहना ठीक रहता है.
  • किसी तरह का नशा ना करे:ड्रग्स , नशीली दवाओं, सिगरेट या शराब के सेवन आदमी-औरत , दोनों के hormones का संतुलन बिगड़ सकता है. और आपकी प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.
  • दवाओं का प्रयोग कम से कम करें-कई दवाइयां , यहाँ तक कि आराम से मिल जाने वाली आम दवाइयां भी आपकी fertility पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं.कई चीजें ovulation को रोक सकती हैं , इसलिए दवाओं का उपयोग कम से कम करें. बेहतर होगा कि आप किसी भी दावा को लेने या छोड़ने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें.
  • Lubricants को avoid करें-Vagina को lubricate में प्रयोग होने वाले कुछ ज़ेल्स, तरल पदार्थ , इत्यादि sperms को महिलाओं की reproductive tract में travel करने में बाधक हो सकते हैं. इसलिए इनका प्रयोग अपने डाक्टर से पूछ कर ही करें

Friday, April 14, 2017

जानें, 1 से 9 महीने तक कैसे मां के गर्भ में होता है बच्चे का विकास,गर्भ में भ्रूण का विकास,Learn Child Development in The Womb of The Mother During 1 To 9 Months in Hindi

गर्भवती होने का एहसास सिर्फ एक गर्भवती स्त्री ही समझ सकती है। ऐसे बहुत से काम होते होंगे जो आप पहले भी करती होंगी। एक नई जिंदगी गर्भ में जब सांस लेती है तो उसका अनुभव ही अलग होता है। उसका एहसास बहुत कोमल होता है। एक तरफ खुशी, हजार सपने और दूसरी तरफ जिम्मेदारी।
मां बनना हर स्त्री के लिए एक ख़ूबसूरत एहसास होता है। इन दिनों वह अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की कुछ हरकतों से भी वाकिफ होती है
गर्भावस्था अपने आप में महत्वपूर्ण समय में से एक है। गर्भधारण के पश्चात गर्भवती महिला के शरीर में हलचल होनी शुरू हो जाती है, जिसके परिणाम शरीर में बाहरी रूप से दिखाई पड़ने लगते है। विकास की प्रांरभिक अवस्था के लक्षण शुरूआत में निरंतर बदलते रहते हैं। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री के हार्मोंस में तेजी से बदलाव आता है। प्रत्येक महीने में ये बदलाव और भी अधिक तेज हो जाते है। एक महीने के गर्भ में भी बच्चे के विकास को देखा जा सकता है। आइए जानते हैं भ्रूण महीने से विकास महीने के बारे में।

जानें, 1 से 9 महीने तक कैसे मां के गर्भ में होता है बच्चे का विकास,Learn Child Development in The Womb of The Mother During 1 To 9 Months in Hindi

  • पहला महीना : गर्भधारण के पहले महीने में आमतौर पर सेहत संबंधी समस्याएं अधिक नहीं होतीं। पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं। बार-बार यूरिन जाना पड सकता है। इस समय भ्रूण का आकार चावल के दाने के बराबर होता है।
  • दूसरा महीना : यह समय थोडा जटिल होता है। इस महीने शिशु के हृदय का विकास होता है। इस महीने के बाद अल्ट्रासाउंड के सहारे यह बताना आसान हो जाता है कि बच्चे का सिर किस तरफ और पैर किस तरफ है
  • तीसरा महीना: इस महीने में शिशु की हड्डियों का निर्माण होता है। उसके हाथ और पैर बनना शुरू होते हैं। बच्चे के कान और बाहरी अंग बनने लगते हैं। इस समय बच्चे का सिर शरीर का सबसे बडा भाग होता है।
  • चौथा महीना : इस माह हॉर्मोन का निर्माण होने लगता है। बच्चे के शरीर से एमनियोटिक द्रव भी निकलने लगता है।
  • पांचवां महीना : बच्चे की लंबाई लगभग 25 सेंटीमीटर होती है। इस माह बच्चा जम्हाई और फेशियल एक्सप्रेशन देने लगता है। अब आप होने वाले बच्चे की गति को महसूस कर सकती हैं।
  • छठा महीना : इस माह बच्चे की आंखें खुलने और बंद होने लगती है।
  • सातवां महीना : बच्चे की किक महसूस करने का समय यही है। आपका होने वाला शिशु आपके पाचन तंत्र और आपकी सांसों की गति को महसूस कर सकता है। उसके सिर पर बाल मोटे होने लगते हैं।
  • आठवां महीना : आपका शिशु इस समय पूरी तरह विकसित हो चुका है। उसका मूवमेंट थोडा कम हो सकता है।
  • नौवां महीना : आपका शिशु अब किसी भी समय इस दुनिया में कदम रख सकता है।

Thursday, April 13, 2017

गर्भनिरोधक घरेलू उपाय,Birth Control Home Remedies in Hindi,

गर्भनिरोधक घरेलू उपाय,Birth Control Home Remedies in Hindi,

अक्सर लोग सेक्स के लिए प्रोटेक्शन इस्तेमाल नहीं करते, जिसकी वजह से उन्हें बाद में अनचाही प्रेगनेंसी का सामना करना पड़ता है। सेक्स में गलती की वजह से कई महिलाओं को गर्भनिरोधक लेने की ज़रुरत पड़ती है, जिसका बुरा असर उनकी सेहत पर भी पड़ता है। तो आइये आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में, जिसे इस्तेमाल कर आप अनचाहे गर्भ को रोक सकते हैं।
  • पुदीने के पत्ते : गर्भ धारण से बचने के लिए आप पुदीने के पत्तो को सुखा कर उसका पाउडर बना लें और इन्हें किसी बर्तन में संचित कर लें. जब भी आपका अपने साथी के साथ भोग करने का मन हो तो आप इसकी एक चम्मच को 5 मिनट पहले गुनगुने पानी के साथ लें. निश्चित रूप से आपको लाभ प्राप्त होगा
  • केले का पेड़ जिस पर फल न लगा हो। या फलहीन पेड़ हो, उसकी जड़ उखाड़कर सुखा लें। उसका चूर्णं बनाकर रख लें। मासिक के समय 4-5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता।
  • माहवारी खत्‍म होने के बाद तुलसी के पत्‍तों का काढ़ा चार दिन तक लगातार पीने से भी गर्भ ठहरने की संभावना कम हो जाती है।
  • सुबह उठने के बाद बासी मुंह (बिना कुल्‍ला किए) एक दो लौंग चबाने से भी गर्भ नहीं ठहरता है।
  • मासिक धर्म के समय चंपा के फूलों को पीस कर पीने से गर्भधारण की संभावना नहीं रहती। जब तक बच्‍चा न चाहें, तब तक इसे प्रयोग कर सकती हैं।
  • संभोग करने से पहले योनि में शहद लगाने से भी गर्भधारण नहीं होता है।
  • संभोग से पहले योनि में नीम का तेल लगाने से गर्भ नहीं ठहरता है।
  • पपीता: अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद पपीता ज़रूर खाएं, इससे गर्भधारण नहीं होगा और आपको बाद में गर्भपात कराने की ज़रुरत नहीं होगी। इसे सेक्स के बाद २ से 3 दिनों तक दिन में २ बार खाने की सलाह दी जाती है।
  • अदरक: अदरक भी एक गर्भ निरोधक के रूप में काम करती है। यदि आप अनचाहा गर्भधारण नहीं चाहती, तो सेक्स के बाद अदरक को गर्म पानी में गर्म कर पीयें। इससे आप निश्चिन्त हो सकती हैं

गर्भपात के घरेलू नुस्खे,Home Remedies for Abortion in Hindi,

गर्भपात के घरेलू नुस्खे,Home Remedies for Abortion in Hindi,

गर्भ धारण करना जहाँ एक सुखद एहसास होता है, वहीं कई बार Abortion ( गर्भपात ) करना भी जरूरी हो जाता है. असुरक्षित सम्भोग के बाद Abortion ( गर्भपात ) घर में भी किया जा सकता है, लेकिन कुछ Precautions ( सावधानियों ) के साथ.
अगर प्राकृतिक गर्भपात 1 महीने के अंदर ही करवाया जाए तो यह ज्‍यादा असरदार होगा नहीं तो ज्‍यादा चांस नहीं है। मेडिकल टर्मिनल ऑफ प्रेग्नेसी एक्ट की तो इसके तहत 20 हफ्ते के बाद एबार्शन नहीं हो सकता है। बेहतर है कि आप घर पर ही प्राकृतिक गर्भपात कर लें। अगर किसी वजह से गर्भ 9 सप्ताह से अधिक समय का हो गया है तो इस से छुटकारा पाने के लिए सर्जिकल गर्भपात सुरक्षित होगा।

 अनचाहे गर्भ के घरेलू उपाय,Gharelu Nuskhe for Abortion in Hindi

  • इसके लिए स्त्रियों को विटामिन सी से युक्त खाना जैसेकि निम्बू, संतरा, हरी सब्जी, गोभी और खीर इत्यादि खाना चाहियें, शरीर की मालिश और भरी कार्य करने चाहियें, गर्म पानी पीना और उससे नहाना चाहियें 
  •  गर्भपात का एक और तरीका होता है गर्भरोधक गोलियों का सेवन करना. ये गोलियां किसी भी दवाई की दुकान में आसानी से उपलब्ध होती हैं.
  • अनार अगर आप अनार को उसके बीज के साथ ही खाएं तो आपके मिसकैरेज होने के चांस काफी ज्‍यादा बढ़ जाते हैं। पुराने जमाने से ही अनार के दानों को प्राकृतिक गर्भपात के लिये प्रयोग किया जाता था।
  • भूने हुए तिल के दाने को honey ( शहद ) के साथ खाएँ, यह भी आपके लिए मददगार साबित होगा.
  • सीता फल के बीज को पीसकर अपनी योनी में अच्छी तरह से मलें, इससे अनचाहा गर्भ नहीं ठहरेगा. ऐसा कुछ दिनों तक लगातार करें.
  • लहसून की 2 कली खाएँ, यह गर्भपात में मदद करेगा. Eating garlic helps in abortion.
  • असुरक्षित सेक्स करने के तुरंत बाद स्त्री का खड़ा हो जाना तथा अपनी योनी की तुरंत अच्छे से सफाई करने से भी बच्चा होने का खतरा कम हो जाता है.
  •  ग्रीन टी ( Green Tea ) : ग्रीन टी या हरी चाय के स्वास्थ्य को बहुत फायदे होते है जैसेकि वजन कम करना, शरीर को चुस्त रखना, हृदय को स्वस्थ रखना इत्यादि. किन्तु अगर इसका अधिक सेवन कर लिए जाये तो ये शरीर के लिए समस्या भी उत्पन्न कर सकता है खासतौर पर गर्भवती स्त्रियों के लिए. इसीलिए इसके पैकेट पर भी लिखा होता है कि गर्भवती स्त्री इसका सेवन न करें. किन्तु गर्भपात के लिए आप इसका सेवन जरुर करें.
  • तुलसी के पत्ते ( Basil leaves ) का काढ़ा ( Brew ) 2-4 दिन पिएँ.
  •  सूखे मेवे- सूखे मेवे जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं, यह शुरुआती गर्भ को खत्म कर सकते हैं।
  • अंडे- गर्भवती महिलाएं जो हाल ही में गर्भवती हुई हो अण्डों के सेवन से बचती है, क्योंकि इससे गर्भपात होने का डर होता है।
  • ज्यादा उछल-कूद और व्यायाम गर्भ गिराने में मददगार होते हैं
  • तिल और शहद  ( Sesame and Honey ) : जिन स्त्री को अनचाहा गर्भ है उन्हें माहवारी के दौरान हर रोज सुबह खली पेट एक चम्मच सीके हुए तिल में शहद मिलाकर लेना चाहियें. इससे उन्हें अधिक खून आता है और उनके गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है. तिल के तेल की मालिश भी आपके लिए बहुत लाभदायक होती है
  • पपीता और अनानास ( Papaya and Pineapple ) : गर्भपात के लिए पपीते के बारे में सबने जरुर सुना होगा. क्योकि हर गर्भवती स्त्री को ये सलाह दी जाती है कि वो पपीते से दूर रहे वर्ना उन्हें गर्भ से जुडी समस्या हो सकती है किन्तु आपको तो गर्भपात करना है न तो आप जितना हो सके पपीता और
  • अनानास खायें. इसका एक फायदा ये भी है कि इससे पीरियड्स भी जल्दी आते है. इन दोनों में पाया जाना वाला रसायन जिसे पपेन कहा जाता है वो गर्भपात को बढ़ावा देता है.
  • 3- 2 ग्राम बबूल के नर्म पत्ते लें, और उन्हें 2 कप पानी में उबालें जब तक कि यह उबलकर एक कप नहीं हो जाता. नियमित रूप से इसका सेवन करें जब तक गर्भ गिर नहीं जाता.
  •  इसके साथ साथ आप अनानाश का भी लगातार सेवन करते रहे. अनानाश से भी आपको विटामिन से मिलती है और कुछ ऐसे कारण उत्तपन करता है जिससे की आपका घर में ही गर्भपात हो सके.
  • आप सोयाबीन के दानो को रात में पानी में भिगो कर रख दे और सुबह खाली पेट उस पानी का सेवन करे, ये तरीका भी आपको आपके घर में ही गर्भपात में सहायक होता है.
 प्राकृतिक रुप से किया जाने वाला ये गर्भपात अगर एक महीने के भीतर ही कर लिया जाए तो ये कुछ असर कर सकता है लेकिन अगर आप इस प्रक्रिया को करने में देरी कर देती तो ये अपना असर नही दिखाएगा। लेकिन अगर गर्भ नौ सप्ताह से ज्यादा समय का हो तो अच्छा होगा कि आप डॉक्टर के पास जा कर ही गर्भपात कराएं। इतना ही नही इस प्रक्रिया से गर्भपात करने के लिए एक ओर बात का ध्यार जरुर रखे अगर आपको किसी भी तरह से हाई ब्लड प्रेशर, मिरगी, मधुमेह, अस्थमा और किडनी से संबंधित रोग है तो आप इस प्रक्रिया से गर्भपात ना करें।

Friday, January 22, 2016

गर्भधारण के उपाय, Preventive Measures for Pregnancy in Hindi,

गर्भवती होने के लिए सिर्फ सेक्स जरूरी नहीं जरूरी है सही समय पर सेक्स गर्भवती होने के लिए सेक्स का कोई निर्धारित समय नहीं है। महिलाएं जब ओर्गास्म प्राप्त कर लेती है तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। गर्भवती होने के लिए सेक्स जितना जरूरी है उतना ही इस बात का ज्ञान होना कि सेक्स कब किया जाए। इस तथ्य को नजरअंदाज करने से कई बार गर्भधारण करने में परेशानी भी आती है। आइए जानें कि माह में किस समय सेक्स करने से गर्भधारण की संभावना काफी अधिक होती है।
  • पुरुष के शुक्राणु का साथी महिला के गर्भ में जाने से गर्भधारण होता है। महिला के अंडाणु से शुक्राणु का मेल होना और निषेचन की क्रिया का होना ही गर्भधारण है। यूं तो गर्भधारण न कर पानेके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। इन कारणों के पीछे अधिकतर ज्ञान और जानकारी का अभाव होता है। 
  • इन सबकारणों के अतिरिक्त एक अन्य कारण भी होता है जिसका असर महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता पर पड़ता है, और वह कारण है सही समय पर सेक्स न करना। अधिकतर जोड़े इस बात से अंजान होते हैं कि गर्भधारण में सेक्स की 'टाइमिंग' बहत मायने रखती है। समय पर सहवास-गर्भवती होने के लिए सिर्फ सहवास करना जरूरी नहीं होता बल्कि सही समय पर सहवास करना भी मायने रखता है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि पुरुष के शुक्राणु हमेशा लगभग एक जैसे ही होते हैं, जो महिला को गर्भवती कर सकते हैं। लेकिन महिला का शरीर ऐसा नहीं होता जो कभी भी गर्भवती हो सके। उसका एक निश्चित समय होता है, एक छोटी सी अवधि होतीहै। 
  • यदि आप उस अवधि को पहचान कर उस समय सहवास करते हैं तो गर्भधारण की संभावना आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाती है। एक मत यह है कि 28 दिन के मासिक धर्म के साइकिल में 14वें दिन ओवुलेशन का है जो पीरियड शुरू होनेके बाद से गिना जाता है, इस दौरान 12 से 18 दिन के बीच में सेक्स करने से गर्भ ठहरता है।'प्रेग्नेंट होने के लिए सेक्स का कोई विशेष दिन नहीं होता, नियमित सेक्स लाइफ में भरोसा रखिए और बेबी प्लानिंग के तीन महीने पहले से फोलिक एसिड के टेबलेट जरूर खाती रहें।' 
  • ओवुलेशन साइकिल-ऋतुचक्र या पीरियड्स के सात दिन बाद ओवुलेशन साइकिल शुरू होती है, और यह माहवारी या पीरियड्स के शुरू होने से सात दिन पहले तक रहती है। ओवुलेशन पीरियड ही वह समय होता है, जिसमें कि महिला गर्भधारण कर सकती है और इस स्थिति को फर्टाइल स्टेज भी कहते हैं। गर्भधारण के लिए, जब भी सेक्स करें तो ओवुलेशन पीरियड में ही करें। 
  • अपनी ओवुलेशन साइकिल का पता लगायें। इसके लिए आप चिकित्सक से संपर्क भी कर सकते हैं। ओर्गास्म-पुरुष सिर्फ अपनी संतुष्टि का खयाल रखते हैं और अपनी पत्नी की कमोत्तेजना को तवज्जो नहीं देते। ऐसी स्त्रियों को गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं। अगर स्त्री सहवास के वक्त ओर्गास्म प्राप्त कर लेती है तो गर्भधारण की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। क्योंकि तब पुरुष के शुक्राणु को सही जगह जाने का समय और माहौल मिलता है तथा शुक्राणु ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं।

सुबह का समय,Morning time

  • गर्भधारण के लिए सेक्स का समय सुबह का होना चाहिए क्योंकि सुबह के समय आप तरोताजा़ रहते हैं।जिन महिलाओं में रेगुलर पीरियड हो वे प्रेगनेंट होने के लिए पीरियड के बाद दस दिन के अंतराल में सेक्स करें, इससे प्रेगनेंट होने की संभावना ज्यादा होती है औरजिनमें में अनियमित पीरियड हो वे प्रेगनेंसी के लिए पीरियड के साइकिल में नियमित अंतराल  पर सेक्स करें।

पीरियडस के दौरान सेक्स

जब आप गर्भधारण करने का सोच रहे है तो इस बात सावधानी बरतें कि कभी भी पीरियडस के दौरान सेक्स ना करें। गर्भ धारण करने या गर्भ की स्थापना के लिए यहाँ हम कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे
    • एक चम्मच असगंध का चूर्ण एक चम्मच देशी घी के साथ मिलाकर मिश्री मिले दूध के साथ मासिक धर्म के 6 ठे दिन से पूरे माह पीने से गर्भाशयके दोष दूर होकर स्त्री को गर्भ ठहर जाता है|
    • अशोक के फूल नियमित रूप से दही के साथ मासिक धर्म के 6 ठे दिन से 2 हफ्ते तक लेते रहने से स्त्री को गर्भ स्थापा हो जाता है|
    • अपामार्ग की जड़ का चूर्ण मासिक के बाद 21 दिन तक दूध के साथ लेते रहने से स्त्री के गर्भवती होने के चांस बढ़ जाते हैं|
    • पीपल के सूखे फलों का चूर्ण आधा चम्मच कच्चे दूध से मासिक धर्म शुरू होने के पांचवे दिन से दो हफ्ते तक सुबह शाम लेने से गर्भाधान के अवसर बढ़ते हैं| गर्भ न टिके तो आने वाले महीनों मे भी यही उपाय करें|
    • तीन ग्राम गोरोचन, १० ग्राम असगंध, १० ग्राम गजपीपरी तीनों को बारीक पीसकर चूर्णं बनाएं। फिर पीरिएड के चौथे दिन से निरंतर पांच दिनों तक इसे दूध के साथ पिएं।
    • महिलाओं को शतावरी चूर्णं घी – दूध में मिलाकर खिलाने से गर्भाशय की सारी विकृतियां दूर हो जाएंगीं और वे गर्भधारण के योग्‍य होगी।
    • 10g ग्राम पीपल की ताज़ी कोंपल जटा जौकुट करके ५०० मि.ली. दूध में पकाएं।जब वह मात्र २०० मि.ली. बचे तो उतारकर छान लें। फिर इसमें चीनी और शहद मिलाकर पीरिएड होने के ५वें या ६ठे दिन से खाना शुरू कर दें। यह बहुत अच्‍छी औषधि मानी जाती है।
      • सेमल की जड़ पीसकर ढाई सौ ग्राम पानी में पकाएं और फिर इसे छान लें। मासिक धर्म के बाद चार दिन तक इसका सेवन करें।
      • 50g ग्राम गुलकंद में 20g ग्राम सौंफ मिलाकर चबाकर खाएं और ऊपर से एक ग्‍लास दूध नियमित रूप से पिएं। इससे आपको बांझपन से मुक्ति मिल सकती है।
      • गुप्‍तांगों की साफ सफाई पर विशेष ध्‍यान दें। खाने में जौ, मूंग, घी, करेला,शालि चावल, परवल, मूली, तिल का तेल, सहिजन आदि जरूर शामिल करें।
      • पलाश का एक पत्‍ता गाय के दूध में औटाएं और उसे छानकर पिएं। मासिक धर्म के बाद से पीना शुरू करें और ७ दिनों तक प्रयोग करें।
      • पीपल के सूखे फलों का चूर्णं बनाकर रख लें। मासिक धर्म के बाद
      • 5-10 ग्राम चूर्णं खाकर ऊपर से कच्‍चा दूध पिएं। यह प्रयोग नियमित रूप से १४ दिन तक करें।
      • मासिक धर्म के बाद से एक सप्‍ताह तक २ ग्राम नागकेसर के चूर्णं को दूध के साथ सेवन करें। आपको फाएदा होगा।
      • 5g ग्राम त्रिफलाधृत सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय की शुद्धि होती है। जिससे महिला गर्भधारण करने के योग्‍य हो जाती है।
      • स्त्री को गर्भधारण कराने केलिए उसकी योनि के स्नायु स्वस्थ हो इसके लिए स्त्री का सही आहार, उचित श्रम एवं तनाव रहित होना जरूरी है तभी स्त्री गर्भवती हो सकती है|
      • स्त्री को गर्भधारण करने केलिए यह भी आवश्यक है लिए यह भी आवश्यक है कि योनिस्राव क्षारीय होना चाहिए इसलिए स्त्री का भोजन क्षारप्रधान होना चाहिए। इसलिए उसे अधिक मात्रा में अपक्वाहार तथा भिगोई हुई मेवा खानी चाहिए।
      • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को अपने इस रोग का इलाज करने के लिए सबसे प हले का इलाज करने के लिए सबसे पहले अपने शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना चाहिए| इसके लिए स्त्री को उपवास रखना चाहिए। इसके बाद उसे 1-2 दिन के बाद कुछ अंतराल पर उपवास करते रहना चाहिए
      • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को दूध की बजाए दही का इस्तेमाल करना चाहिए।
      • स्त्री को गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद एवं नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।
      • बांझपन को दूर करने के लिए स्त्रियों को विटामिन `सी´तथा `ई´ की मात्रा वाली चीजें जैसे नींबू, संतरा, आंवला, अंकुरित, गेहूं आदि का भोजन में सेवन अधिक करना चाहिए।
      • स्त्रियों को सर्दियों में प्रतिदिन 5-6 कली लहसुन चबाकर दूध पीना चाहिए, इससे स्त्रियों का बांझपन जल्दी ही दूर हो जाता है।
      • जामुन के पत्तों का काढ़ा बनाकर फिर इसको शहद में मिलाकर प्रतिदिन पीने से स्त्रियों को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
      • बड़ (बरगद) के पेड़ की जड़ों को छाया में सुखाकर कूटकर छानकर पाउडर बना लें। फिर इसे स्त्रियों के माहवारी समाप्त होने के बाद तीन दिन लगातार रात को दूध के साथ लें। इस क्रिया को तब तक करते रहना चाहिए जब तक कि स्त्री गर्भवती न हो जाय |
      • स्त्री के बांझपन के रोगको ठीक करने के लिए 6 ग्राम सौंफ का चूर्ण घी के साथ तीन महीने तक लेते रहने से स्त्री गर्भधारण करने योग्य हो जाती है।
      • स्त्री के बांझपन के रोग को ठीक करने के लिए उसके पेड़ू पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद उसे कटिस्नान कराना चाहिए और कुछ दिनों तक उसे कटि लपेट देना चहिए। इसके बाद स्त्री को गर्म पानी का एनिमा देना चाहिए।

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