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Saturday, January 28, 2017

वास्तु दोष निवारण के उपाय Vastu Dosh Nivaran ke Upay in Hindi,

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अपना मकान बनाते समय भूल या परिस्थितिवश कुछ वास्तुदोष रह जाते हैं। इन दोषों के निवारण के लिए यदि आप बताए जा रहे उपाय कर लें, तो बिना तोड़-फोड़ के ही वास्तुजनित दोषों से निजात पा सकते हैं। यदि आपके मकान के सामने किसी प्रकार का वेध यानी खंभा, बड़ा पेड़ या बहुमंजिला इमारत हो तो इसकी वजह से आपका स्वास्थ्य या आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। यदि वेघ दोष हो तो निम्न उपाय करना कारगर होगा

वास्तु दोष निवारण के उपाय Vastu Dosh Nivaran ke Upay in Hindi,

  • तुलसी का पौधा स्वास्थ्य के लिए शुभ होता है। यदि कोई बहुमंजिली इमारत आपके सामने हो, तो फेंगशुई के अनुसार अष्ट कोणीय दर्पण, क्रिस्टल बाल तथा दिशा सूचक यंत्र लगा सकते हैं। बड़ा गोल आईना मकान की छत पर ऎसे लगाएं कि मकान की संपूर्ण छाया उसमें दिखाई देती रहे। 
  • हल्दी को जल में घोलकर एक पान के पत्ते की सहायता से अपने सम्पूर्ण घर में छिडकाव करें. इससे घर में लक्ष्मी का वास तथा शांति भी बनी रहती है.
  • अपने घर के मन्दिर में घी का एक दीपक नियमित जलाएं तथा शंख की ध्वनि तीन बार सुबह और शाम के समय करने से नकारात्मक ऊर्जा घर से बहार निकलती है.
  • घर में सफाई हेतु रखी झाडू को रस्ते के पास नहीं रखें. यदि झाडू के बार-बार पैर का स्पर्थ होता है, तो यह धन-नाश का कारण होता है. झाडू के ऊपर कोई वजनदार वास्तु भी नहीं रखें.
  • .अपने घर में दीवारों पर सुन्दर, हरियाली से युक्त और मन को प्रसन्न करने वाले चित्र लगाएं. इससे घर के मुखिया को होने वाली मानसिक परेशानियों से निजात मिलती है.
  • वास्तुदोष के कारण यदि घर में किसी सदस्य को रात में नींद नहीं आती या स्वभाव चिडचिडा रहता हो, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके शयन कराएं. इससे उसके स्वभाव में बदलाव होगा और अनिद्रा की स्थिति में भी सुधार होगा.
  • अपने घर के ईशान कोण को साफ़ सुथरा और खुला रखें. इससे घर में शुभत्व की वृद्धि होती है
  • यदि मकान के पास में फैक्टरी का धुआं निकलता हो, तो एग्जास्ट पंखा या वृक्ष लगा लें। यदि मकान में बीम ऎसी जगह हो जिसके कारण आप मानसिक तनाव महसूस करते हो तो बीम से उत्पन्न होने वाले दोषों से बचाव के लिए यह उपाय अपना सकते है। 
  • शयनकक्ष में बीम हो, तो इसके नीचे अपना बैड या डाइनिंग टेबल नहीं लगाएं। यदि ऑफिस हो तो मेज व कुर्सियां नहीं रखें। बीम के दोनों ओर बांसुरी लगा दें। इससे वास्तुदोष निवारण हो जाता है। पवन घंटी बीम के नीचे लटका दें या बीम को सीलिंग टायलस से ढक दें। 
  • बीम के दोनों ओर हरे रंग की गणपति प्रतिमा लगा दें। यह वास्तु दोषनाशक मानी जाती है। यदि मकान का कोई कोना आपके मुख्य द्वार के सामने आए, तो स्पॉट लाइट लगाएं। जिससे प्रकाश आपके घर की ओर रहे तथा सीधा ऊंचा वृक्ष बीच में लगा दें। 
  • शयनकक्ष में घी का दीपक व अगरबत्ती करें जिससे मन प्रसन्न रहे। इस बात का घ्यान रखें कि झाड़ू शयनकक्ष में नहीं रखें। यदि मकान में दिशा संबंघी कोई दोष हो तो इससे बचने के लिए ये उपाय करने से लाभ मिलना संभव है। मकान में मुख्य द्वार पर देहरी बना लें। 
  • इससे बुरे व अन्य दोष घर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। ईशान कोण के दोष के लिए इस दिशा में पानी से भरा मटका रखें। इस कोण को साफ-सुथरा रखे। अग्नि कोण दोष निवारण के लिए कोने में एक लाल रंग का बल्ब लगा दें जो दिन-रात जलता रहे। 
  • वायव्य कोण दोष निवारण के लिए इस ओर की खिड़कियां खुली रखें, ताकि वायु आ सके। एजॉस्ट पंखा भी लगा सकते हैं। नैऋत्य कोण दोष निवारण के लिए इस कोने को भारी बनाएं। स्टोर बनाना यहां शुभ होता है। शयनकक्ष में दर्पण का प्रतिबिंब पलंग पर न पड़े तथा डबल बेड पर एक ही गद्दा रखें, तो ठीक रहेगा। 
  • पति-पत्नी में प्रेम के लिए प्रेमी परिंदे का चित्र या मेडरिन बतख का जोड़ा रखें अथवा सपरिवार प्रसन्नचित मुद्रा वाला चित्र लगाएं। डायनिंग टेबल को प्रतिबिंबित करने वाला आईना आपके सद्भाव व भाग्य में वृद्धि करता है, इसे लगाएं।
  • अपने घर के मन्दिर में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए पुष्प-हार दूसरे दिन हटा देने चाहिए और भगवान को नए पुष्प-हार अर्पित करने चाहिए.
  • घर के उत्तर-पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा न होने दें और न ही इधर भारी मशीनरी रखें.
  • अपने वंश की उन्नति के लिये घर के मुख्यद्वार पर अशोक के वृक्ष दोनों तरफ लगाएं.
  • यदि आपके मकान में उत्तर दिशा में स्टोररूम है, तो उसे यहाँ से हटा दें. इस स्टोररूम को अपने घर के पश्चिम भाग या नैऋत्य कोण में स्थापित करें.
  • घर में उत्पन्न वास्तुदोष घर के मुखिया को कष्टदायक होते हैं. इसके निवारण के लिये घर के मुखिया को सातमुखी रूद्राक्ष धारण करना चाहिए.
  • यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिणमुखी है, तो यह भी मुखिया के के लिये हानिकारक होता है. इसके लिये मुख्यद्वार पर श्वेतार्क गणपति की स्थापना करनी चाहिए.
  • अपने घर के पूजा घर में देवताओं के चित्र भूलकर भी आमने-सामने नहीं रखने चाहिए इससे बड़ा दोष उत्पन्न होता है.
  • अपने घर के ईशान कोण में स्थित पूजा-घर में अपने बहुमूल्य वस्तुएँ नहीं छिपानी चाहिए.
  • पूजाकक्ष की दीवारों का रंग सफ़ेद हल्का पीला अथवा हल्का नीला होना चाहिए.
  • यदि आपके रसोई घर में रेफ्रिजरेटर नैऋत्य कोण में रखा है, तो इसे वहां से हटाकर उत्तर या पश्चिम में रखें.
  • दीपावली अथवा अन्य किसी शुभ मुहूर्त में अपने घर में पूजास्थल में वास्तुदोशनाशक कवच की स्थापना करें और नित्य इसकी पूजा करें. इस कवच को दोषयुक्त स्थान पर भी स्थापित करके आप वास्तुदोषों से सरलता से मुक्ति पा सकते हैं
  • अपने घर में ईशान कोण अथवा ब्रह्मस्थल में स्फटिक श्रीयंत्र की शुभ मुहूर्त में स्थापना करें. यह यन्त्र लक्ष्मीप्रदायक भी होता ही है, साथ ही साथ घर में स्थित वास्तुदोषों का भी निवारण करता है.
  • प्रातःकाल के समय एक कंडे पर थोड़ी अग्नि जलाकर उस पर थोड़ी गुग्गल रखें और 'ॐ नारायणाय नमन' मंत्र का उच्चारण करते हुए तीन बार घी की कुछ बूँदें डालें. अब गुग्गल से जो धूम्र उत्पन्न हो, उसे अपने घर के प्रत्येक कमरे में जाने दें. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होगी और वातुदोशों का नाश होगा.

वास्तु के अनुसार घर,मकान के वास्तु टिप्स Vastu Shastra Tips for House in hindi,

वास्तु के अनुसार घर,मकान के वास्तु टिप्स,Vastu Tips in Hindi for House,

वास्तु के अनुसार घर,मकान के वास्तु टिप्स,Vastu Tips in Hindi for House,

यदि वास्तु को ध्यान में रखकर घर का निर्माण किया जाए तो वास्तुदोषों के दुष्परिणामों से बचा जा सकता है। वर्तमान के बदलते दौर में वास्तु का महत्व दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। आजकल कई बड़े-बड़े बिल्डर व इंटीरियर डेकोरेटर भी घर बनाते व सजाते समय वास्तु का विशेष ध्यान रखते हैं। वास्तु के अनुसार ही वे कमरे की बनावट, उनमें सामानों की साज-सज्जा करते हैं। इससे घर की खूबसूरती बढ़ने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवाह होता है। वास्तु के अनुसार घर की सजावट करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें

वास्तु के अनुसार घर,मकान के वास्तु टिप्स,Vastu Tips in Hindi for House,

  • मकान का मुख्य प्रवेश द्वार सामान्तया सभी के लिए अच्छा होता हैं, पश्चिम एवं दक्षिण दिशा के स्थित प्रवेश द्वार भी व्यक्ति के काम और जन्म कुंडली के अनुसार अनुसार अच्छा हो सकता हें.
  • मकान के उत्तर एवं पूर्व मे अपेक्षाकृत अधिक खाली स्थान रखना चाहिए.
  • मुख्य द्वार खोलते ही सामने सीढ़ी नहीं होनी चाहिए। 
  • दरवाजा हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए और दरवाजा खोलते और बंद करते समय किसी प्रकार की चरमराहट की आवाज नहीं होनी चाहिए। 
  • घर के तीन द्वार एक सीध में नहीं होने चाहिए। मुख्य द्वार घर के अन्य सभी दरवाजों से बड़ा होना चाहिए। 
  • पूजा घर और रसोई या बेडरूम एक हीं कमरे में नहीं होना चाहिए.
  • घर के मालिक का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. अगर इस दिशा में सम्भव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा दूसरा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.
  • मकान के प्रवेश द्वार पर दहलीज का निर्माण कराएँ। दहलीज के नीचे चाँदी का तार अवश्य लगवाएँ। ऐसा करने वालों के घर में धन की कभी कमी नहीं रहेगी और न ही किसी तरह की अशुभ ऊर्जा उनके घर में प्रवेश करेगी। 
  • मकान का दक्षिण एवं पश्चिमी हिस्सा अपेक्षाकृत भारी एवं ऊचा होना चाहिए.
  • मकान का मध्य स्थान जिसे ब्रह्म स्थान कहा जाता हें, हमेशा खाली रहना चाहिए.
  • भगवान की मूर्तिया या तस्वीरों को इस तरह स्थापित करे, जिससे की पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की और हो.
  • पूर्व - बच्चों का कमरा, लिविंग रूम होना चाहिए 
  • पश्चिम- भोजन कक्ष / डाइनिंग एरिया, बच्चो का कमरा होना चाहिए 
  • उत्तर -बैठक / ड्राईंग रूम, धन रखने का स्थान होना चाहिए 
  • दक्षिण -शयन कक्ष / बेड रूम होना चाहिए 
  • उत्तर-पूर्व -पूजा घर, अध्धयन / स्टडी रूम, बोरिंग, पानी का होद, खुला स्थान में होना चाहिए
  • उत्तर-पश्चिम मेहमान कक्ष होना चाहिए
  • दक्षिण-पश्चिम मास्टर बेड रूम / सीडिया, होना चाहिए 
  • दक्षिण-पूर्व रसोई घर एवं जेनेरटर, इन्वर्टर
  • मकान में धन-नकदी रखने की अलमारी कमरे के दक्षिण-पश्चिम भाग में होनी चाहिए 
  • पूजा घर से सटा हुआ या पूजा घर के ऊपर या नीचे शौचालय नहीं होना चाहिए.
  • पूजा घर में प्रतिमा स्थापित नहीं करनी चाहिए क्योंकि घर में प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति का ध्यान उस तरह से नहीं रखा जा सकता है जैसा कि रखा जाना चाहिए. अतः छोटी मूर्तियाँ और चित्र हीं पूजा घर में लगाने चाहिए
  • सीढ़ी के नीचे पूजा घर नहीं बनाना चाहिए.
  • मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़, दीवार, खंभा, कीचड़, हैंडपम्प या मंदिर की छाया नहीं होनी चाहिए। 
  • घर के मुख्य द्वार की चौड़ाई उसकी ऊंचाई से आधी होनी चाहिए। 
  • घर का मुख्य दरवाजा छोटा और पीछे का दरवाजा बड़ा होना आर्थिक परेशानी का ध्योतक है। 
  • घर का मुख्य द्वार घर के बीचों-बीच न होकर दाएं या बाएं ओर स्थित होना चाहिए। यह परिवार में कलह आर्थिक परेशानी और रोग का ध्योतक है। उदाहरण के लिए, पूर्व में स्थित द्वार पूर्व में मध्य में न होकर उत्तर पूर्व की ओर या दक्षिण पूर्व की ओर होना चाहिए। 
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार की स्थिति का सीधा संबंध उस घर में रहने वाले लोगों की सामाजिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति से होता है। 
  • घर का मुख्य द्वार वास्तु दोषों से मुक्त हो, तो घर में सुख-समृद्धि, रिद्धी-सिद्धि रहती है, सभी प्रकार के मंगल कार्यों में वृद्धि होती है और परिवार के लोगों में आपसी समंजस्य बना रहता है। 
  • इसलिए घर का मुख्य द्वार वास्तु दोष से मुक्त होना अत्यंत आवश्यक है। यदि इसमें कोई दोष हो, तो इसे तुरंत वास्तु उपायों के द्वारा ठीक कर लेना चाहिए।

दैनिक जीवन में वास्तु के उपयोगी नियम Vastu Tips to Increase Happiness in Life,

जीवन में खुशियां चाहिए तो अपनाएं ये वास्‍तु टिप्‍स,दैनिक जीवन में वास्तु के उपयोगी नियम,

जीवन में खुशियां चाहिए तो अपनाएं ये वास्‍तु टिप्‍स,दैनिक जीवन में वास्तु के उपयोगी नियम,

वास्तु जीवन का ऐसा विज्ञान है जो इस बात पर जोर देता है कि घर-परिवार कैसे सुखी, स्वस्थ और खुशहाल हों। यह प्रकृति की ऊर्जा, संसाधन और परिवार की ऊर्जा के सही व संतुलित उपयोग के गुर सिखाता है। जो घर वास्तु के प्रति जितना अनुकूल होगा, वहां उतनी ही खुशियां और समृद्धि होंगी। लोग सुखी होंगे। वहीं, वास्तु के प्रतिकूल घर समृद्धि के बावजूद दुख का कारण बनते हैं।

दैनिक जीवन में वास्तु के उपयोगी नियम,Happiness Vastu Tips in Hindi,

  • वास्तु के अनुसार हमें कभी भी बिस्तर में बैठकर खाना नहीं खाना चाहिए. माना जाता है की ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है
  • रात को सोते वक्त व्यक्ति का सिर हमेशा दक्षिण दिशा में होना चाहिए। कभी भी उत्तर दिशा की ओर सिर करके नहीं सोना चाहिए। इससे अनिद्रा रोग होने की संभावना होती है साथ ही व्यक्ति की पाचन शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है।
  • घर में सप्ताह में दो दफा फिटकरी और नमक के पानी से पोंछा लगाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
  • घर से निकलते समय माता-पिता को विधिवत (झुककर) प्रणाम करना चाहिए। इससे बृहस्पति और बुध ठीक होते हैं। इससे व्यक्ति के जटिल से जटिल काम बन जाते हैं।
  • आपके घर का प्रवेश द्वार एकदम स्वच्छ होना चाहिए। प्रवेश द्वार जितना स्वच्छ होगा घर में लक्ष्मी आने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
  • आपके प्रवेश द्वार के आगे स्वस्तिक, ॐ, शुभ-लाभ जैसे मांगलिक चिह्नों को उपयोग अवश्य करें।
  • अपने घर के प्रवेश द्वार पर कभी ‍भी बिना सोचे-समझे गणेशजी न लगाएं। दक्षिण या उत्तरमुखी घर के द्वार पर ही गणेशजी लगाएं।
  • विवाह पत्रिका कभी भूलकर भी न फाड़े क्योंकि इससे व्यक्ति को गुरु और मंगल का दोष लग जाता है।
  • अपने घर में देवी-देवताओं की ज्यादा तस्वीरें न रखें और शयन कक्ष में तो बिलकुल भी नहीं।
  • शयन कक्ष में टेलीविजन कदापि न रखें क्योंकि इससे शारीरिक क्षमताओं पर विपरीत असर पड़ता है।
  • दफ्तर में काम करते समय उत्तर-पूर्व की ओर मुख करके बैठें तो शुभ रहेगा, जबकि बॉस (कार्यालय प्रमुख) का केबिन नैऋत्य कोण में होना चाहिए। 
  • घर के भीतर शंख अवश्य रखें। इससे बजाने से 500 मीटर के दायरे में रोगाणु नष्ट होते हैं।
  • पक्षियों को दाना खिलाने और गाय को रोटी और चारा खिलाने से गृह दोष का निवारण होता है।
  • अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। इससे परिवार में प्रेम बढ़ता है। तुलसी के पत्तों के नियमित सेवन से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। 
  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को हमेशा साफ-सुथरा रखें ताकि सूर्य की जीवनदायिनी किरणें घर में प्रवेश कर सकें।
  • रसोई घर में भोजन बनाते समय गृहिणी का हमेशा मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। इससे भोजन सुपाच्य और स्वादिष्ट बनता है। साथ ही पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से व्यक्ति की पाचन शक्ति में वृद्धि होती है।
  • आपके घर के जो बच्चे में पढ़ने में कमजोर हैं, उन्हें पूर्व की ओर मुख करके अध्ययन करना चाहिए। इससे उन्हें लाभ होगा।
  • आपके परिवार में जिन कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा है, उन्हें वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) के कमरे में रहना चाहिए। इससे उनका विवाह अच्छे और समृद्ध परिवार में होगा।
  • वास्तु व‌िज्ञान के अनुसार व‌िवाह योग्य कुंवारे लड़कों को दक्ष‌िण और दक्ष‌िण पश्च‌िम द‌िशा में नहीं सोना चाह‌िए। इससे व‌िवाह में बाधा आती है। माना जाता है क‌ि इससे अच्छे र‌‌िश्ते नहीं आते हैं।
  • ईशान कोण यानी भवन के उत्तर-पूर्वी हिस्से वाला कॉर्नर में पूजास्थल पवित्रता का प्रतीक है इसलिए यहां झाड़ू-पोंछा, कूड़ादान नहीं रखना चाहिए। 
  • प्रातःकाल नाश्ते से पूर्व घर में झाड़ू अवश्य लगानी चाहिए। 
  • संध्या समय जब दोनों समय मिलते हैं, घर में झाड़ू-पोंछे का काम नहीं करना चाहिए। 
  • घर में जूतों का स्थान प्रवेश द्वार के दाहिने तरफ न रखें। 
  • घर में टूटे दर्पण, टूटी टांग का पाटा तथा किसी बंद मशीन का रखा होना सुख-समृद्धि की दृष्टि से अशुभकारक है। 
  • ड्राइंग-हॉल को अपने बेडरूम की तरह उपयोग में लेने पर पति, पत्नी को प्यार करता है और दोस्तों से अच्छे संबंध रखता है। 
  • घर के मुख्य द्वार पर शुभ चिह्न अंकित करना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बनी रहती है। 
  • घर के पूजास्थल में एक जटा वाला नारियल रखना चाहिए। 
  • घर में सजावट में हाथी, ऊंट को सजावटी खिलौने के रूप में उपयोग शुभ होता है। ऐसे शयनकक्श जिनमें दंपति सोते हैं, वहां हंसों के जोड़े अथवा सारस के जोड़े के चित्र लगाना अति शुभ माना गया है। 
  • घर के ईशान कोण पर कूड़ा-करकट भी इकट्ठा न होने दें। घर में देवस्थल पर अस्त्र-शस्त्रों को रखना अशुभ है। 
  • घर में तलघर में परिवार के किसी भी सदस्यों के फोटो न लगाएं तथा वहां भगवान और देवी-देवताओं की तस्वीरें या मूर्तियां भी न रखें। 
  • तीन व्यक्तियों का एक सीध में एकाकी फोटो हो, तो उसे घर में नहीं रखें और न ही ऐसे फोटो को कभी भी दीवार पर टांगें।
  • दोपहर या रात्रि को जब विश्राम करें तो आपका बिस्तर दक्षिण-पश्चिम दिशा में तथा सिर दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सही रहता है।
  • उखड़ा हुआ फर्श या खराब स्थिति में प्लास्टर घर में नकारात्मक ऊर्जा, अशांति और आर्थिक हानि लेकर आता है। इसलिए बेहतर होगा कि जल्द इसकी मरम्मत करवा लें।
  • बिस्तर के नीचे तेल, नमक, खाली मटका, झाडू़, जूते, कचरा और ओखली-मूसल जैसी चीजें न रखें। ये चीजें मानसिक अशांति के साथ ही भाग्योदय में बाधा लाती हैं।
  • अगर घर की छत पर भी खाली मटके, पुराने गमले, खराब कूलर, पंखे या रद्दी का सामान पड़ा हो तो उसे वहां से हटा दें। खासतौर से उस कमरे की छत पर ये चीजें नहीं होनी चाहिए, जहां रात्रि को शयन करते हैं।
  • रोज अपने इष्ट देव के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। उसके आसपास दवाई आदि न रखें। पूजा करते समय आपका मुख उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम की तरफ होना चाहिए।

किचन के टिप्स, Useful Kitchen Tips in Hindi,

किचन के टिप्स,  Useful Kitchen Tips in Hindi,

रसोई में अपनाये ये टिप्स जो आपका काम कर देंगे बिलकुल आसान आमतौर पर रसोई में छोटी छोटी समस्याएं आती रहती हैं,जो ग्रहणियों के लिए सर दर्द बन जाती हैं|यहाँ दिये कुछ टिप्स आपका काम आसान कर देंगे और आपका काम सुविधाजनक हो जायेगा|
  • यदि पहले कि पकी हुई सब्जियां या गुंधा आटा फ्रिज में रखा हुआ होतो उतना ही निकालें जितना जरूरत हैक्यूंकि बार बार बाहर निकलने और फिर फ्रिज में वापिस रखने से खाद् सामग्री जल्दी खराब हो जाती है
  • नमकदानी में नमक अक्सर जम जाता है|सील से बचाने के लिए उसमे तीन-चार चावल के दाने डाल दें|
  • फ्रिज में सभी खाद् सामग्रियों को ढककर रखें|
  • फ्रीजर में से बर्फ कि ट्रे झटके के साथ अथवा किसी पैनी वस्तु से न निकालें|ट्रे के नीचे ग्लिसरीन मल दें वः आसानी से निकल जायेगी|
  • दूध को एक उबाल दे कर ही प्रयोग करें ज्यादा उबाले देने से उसके पोष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं|
  • दूध से आटा गूंध कर परांठे बनाएँ अधिक खस्ता और स्वाद बनेगे|
  • रोटी बनाने से दस मिनट पहले आटा बाहर निकल लें इस से आटा खींचेगा नही और रोटियां आराम से बनेगी
  • प्याज काटने से पहले चाक़ू कि नोक पे एक कच्चा आलू छिल कर लगा लें.आँखों में आंसू नही आयेंगे|
  • मीठे बिस्कूट का कुरकुरापन बरकरार रखने के लिए कंटेनर में एक चमच चीनी डाल दें,और उसके ऊपर बिस्कुट रखें|लंबे समय तक बिस्कुट कुरकुरे रहेंगे,यहाँ तक कि बरसातों में भी खराब नही होंगे|
  • रसोई में अगर चाकू पर जंग लग जाये तो उसे प्याज में घोंप के रखें 10-15 मिनट बाद निकाल लें|फिर धोए चाकू साफ़ हो जायेगा|
  • फ्रिजर में पोलिथिन बिछा कर बर्फ कि ट्रे रखें| ट्रे निकलने में परेशानी नही होगी
  • यदि आपके हाथ में किसी भी मसाले के दाग लगे हों तो कच्चा आलू काटकर रगड़िये धब्बे दूर हो जायेंगे|
  • यदि आलू में रखे रखे झुर्रियाँ पड़ गयी हों तो उन्हें नमक डालकर उबालें|आलू का बासीपन चला जायेगा|
  • चावल जब पकने पे आ जाये तो उसमे कुछ बूंदे निम्बू का रस निचोड़ दें|चावल महकदार व खिला खिला बनेगा
  • सेंडविच काटने के लिए जिस चाकू का इस्तेमाल करें,उसे हल्का सा गर्म कर लें ,इससे सेंडविच काटने में आसानी होगी|
  • बेलन को फ्रिज में ठंडा करके रोटी बेलने से आटा नहीं चिपकता
  • बादाम काजू के डिब्बों
  • रसोई के कोनों में बोरिक Powder छिड़किये इससे तिलचट्टे आपको परेशान नहीं करेंगे.
  • अगर आप चाहती हैं, कि सिंक और गैस चूल्हा दोनों हमेशा साफ दिखें, तो आपको हर रात इनकी सफाई करनी चाहिए. सिंक को साफ करने के लिए गर्म पानी का उपयोग करना चाहिए.
  • फ्रिज के भीतरी भाग की सफाई करने के लिए आपको गरम पानी और बेकिंग सोडा का उपयोग करना चाहिए. और इसके बाद फ्रिजर को भी साफ करना चाहिए.
  •  में 2-3 लौंग डालकर रखें,कीड़ा नही लगेगा

Monday, March 21, 2016

घर की सुख और शांति के लिये वास्तु-Vastu Tips for Home in Hindi

घर की सुख और शांति के लिये वास्तु-Vastu Tips for Home in Hindi

सुख और शांति के लिए जितना ज्‍यादा आपका व्‍यवहार मायने रखता है, उससे कहीं ज्‍यादा आपके घर का वास्‍तु। मकान को घर बनाने के लिए जरूरी है, परिवार में सुख-शांति का बना रहना। और ऐसा होने पर ही आपको सुकून मिलता है। यदि आप घर बनवाने जा रहे हैं, तो वास्‍तु के आधार पर ही नक्‍शे का चयन करें। अपने आर्किटेक्‍ट से साफ कह दें, कि आपको वास्‍तु के हिसाब से बना मकान ही चाहिए। हां यदि आप बना-बनाया मकान या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं, तो वास्‍तु संबंधित निम्‍न बातों का ध्‍यान रख कर अपने लिए सुंदर मकान तलाश सकते हैं।
  • मकान का मुख्‍य द्वार दक्षिण मुखी नहीं होना चाहिए। इसके लिए आप चुंबकीय कंपास लेकर जाएं। यदि आपके पास अन्‍य विकल्‍प नहीं हैं, तो द्वार के ठीक सामने बड़ा सा दर्पण लगाएं, ताकि नकारात्‍मक ऊर्जा द्वार से ही वापस लौट जाएं।
  • घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक या ऊँ की आकृति लगाएं। इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • घर की पूर्वोत्‍तर दिशा में पानी का कलश रखें। इससे घर में समृद्धि आती है।
  • घर के खिड़की दरवाजे इस प्रकार होनी चाहिए, कि सूर्य का प्रकाश ज्‍यादा से ज्‍यादा समय के लिए घर के अंदर आए। इससे घर की बीमारियां दूर भागती हैं।
  • परिवार में लड़ाई-झगड़ों से बचने के लिए ड्रॉइंग रूम यानी बैठक में फूलों का गुलदस्‍ता लगाएं।
  • रसोई घर में पूजा की अल्‍मारी या मंदिर नहीं रखना चाहिए।
  • बेडरूम में भगवान के कैलेंडर या तस्‍वीरें या फिर धार्मिक आस्‍था से जुड़ी वस्‍तुएं नहीं रखनी चाहिए
  • बेडरूम की दीवारों पर पोस्‍टर या तस्‍वीरें नहीं लगाएं तो अच्‍छा है। हां अगर आपका बहुत मन है, तो प्राकृतिक सौंदर्य दर्शाने वाली तस्‍वीर लगाएं। इससे मन को शांति मिलती है, पति-पत्‍नी में झगड़े नहीं होते।
  • घर में शौचालय के बगल में देवस्‍थान नहीं होना चाहिए।
  • घर में घुसते ही शौचालय नहीं होना चाहिए।

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर से जुड़े नियम - Vastu Tips for Kitchen in Hindi

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर से जुड़े नियम - Vastu Tips for Kitchen in Hindi

रसोई घर को यदि घर का स्वास्थ्य मंत्रालय कहा जाये तो अनुचित नहीं होगा। क्योंकि यदि हम अपने घर में रसोईघर के वास्तु की अनदेखी करेंगेे तो न केवल गृहणी बल्कि घर केे अन्य सदस्य भी स्वस्थ नहीं रह पायेंगे। देखने में आता है कि वास्तु के विपरित बनायी गयी रसोई किचिन-एक्सीडेन्ट को तो बढ़ावा देती ही है साथ ही अनचाहे मेहमानों की संख्या में भी बढ़ोतरी करती है। प्रस्तुत हैं किचिन के लिये कुछ महत्वपूर्ण 

वास्तु जानकारियां

  • रसोई के लिये सबसे महत्वपूर्ण दिशा आग्नेय कोण (SE) मानी जाती है।
  • यदि किसी कारणवश घर के आग्नेय कोण में रसोई नहीं बन सके तो इसका निर्माण घर के नैरूत (SW) या वायव्ह (NW) हिस्से के आग्नेय भाग में किया जा सकता है। वैसे ये रसोईघर अतिथियों की संख्या में वृद्धि करती है।
  • गैस का चूल्हा या कुकिंग रेंज को रसोई घर के दक्षिण पूर्वी (SE) कोने में रखा जाना चाहिये।
  • किसी भी स्थिती में घर के ईशान (NE) हिस्से में चूल्हे का प्रबन्ध नहीें करना चाहिये। ऐसा करने से धन की हानि होती है व पुत्र संतान के बीमार होने की संभावना रहती है, यदि पुत्र संतान नहीं है तो उसके होने की संभावना समाप्त हो जाती है।
  • रसोई में खाना बनाते समय गृहणी का मुंह पूर्व (E) दिशा की ओर होना चाहिये।
  • बाहर के दरवाजे से चूल्हा नहीं दिखायी देना चाहिये।
  • पानी संग्रहित करने के उपकरण जैसे आर ओ, पानी फिल्टर, मटका, जग आदि का सही स्थान उत्तर-पूर्व (NE) होता है।
  • सिंक (बर्तन साफ करने का स्थान) का उचित स्थान दक्षिण (S) दिशा है।
  • बिजली से चलने वाले उपकरण रखने की दिशा दक्षिण-पूर्व (SE) या दक्षिण (S) दिशा उचित है।
  • फ्रिज पश्चिम (W), दक्षिण (S), या दक्षिण-पूर्व (SE) दिशा में रखना चाहिये। यदि इसे दक्षिण-पश्चिम (SW) दिशा में फ्रिज दीवार से 1-2 फुट हटाकर रखा जा सकता है।
  • खाने के लिये प्रयोग की जाने वाली सामग्री जैसे अनाज, दालें, चीनी आदि को रखने का स्थान दक्षिण (S) या पश्चिमी (W) दीवार पर बनाना चाहिये।
  • वास्तु के अनुसार रसोईघर के बराबर में शौचालय नहीं होना चाहिये।
  • रसोई का दरवाजा उत्तर-पूर्व (NE) या पश्चिम (W) दिशा में खुलना चाहिये।
  • एग्जास्ट फैन (Exhaust Fan) पूर्वी (E) या उत्तरी (N) दिशा की दीवार पर होना चाहिये।
  • जहां तक संभव हो रसोई घर में पूजा का स्थान नहीं होना चाहिये

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