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Monday, August 05, 2019

गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए,What to not eat in Pregnancy in Hindi

गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए।,WHAT TO NOT EAT IN PREGNANCY IN HINDI !

किसी महिला को मां के दर्जे तक पहुंचाने वाले नौ महीने बेशकीमती होते हैं। इन नौ महीनों में वह क्या सोचती है, क्या खाती है, क्या करती है, क्या पढ़ती है, ये तमाम चीजें मिलकर आनेवाले बच्चे की सेहत और पर्सनैलिटी तय करती हैं। इन नौ महीनों को अच्छी तरह प्लान करके कैसे मां एक सेहतमंद जिंदगी को जीवन दे सकती है

गर्भावस्‍था में क्‍या खाए जाए से जरूरी यह जानना है कि क्‍या न खाया जाए। घर-परिवार की बुजुर्ग महिलाएं अपने अनुभव के आधार पर यह राय देती रहती हैं। चलिए जानते हैं कि गर्भावस्‍था में कौन सी सब्‍जियों और फलों से परहेज करना चाहिए। आइये जानें, गर्भवस्‍था के दौरान कौन-कौन से फल और सब्जियां ना खाएं।
  • गर्भावस्था के दौरान इन चीजों के सेवन बचें :-बिना धुले हुए फल और सब्जियां ना खाये :- गर्भावस्था के दौरान पके हुए खाद्य पदार्थ खाएं। कच्चे और बिना पके खाद्य पदार्थ न खाएं। फल और सब्जियां तथा ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें खाने से पहले धोने की आवश्यकता होती है, उन्हें बिना धोएं न खाएं।
  • कॉफ़ी, चाय और शराब से दूर रहे :- प्रसव के दौरान जटिलताओं से तथा भ्रूण में जन्म दोष से बचने के लिए गर्भावस्था के दौरान चाय, कॉफ़ी और शराब के सेवन से बचें। इन तीन पेय पदार्थों के अत्याधिक सेवन से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
  • पपीता ना खाये :- कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान पपीता ना खाए। पपीता खाने से प्रसव जल्दी होने की संभावना बनती है। पपीता, विशेष रूप से अपरिपक्व और अर्द्ध परिपक्व लेटेक्स जो गर्भाशय के संकुचन को ट्रिगर करने के लिए जाना जाता है को बढ़ावा देता है। गर्भावस्था के तीसरे और अंतिम तिमाही के दौरान पका हुआ पपीता खाना अच्छा होता हैं। पके हुए पपीते में विटामिन सी और अन्य पौष्टिक तत्वों की प्रचुरता होती है, जो गर्भावस्था के शुरूआती लक्षणों जैसे कब्ज को रोकने में मदद करता है। शहद और दूध के साथ मिश्रित पपीता गर्भवती महिलाओं के लिए और विशेष रूप से स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए एक उत्कृष्ट टॉनिक होता है।
  • अनानास ना खाये :- गर्भावस्था के दौरान अनानस खाना गर्भवती महिला के स्‍वास्‍थ्‍ा के लिए हानिकारक हो सकता है। अनानास में प्रचुर मात्रा में ब्रोमेलिन पाया जाता है, जो गर्भाशय ग्रीवा की नरमी का कारण बन सकती हैं, जिसके कारण जल्‍दी प्रसव होने की सभांवना बढ़ जाती है। हालांकि, एक गर्भवती महिला अगर दस्त होने पर थोड़ी मात्रा में अनानास का रस पीती है तो इससे उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। वैसे पहली तिमाही के दौरान इसका सेवन ना करना ही सही रहेगा, इससे किसी भी प्रकार के गर्भाशय के अप्रत्याशित घटना से बचा जा सकता है।
  • अंगूर का सेवन ना करे :- डॉक्‍टर गर्भवती महिलाओं को उसके गर्भवस्‍था के अंतिम तिमाही में अंगूर खाने से मना करते है। क्‍योंकि इसकी तासिर गरम होती है। इसलिए बहुत ज्‍यादा अंगूर खाने से असमय प्रसव हो सकता हैं। कोशिश करें कि गर्भावस्था के दौरान अंगूर ना खाए।
  • पारा यानी कि मरक्युरी बच्चे के मस्तिष्क के विकास में विलंब पैदा करता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान पारा युक्त मछली के सेवन से बचना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान भारतीय महिलाओं को पपीता का सेवन करने से मना किया जाता है, खासकर के अगर पपीता कच्चा या अधपका हो।
  • बैंगन, मिर्ची, प्याज, लहसुन, हिंग, बाजरा, गुड़ का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए, खासकर के उनको जिनका किसी न किसी कारण से पहले गर्भपात हो चुका है।
  • पिसे हुए मसालेदार मांस का सेवन करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि उसमे हानिकारक जीवाणुओं का समावेश हो सकमीट
  • कच्‍चा या अधपका मीट खाने से गर्भावस्‍था के शुरूआती दिनों में बचना चाहिये। बेहतर होगा कि गर्भावस्‍था के दिनों में आप मीट को अच्‍छी तरह पकाकर खाएं। गर्भावस्‍था में प्रॉन मीट खाने से बचना चाहिये।
  • डिब्बा बंद भोजन और अचार के रूप में, लंबी अवधि के भंडारण के लिए करना है कि खाना नहीं खाते।डिब्बाबंद।स्टू, मछली और सब्जी के विभिन्न प्रकार इसकी संरचना में बरकरार रखता सिरका या अन्य परिरक्षकों है।भ्रूण के विकास पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है गर्भवस्था के समय हर महिला को अपने खानपान से लेकर हर छोटी सी बड़ी चीजों का बड़ा ध्यान रखना होता है इसके लिए जरूरी होता है कि क्या खाएं और क्या न खाएं इसका भी बहुत ही खास ध्यान रखना होता है।
  • जी हां एक शोध के अनुसार पता चला है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान आलू का सेवन ज्यादा करती है उनको मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है। तो ऐसे समय आप आलू की जगह और दूसरी सब्जियों का सेवन करना शुरू कर दें।

Wednesday, September 26, 2018

पीरियड के कितने दिन बाद प्रेग्नेंट होते है,? Period Ke Kitne Din Baad Pregnancy Hoti Hai in Hindi,


ओवुलेशन चक्र को समझ लेने से आपके गर्भवती होने की समभावना बढ़ जाती हैं। जितने भी लोग बच्चा पैदा करना चाहते हैं , उनमे से लगभग 85% लोग एक साल के अन्दर ऐसा करने में सफल हो जाते हैं. जिसमे से 22 % लोग तो पहले महीने के अन्दर ही सफल हो जाते हैं. यदि एक साल तक प्रयास करने पर भी बच्चा ना हो तो यह समस्य का विषय हो सकता है , और ऐसे जोड़ों को बांझ समझा जाता हैं.

बच्चा पैदा होने के लिए couples के बीच सेक्स का होना अनिवार्य है. और इसके दौरान पुरुष का penis (लिंग) इस्त्री के vagina (योनी) में जाना चाहिए और उसे इस्त्री के vagina में sperm ( शुक्राणु ) छोड़ने होंगे , जिससे sperm ,uterus(गर्भाशय) के मुख के पास इकठ्ठा हो जायेगा

इसके आलावा सम्भोग ovaluation के समय के आस-पास होना चाहिए. Ovaluation एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे महिलाओं के Ovary (अंडाशय ) से egg ( अंडे) निकलते हैं. बच्चा पैदा करने के लिए महिलाओं में सेक्स के दौरान orgasm होना अनिवार्य नहीं है. Doctors का कहना है कि दरअसल fallopian tube जो कि अंडे को ovary से uterus तक ले जाता है , sperm को अपने अन्दर खींच ले जाता है और उसे egg से मिलाने की कोशिश करता है. और इसके लिए महिलाओं में orgasm का आना जरूरी नहीं है.

पीरियड के कितने दिन बाद प्रेग्नेंट होते है,

Ovulation का समय पता करने का अर्थ है उस समय का पता करना जब ovaries से fertilization के लिए तैयार egg निकले. इसे जानने के लिए आपको अपने period-cycle (मासिक-धर्म) का अंदाजा होना चाहिए. यह 24 से 40 दिन के बीच हो सकता है. अब यदि आप को अपने next period के आने का अंदाजा है तो आप उससे 12 से 16 दिन पहले का समय पता कर लीजिये , यही आपका ovulation का समय होगा .
For Example: यदि period की शुरुआत 30 तारीख को होनी है तो 14 से 18 तारिख का समय ovulation का समय होगा.
 सही समय पर सेक्स न करना। अधिकतर जोड़े इस बात से अंजान होते हैं कि गर्भधारण में सेक्स की 'टाइमिंग' बहत मायने रखती है। समय पर सहवास-गर्भवती होने के लिए सिर्फ सहवास करना जरूरी नहीं होता बल्कि सही समय पर सहवास करना भी मायने रखता है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि पुरुष के शुक्राणु हमेशा लगभग एक जैसे ही होते हैं, जो महिला को गर्भवती कर सकते हैं। लेकिन महिला का शरीर ऐसा नहीं होता जो कभी भी गर्भवती हो सके। उसका एक निश्चित समय होता है, एक छोटी सी अवधि होती है।  
Ovulation के समय के आस-पास sex करें Gynecologists का मानना है कि बच्चा पैदा करने के लिए इस्त्री के eggs ovary से निकलने के 24 घंटे के अन्दर ही fertilize होने चाहियें. आदमी के sperms औरत के reproductive tract (प्रजनन पथ) में 48 से 72 घंटे तक ही जीवित रह सकते हैं. चूँकि बच्चा पैदा करने के लिए आवश्यक embryo (भ्रूण ) egg और sperm के मिलन से ही बनता है , इसलिए couples को ovulation के दौरान कम से कम 72 घंटे में एक बार ज़रूर sex करना चाहिए और इस दौरान पुरुष को इस्त्री के ऊपर होना चाहिए ताकि sperms के leakage की सम्भावना कम हो. साथ ही पुरुषों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो 48 घंटे में एक बार से ज्यादा ना ejaculate करें वरना उनका sperm count काफी नीचे जा सकता है , जो हो सकता है कि egg जो fertilize करने में पर्याप्त ना हो.
  • एक healthy lifestyle बनाए रखें.बच्चा पैदा करने के chances बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है कि पति-पत्नी एक स्वस्थ्य- जीवनशैली बनाये रखें. इससे होने वाली संतान भी अच्छी होगी. खाने – पीने में पर्याप्त भोजन और फल की मात्रा रखें . Vitamins कि सही मात्र से पुरुष-स्त्री दोनों की fertility rate बढती है .रोजाना व्यायाम करने से भी फायदा होता है.
  • सिगरेट पीने वाली महिलाओं में conceive करने के chances 40 % तक घट जाते हैं Stress-free (तनाव-मुक्त) रहने का प्रयास करें:इसमें कोई शक नहीं है कि अत्यधिक तनाव आपके reproductive function में बाधा डालेगा. तनाव से कामेक्षा ख़तम हो सकती है , और extreme conditions में स्त्रियों में menstruation कि प्रक्रिया को रोक सकती है. एक शांत मन आपके शरीर पर अच्छा प्रभाव डालता है और आपके pregnant होने की सम्भावना को बढ़ता है. इसके लिए आप regularly breathing- exercises और relaxation techniques का प्रयोग कर सकती हैं.
  • Testicles (अंडकोष)को ज्यादा heat से बचाएँ :यदि sperms ज्यादा तापमान में expose हो जायें तो वो मृत हो सकते हैं. इसीलिए Testicles (जहाँ sperms का निर्माण होता है) body के बहार होते हैं ताकि वो ठंढे रह सकें. गाड़ी चलते समय ऐसे beaded सीट का प्रयोग करें जिसमे से थोड़ी हवा पास हो सके. और बहुत ज्यादा गरम पानी से इस अंग को ना धोएं .
  • सेक्स के बाद थोड़ी देर आराम करें-सेक्स के बाद थोड़ी देर लेटे रहने से महिलाओं कि योनी से sperms के निकलने के chances नहीं रहते. इसलिए सेक्स के बाद 15-20 मिनट लेटे रहना ठीक रहता है.
  • किसी तरह का नशा ना करे:ड्रग्स , नशीली दवाओं, सिगरेट या शराब के सेवन आदमी-औरत , दोनों के hormones का संतुलन बिगड़ सकता है. और आपकी प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.
  • दवाओं का प्रयोग कम से कम करें-कई दवाइयां , यहाँ तक कि आराम से मिल जाने वाली आम दवाइयां भी आपकी fertility पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं.कई चीजें ovulation को रोक सकती हैं , इसलिए दवाओं का उपयोग कम से कम करें. बेहतर होगा कि आप किसी भी दावा को लेने या छोड़ने से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें.
  • Lubricants को avoid करें-Vagina को lubricate में प्रयोग होने वाले कुछ ज़ेल्स, तरल पदार्थ , इत्यादि sperms को महिलाओं की reproductive tract में travel करने में बाधक हो सकते हैं. इसलिए इनका प्रयोग अपने डाक्टर से पूछ कर ही करें

Monday, May 22, 2017

प्रेग्नेंसी टेस्ट के घरेलु उपाय,Pregnancy Test at Home in Hindi,

Pregnancy Check Karne ke Gharelu Nuskhe,

प्रेग्नेंट होना किसी भी महिला और उसके परिवार वालों खासकर उसके पार्टनर के लिए बहुत ख़ुशी की बात होती है। सबसे बड़ी बात कि प्रेग्नेंट होने के बाद, बिना प्रेग्नेंसी टेस्ट के, ज्यादातर महिलाओं इस बात की जानकारी खुद भी नहीं हो पाती कि वह प्रेग्नेंट है। 

मां बनना औरत की जिदंगी का सबसे हसीन पल होता है। शादी के बाद जब औरत के मां बनने की उम्मीद जागती है तो वह अपनी खुशी परिवार के बाकी सदस्यों से बांटने की बजाए पहले खुद इस बात की तसल्ली कर लेना चाहती है कि वह सच में प्रैग्नेंट है या नहीं। वैसे तो मार्किट में कई तरह की प्रैग्नेंसी टैस्ट किट आसानी से मिल जाती हैं लेकिन कई बार शर्माते हुए लड़की अपने दिल की बात किसी से कह नहीं पाती। ऐसे में कुछ आसान से घरेलू उपायों से घर पर ही यह पता लगाया जा सकता है कि आप गर्भवती हैं या नहीं। वैसे तो आपने कई बार टूथपेस्ट से प्रैग्नेंसी की जांच के बारे में सुना होगा लेकिन इसके अलावा और भी बहुत से तरीके हैं, जिनसे आप इसकी जांच कर सकती हैं। गर्भावस्था की जांच करने के लिए सुबह का पहला यूरिन इस्तेमाल करना चाहिए।

आइये जाने प्रेग्नेंसी टेस्ट के घरेलु उपाय,

डेटॉल से कैसे करें प्रेगनेंसी टेस्ट-यह टेस्ट आपको सुबह करना है। सुबह सबसे पहले जब आप यूरिन के लिए जाएं, तो कम से कम 15 एमएल यूरिन को किसी शीशी में ले लीजिये। अब यूरिन में इतनी ही मात्रा में डेटोल लेकर उसमें मिला लीजिये। इसके बाद कुछ देर तक इस मिश्रण पर नजर रखिये। थोड़ी देर बाद यदि, डेटॉल और यूरिन जो आपस में मिक्स हो गया था, अलग-अलग हो जाते हैं और यूरिन, डेटॉल पर तेल की तरह तैरने लगता है तो समझ लीजिये कि आप प्रेग्नेंट हैं। लेकिन इसके बजाय यदि यूरिन और डेटॉल आपस में अच्छे से घुल जाते हैं और दूध सी सफेदी जैसा एक पदार्थ बन जाता है तो समझ लीजिये कि आप प्रेग्नेंट नहीं हैं।

चीनी  डिस्पोजल गिलास में चीनी के कुछ दानें और यूरिन इसमें डाल दें। चीनी घुलने की बजाए अगर गुच्छों में बदल जाए तो समझ लें कि आप गर्भवती हैं।

ब्लीच से प्रेगनेंसी टेस्ट का तरीका :- डिसपोजल या किसी पात्र में थोड़ी मात्रा में ब्लीच पाउडर लें और उसमे पेशाब के सैंपल को मिक्स कर लें। अगर मिक्स करने के बाद बुलबुले दिखाई देते हैं तो यह पॉजीटिव प्रेगनेंसी के संकेत हो सकते हैं ।

सिरका  पारदर्शी प्लास्टिक के गिलास में यूरिन और विनेगर मिलाएं। थोड़ी देर इसे पड़ा रहने दें। सिरके का रंग अगर बदल जाए तो समझ लें कि आप प्रैग्नेंट हैं। 

साबुन भी प्रैग्नेंसी टैस्ट करने के लिए अच्छा उपाय है। इसके लिए 1 गिलास में साबुन और यूरिन डाल लें। इनको मिलाएं और कुछ देर बाद इसमें बुलबुले जैसा कुछ उठे तो समझ ले कि घर नन्हा मेहमान आने वाला है। कांच का गिलास यह प्रैग्नेंसी टैस्ट का सबसे आसान उपाय है। एक कांच का गिलास लेकर इसमें सुबह का पहला यूरिन डालें। थोड़ी देर इसे बिना हिलाए इसी तरह पड़ा रहने दें। इसमें कुछ सफेद सा नजर आना शुरू हो जाए तो समझ लें कि आप गर्भवती हैं। कुछ बदलाव दिखाई न दे तो टैस्ट नैगटिव है।

टूथपेस्‍ट से प्रेगनेंसी टेस्‍ट -टूथपेस्ट के माध्‍यम से प्रेगनेंसी टेस्‍ट करने के लिए आपको सफेद रंग के टूथपेस्ट, सुबह के समय का पहला यूरिन, और एक ग्लास की जरूरत होती है। एक डिस्पोजेबल ग्लास में अपने पहले यूरिन का सैंपल लें। अब उस यूरिन में एक चम्मच टूथपेस्ट मिला दें।

टूथपेस्ट टेस्‍ट का परिणाम यूरिन में टूथपेस्‍ट मिलाने के बाद अगर उसका रंग बदलकर नीला हो जाता है, तो यह आपके प्रेगनेंट होने का संकेत देता है। इसके अलावा झाग का एक साथ इकठ्ठा होना भी पॉजीटिव प्रेगनेंसी का संकेत है। लेकिन अगर आपको इस उपाय को करने के दौरान कोई भी बदलाव दिखाई नहीं देते तो इससे स्पस्ट होता है कि आप प्रेगनेंट नहीं हैं।

Monday, May 15, 2017

रूसी दूर करने के उपाय,Home Remedies for Dandruff in Hindi,

रुसी का उपचार-Home Remedies for Dandruff in Hindi,How to cure dandruff ,itchy scalp,
रूसी सिर में मरी हुई त्वचा के कण होते हैं, जो नई त्वचा के आने से हटते रहते हैं। इन्हीं कणों को रूसी कहते हैं। यह रोग स्त्री और पुरुष दोनों में ही पाया जाता है। ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं होता कि उनके बालों में होने वाली रूसी तैलीय है या रूखी। रूखी रूसी के कण बहुत ही छोटे होते हैं, जो सिर की त्वचा से चिपके या बालों में फैले रहते हैं। ऐसी रूसी में बहुत खुजली होती है। जबकि तैलीय रूसी छोटे कणों के साथ सीबम से मिली होती है। कई बार रूसी ज्यादा हो जाने से बालों का गिरना भी शुरू हो जाता है।

रूसी बालों की सबसे बड़ी दुश्मन है। इसके कारण बाल अपना आकर्षण खो देते हैं। इस रोग के कारण सिर पर खुश्की होकर सफेद-सफेद रूसी बालों में हो जाती है। जब बालों में ब्रश या कंघा करते हैं या बालों को रगड़ते हैं तो यह बालों से निकलकर बाहर गिरने लगती है। यह खोपड़ी पर दाने या पपड़ी के रूप में भी निकल सकती है। यदि इन्हें बालों से बाहर न निकाला जाए तो यह वहां के रोमकूपों को बंद कर देती है।

अगर बालों को साफ न रखा जाए तो उनमें रूसी पैदा हो सकती है और यह फैलने वाली होती है। इसलिए अपने कंघे, ब्रश, साबुन और तौलिए को अलग रखना चाहिए। बालों को सप्ताह में जितनी बार ज्यादा से ज्यादा हो धोना चाहिए।

रूसी होने का कारण

  • यह शरीर में दूषित द्रव्य के जमा हो जाने तथा गलत तरीके के खान-पान और दूषित भोजन का सेवन करने के कारण होती है।
  • सिर की ठीक तरीके से सफाई न करने के कारण भी सिर में रूसी हो सकती है।
  • जिस व्यक्ति के बालों में रूसी हो उसके द्वारा इस्तेमाल किये गये कंघी, तौलिये, ब्रश आदि दूसरे व्यक्तियों को इस्तेमाल नहीं करने चाहिए नहीं तो दूसरे व्यक्ति के बालों में भी रूसी हो सकती है।
  • शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (रोगों से लड़ने की शक्ति) कम होने के कारण तथा भावनात्मक तनाव के कारण भी हो रूसी का रोग हो सकता है।

बालों से रूसी को खत्म करने के लिए उपचार,Remedies For Dandruff,dandruff remedies,

  • पानी में नींबू का रस मिलाकर 1 सप्ताह तक प्रतिदिन बालों की जड़ों में अंगुलियों से अच्छी तरह से मसल लें। फिर थोड़ी देर बाद बालों को धो दें। इससे बालों में से रूसी खत्म हो जाती है।
  • 3 भाग जैतून के तेल में 1 भाग शहद घोल लें। इस मिश्रण को सिर और बालों पर लगाकर सिर पर गर्म तौलिया लपेट लें। इसके बाद सिर को अच्छी तरह से धोने से बालों की रूसी खत्म हो जाती है।
  • नारियल के तेल में चार प्रतिशत कपूर मिलाकर रख लें। फिर अपने बालों को अच्छी तरह से धोकर बालों को सुखा लें। इसके बाद इस तेल को बालों में लगाकर सिर की अच्छी तरह से मालिश करें। इससे रूसी खत्म हो जाती है।
  • आंवला, शिकाकाई तथा रीठा को एक साथ पानी में भिगोकर उस पानी से सिर को धोयें। इस क्रिया को 2-3 दिन तक करने से बालों में से रूसी खत्म हो जाती है।
  • रोजाना जैतून के गुनगुने तेल से सिर की मालिश करें। फिर गर्म पानी में तौलिया भिगोकर अच्छी तरह से निचोड़कर पूरे सिर में बांध लें। इससे तेल और भाप बालों की जड़ों तक पहुंच जाता है। 3 घंटे के बाद गुनगुने पानी से बालों को अच्छी तरह से धोने से बालों मे से सारा शैंपू निकल जाता है।
  • दही या मट्ठे से सिर धोने से भी लाभ होता है।
  • सरसों के तेल में नींबू मिलाकर या सिरके में बहुत सारा पानी मिलाकर बालों की जड़ों में लगाकर लगभग 2 घंटे के बाद सिर को धोएं। इससे बालों में से रूसी कम हो जाती है।
  • बालों में रूसी होने पर प्रतिदिन सुबह के समय में अपने सिर की सूखी मालिश करने से बालों में से रूसी खत्म हो जाती है।
  • दही में थोड़े से सरसो के तेल को मिलाकर प्रतिदिन इस दही को सिर पर कुछ समय के लिए लगाकर फिर बालों को अच्छी तरह से धोने से रूसी खत्म हो जाती है।
  • रोजाना आधे घंटे तक सिर पर दही की मालिश करके सिर को धोने से रूसी खत्म हो जाती है।
  • मेथी के बीजों को रात के समय में पानी में भिगोने के लिए रख दें। सुबह के समय में इसे पीसकर लेप बनाकर सिर पर लगाएं और आधे घंटे के बाद सिर को धो लें।
  • बालों को ब्रश, शैंपू और कंघी से साफ-सुथरा रखें। संतुलित तथा सही से पचने वाला भोजन लें। पूरे सप्ताह में 2 बार गर्म तेल से सिर की मालिश करनी चाहिए। रोजाना रोजमेरी के काढ़े से सिर की मालिश करने से लाभ मिलता है।
  • गर्म पानी में 1 नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाकर फिर सिर को धोने से रूसी में लाभ होता है। बालों को धोने से पहले सिर की त्वचा में तेल की मालिश के बाद गर्म या ठंडे पानी में भीगा हुआ तौलिया लपेट लें। इससे त्वचा के रोम-छिद्र खुल जाते हैं, खून का बहाव तेज होता है और रूसी भी दूर होती है।
  • सुबह के समय में जब धूप निकल जाए तब कम से कम आधे घंटे तक सूर्य का प्रकाश अपने सिर पर लगने दें। इसके बाद मुलतानी मिट्टी का लेप बनाकर सिर पर लगा लें और कुछ देर बाद सिर को धो लें इससे रूसी खत्म हो जाती है।
  • 1 अंडे की सफेदी और 1 नींबू के रस को मिलाकर सिर पर आधे घंटे के लिए लगाएं। फिर इसे सादे पानी से धो लें। अंत में सिरका सादे पानी में मिलाकर बालों को धोने से लाभ मिलता है।
  • सूर्यतप्त नीले तेल की मालिश सिर पर कुछ दिनों तक करने से रूसी खत्म हो जाती है।
  • शरीर में से दूषित द्रव्यों को बाहर करने के लिए व्यक्ति को सप्ताह में एक बार उपवास रखना चाहिए तथा पत्ता गोभी का रस, पालक का रस, अन्ननास का रस सेवन करना चाहिए। एक सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए। इसके बाद सामान्य भोजन करना चाहिए और भोजन में फल, अंकुरित दालें तथा सलाद अधिक लेने चाहिए।
  • चाय, मिर्च-मसालेदार, कॉफी, रिफाइंड वाले पदार्थ तथा मैदा से बनी चीजों का सेवन न करें। पेट को साफ करने के लिए एनिमा क्रिया की आवश्यकता पड़े तो यह क्रिया जरूर करनी चाहिए।

Saturday, May 13, 2017

ब्रेस्ट पेन,स्तनों में दर्द ,Breast Pain in Hindi, Stano Mai Dard Ke Uapay

महिलाओं में कई तरह की प्रतिक्रिया होती हैं जिनकी वजह से उन्हे कई बार दर्द का सामना भी करना पड़ता है ऐसे मे जब उन्हे मासिक धर्म आने पर रहता है तो उनके स्तन में दर्द होने लगता है। और इस प्रकार के दर्द को साइक्लिकल मास्टालजिया कहते हैं। यह दर्द आमतौर पर स्तनों के ऊपर या फिर बाहरी क्षेत्र में उठता है। ऐसे समय स्तनों मे सूजन के साथ कड़कपन भी देखने को मिलता है।
महिलाओं को अक्सर ब्रेस्ट में दर्द की शिकायत रहती है. कई बार ये किसी गंभीर बीमारी की वजह से भी हो सकता है. ऐसा भी होता है कि पीरियड्स के दौरान या किसी और वजह से हार्मोन्स में बदलाव हो तो ब्रेस्ट में दर्द होने लगता है. अगर आप चाहें तो इन घरेलू नुस्खों को अपनाकर इस दर्द से मुक्ति पा सकती हैं.

स्तनों में दर्द होने का कारण

  • दुगध नलिकओ मे बदलओ - दुगध नलिकओ मे बदलओ के कारण भी स्तन मे दर्द होता है !faty acid मे असन्तुलन के कारण - शरीर मे कोशिकओ मे जो faty acid होता है उसके असन्तुलन के कारण भी स्तन मे दर्द की समस्या होती है
  • मानसिक तनाव के कारण - महिलाओ मे मानसिक तनाव के कारण भी स्तन दर्द होता है
  • सर्जरी - कभी स्तनो मे गाठ या किसी और वजह से कराइ गई सर्जरी की वजह से भी स्तन मे दर्द होता है 
  • पसलियो मे किसी समस्या की वजह से - पसलियो मे फेक्चर या किसी और समस्या की वजह से भी स्तन मे दर्द की शिकायत होती है
  • हर्मोन्स परिवर्तन ,महिलाओ मे जब किशोरा अवस्था आती है तो हर्मोन्स परिवर्तित होते है ! हर्मोन्स परिवर्तन होता है तो स्तन मे दर्द होता है !
  •  माहावरी के कारण - माहवरी के कारण भी स्तन मे दर्द होता है ! जब माहवरी आती है उसके 1-2 सप्ताह पहले से स्तन मे दर्द शुरू हो जाता है और माहवरी आने पर बंद हो जाता है !
  • स्तनो का आकार बडा होने के कारण - जिन महिलाओ के स्तनो का आकार बडा होता है उनमे अक्सर स्तन मे दर्द की शिकायत होती है 
  • दवाओ के सेवन के कारण - जो माहिलये बांजपन की दवाइ या गर्भ निरोधक दवाइयो का सेवन करती है उनमे भी अक्सर स्तन दर्द की शिकायत होती है

स्तनों में दर्द का उपचार

  • आइस पैक-ब्रेस्ट पेन से छुटकारा पाने के लिए आप आइस पैक का इस्तेमाल कर सकती हैं. इस आइस पैक से ब्रेस्ट का दर्द कम होने के साथ ही सूजन भी कम हो जाएगी. ऐसा दिन में दो से तीन बार करने से जल्दी फायदा होगा.
  • एप्‍पल साइडर वेनिगर 1 या 2 चम्‍मच एप्‍पल साइडर वेनिगर एक गिलास गरम पानी में मिक्‍स करें। फिर उसमें थोड़ी सी शुद्ध शहद मिक्‍स करें। इसे दिन में रोजाना दो बार पियें। यह आपके हार्मोन को बैलेंस करेगा और सूजन को कम करेगा।
  • मसाज-ब्रेस्ट मसाज करना भी एक अच्छा उपाय है. इससे जहां ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है वहीं ऊतकों को
  • भी फायदा हेाता है. नहाने के दौरान आप किसी अच्छे साबुन या लिक्विड सोप से ब्रेस्ट मसाज कर सकती हैं. इसके अलावा हल्के गर्म ऑलिव ऑयल में कुछ मात्रा कपूर की मिलाकर मसाज करने से भी फायदा होगा
  •  रेंड़ी का तेल-चम्‍मच रेंड़ी के तेल को 2 चम्‍मच जैतून तेल के साथ मिक्‍स कर के ब्रेस्‍ट की मसाज करें। इसे पीरियड्स आने के एक हफ्ते पहले से प्रयोग करें। इस तेल से ब्रेस्‍ट की सूजन कम होगी और उस तक ढेर सारे पोषण पहुंचेगें
  • कैस्टर ऑयल से करें मसाज-कैस्टर ऑयल में रिसिनोलेइक एसिड पाया जाता है, जो ब्रेस्ट पेन दूर
  • करने में बहुत असरदायक है. केवल कैस्टर ऑयल से मसाज नहीं करनी चाहिए. एक चम्मच कैस्टर
  • ऑयल के साथ दो चम्मच कोई भी साधारण तेल मिलाकर मसाज करने से जल्दी फायदा होता है.
  • विटामिन ई का सेवन करें-विटामिन ई और विटामिन बी-6 के सेवन से भी ब्रेस्ट पेन में आराम मिलता है. घर में ऐसी कई चीजें होती है जिनमें विटामिन ई प्रचुर मात्रा में मिलता है. आप चाहें तो विटामिन ई
  • की कैप्सूल भी ले सकती हैं.
  • मैग्निशियम-पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट की मांस-पेशियों में खिंचाव आ जाता है. इस वजह से ब्रेस्ट पेन होता है. ऐसे समय में मैग्निशियम का सेवन आपको इस दर्द से दूर रख सकता है. हरी पत्तियों, बीजों, केले और डार्क चॉकलेट में ये भरपूर मात्रा में मौजूद होता है.
  • सही ब्रा का चुनाव करना बेहद जरूरी है. हो सके तो वायर वाली ब्रा पहनने से परहेज करें व्यायाम करने के दौरान स्पोर्ट्स ब्रा ही पहनें. कैफीन का सीमित इस्तेमाल करें. जितना अधिक हो सके अपने भोजन में फाइबर की मात्रा लें.
  • अधिक से अधिक पानी पिएं. अपने ब्रेस्ट को नजरअंदाज न करें. महीने में दो से तीन बार इसका परीक्षण करें.
  •  साइकलिकल मैस्टेल्जिया (हार्मोनल बदलाव की वजह से स्तन में दर्द) की शिकार हैं। करीब 60 से 70 फीसदी महिलाएं अपने जीवन में अलग-अलग समय पर स्तन में किसी न किसी तरह के दर्द से जूझती हैं। जहां तक स्तन कैंसर की आपकी चिंता है, 
  • आपको मासिक धर्म खत्म होने के बाद अपने स्तनों की जांच करनी चाहिए कि कहीं उनमें कोई गांठ तो नहीं है या किसी प्रकार का बदलाव तो नहीं दिख रहा, जैसे त्वचा में लाली, निप्पल मुडऩा वगैरह। साथ ही, आपको ब्रैस्ट एक्सपर्ट से भी सलाह लेनी चाहिए जो आपके स्तनों की जांच कर यह तय करेंगे कि कहीं कोई गंभीर समस्या तो नहीं है। 
  • यदि आप मोटापे की शिकार हैं तो वज़न कम करने और ब्रैस्ट को सपोर्ट करने वाली ब्रा पहनने से दर्द कम हो सकता है। इसी तरह, एक्सपर्ट की सलाह से दवाएं जैसे लोकल जैल आदि प्रयोग करने से भी आराम मिल सकता है।

Friday, April 14, 2017

जानें, 1 से 9 महीने तक कैसे मां के गर्भ में होता है बच्चे का विकास,गर्भ में भ्रूण का विकास,Learn Child Development in The Womb of The Mother During 1 To 9 Months in Hindi

गर्भवती होने का एहसास सिर्फ एक गर्भवती स्त्री ही समझ सकती है। ऐसे बहुत से काम होते होंगे जो आप पहले भी करती होंगी। एक नई जिंदगी गर्भ में जब सांस लेती है तो उसका अनुभव ही अलग होता है। उसका एहसास बहुत कोमल होता है। एक तरफ खुशी, हजार सपने और दूसरी तरफ जिम्मेदारी।
मां बनना हर स्त्री के लिए एक ख़ूबसूरत एहसास होता है। इन दिनों वह अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की कुछ हरकतों से भी वाकिफ होती है
गर्भावस्था अपने आप में महत्वपूर्ण समय में से एक है। गर्भधारण के पश्चात गर्भवती महिला के शरीर में हलचल होनी शुरू हो जाती है, जिसके परिणाम शरीर में बाहरी रूप से दिखाई पड़ने लगते है। विकास की प्रांरभिक अवस्था के लक्षण शुरूआत में निरंतर बदलते रहते हैं। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती स्त्री के हार्मोंस में तेजी से बदलाव आता है। प्रत्येक महीने में ये बदलाव और भी अधिक तेज हो जाते है। एक महीने के गर्भ में भी बच्चे के विकास को देखा जा सकता है। आइए जानते हैं भ्रूण महीने से विकास महीने के बारे में।

जानें, 1 से 9 महीने तक कैसे मां के गर्भ में होता है बच्चे का विकास,Learn Child Development in The Womb of The Mother During 1 To 9 Months in Hindi

  • पहला महीना : गर्भधारण के पहले महीने में आमतौर पर सेहत संबंधी समस्याएं अधिक नहीं होतीं। पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं। बार-बार यूरिन जाना पड सकता है। इस समय भ्रूण का आकार चावल के दाने के बराबर होता है।
  • दूसरा महीना : यह समय थोडा जटिल होता है। इस महीने शिशु के हृदय का विकास होता है। इस महीने के बाद अल्ट्रासाउंड के सहारे यह बताना आसान हो जाता है कि बच्चे का सिर किस तरफ और पैर किस तरफ है
  • तीसरा महीना: इस महीने में शिशु की हड्डियों का निर्माण होता है। उसके हाथ और पैर बनना शुरू होते हैं। बच्चे के कान और बाहरी अंग बनने लगते हैं। इस समय बच्चे का सिर शरीर का सबसे बडा भाग होता है।
  • चौथा महीना : इस माह हॉर्मोन का निर्माण होने लगता है। बच्चे के शरीर से एमनियोटिक द्रव भी निकलने लगता है।
  • पांचवां महीना : बच्चे की लंबाई लगभग 25 सेंटीमीटर होती है। इस माह बच्चा जम्हाई और फेशियल एक्सप्रेशन देने लगता है। अब आप होने वाले बच्चे की गति को महसूस कर सकती हैं।
  • छठा महीना : इस माह बच्चे की आंखें खुलने और बंद होने लगती है।
  • सातवां महीना : बच्चे की किक महसूस करने का समय यही है। आपका होने वाला शिशु आपके पाचन तंत्र और आपकी सांसों की गति को महसूस कर सकता है। उसके सिर पर बाल मोटे होने लगते हैं।
  • आठवां महीना : आपका शिशु इस समय पूरी तरह विकसित हो चुका है। उसका मूवमेंट थोडा कम हो सकता है।
  • नौवां महीना : आपका शिशु अब किसी भी समय इस दुनिया में कदम रख सकता है।

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